रविवार, 1 मार्च 2026

आश्रम संध्या सत्संग 23-02-2026 शाम | Surat Holi 2008 ( sara gyaan ka bhandaar sachidanand)

आश्रम संध्या सत्संग 23-02-2026 शाम |  Surat Holi 2008 

TIME STAMP INDEX

0:05 सच्चिदानंद ज्ञान का भंडार – हित भावना से सही प्रकाश

0:11 अहंता ममता के पर्दे से दिव्यता ढकना

0:19 बादल-सूर्य उदाहरण – वासना से प्रकाश ढकना

0:33 कर्म बंधन से सत-चित-आनंद ढकना, दुख का कारण

0:46 अहंता मिटाने का उपाय – श्वास के साथ ओम जप

0:59 गुरु या भगवान के चित्र के साथ जप अभ्यास

1:05 होंठ, कंठ, हृदय से जप क्रम

1:19 अभ्यास से दिव्य अनुभव आरंभ

1:40 अनुष्ठान से अनुभव – परंतु आसक्ति बाधा

2:14 नश्वर को पकड़ना, शाश्वत को भूलना

2:23 (उदाहरण) कौशल्या का एकांत साधना

2:43 अहंता ममता में फंसकर जीवन नष्ट

3:09 पुरानी आदत से शक्ति-आयु क्षय

3:21 कपट और झूठ से कुछ स्थायी नहीं

3:27 नश्वर में ममता से सत्य पराया

3:52 होली उत्सव – अहंता ममता पर विजय

4:02 प्रह्लाद आत्मानंद, हिरण्यकश्यप अहंकार

4:17 होलिका दहन – भक्ति की विजय (कथा संदर्भ)

4:24 युधिष्ठिर का प्रश्न – होली हल्लागुल्ला

4:45 डोंडा राक्षसी कथा

5:07 हल्लागुल्ला से निर्भीकता प्रतीक

5:15 कफ नाश हेतु नृत्य-कूद

5:28 होली प्रदक्षिणा और व्रत परंपरा

5:50 मूल बात – जीवन में व्रत आवश्यक

5:57 भगवान महाव्रती – सृष्टि का नियम पालन

6:22 भगवान का कार्पण्य – भक्त न छोड़ना

6:38 भक्त भी भगवान न छोड़े – मिलन

6:56 शरणागत वत्सल भाव

7:12 भक्त-भगवान परस्पर आकर्षण

7:24 अंत में अद्वैत अनुभव

7:47 द्वैत-अद्वैत सब ब्रह्म लीला

8:08 जीवन में व्रत – भगवान को न दूर मानना

8:21 आत्मा सत्य, सुख-दुख मिथ्या

8:40 सच्चिदानंद व्रत से जीवन सरल

8:52 उपायों से दुख न मिटे, व्रत से मिटे

9:04 सच्चिदानंद व्रत से अज्ञान नाश

9:34 (भजन) जय जगदीश हरे

9:57 प्रश्न – गुरु को रिझाने का उपाय

10:12 विचारों की उपेक्षा, ओम हरि ओम

10:34 गुरु की स्थिति में स्वयं को लगाना

11:02 बल की उपासना प्रश्न

11:12 वासुदेव सर्वम भाव बढ़ाना

11:25 ब्रह्म उपासना – सत्संग, चिंतन

11:47 संग और शास्त्र से भाव वृद्धि

12:00 ईश्वर से हटकर मन लगाने का परिणाम

12:16 मनुष्य में अद्भुत जादू – भोजन से शरीर

12:53 जठराग्नि और समुद्र अग्नि उदाहरण

13:06 गाय दूध बनाती, सर्प विष बनाता

13:23 ध्यान से लोकों का ज्ञान प्राप्त करना

13:37 – सृष्टि का जादू और माया का अनंत विस्तार

13:47 – माया का अंत नहीं; बाहरी खोज व्यर्थ

14:03 – असली स्वरूप सच्चिदानंद; भीतर खोज का महत्व

14:11 – ब्रह्मांड का छोर खोजने का प्रयास

14:17–14:37 – विपश्चित ऋषि का ब्रह्मांड अन्वेषण (कथा प्रसंग)

