अपने निज स्वरुप में जाग| Part-2
ahmedabad - 16-10-1983
सत्संग के मुख्य अंश :
जिनके भाग्य बहुत अच्छे होते हैं उनको ही ब्रह्मवेत्ता महापुरुष का दर्शन प्राप्त होता है !
हयातकाल में ब्रह्मवेता महापुरुषों को लोग समझ नहीं पाते, उनके साथ बुरा व्यवहार करते हैं... आखिर क्यों ?
ब्रह्मवेता का सेवक भी इंद्र से पूजित होता है... शुक्र की कथा!
जब कबीरजी ने चोरी की और उनका पुत्र पकड़ा गया तब क्या हुआ... एक रोचक प्रसंग
सत्संग
0:00 एक संत थे ज्ञानी वो बलाद में में गया था, 0:04 तो उनका शिष्य उन्हें ले आया बांकणे पर 0:07 बैठने गए तो शिष्य ने क्या करा अपने कपड़े 0:09 से बाकणा साफ कर दिया, तो सीधे साधे 0:14 देहाती संत ने कहा कि जो मोक्ष ना जोतो ने 0:19 तो आलू करवा थ स्वर्ग 0:21 चोटे मोक्ष ना जोतो 0:24 तो खरे आल ब्रह्म वेता तो स्वर्ग चोटे तो 0:30 तुमको यदि ज्ञान हो जाएगा और पत्नी 0:32 तुम्हें रोटी करके खिलाएगी ना तो उसका भी 0:34 बेड़ा पार हो जाएगा और बेटा तुम्हारे लिए 0:36 एक बिस्तर बिछा देगा ओर एक चादर लगा देगा 0:38 तो भी उसका कल्याण हो जाएगा। रुपयों से 0:40 इतना कल्याण नहीं होगा जितना तुम ब्रह्म 0:42 वेता हो जाओगे तो बेटा तुम्हारा दर्शन 0:44 करेगा तो भी उसका कल्याण हो 0:47 जाएगा। ब्रह्म ज्ञानी का दर्शन वड भागी 0:49 पावई अभागा आदमी तो ब्रह्म ज्ञानी का 0:51 दर्शन नहीं कर सकता 0:53 है।
ब्रह्म ज्ञानी का दर्शन वड भागी पावई 0:56
ब्रह्म ज्ञानी को बल बल 0:58 जावई।
ब्रह्म ज्ञानी की मत कौन बखाने
नानक 1:01 ब्रह्म ज्ञानी की गत ब्रह्म ज्ञानी जाने।
1:03 लेकिन दुर्भाग्य है समाज का कि वे लोग जब 1:06 हयात होते हैं ना तो लोग फायदा नहीं ले 1:08 सकते | रमण हयात थे, तो मुट्ठी भर लो कबीर 1:12 हयात थे तो 50 25 100 200 1:15 आदमी, नानक हयात थे तो आज इधर, कल उधर, परसो 1:19 उधर, 50 लोग कहीं 200 लोग, कभी 500 लोग, कभी 1:22 700 लोग, कभी 200 लोग, कभी दो लोग कभी तो और 1:25 खाने पीने का भी ठिकाना नहीं। लीलाशाह बापू 1:29 जब हयात थे तो 13 आदमी कभी 25 आदमी आ जाए तो 1:31 बापू बोलते आज तो साओ आतवार आहे पहजी गिराकी 1:34 जोरदार आहे। जय राम जी की अज त साओ आतवार आहे आर 1:36 पाहनजी गिराकी जोरदार तई। देखो 25 30 आदमी आ गए। 1:42 आदीपुर में अब लीलाशाह बापू चले गए तो, 1:45 उनका पुतला लगा दिया आनंद मंगल करू आरती 1:48 हरि गुरु संतनी सेवा। लीलाशाह भगवान की जय। 1:51 5000 आदमी इकट्ठे होते और केवल 5000 नहीं 1:55 होंगे ऐसे भी दिन होंगे कि 50 हजार आदमी वहा 1:57 इकट्ठा होंगे। ठीक है मंदिर बनते हैं, आरतियां 2:00 बनती है, पूजा होती है। लेकिन जब गोरख जागता 2:05 नर सेविय इतने समाज के पुण्य ही नहीं 2:08 होते कि वह हयात होते और उनको लोग पहचान 2:10 सके, उनके पास टिक सके, उनको समझ सके, उनको 2:14 झेल 2:15 सके, वे चले जाते हैं, फिर जैसे कृष्ण गए तो 2:19 कृष्ण की आरतियां होने लगी, राम तीर्थ और 2:22 राम कृष्ण गए तो फिर उनके नाम के बनने लगे, 2:25 और वोह हयात थे तो लोग उन्हें समझ नहीं 2:27 पाए।
