रविवार, 1 मार्च 2026

आश्रम संध्या सत्संग 01-03-2026 शाम | Surat Holi 2006

आश्रम संध्या सत्संग 01-03-2026 शाम |   Surat Holi 2006

TIME STAMP INDEX

0:04 दीवार के पीछे घड़ा परोक्ष हो सकता है; पर ज्ञान हमारे साथ ही है (दृष्टांत)
0:17 स्वर्ग परोक्ष हो सकता है; परमात्मा कभी परोक्ष नहीं—अपरोक्ष है (उपदेश)
0:34 जो ज्ञान-स्वरूप, चेतन-स्वरूप, नित्य है—वही आत्मा-परमात्मा मेरा आपा (उपदेश)
0:47 शरीर पहले नहीं था, बाद में नहीं रहेगा; बदलता रहता है (उपदेश)
0:54 जानने वाला ‘मैं’ पहले था, अभी है, बाद में रहेगा—नित्य (उपदेश)
1:03 शरीर अनित्य-जड़; मैं नित्य-चेतन-सुख-स्वरूप (उपदेश)
1:17 परमार्थ-ज्ञान बिना यात्रा अधूरी (उपदेश)
1:31 “जहाँ लगी आत्म-तत्त्व चीन्ह्यो नहीं, त्याँ लगी साधना सर्व झूठी” (उक्ति)
1:44 धन, वाहवाही, भोग—सब मरने वाले शरीर के; आपको क्या मिला? (उपदेश)
2:10 करने से नहीं; अपने परमेश्वर-तत्त्व से दूरी पहचानो—कैसे मिटती है जानो (उपदेश)
2:31 शास्त्रों में बाह्य वेश/तिलक का आग्रह नहीं (उपदेश)
2:52 भगवद्गीता—बुद्धि की नासमझी मिटाओ; “ददामि बुद्धियोगं…” (उक्ति)
3:10 समता के साम्राज्य में आओ; नया करने की मजदूरी नहीं (उपदेश)
3:24 सुख-दुख में डूबो मत; डूबने से ही परेशानी (उपदेश)
3:51 “नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा”—स्वरूप-स्मृति ही उपाय (उक्ति)
4:06 विषमता संसार; समता मुक्ति; द्वैत से भय (उपदेश)
4:27 नित्य वस्तु का साक्षी कौन?—मैं (उपदेश)
4:50 भगवान को जानने हेतु भी चैतन्य ‘मैं’ चाहिए (उपदेश)
5:02 “कभी न छूटे पिंड दुखों से जिसे ब्रह्म-ज्ञान नहीं” (उक्ति)
5:18 अपने-आप को जानने में वीजा/पासपोर्ट/अधिकार की जरूरत नहीं (उपदेश)
5:37 नाक-हाथ-पैर ‘मैं’ नहीं; इन सबमें चैतन्य की सत्ता (उपदेश)
5:49 श्वास में ‘सो-हम’—सीधा आत्म-निशाना (उपदेश)
5:57 रमण महर्षि—“अपने को जानो”; साधक को खोदो (प्रसंग)
6:07 “मैं दुखी हूँ”—किसको दुख? वृत्ति को; ‘मैं’ को नहीं (उपदेश)
6:29 सुख की आशा में जीवन खप गया; दुख शेष (उपदेश)
7:16 शादी/अलगाव/धन/स्वास्थ्य—किसी से स्थायी दुख-नाश नहीं (उपदेश)
7:43 अर्जुन का रथ भगवान चलाएँ, तब भी दुख न मिटे (प्रसंग)
7:49 उपदेश से ज्ञान-स्वभाव में टिके तो दुख नहीं (प्रसंग)
8:03 “शोधी ले निज घर मा”—बाहर नहीं, भीतर खोज (उक्ति)
8:20 मक्खी-चाशनी—सुख-दुख में न डूबो; सयानी बनो (दृष्टांत)
9:18 “आता है आने दो, जाता है जाने दो”—न बंधो, न भिड़ो (उपदेश)
