आश्रम संध्या सत्संग 02-03-2026 शाम | Surat Holi 2001
0:04 तीन चीजें जीव का पीछा नहीं छोड़ती – पुण्य, पाप और भगवान का मंत्र (प्रवचन)
0:14 मरने के बाद पुण्य जीव को स्वर्ग और पाप नरक में ले जाता है (प्रवचन)
0:29 भगवान का मंत्र जीव को ईश्वर से मिलाए बिना नहीं छोड़ता (प्रवचन)
0:38 भगवान के नाम और मंत्र की महिमा (प्रवचन)
0:54 भगवान का नाम भगवान को प्रकट करने और उनसे मिलाने वाला है (प्रवचन)
1:02 रामजी ने पत्थर फेंका तो डूब गया लेकिन राम नाम से पत्थर तर गए (दृष्टांत)
1:08 राम नाम और कृष्ण नाम की महिमा से असंख्य लोगों का उद्धार (प्रवचन)
1:22 ईश्वर, गुरु और मंत्र तीन दिखते हैं लेकिन एक ही स्वरूप हैं (प्रवचन)
1:31 गुरु स्तुति मंत्र “तस्मै श्री गुरुवे नमः” (उद्धरण)
1:38 गुरु मंत्र और साधना का धन बढ़ाने की प्रेरणा (प्रवचन)
1:53 मन को एकाग्र कर वासनाओं को निकालने का उपदेश (प्रवचन)
2:10 वासनाएं निकलने से मन शुद्ध और शांत होता है (प्रवचन)
2:23 मन ही स्त्री, पुरुष और विभिन्न स्वभावों का कारण है (प्रवचन)
2:31 मन ही स्वर्ग और नरक में ले जाने वाला है (प्रवचन)
2:40 मन ही ईश्वर से मिलाता और नीच योनि में गिराता है (प्रवचन)
2:57 जप-तप न करने और बुरे कर्मों से नीच गति का कारण (प्रवचन)
3:12 मन ही योगी और योगेश्वर बना देता है (प्रवचन)
3:18 तत्वज्ञानी गुरु की शरण से परमात्मा का साक्षात्कार (प्रवचन)
3:26 गुरु और ज्ञान मिलने का दुर्लभ सौभाग्य (प्रवचन)
3:41 गुरु की खोज में पहले के साधकों की कठिनाइयाँ (प्रसंग)
4:05 साधना के अवसर का मूल्य समझने की प्रेरणा (प्रवचन)
4:21 आसानी से मिली चीज की कदर नहीं होती (दृष्टांत)
4:31 सत्संग में अनेक प्रश्नों के उत्तर मिलते हैं (प्रवचन)
4:49 सत्संग में मानसिक प्रश्नों के भी समाधान होते हैं (प्रवचन)
5:05 सत्संग से समस्याओं का समाधान और पाप नाश (प्रवचन)
5:28 तुलसीदास जी द्वारा सत्संग की महिमा (उद्धरण)
5:36 अहमदाबाद के माणिकनाथ जोगी का प्रसंग (प्रसंग)
5:51 जप से दुष्टता और दोष मिटते हैं तथा चित्त पवित्र होता है (प्रवचन)
6:01 शरीर, मन और बुद्धि को बल देने वाला कर्म ही धर्म है (प्रवचन)
6:19 निर्बल करने वाला कर्म अधर्म है (प्रवचन)
6:32 उपवास से स्थूलता घटती और मनोबल बढ़ता है (प्रवचन)
6:48 सत्य बल, शक्ति और आनंद देने वाला है (प्रवचन)
7:04 निंदा न करने और भगवान का सम्मान करने की शिक्षा (प्रवचन)
7:20 अपने को कोसना मूर्खता है (दृष्टांत)
7:46 भाग्य को दोष देकर आलस्य करने वालों की स्थिति (दृष्टांत)
8:03 वसंत ऋतु में दिन में न सोने की शिक्षा (प्रवचन)
8:20 भोजन के बाद चलना और समय-समय पर उपवास करना (प्रवचन)