इसी बात को लेकर रामतीर्थ बार-बार 2:29 चिल्लाते थे अपने प्रवचनों में कि मैं राम 2:31 बनकर आया लोगों ने मुझे नहीं पहचाना। मैं 2:34 ईसा बनकर आया लोगों ने मुझे नहीं सुना 2:36 नहीं समझा, मैं मोहम्मद बनकर आया लेकिन 2:39 लोगों ने मुझे नहीं पहचाना, मैं कबीर बनकर 2:41 आया लोगों ने मुझे नहीं पहचाना, मैं 2:43 क्राइस्ट बनकर आया लोगों ने मुझे नहीं 2:45 समझा अब राम बादशाह बनकर आया हूं और मेरा 2:48 उपदेश यही है कि तुम भी वही हो जागो अपने 2:50 रूप 2:52 में।
तो यह हयात जब तत्व वेता होते हैं उस 2:57 समय लोगों के भी 3:00 विचारों 3:02 की कोई खास गलती नहीं है। लोगों का एक उठना, 3:08 बैठना, चलना, फिरना ऐसे व्यक्तियों के साथ 3:12 है कि जो बाहर के जगत से ही जिनकी बुद्धि 3:15 रंग गई। बाहर के भाव भाव देखभाल विनोद 3:20 मनोरंजन उसी में लोग घूमते तो जो मनोरंजन 3:24 में घूमते हैं या बाहर के जगत को सत्य 3:27 मानकर जिनकी बुद्धि और मन उलझा हुआ है 3:30 उनको जगत के पार के खजाने में जाने की 3:32 ताकत ही नहीं होती, जाने का उत्साह ही नहीं 3:35 होता। जब वे बहिर्मुखी लोग साधको का संग करे और साधक जब सिद्धो 3:39 के चरणों को पकड़ रखें तभी कहीं समाज में 3:43 आध्यात्मिकता फैलती है। और जो असली 3:45 आध्यात्मिकता नहीं तो धर्म के नाम पर भी 3:47 एक दुकानदार चल पड़ती 3:51 है। पाखंड से तो बेईमानी से तो होता ही है 3:57 गुंडागर्दी से तो जो कुछ होता है होता है 3:59 लेकिन धर्म के नाम पर भी कई कुछ हो रहा है 4:03 हो रहा है बस।
ओम ओम 4:07 ओम ऐसा कुछ हो जाता है कि धर्म के नाम पर 4:10 ऐसा कुछ वातावरण फैल गया और अबोध लोग ऐसे 4:13 दब जाते हैं उनके वातावरण में और दिखावे 4:17 में कि बेचारे को पता ही नहीं चलता है कि 4:19 अरे मैं कितना स्वतंत्र हूं, कितना स्वामी 4:22 हूं, कितना मेरे अंदर खजाना है, उनको बेचारे को 4:24 पता ही नहीं वो समझते कि किसी ने हमको 4:26 भेजा है, और कोई हमको दया करेगा, कोई हमको 4:29 कुछ देगा, तब हम सुखी होंगे। उनको पता ही 4:32 नहीं कि तुम सुख के स्वामी आप हो। मूर्ख 4:34 आदमी व ग्रंथी खोलता नहीं। कृष्ण बोलते 4:37
भिद्यते हृदयग्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसंशयाः। क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन् दृष्टे परावरे