9:33 बीतने वाला नहीं, जानने वाला नित्य (उपदेश)
10:06 आप ही महत्वपूर्ण; सबको महत्व आप देते (उपदेश)
10:31 कश्मीर/डल लेक—स्वर्ग की खोज बाहर व्यर्थ (दृष्टांत)
11:30 सुख बाहर पाने का भ्रम ही कष्ट (उपदेश)
11:50 नांदेड़ के शिक्षक—मौन में वर्षभर आनंद; भीतर ही खजाना (प्रसंग)
12:49 “आप अपने में ही सुख-स्वरूप; बाहर खोज छोड़ो” (उपदेश)
13:20 मन-बुद्धि-इंद्रियाँ भटकाती; अपने में बैठो—सब संयत (उपदेश)
13:37 84 लाख योनियाँ; असावधानी से पुनर्जन्म-चक्र (उपदेश)
14:31 गर्भ-पाना दुर्लभ; अनेक बार अस्वीकार (दृष्टांत)
15:02 राजा नृग अजगर बने—पतन का संकेत (प्रसंग)
15:16 Abraham Lincoln—शरीर न मिला, सत्ता-वासना शेष; प्रेत-कथा (प्रसंग)

15:44 रामतीर्थ का सत्संग सुनकर अपने में आने की सूझबूझ (प्रसंग)
15:49 अमेरिका का प्रेसिडेंट—जीवन धन्य करने वाला महापुरुष (प्रसंग)
15:55 महापुरुष के मार्ग या मोह-मूल (मुसूलन) के मार्ग—निर्णय आपका (उपदेश)
16:02 तैयारी हो तो फर्क नहीं; बचना है तो अभी लग जाओ (उपदेश)
16:10 “क्या पाया?”—अंत में अपने को पाया कि नहीं (आत्मचिंतन)
16:17 अपने सिवाय कहीं जाओ—अपने को छोड़ नहीं सकते (उपदेश)
16:29 “ये चाहिए–वो चाहिए” हटाओ; अपने को पहचानना है (उपदेश)
16:38 ईश्वर को पहचानना/पाना—अपने को पाओगे तो ईश्वर मिलेगा (उपदेश)
16:45 ईश्वर का दूसरा नाम अपना आपा; आपका दूसरा नाम ईश्वर (उपदेश)
16:57 “ईश्वर सर्वभूतानां हृद्देशे…”—सबके हृदय में ईश्वर (उक्ति) भगवद्गीता
17:06 ब्रह्म-परमात्मा सत-चेतन-ज्ञान-आनंद स्वरूप (उपदेश)
17:15 सत होकर असत शरीर की शरण; चेतन होकर जड़ की गुलामी (उपदेश)
17:22 आनंद-स्वरूप होकर दुखी—यही माया/धोखा (उपदेश)
17:29 “हडलु करूं तो निरात…”—जागो, सजग बनो (उक्ति)
17:36 अपने आप में आना सीखो—सजगता ही उपाय (उपदेश)
17:45 मौन के तीन प्रकार—तामसी, राजसी, सात्विक (उपदेश)
17:53 तामसी मौन—बाहर चुप, भीतर वासना/दुराचार (विवेचन)
18:00 राजसी मौन—चुप रहकर कुछ पाने की चाह (विवेचन)
18:09 सात्विक मौन—एकांत, सात्विक आहार, ईश्वरी सुख (विवेचन)
18:15 अपने आपा को जाने—गुणातीत मौन (उपदेश)
18:21 गुणातीत मौन—ब्रह्मवेत्ता का मौन (उपदेश)
18:28 “बोले हम सदा मौन हैं”—कर्म करते हुए अकर्ता भाव (विवेचन)
18:34 “सदा उपवासी”—करते हुए भी ‘मैंने कुछ नहीं किया’ (विवेचन)
18:41 ब्रह्मज्ञानी का गुणातीत मौन (उपदेश)
18:47 “निर्गुण रोटी सबसे मोटी…”—निरंजन वन में साधु अकेला (भजन)
