बुधवार, 18 मार्च 2026

हे मेरे मन - आश्रम संध्या सत्संग

  हे मेरे मन - आश्रम संध्या सत्संग

TIME STAMP INDEX 

 0:02 (प्रसंग) मन अर्पण न होने से विकार और उद्वेग

0:10 (प्रसंग) मन का रिवर्स में आना और अशांति

0:17 (कथा) शास्त्र आचरण और धर्म का फल वैराग्य
0:25 (कथा) वैराग्य न आए तो धर्म अधूरा
0:35 (कथा) शास्त्र का सही अर्थ समझना
0:46 (कथा) धर्म से वैराग्य, योग से ज्ञान, ज्ञान से मोक्ष
0:56 (कथा) साधना का क्रम
1:03 (कथा) ज्ञान से मोक्ष और जन्म-मरण से मुक्ति
1:12 (कथा) मनुष्य जन्म का सच्चा फल

1:19 (प्रसंग) शरीर का नाश और व्यर्थता
1:26 (प्रसंग) परमात्मा ज्ञान ही उद्देश्य
1:34 (प्रसंग) संसार में आसक्ति ठगने का व्यवहार
1:42 (प्रसंग) ईश्वर के अलावा प्रेम का दुख
1:49 (प्रसंग) संसार से प्रीति का पश्चाताप
1:59 (प्रसंग) ईश्वर ही सच्चा प्रेम

2:08 (प्रसंग) व्यवहार संसार से, प्रेम परमात्मा से
2:17 (प्रसंग) वस्तुएं प्रेम के योग्य नहीं
2:27 (प्रसंग) हर भाव परमात्मा से जोड़ना
2:34 (प्रसंग) परमात्मा में ही सर्व संबंध
2:42 (प्रसंग) शिकायत भी परमात्मा से
2:48 (प्रसंग) हृदय में संवाद

2:56 (संवाद) करुणा के लिए पुकार
3:03 (संवाद) प्रार्थना और गुनगुनाहट
3:10 (संवाद) फरियाद करना
3:19 (प्रसंग) जीवन की क्षणभंगुरता
3:27 (प्रसंग) मृत्यु से पहले शरण
3:36 (प्रसंग) मृत्यु से पहले मुक्ति
3:43 (प्रसंग) अर्थी से पहले अर्थ समझना
3:52 (संवाद) हृदय से प्रार्थना

3:58 (भजन) ओम जप

4:08 (कथा) स्वर्ग भी अंतिम नहीं
4:19 (कथा) वैभव और सौंदर्य व्यर्थ
4:28 (कथा) भोग का निष्फल परिणाम
4:35 (कथा) अप्सरा सुख क्षणिक
4:44 (कथा) इंद्रलोक भी नश्वर
4:53 (कथा) पुनर्जन्म चक्र
5:01 (कथा) विभिन्न योनियाँ
5:10 (कथा) राज-पद व्यर्थ

5:18 (प्रसंग) मृत्यु अनिश्चित
5:28 (कथा) भोग के बाद शून्यता
5:35 (प्रसंग) संपत्ति व्यर्थ
5:43 (प्रसंग) भूमि पर अस्थायी अधिकार

5:54 (कथा) स्वामित्व का भ्रम
6:03 (कथा) दावों का अंत
6:10 (कथा) सत्ता परिवर्तन
6:20 (प्रसंग) “हमारा” का भ्रम

6:30 (दृष्टांत) शतरंज का खेल
6:37 (दृष्टांत) खिलाड़ी का अंत

6:47 (कथा) राजाओं के दावे
6:54 (कथा) सबका अंत
7:02 (प्रसंग) पृथ्वी स्थिर, मनुष्य नश्वर
7:10 (प्रसंग) जीवन क्षणिक

7:20 (प्रसंग) मृत्यु से पहले सत्य समझना
7:26 (प्रसंग) शाश्वत सत्य का बोध
7:36 (प्रसंग) शरीर का अंत और श्मशान सत्य
7:43 (प्रसंग) मौन और निसंकल्प अवस्था का महत्व
7:52 (प्रसंग) चित्त की शांति और श्रेष्ठ अवस्था

8:00 (प्रसंग) जीते जी मोह त्याग का महत्व
8:08 (प्रसंग) मृत्यु से पहले भगवान की ओर चलना
8:17 (प्रसंग) ममता त्याग का अभ्यास
8:25 (प्रसंग) स्वयं से दान करने का महत्व