8:36 निंदा सुनना और अपने को कोसना भी बुरा है (प्रवचन)
8:53 निराशा में न गिरने की शिक्षा (प्रवचन)
9:10 पतन के साथ उत्थान की संभावना भी रहती है (प्रवचन)
9:26 आत्मा अमर है इसलिए आशा बनाए रखना (प्रवचन)
9:48 आयुष्मान नंद का संसार की नश्वरता पर विचार (कथा)
10:31 पत्नी की अनुमति लेकर संन्यास लेने का निर्णय (कथा)
11:12 आयुष्मान नंद और पत्नी के बीच विदाई संवाद (संवाद)
11:47 भिक्षु बनने के बाद भी पत्नी की स्मृति से मन विचलित (कथा)
12:35 घर लौटने का विचार और साधुओं की समझाइश (संवाद)
13:07 गृहस्थ जीवन में भजन की कठिनाई पर चर्चा (संवाद)
13:59 माया और आसक्ति जीव को कैसे घेर लेती है (प्रवचन)
14:35 बुद्ध को आयुष्मान नंद के मन की स्थिति बताई गई (प्रसंग)
14:43 बुद्ध द्वारा आयुष्मान नंद को ध्यान की शिक्षा (संवाद)
15:02 श्वास पर ध्यान और मन को एकाग्र करने की विधि (प्रवचन)
15:21 ध्यान में आयुष्मान नंद का दिव्य अनुभव और अप्सराओं का दर्शन (कथा)
16:04 अप्सराओं की दासियों की भी अद्भुत सुंदरता का वर्णन (कथा)
16:11 बुद्ध द्वारा आयुष्मान नंद को ध्यान से नीचे उतारना (प्रसंग)
16:19 आयुष्मान नंद का दिव्य अप्सराओं के सौंदर्य पर आश्चर्य (संवाद)
16:37 प्रकृति के रहस्यों और मन की एकाग्रता का उपदेश (प्रवचन)
16:48 एक वर्ष ब्रह्मचर्य और साधना करने की शर्त (संवाद)
17:04 तासिल लोक की 500 अप्सराओं का वचन (कथा)
17:23 संकल्प से भोग और वस्तुएं प्राप्त होने का वर्णन (प्रवचन)
17:31 आयुष्मान नंद का एक वर्ष साधना का संकल्प (संवाद)
17:40 अप्सराओं के लोभ से प्रेरित होकर साधना करना (कथा)
17:49 जप और एकाग्रता से योग्यता का विकास (प्रवचन)
17:57 बुद्ध द्वारा वचन निभाने के लिए बुलाना (प्रसंग)
18:05 500 अप्सराओं को देने का प्रस्ताव (संवाद)
18:21 आयुष्मान नंद द्वारा आत्मानंद को श्रेष्ठ बताकर इंकार (संवाद)
18:39 आत्मानंद की श्रेष्ठता का उपदेश (प्रवचन)
18:48 मन की शक्ति और अंतरात्मा के सुख का वर्णन (प्रवचन)
19:17 गुरु कृपा से प्राप्त उच्च सुख का वर्णन (प्रवचन)
19:44 सांसारिक पद जैसे प्रधानमंत्री बनने की इच्छा का अभाव (प्रवचन)
20:03 गुरु कृपा से दूसरों को ऊँचा बनाने की भावना (प्रवचन)
20:22 सांसारिक पदों से श्रेष्ठ आत्मानंद (प्रवचन)
20:31 आत्मज्ञान से दूसरों को स्वर्ग का अधिकारी बनाने की शक्ति (प्रवचन)
20:47 मन में परमात्मा के लिए ललक जगाने का उपदेश (प्रवचन)
20:56 चंचल मन को बार-बार परमात्मा में लगाने का उपाय (प्रवचन)
21:20 गीता का श्लोक – मन को परमात्मा में लाने का उपदेश (उद्धरण)
21:38 मन का चंचल स्वभाव (प्रवचन)
