रविवार, 15 मार्च 2026

07-03-2026 शाम | Surat 1990 ( परमात्मा का क्षीण घन स्वप्न और जाग्रत अवस्था )

 आश्रम संध्या सत्संग 07-03-2026 शाम |  Surat 1990 Ashram Sandhya

TIME STAMP INDEX 

00:02 (प्रसंग) सौराष्ट्र में प्रवचन के बाद प्रोफेसर का प्रश्न – सब में एक परमात्मा होने पर शंका
00:11 (संवाद) प्रोफेसर का प्रश्न कि यदि सब में एक आत्मा है तो एक के मरने पर सब मर क्यों नहीं जाते
00:19 (संवाद) प्रोफेसर होने से आध्यात्मिक समझ होना आवश्यक नहीं
00:27 (संवाद) एक आत्मा होने पर एक के सुख-दुख सबको होने का तर्क
00:35 (संवाद) स्वामीजी द्वारा प्रोफेसर के तर्क पर दया और हंसी

00:59 (दृष्टांत) बिजली और बल्ब का उदाहरण – बल्ब अलग पर करंट एक
01:08 (दृष्टांत) अलग-अलग कमरों के बल्ब पर एक ही बिजली का प्रवाह
01:17 (दृष्टांत) पौधा छोटा और वृक्ष बड़ा पर सूर्य की किरण एक
01:26 (दृष्टांत) शरीर और बुद्धि अलग लेकिन प्रेरक चैतन्य एक

01:43 (उपदेश) “एक नूर ते सब जग उपजा” का सिद्धांत
01:50 (उपदेश) अनन्य भावना से भगवान की पूजा करने वाला शीघ्र भगवत पद पाता है

02:05 (उपदेश) सात्विक, राजसी और तामसी भोजन का वर्णन
02:12 (उपदेश) बासी या अपवित्र भोजन तामसी भोजन
02:19 (उपदेश) अत्यधिक मसालेदार और तला भोजन राजसी भोजन
02:28 (उपदेश) प्रसन्न चित्त से बनाया गया भोजन सात्विक भोजन
02:37 (प्रसंग) पहले माताएं प्रभात में भगवान का नाम लेकर आटा पीसती थीं
02:47 (उपदेश) भोजन बनाते समय चित्त प्रसन्न और पवित्र होना चाहिए
02:54 (उपदेश) टीवी या अशांत वातावरण में भोजन बनाने का दुष्प्रभाव

03:03 (उपदेश) कलह देखने और सुनने से जीवन में कलह बढ़ती है
03:12 (उपदेश) झगड़ों से पार कराने वाला ज्ञान आवश्यक
03:20 (उपदेश) अशांति और पाप मिटाने वाला सत्संग प्राप्त करने का प्रयास
03:30 (उपदेश) जीवन समाप्त होने से पहले जीवनदाता परमात्मा में विश्राम पाने का प्रयास
03:38 (उपदेश) बाहरी आराम से बड़ा आत्मा से मिलन का आनंद

03:59 (तत्वज्ञान) आंख, कान, वाणी, मन और बुद्धि परमात्मा की शक्ति से कार्य करते हैं
04:08 (तत्वज्ञान) दृश्य और विचार बदलते हैं पर देखने वाला आत्मा अचल है
04:24 (शास्त्र) आत्मा ब्रह्म स्वरूप है – “अय आत्मा ब्रह्म”

04:32 (दृष्टांत) बल्ब और पंखे बदलने पर भी पावर हाउस एक
04:39 (दृष्टांत) सूर्य एक और पौधे अनेक
04:46 (दृष्टांत) सब जीव एक ही चैतन्य परमात्मा से जुड़े

05:02 (उपदेश) ऐसे चिंतन से मनुष्य शीघ्र धर्मात्मा बनता है

05:10 (उपदेश) दान के प्रकार – ध्रुव दान का वर्णन
05:19 (उपदेश) ध्रुव दान – जिसमें सब प्राणियों को लाभ और बदले की अपेक्षा नहीं
05:36 (उपदेश) चल दान – सीमित लाभ और फल की अपेक्षा
05:50 (उपदेश) भयजनक दान – डर के कारण किया गया दान
06:04 (उपदेश) राजनैतिक स्वार्थ से किया गया दान
06:21 (उपदेश) श्रेष्ठ दान हृदय और धन दोनों को शुद्ध करता है
06:35 (उपदेश) दान करते समय अहंकार नहीं रखना चाहिए
06:43 (उपदेश) भगवान की वस्तु भगवान के कार्य में लगाना ही सात्विक दान