8:39 (प्रसंग) ईश्वर के अलावा आसक्ति = धोखा
8:46 (प्रसंग) मन लगाना ही बंधन
8:54 (प्रसंग) धर्म से वैराग्य की पहचान
8:59 (प्रसंग) धर्म बढ़े तो वैराग्य बढ़े
9:06 (प्रसंग) पाप से विषयों में रुचि
9:15 (प्रसंग) वासना अंधा बनाती है
9:30 (प्रसंग) ज्ञान से पहले जागृति
9:36 (प्रसंग) मृत्यु से पहले अमरता का अनुभव
9:44 (प्रसंग) कुटुंब से पहले मन हटाना
9:53 (प्रसंग) मन को परमात्मा में लगाना

10:11 (प्रसंग) भोग में गिराने वाले पापी
10:18 (प्रसंग) वासना और भोग की प्रवृत्ति
10:26 (प्रसंग) ईश्वर मार्ग से भटकाना
10:34 (प्रसंग) आध्यात्मिक हानि का बड़ा पाप
10:43 (प्रसंग) धन हानि से बड़ा धर्म हानि
10:50 (प्रसंग) भगवान मार्ग छीनना महापाप
10:59 (प्रसंग) भक्त को भटकाना बड़ा अपराध

11:08 (प्रसंग) संत की क्षमा और कर्मफल
11:17 (प्रसंग) ईश्वर मार्ग से हटने का परिणाम
11:29 (प्रसंग) संत समय का महत्व
11:38 (कथा) ओमकारेश्वर नामक साधक का प्रसंग

11:52 (कथा) भजन में तल्लीनता से सांसारिक हानि
12:02 (कथा) घर में दरिद्रता
12:10 (कथा) सज्जनता और पवित्रता
12:21 (कथा) युवराज द्वारा धन प्रस्ताव
12:29 (कथा) मित्रता का आधार
12:37 (कथा) धन स्वीकार करने का आग्रह
12:46 (कथा) साधक का इंकार

12:54 (कथा) मित्रता केवल भगवान के नाते
13:02 (कथा) धन लेन-देन से इंकार
13:10 (कथा) भक्ति का मूल्य न लगाना
13:18 (कथा) गुरु और भगवान का सम्मान

13:27 (संवाद) पुत्र का प्रश्न
13:35 (संवाद) परिवार की आवश्यकता
13:42 (संवाद) भगवान पर विश्वास
13:49 (संवाद) भगवान सब जानता है
13:58 (संवाद) भक्ति को न बेचना

14:06 (प्रसंग) ईश्वर से प्रेम, व्यापार नहीं
14:14 (कथा) अशर्फियां लौटाना
14:21 (कथा) मित्रता का आध्यात्मिक आधार
14:31 (प्रसंग) सत्संग से संबंध

14:40 (प्रसंग) ईश्वर मार्ग से हटने पर दूरी
14:47 (प्रसंग) आध्यात्मिक पहचान
14:55 (प्रसंग) ईश्वर नाते का महत्व

15:03 (प्रसंग) ईश्वर के लिए त्याग
15:13 (प्रसंग) संसार के लिए त्याग न करें
15:23 (प्रसंग) लोभ और भय से बचना
15:32 (प्रसंग) ईश्वर त्याग का परिणाम

15:40 (प्रसंग) ईश्वर के लिए त्याग = विजय
15:48 (प्रसंग) संसार के लिए त्याग = पतन
15:57 (प्रसंग) अंत में दुखद स्थिति

16:08 (प्रसंग) ईश्वर से सब प्राप्त
16:15 (प्रसंग) संसार से कुछ स्थायी नहीं
16:22 (दृष्टांत) एक साधे सब सधे
16:32 (प्रसंग) परमात्मा की सर्वशक्ति
16:40 (प्रसंग) परमात्मा की अनंतता
16:47 (प्रसंग) आत्मा की शक्ति

16:56 (प्रसंग) परमात्मा से संबंध का महत्व
17:04 (प्रसंग) संबंध टूटे तो सब व्यर्थ
17:12 (प्रसंग) मृत्यु अनिवार्यता
17:20 (प्रसंग) सबको मृत्यु

17:28 (प्रसंग) जीते जी ममता त्याग
17:37 (प्रसंग) सेवा करें, ममता नहीं
17:43 (प्रसंग) अपरिचित को दान
17:54 (प्रसंग) संबंध का बंधन

18:01 (प्रसंग) ईश्वर से संबंध
18:09 (प्रसंग) ईश्वर नाते व्यवहार
18:17 (प्रसंग) इसी जन्म में कल्याण

18:28 (प्रसंग) सवासन में समर्पण
18:34 (प्रसंग) अहं का त्याग
18:48 (प्रसंग) शांति का अनुभव
18:55 (प्रसंग) पंचभूत शरीर

19:04 (प्रसंग) आत्मा में स्थित होना
19:10 (प्रसंग) साक्षी भाव ही मुक्ति
19:19 (प्रसंग) जगत स्वप्न समान
19:27 (प्रसंग) जगत को सत्य मानना दुख
19:34 (प्रसंग) मोह का कारण