14:58पृथ्वीराज चौहान का उल्लेख

15:03 – संत और राजा का संवाद (कथा प्रसंग)

15:37 – सूक्ष्म शरीर से यात्रा का प्रस्ताव

16:10 – बंद कक्ष में संत का प्रकट होना (कथा प्रसंग)

16:29 – सूक्ष्म उड़ान का वर्णन

17:10द्वारकाधीश मंदिर में मंगला आरती दर्शन (कथा प्रसंग)

17:17 – द्वारका का वातावरण, सागर, बाज़ार दर्शन (कथा प्रसंग)

18:01 – अनुभव पर राजा का आश्चर्य

18:06 – ब्रह्मांडों की बहुलता का संकेत

18:24 – सिद्धियों का महत्व और सीमाएँ

19:00 – भटककर बनाम सीधे परमात्मा तक पहुँचना

19:03 – वैज्ञानिक साधनों की सीमा

19:17 – योगियों का ब्रह्मांड चीरना

19:25 – हिमालय और जूनागढ़ के योगियों का उल्लेख

19:41 – आत्मयोग की श्रेष्ठता

19:50 – अदृश्य योगियों से मिलने का संकल्प (कथा प्रसंग)

20:03 – हिमालय यात्रा आरंभ

20:16 – विष्णुप्रयाग क्षेत्र का उल्लेख

20:23 – मृत्युशिखर पर्वत का उल्लेख

20:35 – गुफा मार्ग का वर्णन (कथा प्रसंग)

21:13योगानंद सरस्वती की आत्मकथा का संदर्भ

21:21 – दो दिव्य योगियों से भेंट (कथा प्रसंग)

21:49 – संकल्प से प्रसाद प्रकट होना (कथा प्रसंग)

22:09 – “झूठा न छोड़ना” उपदेश

22:21 – साधक की भूल और शिक्षा (कथा प्रसंग)

22:41 – आँख बंद कर स्थान परिवर्तन अनुभव (कथा प्रसंग)

23:02 – योगियों की संकल्प शक्ति

23:07 – अदृश्य योगियों से मिलने की इच्छा

23:15 – गंगोत्री तक पैदल यात्रा का वर्णन (व्यक्तिगत यात्रा प्रसंग)

23:23 – गंगोत्री पार कर अदृश्य योगियों से मिलना (कथा प्रसंग)

23:34 – पेड़ पर वायु सेवन कर रहने वाले योगी का उल्लेख (कथा प्रसंग)

23:42 – निष्कर्ष: सबसे श्रेष्ठ साधन – भगवान का सिमरण

23:55 – अनेक साधनाओं के बाद सरल नामजप का महत्व

24:01रामकृष्ण परमहंस द्वारा विविध तांत्रिक साधनाओं का अनुभव (कथा संदर्भ)

24:06 – उद्धार का उपाय: प्रीति पूर्वक भगवान का नाम जप

24:12 – “भगवान को अपना मानो” – प्रीति का रहस्य

24:24 – भगवान दूर नहीं, दुर्लभ नहीं – निकटता का भाव

24:39 – योगनिद्रा का महत्व

24:46 – अल्प समय की योगनिद्रा से गहन विश्राम

25:05 – घोड़े पर योगनिद्रा अभ्यास का उल्लेख (कथा संदर्भ)

25:19Napoleon Bonaparte का योगनिद्रा संदर्भ (ऐतिहासिक प्रसंग)

25:27 – योगनिद्रा तकनीक बनाम ईश्वर प्राप्ति का अंतर

25:50 – “ईश्वर सर्वभूतानाम…” (शास्त्र उद्धरण)

26:04 – विभिन्न “यंत्रों” (बुद्धि दृष्टिकोण) से जगत की भिन्न अनुभूति

26:17 – कसाई, चमार, ऊन व्यापारी, दूधवाले दृष्टांत (उदाहरण प्रसंग)

27:00 – देखने वाला जैसा, वैसी दुनिया

27:16कबीर के प्रति श्रद्धा और निंदा का प्रभाव (कथा प्रसंग)

27:28 – कबीर पर झूठे आरोप (वैश्या, शराब, मांस) (कथा प्रसंग)

28:04 – शिष्यों सलूका-मलूका की अडिग श्रद्धा (कथा प्रसंग)