07:07 (उपदेश) सब कुछ संसार में छूटने वाला है
07:14 (उपदेश) बहुजन हिताय के लिए त्याग करना दान है
07:24 (शास्त्र) कलियुग में दान का विशेष महत्व
07:33 (उपदेश) सांत्वना देना और विद्या देना भी दान है
07:41 (उपदेश) सर्वोत्तम दान – भगवान के प्रेम और भक्ति का दान

07:59 (उपदेश) सात्विक, राजस और तामस कर्म का फल
08:06 (उपदेश) कर्म भगवान को अर्पण करने से भगवान की प्राप्ति
08:13 (उपदेश) अपने और दूसरों में भगवान देखने वाला अनन्य भक्त
08:22 (शास्त्र) भगवान भक्त के योग-क्षेम का भार उठाते हैं

08:36 (दृष्टांत) लोभी आदमी का कुएं में गिरने का प्रसंग
08:44 (दृष्टांत) “हाथ दो” कहने पर भी लोभी का हाथ न देना
08:52 (दृष्टांत) साधु द्वारा “मेरा हाथ ले लो” कहने पर बाहर आना
09:09 (दृष्टांत) लोभी का जीवन और मृत्यु का प्रसंग
09:24 (दृष्टांत) लोभी का सेवक और धन के प्रति आसक्ति
09:40 (दृष्टांत) लोभी का मरते समय भी त्याग न करना

09:49 (उपदेश) भगवान का भक्त अहंकार और कर्तापन छोड़ देता है
09:57 (उपदेश) बच्चा जैसे मां की गोद में निश्चिंत होता है वैसे भक्त भगवान में निश्चिंत
10:07 (शास्त्र) “करण करावनहार स्वामी” – परमात्मा ही कर्ता

10:22 (उपदेश) दिन के कर्मों का रात को भगवान को समर्पण
10:29 (उपदेश) गलती के लिए क्षमा और अगले दिन सुधार की प्रार्थना
10:38 (उपदेश) भगवान की गोद में सोने जैसा भाव लेकर सोना
10:47 (उपदेश) ऐसा चिंतन करने से नींद भी बंदगी बन जाती है

11:04 (उपदेश) सुबह उठकर शरीर को खींचना और ढीला छोड़ना
11:12 (उपदेश) प्राणशक्ति को संतुलित करना
11:20 (उपदेश) दिन प्रसन्नता से बिताने का संकल्प

11:28 (दृष्टांत) गुजराती कहावत – दाल बिगड़ी तो दिन बिगड़ा
11:37 (दृष्टांत) समझ बिगड़ी तो जीवन बिगड़ता है
11:46 (दृष्टांत) सोक्रेटिस और उसकी पत्नी का प्रसंग
12:04 (दृष्टांत) पत्नी द्वारा सोक्रेटिस को अपमानित करना
12:21 (दृष्टांत) सोक्रेटिस का शांत और विचारशील स्वभाव
12:37 (दृष्टांत) पत्नी द्वारा गंदा पानी सिर पर डालना
13:01 (दृष्टांत) सोक्रेटिस का हंसकर प्रतिक्रिया देना

13:17 (उपदेश) परिवार में सभी की इच्छाओं का सम्मान करना चाहिए
13:26 (उपदेश) घर में तनाव का कारण अहंकार
13:34 (उपदेश) कलियुग में परिवारों में कलह

13:58 (उपदेश) सत्संग से मन की शांति
14:05 (उपदेश) भगवान के नाम और संतों के सानिध्य का प्रभाव
14:23 (उपदेश) काम, क्रोध, लोभ, मोह से गिरता मन
14:39 (उपदेश) सत्संग मन को संभालता है

14:54 (उपदेश) गीता सुनने और समझने वालों का सौभाग्य
15:01 (उपदेश) गीता के प्रसाद से दुखों का नाश
15:10 (उपदेश) हरिनाम कीर्तन से हृदय में प्रसाद जागृत होता है

15:42 (शास्त्र) गुरु नानक वचन – सतगुरु मिलने से जन्मों की मल धुलती है

15:49 (उपदेश) संतों के साथ हरि जस गाने का महत्व
16:05 (उपदेश) संतों के साथ कीर्तन और भक्ति का महत्व

