आश्रम संध्या सत्संग 25-02-2026 शाम | Surat Holi 2001
TIME STAMP INDEX
0:01 स्कंद पुराण के 25वें अध्याय के छठे श्लोक में शिव जी पार्वती से कहते हैं प्रणवस्या अधिकारो न तव अस्ति (उद्धरण)
0:08 वर्णिनी नमो भगवते वासुदेवाय इति जप सदा ऐसा आदेश है (उद्धरण)
0:16 केवल ओम जप गृहस्थ और सामान्य जन के लिए हितकारी नहीं (उपदेश)
0:23 इसलिए गुरु मंत्र में भगवत नाम मिलाकर ओमकार का जप दिया जाता है (उपदेश)
0:38 शिव जी स्कंद पुराण में पार्वती को प्रणव जप का अधिकार नहीं बताते (उद्धरण)
0:50 नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का सदा जप करना चाहिए (उपदेश)
1:00 राजा दशरथ की पत्नी ने उनके दूषित कर्मों का उल्लेख किया (प्रसंग)
1:13 उसने कहा मैंने दुर्वासा ऋषि से गुरु मंत्र लिया और जप किया (प्रसंग)
1:29 मेरे तपोतेज और आपके काले कर्म से टकराव होता है (संवाद)
1:42 गर्गाचार्य से मंत्र दीक्षा लेने का सुझाव दिया (प्रसंग)
1:59 मंत्र जपते जपते काले प्रभाव दूर होने लगे (दृष्टांत)
2:16 कोटि कौवे अर्थात सूक्ष्म वाइब्रेशन और परमाणु निकलने लगे (व्याख्या)
2:28 शरीर में करोड़ों हानिकारक और हितकारी जीवाणु रहते हैं (उपदेश)
2:49 अमेरिका की डेलाब प्रयोगशाला में 10 वर्ष का अनुसंधान पूर्ण हुआ (उदाहरण)
2:56 प्रेम करुणा और सात्विकता से 1500 श्वेत कण प्रति घन मिलीमीटर बढ़ते हैं (वैज्ञानिक प्रसंग)
3:27 अशांत और काले कर्म वाले संपर्क से 1600 श्वेत कण नष्ट होते हैं (वैज्ञानिक प्रसंग)
3:38 प्राचीन परंपरा में पर्व त्यौहार पर मंदिर जाना तिलक आरती करना ओज बढ़ाता है (उपदेश)
4:07 उद्धव ने श्री कृष्ण से पूछा मनुष्य दुख से बचना चाहता है फिर भी दुखकारी कर्म क्यों करता है (संवाद)
4:31 ब्रह्मा विष्णु महेश के आत्मस्वरूप आप ही हैं ऐसा प्रश्न में कहा (संवाद)
4:53 मेरे लिए क्या हितकर है यह उद्धव का प्रश्न (संवाद)
5:02 धृतराष्ट्र ने कहा जानते हुए भी अधर्म कर लेते हैं (उद्धरण)
5:19 गड़बड़ कौन कराता है यह प्रश्न है (संवाद)
5:52 श्री कृष्ण ने भागवत में उपदेश दिया कि कलयुग ओज और तप हरता है (उपदेश)
6:21 रजोगुण और तमोगुण के संस्कार नीची प्रवृत्ति में ले जाते हैं (उपदेश)
6:35 सतोगुण बढ़ाने का प्रयत्न करना चाहिए (उपदेश)
6:48 दोष निवृत्ति और सात्विक सुख का प्रयास करना चाहिए (उपदेश)
7:11 पशु और मनुष्य में फर्क है कि मनुष्य विकास कर सकता है (उपदेश)
7:26 एकादशी व्रत से ओज और पुण्य बढ़ता है (उपदेश)
7:41 मनुष्य जैसा चिंतन करता है वैसा जन्म पाता है (उपदेश)
8:09 उत्तम कर्म ईश्वर को अर्पित करे तो आत्मा से एकाकार होता है (उपदेश)