मुण्डकोपनिषद् | Verse 9
हृदय की ग्रंथि 4:44 भेदित करो फिर पारावार की दृष्टि से तुम 4:47 देखो,, सारा दुनिया का माल एक व्यक्ति को दे 4:49 दो फिर भी वह समझेगा कि मैं कोई बड़ा नहीं 4:51 हुआ। सब कुछ छीन लो फिर भी तुम छोटे नहीं 4:54 होते 4:55 हो।
शुक्र और अप्सरा की घटना
ब्रह्मज्ञानी संत की सेवा करता था 4:58 शुक्र,,, 5:00 एक दिन शुक्र ध्यान में बैठा शुक्र ज्ञानी 5:03 भी नहीं था और मुढ़ भी नहीं था बीच में 5:06 झूले खाता था त्रिशंकु की 5:08 नाही।। शुक्र ध्यान ध्यान में बैठा और ध्यान 5:11 जब यहां आ जाता है एकाग्र हो जाता है आदमी 5:15 बारह मिनट चित सा एकाग्र एक जगह पर केंद्र पर 5:18 होती तो केंद्र का विकास होता है तीसरी 5:21 आँख उसको बोलते हैं, इसको शिव नेत्र भी 5:23 बोलते हैं तो फिर वो दिखने लगता है। 5:25 सूक्ष्म जगत 5:28 का तो शुक्र ने देखा हुआ अप्सरा को शुक्र 5:32 ज्ञानी था नहीं, अज्ञानी भी नहीं था अत्यंत 5:35 मूढ़ नहीं था कि न दिखे, अत्यंत ज्ञानी नहीं 5:37 था कि वो मिथ्या दिखे। ज्ञानी को मिथ्या 5:40 दिखता है और मूढ़ को सत्य दिखता है, इसको 5:42 दोनों बीच का दिखा। अप्सरा को देखकर 5:46 शुक्र उसके पीछे गया, अप्सरा तो पहले भाग 5:51 गई। शुक्र सूक्ष्म शरीर से गया तो अप्सरा 5:56 तो चली गई। शुक्र ने विचार किया जाऊं ना 5:58 जाऊं क्या करूं ऐसे वैसे तो थोड़ी देर हुई 6:00 और वो तो पहुंच 6:02 गई। बाद में शुक्र गया तो शुक्र गया तो 6:05 राजा इंद्र के राज्य में जाना है, पहले तो 6:08 इंद्र से मिलना पड़ेगा, तो गए इंद्र के पास। 6:11 तो देवता लोग अपने स्थान पर बैठे-बैठे भी 6:13 दूसरे के चित्त की दशा जान लेते हैं। देवता 6:16 की तो बात अलग है लेकिन तुम भी थोड़ी बहुत 6:18 साधना करो जब प्राणायाम ध्यान करो सत्य 6:22 बोलो तो तुम्हारा मन भी शुद्ध हो जाएगा। और 6:25 सत्व गुण आएगा तो आप दूसरे के दिल की बात 6:27 जान लोगे। श्री राम।।म 6:30 यह तो तुम्हारे अंदर भी है ऐसा ऐसा नहीं 6:32 कि केवल देवताओं के पास है। जिसके पास 6:35 सत्व गुण आता है उसके पास यह योग्यता को 6:37 सिद्धि कहो आ जाती है। इंद्र जान गए कि 6:40 शुक्र किसके लिए आए। विश्वाची के दर्शन के 6:43 बाद शुक्र का मन पिघला है और विश्वाची के 6:46 पीछे पीछे आए। फिर भी इंद्र अपने सिंहासन 6:49 से उतर कर विश्वाची को चाहने वाले जो 6:53 शुक्र है उस शुक्र 6:55 को अपने आसन पर बिठाया अर्ग पाद से पूजन 6:59 किया कि तुम ज्ञानवान के सेवक हो, ब्रह्म 7:02 ज्ञानी के तुम सेवक हो, ब्रह्म ज्ञानी के 7:05 निकट रहते हो, ध्यान करते हो, तुम्हारे आने 7:08 से मेरे स्वर्ग का आयुष्य बढ़ जाएगा, मेरे 7:10 पुण्य बढ़ जाएंगे,जय श्री 7:14 राम।जय श्री राम|
