बुधवार, 18 मार्च 2026

ब्रह्मज्ञान - आश्रम संध्या सत्संग - 14-03-2026 सुबह

 ब्रह्मज्ञान - आश्रम संध्या सत्संग - 14-03-2026 सुबह

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0:03 (सम्वाद) कृष्ण, राम, ईसा, कबीर के दर्शन से भी यात्रा अधूरी, परमेश्वर का साक्षात्कार आवश्यक
0:11 (सम्वाद) परमेश्वर का तीन मिनट का साक्षात्कार अद्वैत अनुभव देता है
0:17 (सम्वाद) आत्मा और परमात्मा का भेद समाप्त होने की स्थिति

0:28 (दृष्टांत) तीन मिनट के शुद्ध ज्ञान का महत्व
0:36 (दृष्टांत) गुलाब के ज्ञान का उदाहरण — ज्ञान स्थायी रहता है
0:45 (दृष्टांत) विस्मृति हो सकती है, पर ज्ञान नष्ट नहीं होता
0:53 (सम्वाद) परमात्मा का ज्ञान एक बार हो जाए तो अज्ञान नहीं रहता

1:00 (सम्वाद) स्मृति होने पर दुख मिटता है
1:07 (सम्वाद) सुख अनुभव के बाद मन स्वतः परमात्मा में जाता है
1:17 (दृष्टांत) दुख से बचने हेतु मन का परमात्मा की ओर जाना
1:26 (दृष्टांत) जंगल की आग में प्राणी का जल की ओर जाना
1:35 (दृष्टांत) अभ्यास से परमात्मा में मन की स्थिरता

1:43 (सम्वाद) ज्ञानी सदा आनंद में, अज्ञानी दुख में
1:52 (सम्वाद) अधिक पाने की इच्छा से दुख बढ़ता है
1:59 (सम्वाद) जो मिला है वह अवश्य छूटेगा

2:09 (दृष्टांत) सब वस्तुएं समयानुसार नष्ट होती हैं
2:14 (सम्वाद) राजा, रंक, संत सबको सब छोड़ना पड़ता है
2:21 (सम्वाद) सर्वस्व छोड़ने का नियम सार्वभौमिक
2:28 (सम्वाद) सर्वस्व के स्वामी परमात्मा को जानना आवश्यक

2:37 (सम्वाद) भूमा (व्यापक ब्रह्म) में ही पूर्ण सुख
2:47 (सम्वाद) सीमित वस्तुओं में सुख नहीं
2:55 (सम्वाद) इंद्रिय सुख अल्पकालिक
3:02 (सम्वाद) व्यापक ब्रह्म में ही पूर्ण आनंद

3:11 (सम्वाद) इंद्रिय और मन के सुख अस्थायी
3:21 (सम्वाद) प्रशंसा और निंदा दोनों स्वप्न समान
3:29 (दृष्टांत) इंद्रिय, शरीर, जगत सब स्वप्न समान
3:38 (सम्वाद) सबका आधार चैतन्य परमात्मा

3:44 (सम्वाद) सकाम तप, यज्ञ, व्रत करने वालों की संगति से बचना
3:53 (दृष्टांत) यज्ञ का खंभा — दिखने में बड़ा पर छाया नहीं देता
4:03 (सम्वाद) स्वार्थी साधना से आत्मशांति नहीं मिलती
4:12 (सम्वाद) केवल परमात्मा की चाह रखने वालों की संगति श्रेष्ठ
4:21 (सम्वाद) फल देने वाली संगति ही उपयोगी

4:28 (दृष्टांत) दिखावटी साधना व्यर्थ
4:35 (सम्वाद) आत्मसुख न देने वाली संगति त्याज्य
4:44 (सम्वाद) सकाम यज्ञ करने वालों की संगति निष्फल
4:52 (सम्वाद) आत्मशांति का अभाव होने पर साधना व्यर्थ

5:04 (सम्वाद) हजारों यज्ञ भी आत्मज्ञान के बराबर नहीं
5:11 (सम्वाद) यज्ञों की तुलना में ज्ञान श्रेष्ठ
5:19 (सम्वाद) सत्संग का महत्व अत्यधिक
5:26 (सम्वाद) ज्ञान कथा का पुण्य सर्वोच्च

5:33 (सम्वाद) यज्ञ से सीमित सुख, सत्संग से गहरा आनंद
5:42 (सम्वाद) सत्संग आत्मशुद्धि करता है
5:49 (सम्वाद) संत संग से हृदय उज्जवल होता है