8:21 राजा नृग कुएं में गिरकर कीट योनि में पड़े थे (कथा)
8:33 श्री कृष्ण ने योग शक्ति से उन्हें मुक्त किया (कथा)
8:52 राजा नृग ने कहा मैं पूर्वकाल का दानवीर राजा हूं (संवाद)
9:37 सत्संग अभाव और कर्तापन से दुर्दशा हुई (कथा)
10:02 अवश्यमेव कृतं कर्म शुभाशुभं फल देता है (उद्धरण)
10:20 शुभ से सुख अशुभ से दुख मिश्रित से मिश्रित फल (उपदेश)
10:36 ईश्वर अर्पण कर्म से ईश्वरीय गुण विकसित होते हैं (उपदेश)
10:58 मनुष्य पाशवी मानवी और दैवी तीन घटकों का मिश्रण है (उपदेश)
11:24 पाशवी को राजसी से राजसी को सात्विक से रोकना और सात्विक को ईश्वर अर्पित करना चाहिए (उपदेश)
11:50 नाम जप से लोक और स्वर्ग सहज मिलते हैं (उपदेश)
12:09 योगी के घर जन्म लेकर साधना पूर्ण करता है (उपदेश)
12:21 नानक जी बाल्यकाल से भजन करते थे (प्रसंग)
12:35 रविदास बाल्यकाल से भगवत भक्ति में उन्नत थे (प्रसंग)
13:26 पूर्व जन्म का जप तप साथ आता है (उपदेश)
13:44 मीरा ने रविदास से मंत्र दीक्षा ली (प्रसंग)
13:56 अकबर और तानसेन भी मीरा से शांति पाते थे (प्रसंग)
14:04 ईश्वरी अंश जाग जाए तो मृत्यु भी नहीं छीन सकती (उपदेश)
14:12 ऐसी कमाई बढ़ाओ जो मौत भी न छीन सके (उपदेश)
14:20 भगवत प्रीति अर्थ जप ध्यान सेवा करना चाहिए (उपदेश)
14:35 यश और स्वर्ग हेतु कर्म से मिश्रित फल मिलता है (उपदेश)
14:54 ईश्वर अर्पण कर्म से ईश्वर चित्त रक्षा करते हैं (उपदेश)
15:07 मंत्र भगवान नाम और गुरु मंत्र में भेद है (उपदेश)
15:13 सामान्य मंत्र वांछित वस्तु परिस्थिति देते हैं (उपदेश)
15:29 निद्रा मंत्र से तुरंत प्रभाव होता है (दृष्टांत)
15:40 भगवान नाम सहित मंत्र में भगवती शक्ति कार्य करती है (उपदेश)
15:54 जैसे बच्चा माता पिता की उंगली पकड़कर सुरक्षित चलता है वैसे गुरु मंत्र से सुरक्षा मिलती है (दृष्टांत)
16:01 माता पिता हाथ पकड़ते हैं तो गति और सुरक्षा दोनों बढ़ती है (दृष्टांत)
16:07 गुरु द्वारा भगवत नाम मिले तो मानो भगवान चित्त पकड़ लेते हैं (उपदेश)
16:12 बार बार सत्संग और सत प्रवृत्ति में ले जाते हैं (उपदेश)
16:21 लाभ जानकर भी पाशवी और मानवी कर्मों में गिरते हैं (उपदेश)
16:42 रजोगुण और तमोगुण के प्रभाव से जीव फिसलता है (उपदेश)
16:49 काम एष क्रोध एष रजोगुण समुद्भव महापापात्मा महावैरी है (उद्धरण)
17:03 निर्बल बालक जैसे मां पिता को पुकारता है वैसे साधक प्रार्थना करे (दृष्टांत)
17:14 लोभ और विषय आकर्षण में प्रभु से सद्बुद्धि मांगे (प्रार्थना)
17:46 मृत्यु भी न छीन सके ऐसा आत्म सुख जगे यह प्रार्थना करे (प्रार्थना)