जिन देवताओं को हम लोग 7:18 आशीर्वाद लेने के लिए गिड़गिड़ाते हैं उन 7:21 देवों का राजा ब्रह्म विता के सेवक की 7:24 सेवा करता 7:25 है। बात तो ऊंची है इसीलिए तुम बोलते कि 7:29 ऊंचा ऊंचा माल तो साई के लिए रखो अपने को 7:31 तो साधारण मिले तुम भी दयालु हो बड़े 7:33 दयालु 7:36 हो।। ओम ओम7:39 ओम तो वेदांत का श्रवण भाग कर्मकांड का काम 7:44 पूरा कर देता है। मनन भाग निदिध्यासन का 7:47 उपासना कांड पूरा कर देता है, और निर्दीध्यासन करने से ज्ञान कांड का काम पूरा हो 7:52 जाता है। फिर बाद में थोड़ा सा ही बचता है 7:54 जो गुरु की कृपा। तो गुरुओं के प्रारंभ 7:57 प्रारंभ में भी संतों का समागम से भक्ति 7:59 का रंग लगता है, और अंतिम में भी बुद्ध 8:02 पुरुषों की कृपा से, कई लोग बोलते हैं कि 8:04 गुरुओं की कृपा प्रारंभ में चाहिए, नहीं 8:07 नहीं अनुभवी हों का कहना कि प्रारंभ में 8:09 भी उनकी कृपा चाहिए, अंत में भी उनकी कृपा 8:11 चाहिए, बीच में आपकी यात्रा चाहिए। शुरुआत 8:14 भी मनाथ थाय अने पूर्णा उती भी ममना थ थाय 8:18 बच्चे आप थोड़ू डवू पड़े 8:23 ल।
इसी बात को रामायण कहता है
नवधा भकति कहउँ तोहि पाहीं।
सावधान सुनु धरु मन माहीं।।
प्रथम भगति संतन्ह कर संगा।
दूसरि रति मम कथा प्रसंगा।।
गुर पद पकंज सेवा तीसरि भगति अमान।
चौथि भगति मम गुन गन करइ कपट तजि गान।
मन्त्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा।
पंचम भजन सो बेद प्रकासा।।
छठ दम सील बिरति बहु करमा।
निरत निरंतर सज्जन धरमा।।
सातवँ सम मोहि मय जग देखा।
मोतें संत अधिक करि लेखा।।
आठवँ जथालाभ संतोषा।
सपनेहुँ नहिं देखइ परदोषा।।
नवम सरल सब सन छलहीना।
मम भरोस हियँ हरष न दीना।।
ये रामायण कार कहते 8:46 हैं तो जिसका मन शांत हुआ है परमात्मा में, 8:50 उन्हीं महापुरुषों को संत कहते है 8:53 शास्त्र इसीलिए तीर्थ तभी तीर्थतव को 8:56 उपलब्ध होता है जिसने आत्म तीर्थ में 8:58 स्नान कर लिया, वे लोग जहां भी जाते हैं 9:00 वहां तीर्थ हो जाता है, और उनको जाना आना 9:04 सब उनके लिए तो विनोद मात्र व्यवहार। जनो 9:06 ब्रह्म निष्ट प्रमाण इनका व्यवहार विनोद 9:10 मात्र है।
कबीर जी और कमाल कहानी
कबीर को कहा कि लोगों को मत कहना। 9:13 भोजन करके 9:15 जाए बोले अच्छा ना आएगी तो ना कहूंगा बोले 9:19 नहीं नहीं तो कर्जा लेना पड़ता है लोग 9:21 देते नहीं सीधा नहीं मिलता है। आप रुकना 9:25 मत कथा सुने फिर बोलना चले जाए आप लोगों 9:28 को ऐसा मत कहो कि जा रहे हो धूप है रोटी खाके 9:30 जाओ तुम तो बोल देते फिर हमको पका पका के 9:33 मम्मी को और हमको बाजार से लाला के तकलीफ 9:36 होती है, तो कल को कल कोई जाए तो आप रोकना 9:39 मत।