5:59 (दृष्टांत) यज्ञ का धुआँ बनाम सत्संग का प्रकाश
6:04 (सम्वाद) सत्संग से हरि रस प्राप्त होता है
6:13 (सम्वाद) संतों के पास बैठने का लाभ

6:22 (सम्वाद) राजाओं का भी गुरु द्वार पर जाना
6:30 (सम्वाद) गुरु कृपा से ज्ञान प्राप्ति
6:38 (सम्वाद) सत्संग में आने का कारण लाभ और ज्ञान

6:49 (सम्वाद) संसार स्वप्न समान
6:56 (सम्वाद) धन, व्यक्ति, घटनाएं सब स्वप्न
7:04 (सम्वाद) समय के साथ सब स्मृति बन जाता है

7:15 (दृष्टांत) घटनाएं बाद में स्वप्न जैसी लगती हैं
7:22 (सम्वाद) जन्माष्टमी आदि उत्सव भी स्वप्न समान
7:31 (सम्वाद) संपूर्ण संसार स्वप्न स्वरूप

8:05 (सम्वाद) संसार में आसक्ति व्यर्थ
8:11 (सम्वाद) सबको सब छोड़ना है
8:20 (सम्वाद) अज्ञानता से दुख उत्पन्न

8:28 (सम्वाद) लोग एक-दूसरे को ठग कर सुखी होना चाहते हैं
8:34 (सम्वाद) असली सुख का विस्मरण
8:44 (भजन) नारायण हरे नारायण हरे
8:52 (भजन) तीन लोक चौदा भुवन में भ्रमण

9:02 (सम्वाद) संत संग में ही सुख
9:09 (सम्वाद) सादगी और संतों का महत्व
9:16 (सम्वाद) संतों के हृदय में सुख

9:24 (दृष्टांत) संगीत सीखने के लिए गुरु आवश्यक
9:32 (दृष्टांत) कला बिना गुरु के नहीं सीखी जा सकती
9:39 (सम्वाद) गुरु के बिना आत्मज्ञान कठिन

9:47 (सम्वाद) अनुभव से ही ज्ञान प्राप्त होता है
9:56 (सम्वाद) गुरु ज्ञान को अनुभव बनाना चाहिए

10:03 (सम्वाद) संत संग से निर्भय सुख
10:12 (सम्वाद) बाहरी सुखों से श्रेष्ठ संत संग
10:22 (दृष्टांत) भौतिक सुखों की सीमितता

10:32 (सम्वाद) संत संग से हृदय शुद्धि
10:38 (सम्वाद) आत्मसुख प्रकट होता है
10:46 (सम्वाद) बाहरी सुख स्वतः प्राप्त होते हैं

10:56 (दृष्टांत) सुख ज्ञानी के पीछे चलता है
11:04 (सम्वाद) अज्ञानी सुख के पीछे भागता है
11:10 (सम्वाद) इच्छा ही दुख का कारण

11:20 (सम्वाद) इच्छा निवृत्ति से मुक्ति
11:28 (दृष्टांत) इच्छा समाप्त होने पर संसार पार
11:35 (सम्वाद) वासना रहते दुख

11:42 (सम्वाद) नो डिजायर नो प्रॉब्लम सिद्धांत
11:50 (सम्वाद) अधिक इच्छा अधिक समस्या

12:06 (सम्वाद) इच्छा मुक्त व्यक्ति ईश्वर तुल्य
12:13 (सम्वाद) आत्मसुख प्राप्त व्यक्ति भोग नहीं चाहता
12:22 (दृष्टांत) जाल से मुक्त पक्षी पुनः नहीं फंसता

12:31 (सम्वाद) तृष्णा समाप्ति से शांति
12:41 (सम्वाद) संतोष से ईश्वरत्व
12:49 (सम्वाद) असंतोषी धनी भी गरीब

12:57 (सम्वाद) संतोषी निर्धन भी ईश्वर
13:04 (सम्वाद) आत्मसंतोष का महत्व

13:13 (सम्वाद) हर व्यक्ति में ईश्वर
13:23 (सम्वाद) संतोष अमृत समान
13:30 (सम्वाद) संतोष सर्वोत्तम रसायन

13:37 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी की विशेषताएं
13:46 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी की महिमा अवर्णनीय

14:05 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी अद्वैत भाव में स्थित
14:15 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी को शरीर मानना अपराध

14:24 (सम्वाद) मूर्ति, प्रसाद, तुलसी, गाय का आदर
14:30 (सम्वाद) ज्ञानवान को परमात्मा रूप मानना

