शनिवार, 6 सितंबर 2025

Chandra Grahan 2025: ग्रहण में क्या करें क्या न करें?

 


Chandra Grahan 2025: ग्रहण में क्या करें क्या न करें?  

7 सितंबर 2025 चंद्रग्रहण विवरण - 

  • खग्रास चन्द्रग्रहण – 7 सितंबर 2025 (भारत में दिखेगा, नियम पालनीय है)
  • ग्रहण समय – रात्रि 9:57 से देर रात 1:27 तक
  • सूतक प्रारम्भ – 7 सितंबर, रविवार दोपहर 12:57 से
  • सूतक (बालक, वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिलाओं के लिए) – 7 सितंबर शाम 5:27 से ग्रहण प्रारम्भ तक
  • ग्रहण भारत में दिखेगा, इसलिये ग्रहण के नियम पालनीय आवश्यक हैं
  • 12 बजे तक सभी भोजन अवश्य कर लें

ग्रहण काल में क्या करें और क्या न करें

ग्रहण का समय न केवल खगोल विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत खास माना जाता है। हमारे शास्त्र कहते हैं कि यह समय आत्म-शुद्धि, साधना और पुण्य अर्जित करने का होता है। इसलिए इस समय कुछ नियम और सावधानियाँ ज़रूर अपनानी चाहिए।

1. मंत्र-जप और पूजा

  • ग्रहण के समय मंत्र-जप सामान्य समय से कई गुना फल देता है।

  • अगर मंत्र-जप न किया जाए तो उसकी शक्ति कम हो जाती है।

  • सूर्य ग्रहण में “ॐ ह्रां ह्रीं सः सूर्याय नमः” मंत्र का जप बुद्धि और आत्मबल को बढ़ाता है।

  • चंद्र ग्रहण में “ॐ चंद्राय नमः” मंत्र मन को शांत करता है।

  • स्वास्थ्य मंत्र - ॐ हंसं हंसः 

  • ब्रह्मचर्य मंत्र - ॐ अर्यमायै नमः 

  • आरोग्य मंत्र - अच्युताय गोविन्दाय अनन्ताय नामभेषजात् ।

    नश्यन्ति सर्वरोगाणि सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ।।…

  • ओमकार जप, गीता, रामायण, विष्णु सहस्रनाम या अन्य स्तोत्र का पाठ करना भी उत्तम है।

2. दान और सेवा

  • ग्रहण के समय किया गया दान सामान्य समय से कई गुना फलदायी होता है।

  • गायों को घास, पक्षियों को अन्न, और ज़रूरतमंदों को वस्त्र, भोजन या धन दान करना चाहिए।

  • मौन रहकर दान करना और भी श्रेष्ठ माना गया है।

3. भोजन संबंधी नियम

  • ग्रहण के समय भोजन करना वर्जित है।

  • गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण नहीं देखना चाहिए।

  • ग्रहण से पहले बना भोजन ग्रहण के बाद त्याग देना चाहिए।

  • दही, उबला दूध, छाछ, घी, तेल और पका हुआ अन्न ग्रहण के बाद भी खाया जा सकता है, अगर उसमें पहले से कुश, तिल या तुलसी डाल दी गई हो।

  • दूध और दूध से बने व्यंजनों में तिल या तुलसी न डालें।

  • सूर्य ग्रहण में 12 घंटे और चंद्र ग्रहण में 9 घंटे पहले भोजन न करें।

  • वृद्ध, बच्चे और रोगी 4.5 घंटे पहले तक भोजन कर सकते हैं।

  • ग्रहण के समय भोजन करने से पाप लगता है और दूसरों का अन्न खाने से वर्षों का पुण्य नष्ट हो जाता है।

4. स्नान और शुद्धि

  • ग्रहण खत्म होते ही पहने हुए वस्त्र सहित  करें। और शुद्ध कपड़े पहनें।

  • ग्रहण काल में उपयोग कियेहुए कपड़े भी धो लें .