16:31 (उपदेश) संत निंदा का दुष्परिणाम
16:39 (उपदेश) संत निंदा से कुल का नाश
16:47 (उपदेश) राम नाम और सत्संग से जीवन का कल्याण

17:03 (शास्त्र) संत निंदक पर नानक का वचन
17:13 (प्रसंग) प्राचीन काल में राजाओं द्वारा ब्रह्मज्ञान का प्रचार
17:20 (प्रसंग) यमराज का ब्रह्मा जी के पास जाना
17:28 (प्रसंग) ब्रह्मज्ञानी संतों के कारण नरक खाली होना
17:36 (प्रसंग) ब्रह्मा जी का समाधान

18:00 (प्रसंग) ब्रह्मज्ञानी संतों के निंदक और प्रशंसक का परिणाम
18:17 (उपदेश) संत निंदक का पतन और संत भक्त का उत्थान

19:30 (उपदेश) आत्मस्वरूप में स्थित होने का मार्ग
19:37 (शास्त्र) गीता ज्ञान की महिमा
19:44 (उपदेश) अर्जुन का मोह नष्ट होना

20:01 (उपदेश) भगवान कृष्ण का जीवन उदाहरण
20:09 (उपदेश) हृदय में भगवान की उपस्थिति

20:24 (तत्वज्ञान) वेदांत का सूक्ष्म ब्रह्मज्ञान
20:31 (शास्त्र) योग वशिष्ठ में परमात्मा की चार अवस्थाएं

20:49 (तत्वज्ञान) घन सुषुप्ति – जड़ जगत की अवस्था
21:03 (तत्वज्ञान) क्षीण सुषुप्ति – वृक्ष आदि की अवस्था
21:17 (तत्वज्ञान) स्वप्न अवस्था – चलने-फिरने वाले जीव
22:47 (तत्वज्ञान) जागृत अवस्था – भगवान का पूर्ण प्रकट स्वरूप

23:01 (प्रसंग) ब्रह्मा जी की सभा में भगवान के निवास पर चर्चा
23:10 (शास्त्र) “हरि व्यापक सर्वत्र समाना”

23:20 (उपदेश) विभिन्न अवतारों का उद्देश्य
23:30 (उपदेश) मत्स्य, कच्छप, वामन अवतार का वर्णन
24:04 (उपदेश) राम अवतार – मर्यादा और प्रेम का संदेश
24:25 (उपदेश) दत्तात्रेय और कपिल अवतार – ब्रह्मज्ञान प्रचार

24:48 (उपदेश) कृष्ण अवतार – प्रेम का अवतार
25:10 (उपदेश) कृष्ण द्वारा प्रेम और व्यवहार की शिक्षा

25:28 (प्रसंग) राधाष्टमी और राधा का महत्व
25:45 (तत्वज्ञान) राधा – प्रेम धारा का प्रतीक

26:01 (दृष्टांत) प्रेम अवतार के प्रकट होने का उदाहरण
26:10 (प्रसंग) राधा और कृष्ण का प्रेम प्रसंग
26:24 (दृष्टांत) तोते को “धारा” सिखाने का प्रसंग

26:30 (भजन) प्रेम का संदेश – वेद पुराण से बढ़कर प्रेम

27:14 (उपदेश) परमात्मा सबके भीतर पूर्ण रूप से विद्यमान
27:23 (उपदेश) संतों और भक्तों में वही परमात्मा

27:44 (शास्त्र) “जिन खोजा तिन पाया”

28:01 (तत्वज्ञान) बाह्य विषयों में जाने पर प्रेम काम में बदल जाता है

28:09 (उपदेश) जड़ वस्तुओं में प्रेम एकांगी होता है
28:16 (उपदेश) धन, गाड़ी, मकान को चाहो लेकिन वे तुम्हें नहीं चाहते
28:25 (उपदेश) जड़ वस्तुओं में घन सुषुप्त अवस्था का भाव
28:34 (उपदेश) परमात्मा को चाहने पर परमात्मा भक्त को संतों और मंदिर तक पहुंचाता है

28:41 (प्रसंग) कम्युनिस्ट पिता और आस्तिक बेटे का प्रसंग
28:51 (संवाद) पिता का कहना कि मंदिर जाना समय की बर्बादी है
28:59 (संवाद) बेटे का उत्तर कि सत्संग से प्रसन्नता और सफलता मिलती है