14:37 (सम्वाद) ज्ञानवान को पहचानने का महत्व
14:46 (सम्वाद) गलत दृष्टि से बंधन

15:03 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी का वास्तविक स्वरूप
15:10 (सम्वाद) योग वशिष्ठ का संदर्भ
15:15 (सम्वाद) मनुष्य जन्म का उद्देश्य आत्मज्ञान

15:25 (सम्वाद) साधु संग का महत्व
15:33 (सम्वाद) मूर्ख संग से बचना

15:40 (सम्वाद) श्रद्धाहीन व्यक्ति अधिकारी नहीं
15:49 (सम्वाद) संत वचन के अधिकारी भाग्यशाली

16:01 (सम्वाद) जप, तप, संयम की आवश्यकता
16:09 (सम्वाद) आत्मज्ञान के गुण

16:17 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी निर्लेप
16:26 (भजन) ब्रह्मज्ञानी दी महिमा

16:30 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी को परमेश्वर स्वरूप
16:37 (सम्वाद) दुर्लभ पहचान

16:43 (सम्वाद) जन्म-मरण के दुख
16:53 (सम्वाद) अज्ञानता से कष्ट

17:01 (सम्वाद) आत्मज्ञान से मुक्ति
17:07 (सम्वाद) सुमिरन और चिंतन का महत्व

17:18 (सम्वाद) सत्संग के लिए कष्ट भी स्वीकार्य
17:26 (सम्वाद) ऐश्वर्य त्यागकर ज्ञान प्राप्ति

17:37 (सम्वाद) प्रमाद सबसे बड़ा शत्रु
17:44 (सम्वाद) आत्मज्ञान का अभाव दुख का कारण

17:53 (दृष्टांत) मेंढक का उदाहरण — संसार में फंसा व्यक्ति
18:01 (सम्वाद) अभ्यास की आवश्यकता

18:09 (दृष्टांत) पेट्रोल से आग बुझाने का उदाहरण
18:17 (सम्वाद) भोग से दुख नहीं मिटता
18:26 (सम्वाद) आसक्ति बढ़ती है

18:32 (सम्वाद) संसार का अंत दुख में
18:40 (सम्वाद) मृत्यु के बाद सब समाप्त

18:46 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञान के बिना जीवन व्यर्थ
18:56 (सम्वाद) संसार में अज्ञान का प्रभाव

19:03 (सम्वाद) अच्छे कर्म से आसक्ति घटे
19:12 (सम्वाद) आसक्ति बढ़े तो कर्म गलत

19:18 (सम्वाद) सामान्य, श्रेष्ठ, उत्तम व्यक्ति का भेद
19:27 (सम्वाद) सुख-दुख को स्वप्न मानना श्रेष्ठ

19:36 (सम्वाद) आत्मचिंतन का महत्व
19:44 (सम्वाद) “मैं कौन हूँ” का विचार

19:52 (सम्वाद) दुख और क्रोध से ऊपर उठना
20:00 (सम्वाद) विचार शक्ति का महत्व

20:09 (सम्वाद) विचार परम मित्र
20:18 (सम्वाद) श्रद्धा और ज्ञान का संतुलन

20:25 (सम्वाद) निर्णय शक्ति आवश्यक
20:32 (सम्वाद) विचार से सफलता

20:41 (सम्वाद) संशय से असफलता
20:47 (सम्वाद) दृढ़ निश्चय से सफलता

20:56 (दृष्टांत) नेपोलियन उदाहरण — दृढ़ विचार
21:04 (सम्वाद) विचारवान व्यक्ति सक्षम

21:12 (सम्वाद) इतिहास में विचारवानों की महिमा
21:19 (सम्वाद) महान संतों का उदाहरण

21:27 (सम्वाद) विचार की शक्ति से महानता
21:34 (सम्वाद) आत्मज्ञान का विचार श्रेष्ठ

21:42 (सम्वाद) भोग से विरक्ति आवश्यक
21:50 (सम्वाद) परमात्मा प्राप्ति का दृढ़ विचार

22:00 (सम्वाद) भोग स्वयं पीछे आते हैं
22:09 (सम्वाद) विचार से कार्य सिद्ध

22:18 (सम्वाद) बिना विचार के कर्म दुखद
22:27 (सम्वाद) दान भी विचारपूर्वक

22:36 (सम्वाद) विचार ही धर्म
22:44 (सम्वाद) जीवन के हर क्षेत्र में विचार आवश्यक

22:00 (सम्वाद) भोग अपने आप ज्ञानी के पीछे चलते हैं, उन्हें पाने की दौड़ आवश्यक नहीं
22:09 (सम्वाद) दृढ़ विचार और आत्मनिष्ठा से सभी कार्य सिद्ध होते हैं