  • आसन, मंदिर का कपड़ा और गोमुखी भी धोना चाहिए।

  • घर में गंगाजल या गोमूत्र छिड़ककर शुद्ध करें।

  • खाद्य वस्तुओं से कुश और तुलसी निकाल दें।

  • स्नान के समय मौन रहें।

  • स्नान के बाद शुद्ध सूर्य या चंद्र का दर्शन करके ही भोजन करें।

5. गर्भवती स्त्रियों के लिए सावधानियाँ

  • लोहे का चश्मा, पिन, नकली गहने, चाकू, कैंची, पेन, पेंसिल जैसी वस्तुएँ ग्रहण में न रखें।

  • गर्भवती स्त्रियाँ घर के अंदर रहें और दरवाजे-खिड़कियाँ बंद रखें।

  • नियमों का पालन न करने से गर्भस्थ शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है।

6. अन्य निषेध

  • ग्रहण में तेल मालिश, उबटन और श्रृंगार न करें।

  • जीव-जंतुओं को कष्ट न दें।

  • पत्ते, फूल, लकड़ी न तोड़ें और ब्रश न करें।

  • हंसी-मजाक, नाच-गाना या मनोरंजन न करें।

  • चिंता, क्रोध और झगड़े से बचें।

  • ग्रहण या भूकंप के समय ज़मीन न खोदें।

7. ग्रहण के समय आचरण

  • जो ग्रहण में सोता है उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

  • जो मूत्र त्याग करता है उसके घर में दरिद्रता आती है।

  • जो शौच करता है उसे रोग और नीच जन्म मिलता है।

  • ग्रहण के समय मौन रहकर जप, ध्यान और शास्त्र-पाठ करना सबसे अच्छा है।

8. विशेष अनुशंसाएँ

  • सूतक शुरू होने से पहले गंगाजल पीएं।

  • गले में तुलसी की माला या कुश धारण करें।

  • सूर्य ग्रहण में असली रुद्राक्ष माला पहनने से पाप नष्ट होते हैं।

  • यदि संभव हो तो उपवास करें और ग्रहण के बाद दान देकर व्रत का समापन करें।

  • ग्रहण को आत्म-साधना और आत्म-विकास का अवसर मानकर शांत और संयम से समय बिताएँ।


Chandra Grahan 2025: ग्रहण में क्या करें क्या न करें?  
टाइम स्टाम्प के साथ ट्रांसक्रिप्शन -

0:09 ग्रहण कल में क्या करें क्या न करें 0:12 जानने के लिए आइये डालते हैं एक नजर।

 0:14 ग्रहण कल में मंत्र जप न करने से मंत्र 0:18 को मलिनता प्राप्त होती है,ॐ ह्रां ह्री सः सूर्याय नमः 0:21 इस मंत्र से आपके सूर्य 0:24 केंद्र और बुद्धि का विकास होता है ।


ग्रहण 0:26 के समय गायों को घास पक्षियों को अन्न 0:29 जरूरतमंदों  को वस्त्र दान  करने से अनेक 0:32 गुना पुण्य प्राप्त होता है ।


ग्रहण को 0:34 बिल्कुल ना देखें ,ग्रहण के पहले का बनाया 0:37 हुआ अन्य ग्रहण के बाद त्याग देना चाहिए ।0:39 लेकिन ग्रहण से पूर्व रखा हुआ दही, या उबाल 0:43 हुआ दूध, छाछ, घी, या तेल इनमें से किसी में 0:46 सिद्ध किया अर्थात ठीक से पकाया हुआ अ पूड़ी आदि अन्न ग्रहण के बाद भी सेवनीय हैं, परन्तु ग्रहण से पूर्व इनमे कुंशा डालना जरूरी है। 


0:49 0:55 ग्रहण का कु- प्रभाव वस्तुओं पर न पड़े 0:57 इसलिए मुख्य रूप से कुशा का उपयोग होता है, 0:59 इससे पदार्थ अपवित्र होने से बचते हैं, कुंशा 1:03 नहीं है तो तिल डालें या तुलसी के पत्तों 1:05 का भी उपयोग कर सकते हैं, किंतु  दूध या दूध से बने व्यंजनों में तिल या तुलसी न डाले।

 