29:13 (उपदेश) जीवन में आध्यात्मिकता न हो तो प्रेम सरिता नहीं खुलती
29:20 (उपदेश) प्रेम सरिता न खुले तो व्यवहार विष हो जाता है

29:30 (उपदेश) हरि नाम कीर्तन से मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर केंद्रों पर प्रभाव

29:44 (कीर्तन) संत नानक – संत जना मिल हरि जस गाइए
29:52 (कीर्तन) तुलसीदास – हरि व्यापक सर्वत्र समाना
30:01 (कीर्तन) ऋषि वचन – हरे नामव केवलम

30:10 (कीर्तन) हरे राम हरे कृष्ण महा मंत्र कीर्तन

30:24 (उपदेश) हरि नाम कीर्तन से सुषुप्त शरीर में चेतना का प्रसार
30:32 (उपदेश) भाव और क्रिया की शुद्धि
30:38 (उपदेश) भाव और क्रिया शुद्ध होने पर ज्ञान का प्रकाश

30:45 (उपदेश) सिख धर्म का पहला ग्रंथ जप जी का महत्व

31:00 (कथा) गुरु नानक का नदी में लीन होना
31:08 (कथा) तीन दिन तक नानक जी का अदृश्य रहना
31:18 (कथा) भीतर की सरिता में आत्मानुभव का संकेत
31:31 (कथा) नानक जी का प्रकट होकर “एक ओंकार” का उपदेश देना

31:57 (उपदेश) ओंकार परमात्मा की स्वाभाविक ध्वनि है
32:14 (उपदेश) जन्म लेते समय बच्चे की ध्वनि ओंकार से मिलती है
32:30 (उपदेश) ओंकार और परमात्मा की शांति से रोगी को राहत मिलती है

32:45 (उपदेश) आत्मा के जितने निकट रहोगे उतनी सफलता और प्रसन्नता
33:01 (उपदेश) बाहरी आसक्ति से तनाव और अशांति बढ़ती है

33:09 (दृष्टांत) सुकरात और सूअर का उदाहरण
33:26 (उपदेश) जीवन केवल पेट भरने के लिए नहीं, सत्य अनुभव के लिए है
34:08 (संवाद) मित्रों का कहना कि निश्चिंत सूअर होना बेहतर है
34:18 (संवाद) सुकरात का उत्तर कि विचारक होकर परम पद पाना श्रेष्ठ है

34:27 (उपदेश) चिंतन अंत में पूर्ण निश्चिंतता देता है
34:36 (उपदेश) धन, सत्ता, सौंदर्य की शराब से नहीं हरि नाम से निश्चिंतता

35:11 (प्रसंग) कम्युनिस्ट पिता और बेटे की दूसरी चर्चा
35:19 (संवाद) पिता का कहना कि भगवान नहीं है
35:28 (संवाद) बेटे का तर्क कि सृष्टि में व्यवस्था संचालक का संकेत देती है

36:00 (संवाद) पिता का तर्क कि संसार गति और गर्मी से चलता है

36:34 (दृष्टांत) बेटे का युक्ति से पिता को समझाने का विचार
37:03 (दृष्टांत) बेटे का चित्र बनाकर उदाहरण देना
37:20 (संवाद) पिता को चित्र से तर्क समझाना
38:10 (संवाद) पिता का मानना कि बनाने वाला कोई होगा
38:33 (प्रसंग) पिता का बेटे की बात से प्रभावित होकर मंदिर जाने की अनुमति देना

39:03 (उपदेश) कृष्ण अवतार प्रेम प्रकट करने का विशेष अवतार है
39:25 (उपदेश) राम नाम और कृष्ण नाम का वैदिक महत्व
39:42 (उपदेश) कृष्ण का अर्थ – आकर्षित करने वाला

39:52 (कथा) कृष्ण की गोपियों के साथ प्रेम लीला

41:10 (कथा) वृंदावन की नाटक कंपनियों में कृष्ण मुकुट पर विवाद
41:35 (प्रसंग) मुकुट दाईं या बाईं ओर झुका होने पर मुकदमा
41:49 (प्रसंग) न्यायाधीश का निर्णय कि मुकुट सीधा बांधा जाए
42:04 (उपदेश) कृष्ण की पूजा न्यायालय से नहीं प्रेम से चलती है