18:55 अंजन=इंद्रियां; उनसे भटकना और निरंजन में खेलना (दृष्टांत)
19:09 निरंजन मन में साधु चुप-शांत (उपदेश)
19:16 “बखड़ माथे गौ…”—ऊर्ध्व-वृत्ति में ब्रह्माकार (दृष्टांत)
19:30 माखन साधु खाए; छाछ जगत को पिलाए—अनुभव-वाणी (दृष्टांत)
19:45 ब्रह्मसुख स्वयं; अनुभव-रूपी छाछ जगत हेतु (विवेचन)
19:57 सादी छाछ सुपाच्य—अनुभव की सरल वाणी (दृष्टांत)
20:09 अपने ढंग की साधना से अधिक बल—सत्संग से (उपदेश)
20:20 “माखन साधु खाए…”—जगत छाछ से तृप्त (भजन)
20:34 छाछ से मजा; माखन से पुष्ट—स्वानुभव श्रेष्ठ (उपदेश)
20:45 “लाला लालियां…”—माखन भी चखो (आह्वान)
20:51 साधु के गाँव का रस (उपदेश)
21:00 प्रातः 4 से जागरण—फुर्सत नहीं, तृप्ति पूर्ण (प्रसंग)
21:09 ऐसी तृप्ति—कुछ नहीं चाहिए (उपदेश)
21:16 “पत्नी/पति से सुखी”—चमड़े का भक्त (उपदेश)
21:21 काम-सुख और राम-सुख में 26 प्रकार का अंतर (विवेचन)
21:29 कामना-पूर्ति का सुख vs कामना-निवृत्ति का सुख (विवेचन)
21:37 कामना-निवृत्ति में 26 सद्गुण; पूर्ति में 26 दुर्गुण (उपदेश)
21:45 सत्-चित्-आनंद आत्मा में सुख—सद्गुण स्वतः (उपदेश)
21:59 जड़-संसार से सुख—दुर्गुण स्वतः (उपदेश)
22:05 “बापू जी/बेटा जी”—संसार-सुख चाहें तो पतन (उपदेश)
22:17 “हाय तू सुख दे”—आसक्ति का पतन (उपदेश)
22:24 “कबीरा जोगी जगत गुरु…”—जगत की आस त्याग (उक्ति)
22:42 नश्वर सुख छोड़ो; ईश्वरी सुख में आओ (उपदेश)
22:50 जग की आशा करे—जग का दास (उक्ति)
23:04 आशा में बापू जी से बेटा जी—पतन (दृष्टांत)
23:15 संसारी सुख के पीछे दुख-भय-रोग (उपदेश)
23:29 आत्म-सुख में न दुख, न भय, न टेंशन (उपदेश)
23:36 आनंद-रूपी छाछ से लाखों तृप्त (उपदेश)
23:41 “मैं खुले हाथ बांटता हूँ”—लो, कंजूसी मत करो (आह्वान)
23:56 सहयोग से भीतर का ईश्वरत्व जगाओ (उपदेश)
24:04 राजनीति/कला बहुत हुई; अब आत्म-सुख की कला (उपदेश)
24:19 युग को पहले आत्म-शांति का प्रसाद चाहिए (उपदेश)
24:31 घर का खजाना छोड़ राजनीति-कौशल—व्यर्थ स्पर्धा (उपदेश)
24:46 राम जानबूझकर हारें—भरत/लक्ष्मण को जीत दें (प्रसंग)
25:05 धन/कुर्सी से बड़ा आप—चैतन्य (उपदेश)
25:31 धन/कुर्सी जड़; जानने वाले आप (उपदेश)
25:48 “धन बिना कीमत नहीं”—भ्रम त्यागो (उपदेश)
26:01 अपने में आओ; देवता भी दर्शन को लालायित (उपदेश)
26:17 ईश्वर-स्वभाव में स्थित हो जाओ (आह्वान)
26:32 “हरि ओम शांति”—काम के बाद थोड़ी देर चुप (उपदेश)