21:58 मन को परमात्मा में स्थिर करने का पुरुषार्थ (प्रवचन)
22:07 एकाग्रता से प्रकृति के रहस्य खुलने का वर्णन (प्रवचन)
22:15 एकाग्रता से सिद्धियां और भोग प्राप्त होने की संभावना (प्रवचन)
22:22 परमात्मा का सुख इन सब से श्रेष्ठ (प्रवचन)
22:29 परमात्मा भाव से एकाग्रता करने की शिक्षा (प्रवचन)
22:44 गोल बिंदु पर दृष्टि स्थिर करने का ध्यान उपाय (साधना विधि)
23:05 एकाग्रता से चमत्कारिक प्रभाव होने की संभावना (प्रवचन)
23:15 परमात्मा या गुरु के चित्र पर ध्यान करने का उपाय (साधना विधि)
23:32 नील बिंदु या प्रकाश अनुभव का वर्णन (प्रवचन)
23:38 श्वास और नामजप से ध्यान करने की विधि (साधना विधि)
23:47 शक्तिपात से भीतर क्रियाएं होने का वर्णन (प्रवचन)
24:02 भगवत रस और दिव्य आनंद का अनुभव (प्रवचन)
24:10 ध्यान के चार प्रकार – पादस्थ, पिंडस्थ, रूपस्थ, रूपातीत (प्रवचन)
24:17 हर वस्तु में परमात्मा का चिंतन करने की शिक्षा (प्रवचन)
24:42 विक्षेप और शोर में भी भगवान का स्मरण (प्रवचन)
25:02 चंचल मन को बार-बार भगवान में लगाने का उपदेश (प्रवचन)
25:10 सब में भगवान की सत्ता देखने की शिक्षा (प्रवचन)
25:17 निंदा और फरियाद से बचने का उपदेश (प्रवचन)
25:32 आंखों को झपकाकर फिर स्थिर दृष्टि से ध्यान का अभ्यास (साधना विधि)
25:47 प्राणायाम से मन और शरीर की शुद्धि (साधना विधि)
26:07 मन को समझाकर ध्यान में बैठाने की युक्ति (दृष्टांत)
26:22 मन लगे या न लगे फिर भी साधना करते रहने का उपदेश (प्रवचन)
26:49 मन की चंचलता से धार्मिक व्यक्ति भी दुखी रह जाता है (प्रवचन)
27:03 भगवान में मन न लगने से दुख का कारण (प्रवचन)
27:18 सभी धर्मों में उपासना स्थल मन को एकाग्र करने का स्थान (प्रवचन)
27:42 घर में भी एकाग्रता का स्थान बनाने की प्रेरणा (प्रवचन)
27:49 पूरे संसार को भगवान का मंदिर मानने की शिक्षा (प्रवचन)
27:58 रामकृष्ण परमहंस की रेल यात्रा का प्रसंग आरंभ (प्रसंग)
28:06 अंग्रेज शासन में लोकल ट्रेन की स्थिति का वर्णन (प्रसंग)
28:26 अंग्रेजों के अत्याचार और भारतीयों की सहनशीलता (प्रवचन)
28:44 आत्मिक शक्ति और मनोबल बढ़ाने की प्रेरणा (प्रवचन)
29:01 अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने का संदेश (प्रवचन)
29:26 रामकृष्ण परमहंस का बेलपत्र के वृक्ष को देखना (प्रसंग)
29:45 बेलपत्र तोड़कर शिव को अर्पण करने की भावना (प्रसंग)
30:01 अंतर्मन में शिव स्वरूप का अनुभव (कथा)
30:10 शिव मंत्र बोलते हुए बेलपत्र अर्पण करना (भजन)
30:25 ध्यान में लीन होने से गाड़ी का न चलना (प्रसंग)
30:34 ध्यान समाप्त होने पर गाड़ी का चलना (प्रसंग)
30:45 साधना के आरंभिक काल के चमत्कारिक अनुभव (प्रसंग)
31:02 साधकों द्वारा संकल्प से गाड़ी रुकवाने का उदाहरण (प्रसंग)
31:11 आत्मा में अनंत शक्तियों का वर्णन (प्रवचन)
31:19 उन शक्तियों को दिखावे में न खर्च करने का उपदेश (प्रवचन)
31:33 हर जगह भगवान का स्मरण और श्वास में नामजप (प्रवचन)
31:43 मन न लगे तो शरीर को सक्रिय कर फिर ध्यान में बैठना (साधना विधि)
31:51 मन को दृढ़ता से साधना में बैठाने का उपदेश (प्रवचन)
32:08 शांत बैठने का अभ्यास (साधना विधि)
32:16 गहरी श्वास लेकर अशांति दूर करने की प्राणायाम विधि (साधना विधि)
32:35 मन न लगने की शिकायत और प्रश्न (संवाद)
32:45 आनंद और मन लगने के संबंध की व्याख्या (प्रवचन)
33:02 श्वास को देखकर और गिनकर मन एकाग्र करने की विधि (साधना विधि)
33:23 मन न लगे तो भी शांत बैठने की युक्ति (प्रवचन)
33:50 मुसाफरी के दृष्टांत से ध्यान में बैठने की शिक्षा (दृष्टांत)
34:08 चुपचाप बैठे रहने से तपस्या होने का उपदेश (प्रवचन)
34:27 जय गुरुदेव की जय (कीर्तन)
35:04 युक्ति से मन को शांत करने का उपदेश (प्रवचन)
35:23 मनुष्य जीवन को आनंदमय बनाने की प्रेरणा (प्रवचन)
35:48 मन को ईश्वर में लगाने की शिक्षा (प्रवचन)
35:56 धर्म, ध्यान और उपासना का अर्थ (प्रवचन)
36:13 तत्वज्ञान द्वारा आत्मानुभव की व्याख्या (प्रवचन)
36:22 मनुष्यों के विभिन्न स्तरों का वर्णन (प्रवचन)
36:49 देवत्व और भगवत्व की ऊंचाइयों का वर्णन (प्रवचन)
37:05 वशिष्ठ जी द्वारा जीवों के पतन का उदाहरण (कथा)
37:22 मन के अनुसार जीवन से नीच योनि में गिरने का वर्णन (प्रवचन)
37:31 संयम और तप से इंद्र बनने का उदाहरण (कथा)
37:45 मन को ईश्वर और धर्म में लगाने से विकास (प्रवचन)
38:03 मनमर्जी से जीवन जीने से पतन (प्रवचन)
38:12 गीता का श्लोक – आत्मा ही अपना मित्र और शत्रु (उद्धरण)
38:28 संयमित मन को अपना मित्र बताना (प्रवचन)
38:34 असंयमित मन को अपना शत्रु बताना (प्रवचन)
38:50 मनमुख जीवन से सबसे अधिक हानि (प्रवचन)
39:00 ईश्वर में लगे मन से सबसे बड़ा लाभ (प्रवचन)
39:17 सांसारिक पद और सुविधाओं की सीमाएं (प्रवचन)
39:31 मन में शांति न हो तो भोग भी दुखद (प्रवचन)
39:40 ईश्वर में लगा मन अंत में ईश्वर से मिलाता है (प्रवचन)
39:49 भोग में लगा मन प्रेत बनकर भटकाता है (प्रवचन)
40:05 ईश्वर में मन लगाने की महिमा (प्रवचन)
40:19 आत्मानंद की श्रेष्ठता (प्रवचन)
40:26 सांसारिक प्रमोशन और गुलामी का दृष्टांत (दृष्टांत)
40:36 प्रमोशन के बाद भी मृत्यु का सत्य (प्रवचन)
40:50 कबीर का दोहा – कुत्ते की दोस्ती (दोहा)
41:06 संसार के सुख-दुख का स्वभाव (प्रवचन)