19:43 (दृष्टांत) स्वप्न का उदाहरण
19:53 (प्रसंग) अतीत का मिथ्यात्व

20:02 (प्रसंग) 100 वर्ष का परिवर्तन
20:08 (प्रसंग) पीढ़ियों का अंत
20:15 (प्रसंग) वर्तमान भी अस्थायी
20:22 (प्रसंग) भविष्य में सब स्वप्न

20:31 (प्रसंग) स्वप्न का स्वभाव
20:39 (प्रसंग) भ्रांति से सत्य प्रतीत

20:50 (प्रसंग) सांसारिक लक्ष्य की सीमितता
20:58 (प्रसंग) परमात्मा साक्षात्कार का लक्ष्य

21:05 (प्रसंग) विदेश का आकर्षण
21:14 (प्रसंग) अमेरिका का उदाहरण
21:22 (प्रसंग) परमात्मा का गर्व
21:32 (प्रसंग) भोगवादी जीवन की आलोचना
21:39 (प्रसंग) शरीर केंद्रित जीवन
21:47 (प्रसंग) जीवन की व्यर्थता
21:56 (प्रसंग) आत्मदेश का महत्व

22:05 (प्रसंग) स्वर्ग भी अंतिम नहीं
22:13 (प्रसंग) भटकाव का परिणाम

22:22 (प्रसंग) ज्ञान का अहंकार
22:31 (प्रसंग) सूक्ष्म ज्ञान की सीमाएं
22:38 (प्रसंग) परमात्मा को न जानना

22:50 (प्रसंग) ज्ञान का स्रोत
22:59 (प्रसंग) आत्मा की समानता
23:05 (प्रसंग) जन्म-मरण से परे आत्मा
23:13 (प्रसंग) आत्मज्ञान का महत्व

23:21 (प्रसंग) ईश्वर मार्ग का मापदंड
23:28 (प्रसंग) बाहरी मापदंड व्यर्थ
23:39 (प्रसंग) हृदय में परमात्मा

23:48 (प्रसंग) जन्म-मरण चक्र
23:55 (प्रसंग) संबंधों की अस्थिरता

24:04 (प्रसंग) नियम उल्लंघन का फल
24:10 (प्रसंग) कर्म और पुनर्जन्म

24:20 (प्रसंग) पितृ दोष और परिणाम
24:34 (प्रसंग) पाप का प्रभाव

24:37 (प्रसंग) भोग का दुख
24:47 (प्रसंग) भोग में सुख नहीं
24:50 (प्रसंग) शरीर की दुर्बलता
24:59 (प्रसंग) परमात्मा ध्यान श्रेष्ठ

25:07 (प्रसंग) आत्मकल्याण और पितृ कल्याण
25:14 (प्रसंग) परमात्मा का स्वरूप

25:21 (प्रसंग) परमात्मा निराकार
25:33 (प्रसंग) नेति नेति विचार
25:40 (प्रसंग) परम सत्ता का वर्णन
25:48 (प्रसंग) सबका आधार

25:57 (प्रसंग) महापुरुषों का एकत्व
26:09 (प्रसंग) आत्मज्ञान का परिणाम

26:30 (प्रसंग) निसंकल्प शांति
26:39 (प्रसंग) मौन और महानता
26:47 (प्रसंग) चंचलता से पतन
26:57 (प्रसंग) अशांति का कारण

27:04 (प्रसंग) चतुराई का बंधन
27:12 (प्रसंग) जन्म चक्र
27:20 (प्रसंग) सीमित संबंध

27:30 (प्रसंग) संतुलित जीवन
27:37 (प्रसंग) संयम का महत्व
27:47 (प्रसंग) साधना में लगना
27:56 (प्रसंग) साक्षी भाव

28:02 (प्रसंग) समय का सदुपयोग
28:11 (प्रसंग) आयु का क्षय
28:19 (प्रसंग) आत्मा और आवरण
28:26 (प्रसंग) अज्ञान का अंत

28:33 (प्रसंग) देहाभिमान का त्याग
28:41 (प्रसंग) आत्मस्वरूप का बोध
28:48 (प्रसंग) ब्रह्मभाव

28:55 (भजन) ओम शांति
29:03 (भजन) शांति का आह्वान
29:10 (भजन) ईश्वरीय शांति
29:20 (भजन) अद्वैत शांति
29:32 (भजन) चित्त शांति
29:52 (भजन) ओम शांति

30:08 (प्रसंग) चित्त की शांति का महत्व
30:17 (प्रसंग) मन की चंचलता दुख
30:30 (प्रसंग) मन उपशम
30:40 (प्रसंग) संकल्प-विकल्प से मुक्ति
30:53 (प्रसंग) श्वास में परमात्मा शांति

 

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