18:04 भगवत स्मृति साधक की सहायता करती है (उपदेश)
18:10 खानपान सात्विक रखने से गुणों पर प्रभाव पड़ता है (उपदेश)
18:20 तामसी संग से स्वभाव तामसी बनता है (उपदेश)
18:30 राजसी संग से स्वभाव राजसी बनता है (उपदेश)
18:38 सात्विक संग दुर्लभ है पर स्वभाव सात्विक बनाता है (उपदेश)
18:53 तामसी राजसी सात्विक मंत्र भेद होते हैं (उपदेश)
19:05 सात्विक खुराक आवश्यक है (उपदेश)
19:15 वेशभूषा भी गुणों को प्रभावित करती है (उपदेश)
19:27 लाल रंग कामनात्मक राजसी वृत्ति बढ़ाता है (दृष्टांत)
19:34 श्वेत रंग सात्विक माना जाता है (उपदेश)
19:49 चरण दास गुरु कृपा कीनी उलट गई मेरी नैन पुरिया (भजन)
19:59 दृष्टि बदलने से जीवन बदलता है (उपदेश)
20:17 नजर बदली तो नजारे बदले (दृष्टांत)
20:35 नश्वर नहीं शाश्वत चाहिए ऐसा दृष्टिकोण बने (उपदेश)
20:49 सात्विक मंत्र से आरोग्य ऐश्वर्य और अंततः परमात्मा प्राप्ति होती है (उपदेश)
20:55 आनंद में स्थिति ही परमात्मा प्राप्ति है (उपदेश)
21:05 राजसी मंत्र मनोकामना पूर्ति हेतु होते हैं (उपदेश)
21:13 तामसी मंत्र मारण मोहन उचाटन हेतु होते हैं (उपदेश)
21:22 दृढ़ इच्छा शक्ति आस्था एकांत और अनुष्ठान आवश्यक है (उपदेश)
21:30 उपवास सात्विक भोजन और विलास त्याग आवश्यक है (उपदेश)
21:41 मौन जप शास्त्र चिंतन और मनोनिग्रह आवश्यक है (उपदेश)
21:56 ऐसा पुरुष इसी जन्म में साक्षात्कार कर सकता है (उपदेश)
22:19 पद और प्रतिष्ठा से अधिक सात्विक गुण बढ़ाना आवश्यक है (उपदेश)
22:46 ईश्वरी अंश न जगाए तो शास्त्र उसे मूढ़ कहते हैं (उपदेश)
22:59 विमूढ़ लोग आत्म सुख नहीं पाते (उद्धरण)
23:14 जीवन में सात्विक नियम आवश्यक हैं (उपदेश)
23:27 प्याज लहसुन मांस शराब तामसी प्रवृत्ति बढ़ाते हैं (उपदेश)
23:42 सात्विक स्थानों पर जाने से सतोगुण बढ़ता है (उपदेश)
23:58 पवित्र होकर साधना कक्ष में प्रवेश उसे सात्विक बनाता है (उपदेश)
24:12 रविवार ईश्वर के लिए संकल्प करना बुद्धिमत्ता है (उपदेश)
24:25 जो साथ नहीं जाएगा उसे छोड़ जो साथ जाएगा उसे पाना चाहिए (उपदेश)
25:00 एक दिन सलंग जप ध्यान से ईश्वरी अंश जागता है (उपदेश)
25:32 प्रिय पदार्थ त्यागकर मन पर विजय पाए (उपदेश)
26:06 त्याग से निरंतर शांति मिलती है (उद्धरण)
26:12 राजा भर्तृहरि ने जलेबी त्यागकर मन जीता (दृष्टांत)
26:59 मन के हारे हार मन के जीते जीत (उपदेश)
27:05 ईश्वर अंश जगाने को स्वयं प्रयत्न आवश्यक है (उपदेश)
27:20 संस्था और आयोजन का उद्देश्य ईश्वरी अंश विकास है (उपदेश)
27:34 अमृत अनुभव सबको चखाना उद्देश्य है (उपदेश)