कबीर ने कहा ठीक है नहीं रोकने का होगा 9:44 तो नहीं रोकूंगा, बोले मतलब क्या बोले उस 9:47 समय का कोई पता नहीं जैसा होगा 9:49 होगा। रोकूंगा ऐसा भी नहीं कहता हूं, नहीं 9:52 रोकूंगा ऐसा भी नहीं कहता हूं, और हुई कल 9:56 तो फिर कह दिया कि अरे धूप हो रही है भोजन 9:58 करके जाओ। कमाल ने दिखाई आंखें फिर भी कुछ 10:01 नहीं शाम हुई कमाल ने कहा यदि तुम ऐसा ही 10:05 करोगे तो चोरी करने के सिवा दूसरा कोई 10:07 चारा नहीं। कबीर कहते जब चोरी करने से काम 10:09 चल जाता है तो सत्संगी को भोजन कराने में 10:12 क्या घाटा है। चोरी करेंगे,, तो बोले फिर साथ 10:15 में आना पड़ेगा बोले10:17 हां रात हुई और कमाल ने जगाया व पुत्र तो 10:20 कबीर का ही था वो भी जैसा तैसा तो बेटा 10:22 नहीं था। रात हुई कबीर को जगाया कबीर 10 10:27 पांच कदम चले कमाल सोचा का क्या ख्याल है 10:29 आना है 10:31 ना, कमाल समझता था कबीर बोलेंगे सो जा, बैठ 10:35 जा, पागल कहेगा, ये वो।।।। कबीर ने कहा हां जब 10:38 उठा ही लिया तो आ ही रहा हूं क्या आना 10:40 पूछता है, फिर आधे रास्ते पर पहुंचे कमाल 10:43 बोलता है क्या ख्याल है आप लोगों को कहोगे 10:46 नहीं कि कहते रहोगे बोले कोई पता नहीं। ना 10:50 कहूंगा ऐसा भी नहीं कहता हूं कहता रहूंगा 10:52 ऐसा भी नहीं कहता हूं लेकिन तू बार-बार 10:53 क्यों पूछता है। बोले मैं इसलिए पूछता हूं 10:56 कि शायद तुम अपना निर्णय बदल, लो शायद तुम 10:58 अपना कुछ पकड़ पकड़ लो। कबीर ने कहता की पकड़ 11:01 पकड़ने वाला था तब कहता तो हो जाता, अब 11:03 पकड़ने वाला कुछ नहीं। विस्तारिक जाएंगे कोई 11:07 पता नहीं, नहीं जाएंगे कोई पता 11:10 नहीं, कोई पकड़ नहीं है, जिसका जहां का 11:13 तीव्र संकल्प होगा। हां भाई ठीक है। जय 11:17 जय।। तेरी मर्जी पूर्ण 11:20 हो,, कबीर की कोई पकड़ नहीं है,, बुद्ध पुरुष 11:24 की कोई पकड़ नहीं होती है,, अब बुद्ध की ही 11:26 पकड़ होती है,, आमज ऊ जो आमज देखा 11:31 अरे सब सुपनो आए आम देख तोम देखयो तो आश 11:36 बाजी न हाथी नाप कंकू ट तो लोबान मुक तो 11:40 भड़का 11:41 थाना एम आखू जगत आबाजी ब 11:46 भड़का लिए ज्ञानी को कोई पकड़ नहीं हमारी 11:49 ना आरजू है, ना जुस्त जू है, हम राजी है उसमें 11:53 जिसम तेरी रजा है। तुम लोगों की रजा है हम राजी। ओम ओम ओम वो कमाल लिए जा रहा है कबीर 12:03 को और जहां दुकानदार का वो गोदाम था,घर था साथ मे रहते थे आगे दुकान पीछे मकान। कमाल बोलता है अभी भी आप सुधर जाओ क्योंकि जब जब बिगड़े है ज्ञानी ही बिगड़े है अज्ञानी तो कभी बिगड़ता ही नही क्योंकि बिगड़ने की आखिरी पहरि पर है इसलिए वो बिगड़ता ही नही। जो नीचे बैठता है वो कभी गिरता ही नही,जब जब बिगड़ा है तब ज्ञानी ही बिगड़ा है, 12:29 जब जब बेवफाई की है तब गुरु ने ही कि है, 12:32 शिष्यों ने तो की नहीं है ऐसा है ना।