41:23 प्रभु ज्ञान, ध्यान और आनंद की महिमा (प्रवचन)
41:32 संसार की वस्तुओं को समय नष्ट करने वाला बताना (प्रवचन)
41:56 सत्संग में हर क्षण पुण्य कमाई का वर्णन (प्रवचन)
42:05 ईश्वर चिंतन और ध्यान का महत्व (प्रवचन)
42:44 पावन समय और वातावरण का वर्णन (प्रवचन)
42:58 भगवान के सुमिरन और ध्यान का महत्व (प्रवचन)
43:21 सत्संग से पुण्य और आध्यात्मिक कमाई (प्रवचन)
43:49 ओम शांति का जप (कीर्तन)
44:05 शांति और ध्यान में स्थिर होने का निर्देश (ध्यान)
44:25 हरि ओम शांति और आनंद का जप (कीर्तन)
44:37 आत्मशक्ति और दृढ़ भक्ति का आह्वान (कीर्तन)
44:45 मन को ईश्वर में लगाने का संकल्प (कीर्तन)
45:01 हरि ओम जप और संगीत (कीर्तन)
45:24 धीरे-धीरे ध्यान में डूबने का निर्देश (ध्यान)
45:41 स्मरण से पाप और ताप मिटने की शिक्षा (प्रवचन)
46:00 परमात्मा की मधुर शांति का अनुभव (ध्यान)
46:10 ओम शांति और आनंद का जप (कीर्तन)
46:24 प्रसन्नता, एकाग्रता और आरोग्यता का आह्वान (कीर्तन)
46:43 आनंद और शांति का जप (कीर्तन)
47:06 ओम शांति जप (कीर्तन)
47:28 संगीत (कीर्तन)
47:37 मुनीश्वर के दर्शन और उपदेश से आनंद प्राप्ति (संवाद)
47:51 बाहरी सुख के बजाय आंतरिक आनंद का अनुभव (संवाद)
48:00 अंतरात्मा के आनंद का अनुभव (संवाद)
48:08 संत संगति को चंद्रमा की चांदनी जैसा शीतल बताना (प्रवचन)
48:16 संत संग से सबको आनंद प्राप्त होने की बात (प्रवचन)
48:22 संत संग को चंद्रमा के अमृत से भी श्रेष्ठ बताना (प्रवचन)
48:30 स्वर्ग अमृत से पुण्य नाश और संत संग से पाप नाश (प्रवचन)
48:39 चंद्रमा-कमल, फूल-वायु, सूर्य-कमल का उदाहरण (दृष्टांत)
48:47 संत संग से बुद्धि में आत्मसुख का वर्णन (प्रवचन)
48:54 संत संग से हृदय कमल खिलने का उदाहरण (दृष्टांत)
49:03 संत संग से भगवत भाव जागना (प्रवचन)
49:10 दीपक लेकर गड्ढे में गिरने का उदाहरण (दृष्टांत)
49:20 संत संग करके भी दुखी रहने की असंभवता (प्रवचन)
49:31 सत्संग से दुख नाश की युक्तियाँ मिलना (प्रवचन)
49:40 सत्संग रूपी दीपक से अंधकार न रहना (दृष्टांत)
49:45 सत्संग और भगवान नाम से नरक न रहना (प्रवचन)
49:53 कामी पुरुष के आनंद और संत संग के आनंद की तुलना (दृष्टांत)
50:01 निर्वासनिक पुरुष के संग के आनंद की महिमा (प्रवचन)
50:08 वसंत ऋतु और फूलों का उदाहरण (दृष्टांत)
50:19 हिमालय की शीतलता और निर्वासनिक मन की तुलना (दृष्टांत)
50:28 भगवान में मन लगने से निर्वासनिक अवस्था (प्रवचन)
50:37 हृदय की शीतलता को महान तपस्या का फल बताना (प्रवचन)
50:46 संत संग से हृदय शीतलता का अमूल्य लाभ (प्रवचन)
50:52 अंतःकरण की शीतलता को तप का अनंत फल बताना (प्रवचन)