22:18 (सम्वाद) बिना विचार के किया गया हर कर्म अंत में दुखद होता है
22:27 (सम्वाद) दान, सेवा, निर्णय — सब विचारपूर्वक ही करने चाहिए

22:36 (सम्वाद) सच्चा धर्म वही है जिसमें विवेक और विचार जुड़ा हो
22:44 (सम्वाद) जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विचार की आवश्यकता अनिवार्य है

23:00 (सम्वाद) मनुष्य को हर परिस्थिति में जागरूक और सजग रहना चाहिए
23:09 (सम्वाद) अज्ञानता और लापरवाही जीवन को नीचे गिराती है

23:18 (सम्वाद) विचारवान व्यक्ति ही सही मार्ग चुन पाता है
23:27 (सम्वाद) बिना सोचे समझे चलना पतन का कारण बनता है

23:36 (सम्वाद) आत्मचिंतन से ही जीवन की दिशा स्पष्ट होती है
23:45 (सम्वाद) “मैं कौन हूँ” का विचार सर्वोच्च साधना है

24:00 (सम्वाद) संसार के भोग आकर्षक हैं पर अंत में दुख देते हैं
24:09 (सम्वाद) भोगों की आसक्ति मनुष्य को बंधन में डालती है

24:18 (सम्वाद) त्याग और विवेक से ही आत्मिक उन्नति संभव है
24:27 (सम्वाद) आत्मज्ञान के बिना जीवन अधूरा है

24:36 (सम्वाद) सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, भीतर है
24:45 (सम्वाद) मन को बाहर से हटाकर भीतर लगाना आवश्यक है

25:00 (सम्वाद) सत्संग और संतों का मार्ग जीवन को ऊँचा उठाता है
25:09 (सम्वाद) संत वचन जीवन के अंधकार को दूर करते हैं

25:18 (सम्वाद) गुरु की कृपा से ही ज्ञान का प्रकाश होता है
25:27 (सम्वाद) बिना गुरु के आत्मज्ञान प्राप्त करना कठिन है

25:36 (सम्वाद) अभ्यास और निरंतरता से ही मन स्थिर होता है
25:45 (सम्वाद) साधना में धैर्य और दृढ़ता आवश्यक है

26:00 (सम्वाद) इच्छा और वासना ही दुख का मूल कारण हैं
26:09 (सम्वाद) इच्छा समाप्त होते ही मन शांति अनुभव करता है

26:18 (सम्वाद) संतोष ही सबसे बड़ा धन है
26:27 (सम्वाद) असंतोषी व्यक्ति कभी सुखी नहीं हो सकता

26:36 (सम्वाद) आत्मसंतोष से ही जीवन में पूर्णता आती है
26:45 (सम्वाद) जो भीतर संतुष्ट है वही वास्तव में धनी है

27:00 (सम्वाद) संसार में सब कुछ नश्वर और परिवर्तनशील है
27:09 (सम्वाद) जो आज है वह कल नहीं रहेगा

27:18 (सम्वाद) शरीर, धन, संबंध — सब क्षणिक हैं
27:27 (सम्वाद) केवल आत्मा ही शाश्वत और सत्य है

27:36 (सम्वाद) इस सत्य को जानने वाला ही ज्ञानी है
27:45 (सम्वाद) ज्ञान से ही जीवन का उद्देश्य पूर्ण होता है

28:00 (सम्वाद) समय बहुत मूल्यवान है, इसे व्यर्थ न गँवाएँ
28:09 (सम्वाद) हर क्षण आत्मउन्नति के लिए उपयोग करें

28:18 (सम्वाद) मृत्यु निश्चित है, इसलिए जीवन का सही उपयोग करें
28:27 (सम्वाद) आत्मज्ञान के बिना मृत्यु व्यर्थ है

28:36 (सम्वाद) परमात्मा को जानना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है
28:45 (सम्वाद) इसी से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है

29:00 (सम्वाद) जब तक “मैं” का रहस्य नहीं समझा, तब तक अज्ञान बना रहता है
29:09 (सम्वाद) “मैं कौन हूँ” का समाधान ही मुक्ति का द्वार है

29:18 (सम्वाद) आत्मज्ञान से द्वैत समाप्त हो जाता है
29:27 (सम्वाद) सबमें एक ही परमात्मा का अनुभव होता है

29:36 (सम्वाद) यही अद्वैत स्थिति परम शांति देती है
29:45 (सम्वाद) यही जीवन का परम सत्य और सार है

30:00 (सम्वाद) आत्मज्ञान ही सर्वोच्च उपलब्धि है
30:06 (सम्वाद) यही मनुष्य जन्म का सच्चा उद्देश्य है




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