नहीं 12:36 सुकरात को जहर किसने दिया। बेवफाई शिष्यों 12:40 ने ही की है गुरु ने कभी नहीं की। अज्ञानी 12:42 ने ही ज्ञानी से बेवफाई की है। ज्ञानी ने 12:44 कभी किसी से बेवफाई नहीं की। बेवफाई करने 12:47 का उसको गुंजाइश ही नहीं बेवफाई करने के 12:49 लिए उसको कुछ स्वार्थ चाहिए, कुछ सुख चाहिए, 12:52 सुख का तो दरिया स्वयं है, बेवफाई क्यों 12:55 करेगा। जीसस को क्रॉस पर अज्ञानीयो ने 12:58 चढ़ाया, किसी ज्ञानी ने दूसरों को क्रॉस पर 13:01 चढ़ाया ऐसा इतिहास नहीं है। किसी ज्ञानी ने 13:03 अज्ञानी से बेवफाई की ऐसा इतिहास नहीं 13:05 मिलता है। जब मिलता है तब अज्ञानीयो ने 13:08 ज्ञानियों से बेवफाई की। और ज्ञानी फिर भी 13:10 वफादारी का पैगाम दिए जा रहे हैं,,,, हां बोलो। 13:14 महावीर को कील अज्ञानी ने डाले, महावीर ने 13:17 किसी को कील नहीं डाले। बुद्ध को अज्ञानी 13:19 ने थूका, बुद्ध ने किसी पर नहीं थूका। कबीर 13:21 की बेइज्जती और निंदा अज्ञानियों ने ही ने की 13:24 कबीर ने किसी की बेइज्जती नहीं की। नानक पर 13:26 कंकड़ पत्थर की बारिश की अज्ञानियो ने की। 13:28 शुकदेव जी का अपमान किया तो अज्ञानीयो 13:30 ने। सुकरात को जहर दिया तो अज्ञानीयो ने। 13:33 मंसूर को फांसी चढ़ा दिया सूली चढ़ा दिया 13:35 तो अज्ञानियो ने।
जय श्री राम तो कबीर को 13:39 बोलता है कि कमाल कहता है कि आप भोजन 13:41 करेंगे लोगों को भी कराते हैं, अब हम पहुंच 13:45 नहीं सकते हैं, तो चोरी के सिवा दूसरा कोई 13:47 रास्ता नहीं है। यदि आप यह अपना रास्ता 13:50 छोड़ो लोगों को जिमाने का तो फिर वापस चलते 13:54 हैं। कबीर बोलते पागल जब घर से जगाया, यहां 13:58 तक पहुंचे, अब वापस आने की बात कर रहा 14:00 है। इस समय कोई आदमी देखे तो कबीर को पूरा 14:04 चोर मानेगा संत नहीं मानेगा। क्योंकि चोरों 14:07 को कबीर भी चोर दिखेगा। लेकिन ज्ञानी से जो 14:09 होता है सहज में होता है सेंध नडाल दी कबीर 14:14 कह रहे संभाल के डालना जो भी काम करो 14:16 सुविधा पूर्ण करो, व्यवस्थित करो, असफल मत 14:19 होना विजय हो जाओ। सेंध डाल दी बोले अब घुसो 14:23 अंदर कि तुम अपना विचार बदलते हो बोले 14:25 मेरा विचार होता तो बदल देता क्या पता कब 14:27 क्या हो जाए कोई पता नहीं 14:29 जिस काम के लिए आया तू कर मैं सहमत 14:33 हूं। कमाल अंदर गया वो हीरे मोती तो चाहिए 14:37 नहीं रोटी वोती है, वह जो कुछ दाल सब्जी है 14:40 बटाका आलू पालू है, चावल पावल, मूंग की दाल 14:45 उठाया, पटले बांधे बोले धीरे धीरे दे दे 14:48 पोटला बाहर आ गया, कमाल बाहर आने को था बोले 14:52 उनको जगा तो 14:56 दे। जगाओ क्यों,, 14:59 अपना काम हो गया फिर खामखा वो बेकार होंगे। 