26:45 चिंता-भय से न जुड़ो (उपदेश)
26:51 अहमद फकीर और श्रीकृष्ण—टोपा प्रसंग (कथा)
27:05 श्रीकृष्ण युवक-रूप में “अहमद” से दिल्लगी (कथा)
27:21 ध्यान में जिसको पुकारे—वही प्रकट (कथा)
27:33 “टोपा बेचोगे?”—दो लोक से भी महंगा (संवाद)
29:27 “अहमद अभिमानी”—कृष्ण की चुटकी (संवाद)
30:07 “मंदिरों में नहीं; दिल में मुलाकात”—अहमद का उत्तर (संवाद)
30:30 “खुदा खुद आ”—व्यापक ब्रह्म की लीला (कथा)

31:06 “खुद आ” की पुकार—जैसे हिंदुओं का भगवान स्वयं आता (विवेचन)
31:14 अल्लाह प्रार्थना स्वीकार करे या न करे; पर “खुदा” अपने आप आता (उपदेश)
31:20 अहमद ने बुलाया नहीं; फिर भी वह प्रकट—ईश्वर की निकटता (प्रसंग)
31:28 “नारायणा हरि…”—बिना बुलाए भी क्षणभर दूर नहीं (कीर्तन)
31:33 अहमद ने आत्मा को ऐसा समर्पित किया कि कृष्ण आकर्षित हुए (विवेचन)
31:44 “कर्षति-आकर्षति”—जो सबको आनंदित करे वही कृष्ण (उपदेश)
31:50 लहर पानी में मिली—अब पानी को बुलाएँ क्यों? (दृष्टांत)
31:55 अहमद का ‘अहम’ कृष्ण में मिला—आह्वान शेष नहीं (दृष्टांत)
32:01 प्रेम में दोनों की खानदानी—मिटना और प्रकट होना (विवेचन)
32:12 आज पति-पत्नी कर्तव्य को स्वार्थ से समझाते (उपदेश)
32:27 दूसरे को कर्तव्य न बताओ; अपना कर्तव्य निभाओ (उपदेश)
32:33 गुरु का कर्तव्य—शिष्य का विकास; शिष्य करे/न करे उसकी मौज (उपदेश)
32:46 अपने जिम में जो आए—ईमानदारी से निभाओ (उपदेश)
32:59 दूसरे के अधिकार की रक्षा—यही विकास (उपदेश)
33:20 व्यक्तित्व का सृजन नहीं; ईश्वरीय शांति में विसर्जन—सच्चा विकास (उपदेश)
33:38 “आई शाउट यू…”—अहंकार-प्रदर्शन की निरर्थकता (उदाहरण)
33:52 रोज करोड़ों का जन्मदिन—शरीर का बर्थडे क्या? (उपदेश)
34:04 धन/मकान बढ़े—विकास नहीं; बिना वस्तु सुखी होना विकास (उपदेश)
34:17 वस्तुओं की गुलामी—अविकास (उपदेश)
34:24 “तुझ में राम, मुझ में राम…”—सबमें राम (भजन)
34:31 स्नेह आत्मभाव से; रूप-सौंदर्य से नहीं (उपदेश)
34:43 नकली दांत और असली में भी नश्वरता (दृष्टांत)
34:56 बाल/पैसे/शरीर असली नहीं; असली तुम—अमर चैतन्य (उपदेश)
35:08 “गुरु के प्यारे दुलारे तुम”—स्व-महिमा (उपदेश)
35:23 प्रिय वस्तु में भी प्यारे की याद—गुलामी क्षीण (उपदेश)
35:41 गुरु-शिष्य और सारस-सारसी (कथा)
35:56 पहले चाह—“मैं ऐसा बन जाऊं” (कथा-विकास)
36:03 दूसरी चाह—“वो मुझे देखें” (कथा-विकास)
36:11 तीसरी चाह—“उन्हें पास पालूं” (कथा-विकास)
36:27 चौथी अवस्था—न बंधन, न चाह; जो है अच्छा (कथा-समाप्ति)