28:44 – “जाति ना पूछिए संत की…” (प्रशंसा/दोहा संदर्भ)

29:20रामतीर्थ का दृष्टिकोण (साहित्य संदर्भ)

29:56 – अखबार की खबर बनाम व्यक्तिगत अनुभव की सच्चाई

30:07Gautama Buddha पर लांछन (ऐतिहासिक प्रसंग)

30:13महावीर पर आरोप (ऐतिहासिक प्रसंग)

30:19 – निंदा-आंधी से बचकर गुरु मार्ग पर टिके रहने का उपदेश

30:54 – गुरु से डटे रहने पर पूर्ण लाभ

31:09 – गुरु दर्शन हेतु 40 दिन प्रतीक्षा (व्यक्तिगत प्रसंग)

31:26 – चमत्कारी संत द्वारा पानी से दूध बनाना (कथा प्रसंग)

32:20 – गीता के छठे अध्याय का नियमित पाठ

32:44 – पूजा बिना जल ग्रहण न करने का नियम (व्रत प्रसंग)

33:05 – शिव पूजा का दूध बेहोश व्यक्ति को पिलाना (सेवा प्रसंग)

33:17 – “आज मेरी पूजा हो गई” – आंतरिक अनुभूति (आध्यात्मिक अनुभव)

33:29 – त्याग और सेवा का महत्व

33:41 – भगवान से प्रेमपूर्ण संवाद और आंतरिक संघर्ष (अनुभव प्रसंग)

33:52 – साधना में वैराग्य की परीक्षा (कथा प्रसंग)

34:05 चाण प्रणाली और ईश्वर पर भरोसा – “जिसको गरज होगी आएगा”

34:12 सृष्टिकर्ता स्वयं भक्त को खींच लेता है – पूर्ण समर्पण का भाव

34:20 ईश्वर को अपना मानकर प्रेमपूर्वक हठ और अधिकार भाव

34:28 भगवान भक्त की दादागिरी भी सह लेते हैं (भक्ति प्रसंग)

34:35 “नारायण हरि” जप (कीर्तन)

34:47 गीता के छठे अध्याय का श्लोक सुनाना (कथा प्रसंग) – भगवद्गीता

34:56 श्लोक की व्याख्या से वैराग्य और भगवान की तड़प जागृत होना (कथा प्रसंग)

35:04 शरीर की उपेक्षा और ईश्वर प्राप्ति की तीव्र भावना

35:15 नश्वर शरीर से अधिक ईश्वर प्राप्ति का महत्व

35:31 झूठे आडंबर और वास्तविक आत्मस्वरूप पर विचार (संवाद प्रसंग)

35:57 गुरुदेव का नाम लेने पर साधु की प्रतिक्रिया (कथा प्रसंग)

36:29 मन से गुरु स्वीकारना – लीलाशाह बापू के प्रति आंतरिक श्रद्धा (गुरु प्रसंग)

37:07 आश्रम की राजनीति और विरोध के बीच दृढ़ रहना (जीवन अनुभव प्रसंग)

37:44 ईश्वर प्राप्ति के लिए उद्देश्य की दृढ़ता आवश्यक

38:07 संसार को भगवान से बड़ा मानने पर श्रद्धा का पतन

38:34 “श्रद्धावान लभते ज्ञानम्” का सिद्धांत – श्रीकृष्ण (शास्त्र प्रसंग)

38:47 पार्वती की अटूट श्रद्धा और सप्तऋषियों द्वारा परीक्षा (कथा प्रसंग)

39:52 शिव को पाने का जन्म-जन्मांतर का संकल्प (भक्ति प्रसंग)

40:05 “वर तो शंभू…” अडिग निष्ठा की घोषणा (भक्ति प्रशंसा)

40:52 श्रद्धा टूटने का सबसे बड़ा आध्यात्मिक नुकसान

41:22 अष्टावक्र और राजा जनक की गुरु-शिष्य श्रद्धा (कथा प्रसंग)

42:10 श्रद्धा की तीव्रता का उदाहरण – पानी के तापमान से तुलना

42:37 नरसी मेहता का समर्पण भाव पद (भजन)