27:55 श्री कृष्ण उद्धव को मनुष्य का आदर्श बताते हैं (संवाद)
28:07 11वें स्कंध 23वें अध्याय में उज्जैन के ब्राह्मण की कथा है (कथा)
28:21 वह धनी विद्वान पर अत्यंत कंजूस था (कथा)
28:37 धन देवयोग और पुरुषार्थ से आता जाता है (उपदेश)
28:48 धन जाने पर पराए और मित्र भी मुंह मोड़ लेते हैं (कथा)
29:03 राजा ने कर लगाकर धन हर लिया (कथा)
29:17 अपमानित होकर ब्राह्मण ने गृह त्याग किया (कथा)
29:32 लोग निंदा करते रहे पर उसे सत्संग मिल गया (कथा)
29:52 ब्राह्मण ने मन को समझाया धन तो मरकर भी छोड़ना था (संवाद)
29:59 भगवान ने जीते जी छीन लिया यह भी कृपा है (उपदेश)
30:08 छोड़ना तो था जीते जी भगवान ने छुड़ा दिया कुटुंबियों का रुख भी दिखा दिया (संवाद)
30:19 भगवान तेरी दया है साधु बना भिक्षा मांगता हूं लोगों में आसक्ति न हो इसलिए ताड़ना भी कृपा है (संवाद)
30:36 सात्विक विचार से ब्राह्मण कष्टों में भी भगवत रस लेकर अंतःसुख पाता है (उपदेश)
30:42 मनुष्य ईश्वरी अंश जगाने में स्वतंत्र है (उपदेश)
30:48 उज्जैन नगरी महाकाल जहां कुंभ होता है वहीं ब्राह्मण भिक्षा लेता था (कथा)
30:56 जहां श्रीकृष्ण सान्दीपनि आश्रम में पढ़े वहीं आश्रम की भूमि का उल्लेख (कथा)
31:17 जय जय भगवान की जय का उच्चारण (कीर्तन)
31:28 धन में 15 अनर्थ और अनेक दुर्गुण हैं ऐसा ब्राह्मण ने समझा (कथा)
31:36 धन से अहंकार इच्छाएं और शत्रु बढ़ते हैं तथा चिंता बढ़ती है (उपदेश)
31:56 धन के सदुपयोग जैसे शास्त्र सेवा पूजा माता पिता सेवा संभव थे (उपदेश)
32:16 64 दोषों से दबा था भगवान ने धन हरकर दोष मूल हटाया (कथा)
32:32 ममता और आसक्ति का मूल भी भगवान ने हर लिया ऐसा धन्यवाद (संवाद)
32:44 ईर्ष्या द्वेषी लोग नदी तट पर अपमान करते थे (कथा)
33:08 अपमान सहकर भी ब्राह्मण आत्मा को अमर मान सात्विक चिंतन करता (उपदेश)
33:33 सात्विक चिंतन से अनुपायनी कृपा और पराभक्ति जागी (उपदेश)
33:39 वैधी भक्ति कुल परंपरा से होती है जैसे विभिन्न मतों में नामस्मरण (उपदेश)
34:24 सत्संग से गौणी भक्ति फिर अनुरागा भक्ति और अंत में परा भक्ति (उपदेश)
34:51 परा भक्ति अनुभव कराती है (उद्धरण)
35:06 वेतन प्रमोशन की मांग राजसी और शत्रु नाश की मांग तामसी भक्ति है (उपदेश)
35:23 हर हाल में वाह प्रभु कहना सात्विक भक्ति है (उपदेश)
35:43 पीड़ा सहने से सिद्धि और उद्देश्य पूर्ति होती है (उपदेश)
36:01 क्रोध गर्व स्पर्धा बदले की भावना त्यागी (कथा)
36:19 नाम जपत मंगल दिशा दसों दिशा मंगलमय होती है (कीर्तन)
36:27 नाम धन नाम रूप रंग और नाम में ही सुख है (कीर्तन)