36:39 “बस यही ज्ञान है”—मजदूरी छोड़ो (उपदेश)
36:53 अमेरिका/इंडिया—हर जगह दौड़-धूप; संतोष भीतर (दृष्टांत)
37:11 “हंसीब खेलीब धरीब ध्यान”—हँसते-खेलते ध्यान (उक्ति)
37:25 ध्यान में गुरु/भगवान का प्रकाश अनुभव (उपदेश)
37:46 गुरु को अर्पण—सरल भाव; अंतःकरण भगवत-रस से भरो (उपदेश)
38:03 “मेरे में दुर्गुण…” छोड़; “मैं भगवान में” भाव (उपदेश)
38:16 दुराग्रह से दुख; प्रयत्न कर समभाव रखो (उपदेश)
38:30 परिवर्तन अनित्य; जानने वाला नित्य आत्मा (उपदेश)
38:53 अपनी मौत नहीं देखी—शरीर की देखी (विवेचन)
39:06 “तुम हाथी हो”—क्या मानोगे? (दृष्टांत)
39:29 जाति/नाम शरीर के; हम चैतन्य आत्मा (उपदेश)
39:52 “तुम पापी/पुण्यात्मा/काले-गोरे”—चमड़े की बातें (उपदेश)
40:26 हम प्रभु वाले—सुख-दुख के साक्षी (उपदेश)
40:51 मरता शरीर; मरने के बाद जो रहे उसकी मौत नहीं (उपदेश)
41:16 “ज्ञानमय तप…”—ज्ञान का आश्रय लो (उक्ति)
41:29 देश-प्रदेश की पहचान शारीरिक कल्पना (उपदेश)
41:53 “हरि ओम”—शाश्वत सत्य आत्मा-परमात्मा (उद्घोष)
42:00 बुढ़ापा/मरण का भय—मन को डाँटो (उपदेश)
42:20 “हम मौत के बाप”—आत्मा अमर (उद्घोष)
42:38 बीमारी में धैर्य; देह-भाव न लाओ (उपदेश)
43:11 “अपना स्वामी आप बनो”—अखंडानंद महाराज का प्रसंग (प्रसंग) स्वामी अखंडानंद
43:31 इंदिरा गांधी के गुरु—अखंडानंद (प्रसंग) Indira Gandhi
44:13 निर्धनता में भी अहंकार/दुख हावी नहीं (प्रसंग-विवेचन)
44:43 तीन बेटियाँ, नौ नाती—कठिन परिस्थिति (प्रसंग)
45:51 अल्प आय; पड़ोसी सहयोग—फिर भी प्रसन्न (प्रसंग)
46:17 वेद का संदेश—हँसते-खेलते जीवन (उपदेश)
46:40 “राह की दुश्वारियों पे मुस्कुराना…” (उक्ति)
46:59 साधारण नहीं—दुश्वारियों पर नाचता जीवन (विवेचन)
47:06 “नारायण हरि…”—स्मरण (कीर्तन)
47:15 “माल खजाना छोड़…”—नश्वरता चेतावनी (उक्ति)
47:24 “कर सत्संग अभी से प्यारे…”—आत्म-संग का आह्वान (भजन)

47:39 “खिला-पिला के देह बढ़ाई”—अंत में अग्नि को समर्पित (उपदेश)
47:46 “चार छोकरा मेरे”—ममता की भ्रांति छोड़ो (विवेचन)
48:02 बेटियाँ-जमाई डिपॉजिट; लड़के-बहुएँ थापन (उपदेश)
48:07 शरीर श्मशान की थापन; आत्मा परमात्मा का दुलारा (उपदेश)
48:22 “ओम नमो वासुदेवाय” (मंत्र-जप)
48:30 “ओम”—अखिल ब्रह्मांड में व्यापी परब्रह्म की ध्वनि (विवेचन)
48:52 कृष्ण, राम, शिव, गणपति, वामन, नरसिंह—अनेक अवतार; फिर भी चिद्घन पूर्ण (विवेचन)