43:34 मिथ्या से ममता हटाकर सत्य में ममता लगाने का उपदेश

43:42 तुलसीदास की वाणी – “ममता राम से…” (भक्ति प्रसंग)

44:21 “जो दिखे सो चलनहार…” जगत की नश्वरता का विवेक

44:37 “मन तू ज्योति स्वरूप…” आत्मज्ञान उपदेश

44:54 “लल्ला लल्ली…” आंतरिक आनंद का संकेत (भक्ति काव्य पंक्ति)

45:37 “सुख सपना, दुख बुलबुला…” जीवन की अस्थिरता का दर्शन

45:42 आत्मा को पहचानने और प्रभु में विश्रांति लेने का उपदेश

45:48 मनुष्य जन्म का उद्देश्य – आत्मसाक्षात्कार

46:00 केवल पेट भरना जीवन का लक्ष्य नहीं; अनपढ़ भी सुख से सोते हैं (जीवन विवेक प्रसंग)

46:19 मिथ्या को सत्य मानने से आपदाओं का जन्म (उदाहरण प्रसंग)

46:24 खुजली और दलदल का उदाहरण – संसार में फँसने की स्थिति (दृष्टांत प्रसंग)

46:47 मोह के फंदे में फँसकर समय गँवाना (उपदेश प्रसंग)

47:04 मृत्यु के समय “मेरा क्या होगा?” की चिंता – वास्तविक अज्ञान

47:28 नश्वर को ‘मेरा’ मानने की भूल और जन्म-जन्मांतर का बंधन

47:45 पढ़-लिखकर भी संसार का बोझ ढोना – गधे का दृष्टांत (दृष्टांत प्रसंग)

48:21 कोई छोटा, कोई बड़ा गधा – संसारिक बोझ का भेद (हास्य प्रसंग)

48:47 “पड़ा रहेगा माल खजाना…” (भजन)

49:42 “कर सत्संग अभी से प्यारे…” परमात्मा प्राप्ति का आह्वान (भजन)

50:00 देह अग्नि में जलने योग्य है – शमशान/कब्र का स्मरण (मृत्यु स्मरण प्रसंग)

50:38 देवता भी जिस परमात्मा के दर्शन को तरसते हैं, उसके लिए समय न निकालना (विवेक प्रसंग)

50:56 “मैन इज द गॉड बट प्लेइंग द फुल” – अज्ञान की स्थिति (उपदेश प्रसंग)

51:14 भगवान की शरण से संसार सागर सुगम हो जाता है (शास्त्र प्रसंग)

51:25 संसार सागर और ‘गोपद’ उदाहरण – विवेकवान के लिए सरलता (दृष्टांत प्रसंग)

51:52 “नारायण हरि” स्मरण (कीर्तन)

52:03 सत्संग का सौभाग्य और साधना के लिए पूर्व प्रयास (जीवन अनुभव प्रसंग)

52:33 भूख जगाने का उपदेश – ज्ञान पचाने की शक्ति आवश्यक

52:53 जादूगरों की कला बनाम ईश्वर प्राप्ति की श्रेष्ठ कला (उदाहरण प्रसंग)

53:37 64 कलाएँ और 14 विद्याएँ – परमात्मा प्रेम ही सार

53:58 “आदि सत जुगात सत्य…” नाम स्मरण (भजन)

54:19 श्वास गिनना और संकल्प शांति से आत्मिक स्थिति (ध्यान प्रसंग)

54:48 एकाग्रता सर्वोच्च तप है

55:15 विवेकयुक्त एकाग्रता से शाश्वत की प्राप्ति

55:30 हिरण्यकश्यप की तपस्या और बाह्य वरदान का परिणाम (कथा प्रसंग)

55:57 परमेश्वर की प्राप्ति बिना सब कुछ धोखा

56:15 उत्तम साधक के लिए समत्व का उच्च ज्ञान

56:45 सुख-दुख के मध्य सच्चिदानंद सत्ता में स्थित होना – ब्राह्मी स्थिति (शास्त्र प्रसंग)

57:04 ब्राह्मी स्थिति से आत्मसाक्षात्कार शीघ्र होना

57:18 सुख-दुख में न डूबकर समत्व योग की साधना (योग उपदेश)



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