42:28 (कथा) गोपी का कृष्ण से प्रेमपूर्ण उलाहना
42:52 (कथा) कृष्ण का गोपी के तगारे उठवाना
43:31 (संवाद) कृष्ण का मक्खन के बदले तगारा उठाने की लीला
43:57 (कथा) गोपी का कृष्ण को गोबर के टिल्ले लगाने का प्रेम प्रसंग

44:12 (उपदेश) कृष्ण प्रेम अवतार का अद्भुत उदाहरण
44:30 (प्रसंग) कृष्ण का अर्जुन का सारथी बनना

45:01 (उपदेश) कृष्ण जीवनभर मुस्कुराने का आदर्श
45:24 (उपदेश) सुबह कुछ समय हंसने से स्वास्थ्य और प्रसन्नता
45:30 (उपदेश) प्रसन्नता से बुद्धि में प्रकाश

45:42 (उपदेश) यश और प्रेम बांटने की चीज हैं
45:52 (उपदेश) दुख को पैरों तले कुचलना चाहिए

46:01 (उपदेश) अपनी परेशानी से दूसरों का मूड खराब नहीं करना चाहिए
46:33 (उपदेश) दुख सुनाना हो तो ज्ञान से और सुख सुनाना हो तो प्रेम से

46:49 (उपदेश) व्यवहार में कुशलता भी एक प्रकार का यज्ञ है
46:58 (उपदेश) किसी के दिल को चोट कम पहुंचे ऐसा व्यवहार भी यज्ञ है
47:07 (उपदेश) किसी की खुशी बढ़ाने वाला व्यवहार भी यज्ञ है
47:14 (उपदेश) सब यज्ञों में जप यज्ञ श्रेष्ठ है

47:23 (दृष्टांत) दुर्घटना की खबर समझदारी से सुनाने का उदाहरण

48:17 (कथा) कृष्ण का मक्खन खाने का प्रसंग
48:35 (संवाद) घंटियों से कृष्ण का प्रश्न
48:44 (संवाद) घंटियों का उत्तर कि भगवान स्वयं भोग लगाएं तो घंटी बजती है

49:18 (प्रसंग) मदन मोहन मालवीय और उनकी माता का आशीर्वाद प्रसंग
50:22 (प्रसंग) मालवीय जी द्वारा हनुमान प्रसाद पोद्दार को दी गई कुंजी

51:08 (उपदेश) किसी से मिलने से पहले चार बार नारायण स्मरण का मंत्र
51:34 (उपदेश) हर व्यक्ति में नारायण को देखकर व्यवहार करना

52:08 (उपदेश) व्यवहार से पहले नारायण स्मरण का अभ्यास
52:47 (उपदेश) घर के झगड़े को नारायण स्मरण से शांत करना

53:03 (उपदेश) हरि नाम से घर का झगड़ा भी भक्ति बन सकता है
53:23 (उपदेश) हरि नाम सरल और सबके लिए सुलभ साधना है
53:38 (उपदेश) हरि नाम से भाव केंद्र विकसित होता है

53:47 (उपदेश) रावण में क्रिया शक्ति अधिक लेकिन भाव शुद्ध नहीं
54:06 (उपदेश) राम और कृष्ण में भाव, ज्ञान और क्रिया का संतुलन

54:13 (उपदेश) भाव और ज्ञान शक्ति से क्रिया भगवान की सेवा बनती है
54:22 (उपदेश) भाव शुद्ध न हो तो क्रिया शक्ति नुकसान करती है

55:04 (उपदेश) शिक्षा और दीक्षा का अंतर
55:21 (उपदेश) दीक्षा जीवन की दिशा तय करती है
55:38 (उपदेश) सही दिशा हो तो थोड़ी शक्ति भी लोकहित करती है

56:01 (उपदेश) कृष्ण को जगतगुरु के रूप में स्वीकार

56:26 (प्रसंग) उद्धव का वृंदावन से लौटकर कृष्ण से संवाद
56:45 (दृष्टांत) कृष्ण के हृदय में राधा प्रेम का अनुभव

57:03 (उपदेश) राधात्व देखने से प्रेम शुद्ध होता है
57:12 (उपदेश) संयमित जीवन से तेजस्वी संतति और समाज का कल्याण




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

संकल्प - विकल्प रहित परम शांत अवस्था

 संकल्प - विकल्प रहित परम शांत अवस्था सत्संग के मुख्य अंश : राम में विश्रांति पाने से सबकुछ सम्भव हो जाता है । करने, जानने और मानने की शक्ति...