37:07 उठते बैठते सोते नाम स्मरण ईश्वरी अंश जगाता है (उपदेश)
37:36 स्वास स्वास जप अत्यंत नेक उपाय है (उपदेश)
38:14 अनेक जन्मों के संस्कार नाम से मिटते हैं (उद्धरण)
38:46 सत्संग सुनना कपिला गौ दान तुल्य पुण्य देता है (उपदेश)
39:16 परम पुण्य से सत्संग और दृढ़ साधना रुचि मिलती है (उपदेश)
39:33 सेठ और मोची का प्रसंग कथा सुनने सेवा भावना का दृष्टांत (दृष्टांत)
40:24 मोची ने भगवत सेवा का अवसर नहीं छोड़ा (दृष्टांत)
41:24 उत्तम मध्यम कनिष्ठ सेवक के भेद बताए (उपदेश)
42:03 शबरी और एकनाथ उत्तम सेवक उदाहरण (दृष्टांत)
42:22 उत्तम सेवक को एकांत मौन और परमात्मा सुख प्रिय होता है (उपदेश)
42:28 रजोगुणी तमोगुणी आहार से दिखावा और अविवेक बढ़ता है (उपदेश)
42:52 सतोगुणी कृपा पचा लेता है इसलिए सात्विक आहार चिंतन व्यवहार आवश्यक (उपदेश)
43:04 छह माह नियम से ईश्वरी अंश अनुभव संभव कहा (उद्धरण)
43:34 कड़े नियम से शीघ्र आनंद झलक मिलती है (उपदेश)
44:01 महापुरुष एक क्षण में अनेक को ईश्वरी सुख झलक दे सकते हैं (प्रसंग)
44:43 मानव जन्म ईश्वरी सुख पाने के लिए है (उपदेश)
45:24 बड़े में बड़ा ईश्वरी अंश है उसका साक्षात्कार लक्ष्य है (उपदेश)
45:46 काम को तत्परता से करना ही पूजा है (उपदेश)
46:05 जो काम में तत्पर वही जप ध्यान में भी तत्पर (उपदेश)
46:16 बुद्धिमान हर परिस्थिति को आनंदमय बना देता है (उपदेश)
46:55 उद्धव का प्रश्न स्वधर्म या शरणागति में दुविधा (संवाद)
47:25 श्रीकृष्ण का उत्तर परमात्मा प्रत्यक्ष अपरोक्ष सत्तास्फूर्ति दाता है (संवाद)
30:08 छोड़ना तो था जीते जी भगवान ने छुड़ा दिया कुटुंबियों का रुख भी दिखा दिया (संवाद)
30:19 भगवान तेरी दया है साधु बना भिक्षा मांगता हूं लोगों में आसक्ति न हो इसलिए ताड़ना भी कृपा है (संवाद)
30:36 सात्विक विचार से ब्राह्मण कष्टों में भी भगवत रस लेकर अंतःसुख पाता है (उपदेश)
30:42 मनुष्य ईश्वरी अंश जगाने में स्वतंत्र है (उपदेश)
30:48 उज्जैन नगरी महाकाल जहां कुंभ होता है वहीं ब्राह्मण भिक्षा लेता था (कथा)
30:56 जहां श्रीकृष्ण सान्दीपनि आश्रम में पढ़े वहीं आश्रम की भूमि का उल्लेख (कथा)
31:17 जय जय भगवान की जय का उच्चारण (कीर्तन)
31:28 धन में 15 अनर्थ और अनेक दुर्गुण हैं ऐसा ब्राह्मण ने समझा (कथा)
31:36 धन से अहंकार इच्छाएं और शत्रु बढ़ते हैं तथा चिंता बढ़ती है (उपदेश)
31:56 धन के सदुपयोग जैसे शास्त्र सेवा पूजा माता पिता सेवा संभव थे (उपदेश)
32:16 64 दोषों से दबा था भगवान ने धन हरकर दोष मूल हटाया (कथा)