51:02 चित्त शीतल होना ही समाधि बताना (प्रवचन)
51:08 समाधि की अवस्था का वर्णन (प्रवचन)
51:16 भाव समाधि, योग समाधि, ध्यान समाधि का उल्लेख (प्रवचन)
51:23 कीर्तन करते भाव समाधि का वर्णन (प्रसंग)
51:30 हनुमान जी को राम चरण स्पर्श से भाव समाधि (कथा)
51:38 मीरा के कीर्तन में भाव समाधि का उदाहरण (कथा)
51:45 सत्संग सुनते-सुनते भाव समाधि और शांति (प्रवचन)
51:53 भारत की आध्यात्मिक शांति का उल्लेख (प्रवचन)
52:01 भारत को आध्यात्मिक देश बताना (प्रवचन)
52:12 निर्वासनिक पुरुष के संग से शीतलता (प्रवचन)
52:22 चंद्रमा बाहरी तप मिटाता है उदाहरण (दृष्टांत)
52:30 ज्ञानवान संग से हृदय की तप्तता मिटना (प्रवचन)
52:39 परम शांति की प्राप्ति (प्रवचन)
52:47 निर्वासनिक पुरुष के सुख की महिमा (प्रवचन)
52:55 त्रिलोकी सुख तुच्छ लगने का वर्णन (प्रवचन)
53:04 पृथ्वी तुच्छ और मेरु पर्वत छोटा लगना (दृष्टांत)
53:12 चारों दिशाएँ तुच्छ लगना (प्रवचन)
53:22 परम पद में विश्राम का वर्णन (प्रवचन)
53:30 परब्रह्म परमात्मा में एकत्व का वर्णन (प्रवचन)
53:43 परमात्मा की सर्वव्यापकता का वर्णन (प्रवचन)
53:52 परमात्मा हर जगह होने का वर्णन (प्रवचन)
53:59 ब्रह्मांडों में आत्मा की व्यापकता (प्रवचन)
54:05 इंद्र और ज्ञानवान का उदाहरण (दृष्टांत)
54:13 योग वशिष्ठ पढ़ने की प्रेरणा (प्रवचन)
54:24 तीन घंटे जप, तीन घंटे ध्यान की साधना (साधना विधि)
54:27 तीन घंटे शास्त्र अध्ययन का निर्देश (साधना विधि)
54:33 तीन घंटे गुरु सेवा का निर्देश (साधना विधि)
54:40 दिन को दो भागों में साधना और सेवा (साधना विधि)
54:48 दिन के चार भागों में साधना का निर्देश (साधना विधि)
54:57 जप, ध्यान, शास्त्र और सेवा से ज्ञान प्राप्ति (प्रवचन)
55:07 आत्म रूपी तीर्थ में स्नान का वर्णन (प्रवचन)
55:15 आत्मज्ञानी अपवित्र को भी पवित्र कर देता है (प्रवचन)
55:24 भगवान में मन लगाकर साक्षात्कार का वर्णन (प्रवचन)
55:34 प्रधानमंत्री आने पर ऑफिस खुलने का उदाहरण (दृष्टांत)
55:42 बड़े नेता आने पर अधिकारियों की उपस्थिति (दृष्टांत)
55:49 ज्ञानी के आने से ग्रह-नक्षत्र अनुकूल होना (प्रवचन)
55:58 ज्ञानी के आगमन से समय-तिथि अनुकूल होना (प्रवचन)
56:06 मुख्यमंत्री आने पर अधिकारियों का मिलना (दृष्टांत)
56:14 साधारण व्यक्ति और बड़े व्यक्ति का अंतर (दृष्टांत)
56:22 ज्ञानी के प्रभाव का उदाहरण (प्रवचन)
56:33 ग्रह-नक्षत्र और तिथि ज्ञानी के अनुकूल होना (प्रवचन)
56:41 ज्ञानी की उपस्थिति से वातावरण परिवर्तन (प्रवचन)
56:49 प्रकृति की लीला प्रकट होना (प्रवचन)
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