15:01 बोले पहले तो आपने कहा कि आवाज मत करना 15:03 जगाना मत बोले पहले अपना काम पूरा करना था 15:05 उसी लिए जगाना नहीं था, अब जगा दो। आवाज दे 15:09 दे कि हम लिए जा रहे हैं संभल जाना बाहर 15:10 इधर उधर भटकना मत। माल ठिकाने जा रहा है 15:13 ठीक जगह पर लिए जा रहे हैं। बात तो ठीक है 15:16 ठीक जगह पर लिए जा रहे हैं उसका पूरा सद 15:18 उपयोग होगा। साधक खाएंगे, भजन करने वाले 15:20 खाएंगे, संत खाएंगे, ठीक जगह पर जा रहा है 15:23 माल तो, वो कमाल ने लगाई 15:27 आवाज हम जा हैं माल समान घर में तुम्हारा 15:30 सेध डली है, चोरी हो गई है जागो रे लोगो। 15:34 वो 15:36 भागे बोले पिताजी जग गए बोले तू आजा वो 15:39 बाहर निकलते थे तो लोगों ने आग पैर पकड़ 15:42 लिए, बोले इन्होने तो पकड़ लिए बोले पकड़ 15:45 लिए तो पकड़ लिए धड़ उनके हाथ में सिर तो 15:47 मेरे हाथ में। मैं काट के लिए जा रहा हूं। 15:49 कथा कहते है कि कबीर सिर ले गए और धड़ 15:53 उधर ही रह गया। अब देखे धड़ बड़े 15:55 घबराए भीड़ इकट्ठी हो गई लोगों ने कहा देखो 15:59 ये मालूम होता है कि कमाल है कबीर का 16:01 पुत्र। 16:02 है जिस समय वो बोलते हैं कबीर की आवाज 16:05 लगाओ इस समय देखा जाए तो साहूकार भी पूरे 16:08 हैं, क्योंकि जिसका माल है उसको कहे जा रहे 16:10 है, कि हम लिए जा रहे हैं, और चोर देखो तो 16:12 पूरे हैं कि पराया माल लेकर रवाना हो रहे 16:14 हैं। ज्ञानी चोरी भी कर सकता है,, कि कुछ 16:17 नहीं करता इसलिए सब कुछ कर सकता 16:20 है। धड़का भी दिहनो की हा,, हो के हां भाइ केहा रूसी वेदों की हा, क 16:25 परची वेंदो की हा हाज़ सब संभावनाए है 16:29 वहा जैसी तुम्हारी संभावना, जैसी तुम्हारी 16:32 भावना।
कबीर का कोई इरादा नहीं जैसा कमाल 16:35 का इरादा, जैसा लोगों का इरादा, जैसा 16:37 लोकेश्वर का 16:39 इरादा। वो धङ को टांग दिया यदि कमाल का 16:43 पुत्र होगा तो कीर्तन करने वाले ओम गुरु 16:46 शिवो हम शिवो हम करेंगे तो कमाल खुश हो 16:48 जाएगा। तालिया बजा तो समझ लेना कि कबीर का 16:50 पुत्र है कुछ ना बोले तो समझना कि अज्ञानी 16:53 का पुत्र 16:55 है। शीष पड़े ने धड़ लड़े 17:01 मस्तक 17:02 का व कीर्तन करने वाले निकले प्रभात को 17:06 तो बजने लगी कथा कह 17:09 रही कबीर के चरणों गए कि जो माल ले गए वो 17:13 तो ठीक है और भी हम थोड़ा पहुंचा देते हैं। 17:15 राशन आपके चरणों में सदा हम पहुंचा करेंगे। 17:18 यह 302 हमारे से हटे ऐसी कृपा 17:23 करो। 302 में 17:27 फसे। तेरी मर्जी पूर्ण हो ले आया लगा दिया 17:33 पानी छटा रे कमालिया क्या करता है बोले 17:35 हरि ओम हरि ओम 17:38
अब ऐसी जब घटना घटती तो कुछ उनका प्लान 17:41 नहीं होता है 17:43 नियति में अज्ञानी लोग उन महापुरुषों को 17:46 बदनाम करते और नियति प्रकृति ईश्वर उनको 17:50 प्रसिद्ध करने के लिए ऐसी घटना करा 17:53 देते है। ज्ञानी कुछ नहीं करते ज्ञानी ने इसको 17:56 जिंदा किया इसका यह किया यह तुम्हारी थोपा 17:59 हुआ भावना है। ज्ञानी किसी को जिंदा बिंदा 18:01 नहीं करता, किसी को मारता नहीं, बस नियति 18:04 उनसे जो कुछ करवा ले वाह 18:06 वाह।।
प्रिय सधे प्यार में मिडई मिठाई कोने 18:11 कड़ाई चखी जी चाह करे।। ईश्वर जो करता है 18:14 अथवा बुद्ध पुरुषों के द्वारा जो परमात्मा 18:16 करवाता है, भला कराता 18:19 है। 18:20 इसलिए के बापू अमेरिका जाने वाले 18:24 हैं, मुंबई के प्लेन में बैठू समुद्र पार 18:28 हो जाऊ तो समझना के जाने वाले है। कहा था ना 18:32 पासपोर्ट आ गया, वीजा आ गई, तारिक नकी हो गई 18:35 हो गई लेकिन इधर जाने के बदले उधर ले चला 18:37 हरिद्वार तो, गए 18:40 हरिद्वार। फिर गए हिमालय, हेमकुंड, इधर उधर, 18:43 ना जाने कहाँ कहाँ 18:46 गए कोई पता नहीं 10 मिनट बाद में क्या 18:49 होगा कोई पता नहीं, कोई प्लान नहीं। 18:52 हमारा भीतर से गहराई में ऊपर ऊपर से कह 18:56 देते कि अ मारे जाऊ छ मारे खाऊ छ अ मारे 18:59 जो 19:00 छछ हो गया तो ठीक है नहीं हुआ तो ठीक है 19:04 जैसा फुरना आया सच्चा पड़ा तो क्या, और झूठा 19:06 पड़ा तो क्या फुरना ही तो है। भाई रोटी खाइन्डे त खाइन्दस। 19:10 खाया तो खाया नहीं खाया तो नहीं खाया। 19:14 आ गया तो बोल दिया बोल दिया नहीं बोला तो 19:18 नहीं
चुप में चुप आए खिल में खिलनदो आए
ऐडहो महबूब कीन की मिलन आह।।
जोगिन आए जंगल बसायो दवा भी मिलदी आए
दुआ भी मिलदी आए, ध्यान भी मिलदो आए
,ज्ञान भी मिलदो आए, पेसा भी मिलदी आए,
प्रीत भी मिलदी आए, छिड़ब भी मिलदी आहे,
ओ हिते कचन 19:51 जो कम 19:53 ना हा, संतन के सुण्यान ला पक्को दिमाग खपे, पक्को 19:57 अकुल खपे, पक्की श्रधा खपे,19:59 न तो माडु लुङि त वनन विचारा चओ श्री 20:03 राम।। औखी घड़ी न देखन देव सतगुरु अपना बरद 20:09 संभारे नानक सतगुरु पेटिया मैल जन्म जन्म 20:14 दे लते ठे सच्चे पादशाह मैल जन्म जन्म दे 20:20 लते
कबीर अपनी भाषा में कहते हैं
सुख देवे दुख को हरे करे पाप का अंत
कह कबीर वे कब मिले परम स्नेही संत।
संत मिले यह सब मिटे काल जाल जम जोट
शीश नमावे ढही पड़े सब पापन की पोट।।
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