32:32 ममता और आसक्ति का मूल भी भगवान ने हर लिया ऐसा धन्यवाद (संवाद)
32:44 ईर्ष्या द्वेषी लोग नदी तट पर अपमान करते थे (कथा)
33:08 अपमान सहकर भी ब्राह्मण आत्मा को अमर मान सात्विक चिंतन करता (उपदेश)
33:33 सात्विक चिंतन से अनुपायनी कृपा और पराभक्ति जागी (उपदेश)
33:39 वैधी भक्ति कुल परंपरा से होती है जैसे विभिन्न मतों में नामस्मरण (उपदेश)
34:24 सत्संग से गौणी भक्ति फिर अनुरागा भक्ति और अंत में परा भक्ति (उपदेश)
34:51 परा भक्ति अनुभव कराती है (उद्धरण)
35:06 वेतन प्रमोशन की मांग राजसी और शत्रु नाश की मांग तामसी भक्ति है (उपदेश)
35:23 हर हाल में वाह प्रभु कहना सात्विक भक्ति है (उपदेश)
35:43 पीड़ा सहने से सिद्धि और उद्देश्य पूर्ति होती है (उपदेश)
36:01 क्रोध गर्व स्पर्धा बदले की भावना त्यागी (कथा)
36:19 नाम जपत मंगल दिशा दसों दिशा मंगलमय होती है (कीर्तन)
36:27 नाम धन नाम रूप रंग और नाम में ही सुख है (कीर्तन)
37:07 उठते बैठते सोते नाम स्मरण ईश्वरी अंश जगाता है (उपदेश)
37:36 स्वास स्वास जप अत्यंत नेक उपाय है (उपदेश)
38:14 अनेक जन्मों के संस्कार नाम से मिटते हैं (उद्धरण)
38:46 सत्संग सुनना कपिला गौ दान तुल्य पुण्य देता है (उपदेश)
39:16 परम पुण्य से सत्संग और दृढ़ साधना रुचि मिलती है (उपदेश)
39:33 सेठ और मोची का प्रसंग कथा सुनने सेवा भावना का दृष्टांत (दृष्टांत)
40:24 मोची ने भगवत सेवा का अवसर नहीं छोड़ा (दृष्टांत)
41:24 उत्तम मध्यम कनिष्ठ सेवक के भेद बताए (उपदेश)
42:03 शबरी और एकनाथ उत्तम सेवक उदाहरण (दृष्टांत)
42:22 उत्तम सेवक को एकांत मौन और परमात्मा सुख प्रिय होता है (उपदेश)
42:28 रजोगुणी तमोगुणी आहार से दिखावा और अविवेक बढ़ता है (उपदेश)
42:52 सतोगुणी कृपा पचा लेता है इसलिए सात्विक आहार चिंतन व्यवहार आवश्यक (उपदेश)
43:04 छह माह नियम से ईश्वरी अंश अनुभव संभव कहा (उद्धरण)
43:34 कड़े नियम से शीघ्र आनंद झलक मिलती है (उपदेश)
44:01 महापुरुष एक क्षण में अनेक को ईश्वरी सुख झलक दे सकते हैं (प्रसंग)
44:43 मानव जन्म ईश्वरी सुख पाने के लिए है (उपदेश)
45:24 बड़े में बड़ा ईश्वरी अंश है उसका साक्षात्कार लक्ष्य है (उपदेश)
45:46 काम को तत्परता से करना ही पूजा है (उपदेश)
46:05 जो काम में तत्पर वही जप ध्यान में भी तत्पर (उपदेश)
46:16 बुद्धिमान हर परिस्थिति को आनंदमय बना देता है (उपदेश)
46:55 उद्धव का प्रश्न स्वधर्म या शरणागति में दुविधा (संवाद)
47:25 श्रीकृष्ण का उत्तर परमात्मा प्रत्यक्ष अपरोक्ष सत्तास्फूर्ति दाता है (संवाद)
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