ग्रहण के सूतक से पूर्व गंगाजल पीये।1:12 है ग्रहण काल में तेल मालिश करने या उबटन 1:16 लगाने से कुष्ठ रोग होने की संभावना बढ़ 1:18 जाती है ।


1:20 जीव-जंतु या किसी प्राणी की हत्या करने 1:22 वाले को नारकीय योनियों  में जाना पड़ता है।


 1:25 पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल आदि ना तोड़े, दत 1:28धावन अभी ब्रश समझ लो ना करें ।


चिंता करते 1:31 हैं तो बुद्धि नाश होता है ,भूकंप एवं 1:34 ग्रहण के अवसर पर पृथ्वी को खोदना नहीं 1:36 चाहिए।

 ग्रहण के दौरान हंसी मजाक ,नाच गाना,ठिठोली आदि न करे क्योंकि ग्रहण काल उस देवता के लिए संकट का काल है,उस समय वे ग्रह पीड़ा में होते है,अतः उस समय भगवन्नम जप,कीर्तन ओमकार का जप 1:50 संबंधित ग्रहों एवं वजापक दोनों के लिए 1:53 ही  हितावकर है ।


सूर्य ग्रहण में चार प्रहार 1:56 यानी 12 घंटे पूर्व और चंद्र ग्रहण में 1:59 तीन प्रहार यानी 9 घंटे पूर्व भोजन नहीं 2:02 करना चाहिए । बुड्ढे , बालक,,रोगी डेढ़ प्रहर यानी 2:05 4.5 घंटे पूर्व तक खा सकते हैं ।ग्रहण के 2:09 समय भोजन करने वालाअधोगति को जाता है, 2:11 ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से 12 2:14 वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट 2:17 हो जाता है ।


ग्रहण के समय जो नींद करता है 2:20 उसको रोग जरूर पकड़ेगा,उसकी रोग 2:22 प्रतिकारता का गला घुटेगा ।


जो पेशाब 2:26 करता है ,उसके घर में दरिद्रता आती है, जो 2:28 शौच करता है उसको क्रीमी रोग होता है ,तथा 2:31 किट की योनि में जाना पड़ता है।


 ग्रहण कल 2:33 में स्पर्श किए हुए वस्त्र आदि की शुद्धि 2:35 हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए, तथा स्वयं 2:38 को भी पहने हुए वस्त्र सहित स्नान करना 2:41 चाहिए ।

आसन ,गोमुखी व मंदिर में बिछा हुआ 2:44 कपड़ा भी धो दें ,और दूषित  ओरा के 2:46 शुद्धिकरण हेतु गोमूत्र या गंगाजल का 2:48 छिड़काव  पूरे घर में कर सके तो अच्छा है ।


2:50 ग्रहण के बाद स्नान करके खाद्य वस्तुओं 2:53 में डाले गए कुश एवं तुलसी को निकल देना 2:56 चाहिए ।ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं 2:58 बोलना चाहिए। सूर्य और चंद्र जिसका ग्रहण 3:01 हो उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना 3:03 चाहिए ।


3:04 गर्भिणी अगर चश्मा लगती हो और चश्मा लोहे 3:07 का हो तो उसे ग्रहण काल तक निकल देना चाहिए ।

3:09 बालों पर लगी पिन या नकली गहने भी उतार 3:13 दें ।ग्रहण के समय गर्भवती, चाकू, कैची ,पेन ,3:16 पेंसिल, जैसी नुकीली चीजों का उपयोग न 3:18 करें क्योंकि इससे शिशु के होंठ काटने की 3:21 संभावना होती है ।


स्वास्थ मंत्र और 3:24 ब्रह्मचर्य मंत्र भी जप लेना चाहिए ,ग्रहण 3:26काल में गले में तुलसी की माला या छोटी में 3:29 कुश धारण कर ले।

 सूर्य ग्रहण के समय 3:31 रुद्राक्ष माला धारण करने से पाप नष्ट हो 3:34 जाते हैं ,पर ध्यान रहे असली रुद्राक्ष हो 3:37 फैक्ट्री का बनाया नकली नहीं।


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