49:15 “भगवते वासुदेवाय”—108 जप से विघ्न-बाधा शांति (मंत्र-उपदेश)
49:35 यात्रा/ड्राइविंग से पहले जप—रक्षा भाव (उपदेश)
49:44 “ओम त्र्यम्बकं…” (मंत्र-जप)
49:57 त्र्यम्बक जप—जीवन-संध्या से पहले शांति (उपदेश)
50:05 “ओम शांति ओम आनंद” (उद्घोष)
50:12 प्रवृत्ति से शक्ति-खर्च; हर प्रवृत्ति में हरास (विवेचन)
50:24 प्रवृत्ति के साक्षी परमेश्वर में शांति का अवसर (उपदेश)
50:32 प्रवृत्ति पहले/बाद—निवृत्ति; समभाव रखो (उपदेश)
50:46 दुख-सुख, पाप-पुण्य, मोह-अहंकार से निवृत्त रहो (उपदेश)
51:01 परमात्म-संबंध में परिपूर्णता—जीवन का लाभ (उपदेश)
51:14 4–8 घंटे उदर-पूर्ति; 2–3 घंटे सेवा/संस्कृति-रक्षा; 1–2 घंटे आत्म-निवास (उपदेश)
51:36 बाहर सुख-भ्रम; सुख आत्मा में (विवेचन)
51:51 भीतर निवृत्ति से सुख बाँटो—दुख हरता है (उपदेश)
52:07 द्रौपदी का उत्तर—दुख न सोचती; सेवा में लगती (कथा) Draupadi
52:30 वनवास का दुख सेवा-सुख से तुच्छ (कथा-विवेचन)
53:04 दूसरों का दुख हरने से अपना दुख क्षीण (उपदेश)
53:11 सुख-लालच मिटाने को सुख दो; दुख-भय मिटाने को दुख हरों (उपदेश)
53:32 अंतरात्मा-सत्ता में विश्रांति (उपदेश)
53:38 बुराई-रहित बनो; हक/अपमान/कष्ट से बचो (उपदेश)
54:00 जीवन केवल समस्या/धन-संचय नहीं (उपदेश)
54:05 चार उपवेद—गंधर्व वेद: नृत्य, हास्य, प्रसन्नता (विवेचन)
54:12 स्थापत्य वेद: रहन-सहन स्वास्थ्यदायक (विवेचन)
54:19 आयुर्वेद—ऋतुचर्या का पालन (विवेचन)
54:26 होली-ऋतु में धानी; कफ-शोषण; खजूर संयम (उपदेश)
54:38 केसरिया/फूलों के रंग—सप्तधातु/सप्तरंग संतुलन (विवेचन)
54:51 होली—अहंता-त्याग; एकत्व-आनंद (उपदेश)
55:05 “जो हो गया सो हो गया”—अतीत-शोक न करो (उक्ति)
55:31 “जो बीत गई सो बीत गई…” (उक्ति)
55:58 धनुर्वेद—अहिंसा संग सज्जनता; अन्याय पर सजगता (विवेचन)
56:14 दुष्ट पर दृढ़ता; सज्जन पर उदारता (उपदेश)
56:43 द्वेष न रखो; “काज हमार हित तासु होए” (उक्ति)
57:04 सुधार हेतु कठोरता—समय-रक्षा (उदाहरण)
57:16 भीतर भगत, बाहर दबंग—संतुलन (उपदेश)
57:29 मोहम्मद गजनवी का प्रसंग—केवल भगवान पर छोड़ो नहीं (प्रसंग) Mahmud of Ghazni
57:41 संस्कृति/देश-अस्मिता की रक्षा स्वयं करो (उपदेश)
58:01 स्वास्थ्य/चरित्र/मन-बुद्धि का रक्षण (उपदेश)
58:19 मन पर दया; इंद्रियां मन को, मन बुद्धि को बहकाए (विवेचन)
58:36 स्वाद-लालच से स्वास्थ्य-हानि; संयम रखो (उपदेश)




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