[00:15] विदेश में एक परीक्षण हुआ। आरोग्य संस्था के प्रेसिडेंट एक वृद्ध को जांच करता है । मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर फ्रेडरिक ने आश्चर्य पाया फ्रेडरिक हैरान हो गया। [00:44] के 84 वर्ष का आदमी और इतना काम कर रहा है !थकता भी नहीं आठ घंटे ड्यूटी रिटायर होने के बाद दूसरी ड्यूटी भी अटेंड किया। और 84 साल की उम्र है 8 घंटे ड्यूटी करता है फिर भी ग्रह-नक्षत्रों की रिसर्च में लगा है ।
[01:04] मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर फ्रेडरिक उस 84 वर्ष के कर्मठ से पूछते है – "तुझे कोई बीमारी तो नहीं है?" बोले – "बीमारी काहे की? मैंने तो कभी चेकअप नहीं कराया। आप लोग डॉक्टर लोग हैं, एसोसिएशन वाले आए हैं, है कि नहीं बिमारी चेक कर लो।" मेडिकल एसोसिएशन के कुछ लोग और डॉक्टर फ्रेडरिक ने उस बुड्ढे के शरीर का परीक्षण किया तो दुनिया भर की बीमारियां थी । दुनिया भर की बीमारियां [01:44] , और तू इतना काम कर रहा है जांच किया कि दुनिया भर की इसके अंदर बीमारियां है फिर भी ये स्वस्थ कैसे है " बोले – "शरीर को क्रियाशील और मन को तीव्र चिंतन में लगाया है ,इसलिए बीमारियों का विष जलता जा रहा है।"
[02:05] जो आलसी हैं, अथवा थोड़ी-सी बीमारी आती है और बार बार बीमारी का चिंतन करता है वो बीमारी का जहर बनाता है । लेकिन जो कर्म में लगा रहता है, स्थूल शरीर से काम करता रहता है और सूक्ष्म शरीर से चिंतन करता रहता है, उसकी बीमारियों का जहर उसकी क्रिया ही तपा तपा के खत्म कर देती है। [02:26] वे ही लोग दीर्घजीवी रहे जो काम करते रहे।
[02:30] जो निकम्मे है आलसी हैं, – यह तो खाऊं, वो खाऊं। चटोरापन फिर आह आह "ओ लल्लू ओ लल्लू, ओ भैया ऐ उसको बुलाना। लल्लू रसोया गया था, इधर आ भाई।" [02:48] आह आह "लल्लू, जरा पानी का गिलास तो भर देना।" ओ आधा किलोमीटर दूर चल गया रसोइया सब्जी लेने के लिए ,उसको सेठानी बुलाती है – "पानी का गिलास भर।" फिर बोलती है – "खाना हजम नहीं होगा। खाना हजम क्यों होगा? कामकाज तो करतीनहीं।"बस _______(_सिंधी में है कुछ)
[03:09] दो आलसी सोए थे जामुन के वृक्ष के नीचे । एक घोड़े सवार जा रहा था ।आलसी ने आवाज मारी– "ए घोड़े सवार भाई, रुकिए। रुका जरा इधर आइए, नीचे आइए। जल्दी आइए जल्दी कर भैया, जल्दी कर। भगवान तेरा भला करेगा।" घोड़े सवार युवक था उतरा । [03:30] आलसी ने कहा – "देख, मेरे पेट पर पका जामुन पड़ा है। मेरे मुंह में डाल दे यार ।" युवक बिचारा थोड़ा भगत जैसा था उठा के उसके मुंह में डाल दिया युवक जाने लगा। आलसी बोलता है – "ठहर यार, मुंह से निकालेगा कौन? गुठली कौन निकालेगा जरा ठहर।"
[04:00] इतने में एक महात्मा आ धमके । महात्मा ने युवक को कहा – "सेवा तो करना चाहिए , लेकिन आलसियों की सेवा नहीं करो बेटा । और ये तो उनकी बर्बादी हो जाएगी। आलसियों की सेवा करनी है तो मैं बताता हूं – ला तेरा चाबुक ला ।" उठा के एक एक सटाक सटाक और जो आलसी थे लेटे थे लगाया बोले [04:23] "क्या कर रहे हो?" बोले – "ये तुम्हारी सेवा है। जय राम जी की! तुम्हारी यही सेवा है के तुम सक्रिय हो जाओ ऐसा मुझे करना चाहिए
[04:39] जो आलसी हुए पड़े हैं, उनके लिए तो झगड़ा करना भी अच्छा है। जय राम जी की आलस तमोगुण है और झगड़ा रजोगुण है । और झगड़ा करने के बाद पता चलेगा कि झगड़ा करने में कोई सार नहीं है । [04:53] तो जहां अति आलस्य होता है, वहां विलासिता आ जाती है। वहां कुदरत फिर कलह पैदा करती है। और कलह पैदा करने के बाद पता चलता है कलह में कोई सार नहीं , झगड़े में कोई सार नहीं । डरपोक होकर सुकड़ने के मरने के बजाय बहादुर होकर कलह करना अच्छा । [05:11] और कलह करने की अपेक्षा बहादुर हो कर सत्कर्म करके ईश्वर को प्रेम करना, यह सबसे ऊँची चीज है। बढ़िया चीज है निष्काम कर्म करना चाहिए।
* * * * *
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें