आश्रम संध्या सत्संग 08-03-2026 शाम | Surat 1990
TIME STAMP INDEX
0:02 (प्रसंग) चार वेद और चार उपवेद श्रीकृष्ण के हस्तगत होने का वर्णन
0:10 (प्रसंग) युद्धभूमि में गीता में चारों वेदों का सार प्रकट होना
0:19 (प्रसंग) युद्ध के भयंकर वातावरण में भी कृष्ण द्वारा ज्ञान देना
0:29 (प्रसंग) गीता का सनातन महत्व और अमर ग्रंथ होना
0:37 (प्रसंग) विश्व में गीता जयंती का महत्व
0:45 (दृष्टांत) कनाडा के राष्ट्रपति ट्रेडो पर गीता का प्रभाव
0:52 (दृष्टांत) ट्रेडो का वृंदावन आना और एकांत जीवन अपनाना
1:02 (दृष्टांत) गीता और उपनिषद को आध्यात्मिक आहार बनाना
1:10 (प्रसंग) गीता मानवता का ग्रंथ है यह विचार
1:25 (श्लोक) तेषाम सततयुक्तानाम का उच्चारण
1:40 (श्लोक) भजताम प्रीति पूर्वकम का जप
1:58 (श्लोक) ददामि बुद्धियोगं तम का जप
2:14 (श्लोक) येन मामुपयान्ति ते का जप
2:27 (प्रसंग) गीता के दशम अध्याय के श्लोक का अर्थ
2:36 (प्रसंग) प्रेमपूर्वक भजन करने वालों को भगवान बुद्धियोग देते हैं
2:45 (प्रसंग) कर्म को भगवान को अर्पण करने का संदेश
2:53 (प्रसंग) इन्द्रियों द्वारा किए जाने वाले कर्मों का वर्णन
3:01 (प्रसंग) आंख, कान, जिह्वा, त्वचा द्वारा संसार का अनुभव
3:13 (प्रसंग) इन्द्रियों द्वारा जगत का ज्ञान
3:20 (प्रसंग) आंख और कान को जगत की ज्योति बताना
3:27 (प्रसंग) स्वाद और गंध की ज्योति का वर्णन
3:34 (प्रसंग) स्पर्श की ज्योति त्वचा होना
3:42 (प्रसंग) सभी ज्योतियों के मूल में परमात्मा का प्रकाश
3:49 (प्रसंग) सूर्य, चंद्र और अग्नि की ज्योति का उदाहरण
3:59 (प्रसंग) मन और बुद्धि की ज्योति का वर्णन
4:07 (प्रसंग) चैतन्य आत्मा को अंतिम ज्योति बताना
4:17 (प्रसंग) दृश्य संसार के बदलने का वर्णन
4:26 (प्रसंग) देखने और सुनने वाले परमात्मा का वर्णन
4:34 (प्रसंग) बचपन, मित्र और यौवन के बदलने का उदाहरण
4:42 (प्रसंग) बुढ़ापा और मृत्यु के परिवर्तन का वर्णन
4:49 (प्रसंग) जन्म-मृत्यु के अनेक परिवर्तन
4:55 (प्रसंग) आत्मा और परमात्मा का कभी न बदलना
5:03 (प्रसंग) जन्म-जन्म के संबंध बदलने का उदाहरण
5:09 (प्रसंग) परमात्मा का हर जन्म में साथ रहना
5:15 (प्रसंग) सत स्वरूप परमात्मा का हृदय में होना
5:24 (प्रसंग) सुबह उठकर परमात्मा का स्मरण करने का संदेश
5:31 (प्रसंग) कर्म के बाद भगवान को अर्पण करने का उपदेश
5:40 (प्रसंग) कर्ता भाव छोड़कर भगवान को समर्पण
5:49 (प्रसंग) अहंकार त्याग और भगवान की कृपा का स्मरण
5:56 (प्रसंग) भगवान की कृपा से प्रेम का अनुभव
6:02 (दृष्टांत) अमृत की एक बूंद का उदाहरण
6:10 (दृष्टांत) दूध की बूंद और गिलास का अंतर
6:17 (दृष्टांत) अमृत की बूंद और सरोवर का उदाहरण
6:26 (प्रसंग) हर कर्म से पहले भगवान को प्रेम अर्पित करना
6:35 (प्रसंग) कर्तापन छोड़ने का उपदेश
6:44 (प्रसंग) प्रभु की सत्ता से सेवा प्रारंभ करना
6:50 (प्रसंग) हृदय में प्रेम उत्पन्न होने का वर्णन
6:59 (उद्धरण) कबीर का प्रेम पर कथन
7:07 (प्रसंग) अहंकार रोग मिटाने के लिए ईश्वर प्रेम
7:16 (प्रसंग) परमात्मा प्रेम से जीवन की बंदगी होना
7:25 (प्रसंग) धन प्रेम से उत्पन्न तनाव का वर्णन
7:34 (प्रसंग) धन से उत्पन्न चिंता का उदाहरण
7:42 (दृष्टांत) काम सुख की क्षणिकता का उदाहरण
7:51 (दृष्टांत) सरोवर की सतह और तले का उदाहरण
8:00 (प्रसंग) काम और क्रोध में अधिक देर टिकना संभव नहीं होना
8:08 (प्रसंग) झगड़ा थोड़े समय में समाप्त होना और मनुष्य का शांत होना
8:17 (प्रसंग) क्रोध के बाद मनुष्य की ऊर्जा नष्ट होना
8:25 (प्रसंग) काम विकार के बाद शक्ति का नाश होना
8:34 (प्रसंग) भगवान के प्रेम से ऊर्जा उत्पन्न होना
8:42 (प्रसंग) भगवान को भोग अर्पण करना सबके बस की बात नहीं
8:50 (प्रसंग) भगवान गहनों या पकवानों के भूखे नहीं
8:56 (प्रसंग) भगवान केवल प्रेम के भूखे हैं
9:05 (प्रसंग) भगवान का प्रेम सभी के लिए संभव होना
9:13 (श्लोक) तेषाम सततयुक्तानाम भजताम प्रीति पूर्वकम का संदर्भ
9:20 (प्रसंग) सेवा पूजा में सच्चे प्रेम की आवश्यकता
9:26 (दृष्टांत) तुच्छ वस्तु के लिए पूजा करने वाले का नुकसान
9:42 (दृष्टांत) चक्रवर्ती सम्राट और दुआनी का उदाहरण
9:49 (दृष्टांत) महान अवसर छोड़कर छोटी चीज लेने का उदाहरण
9:58 (प्रसंग) भगवान की प्रीति प्राप्ति के लिए कर्म करना
10:06 (प्रसंग) भगवान के लिए रोने का महत्व
10:15 (प्रसंग) मृत्यु की अनिवार्यता का प्रश्न उठाना
10:22 (प्रसंग) हर घर में मृत्यु का सत्य होना
10:31 (प्रसंग) अंतिम यात्रा का निश्चित होना
10:40 (प्रसंग) जन्म के समय भविष्य पूछना
10:49 (प्रसंग) पुत्र के भविष्य के प्रश्न
10:57 (प्रसंग) चार प्रकार के पुत्र का उल्लेख
11:06 (प्रसंग) मृत्यु के विषय में कोई प्रश्न न करना
11:13 (प्रसंग) मृत्यु का निश्चित होना
11:20 (प्रसंग) बाकी सब अनिश्चित लेकिन मृत्यु निश्चित
11:29 (प्रसंग) मृत्यु से पहले अहंकार भगवान में डुबोने का संदेश
11:39 (प्रसंग) अहंकार का त्याग अमरता का द्वार खोलना
11:47 (उद्धरण) मरने के आध्यात्मिक अर्थ पर दोहा
11:54 (प्रसंग) अहंकार को मारने का संदेश
12:01 (प्रसंग) प्रशंसा से अहंकार न बढ़ाने का उपदेश
12:08 (प्रसंग) निंदा और प्रशंसा को सही दृष्टि से देखना
12:17 (प्रसंग) दूसरों की कमजोरी को अपना गुण न मानना
12:23 (प्रसंग) निर्धनता या दुर्बलता को अपना बल न मानना
12:30 (प्रसंग) परमात्मा से अपना संबंध समझना
12:36 (प्रसंग) भगवान को प्रसन्न रखने का महत्व
12:45 (प्रसंग) युद्ध में भी भगवान की बंदगी संभव होना
12:54 (प्रसंग) भगवान को प्रेम करने का उपदेश
13:01 (दृष्टांत) मृत्यु के घर में मजा पूछने का उदाहरण
13:11 (प्रसंग) अनुचित प्रश्न से लोगों का क्रोधित होना
13:17 (प्रसंग) ध्यान और कीर्तन में रोने का अनुभव
13:26 (प्रसंग) सत्संग में भाव विभोर होकर रोना
13:33 (प्रसंग) सत्संग का शांत वातावरण
13:41 (प्रसंग) भगवान के लिए रोने में आनंद होना
13:49 (प्रसंग) संसार के सुख में भी दुख होना
13:59 (भजन) नारायण नारायण स्मरण
14:07 (भजन) राम गुण गाने का संदेश
14:14 (प्रसंग) तुलसीदास का बांके बिहारी मंदिर जाना
14:21 (संवाद) तुलसीदास के ज्ञान और भक्ति पर प्रश्न
14:30 (प्रसंग) तुलसीदास द्वारा कृष्ण से राम रूप मांगना
14:38 (उद्धरण) तुलसीदास का प्रसिद्ध पद
14:47 (भजन) तुलसी मस्तक तब नमे पद का गायन
14:52 (भजन) कृष्ण रूप और राम रूप का वर्णन
15:00 (प्रसंग) तुलसीदास के ज्ञान का प्रश्न
15:08 (संवाद) प्रश्न का उत्तर और प्रेम की परीक्षा
15:17 (प्रसंग) राम और कृष्ण एक होने का विचार
15:25 (प्रसंग) प्रेम की महिमा दिखाने के लिए घटना
15:32 (भजन) तुलसी मस्तक तब नमे पद का पुनः गायन
15:42 (भजन) श्रीकृष्ण के रघुनाथ बनने का वर्णन
15:52 (भजन) राम रूप दर्शन का वर्णन
15:59 (भजन) राम नाम और सीता-लक्ष्मण का स्मरण
16:09 (भजन) ध्यान और कल्याण का वर्णन
16:15 (भजन) नील सरोवर और घनश्याम का वर्णन
16:24 (प्रसंग) भक्तों के लिए कृष्ण का राम बनना
16:30 (प्रसंग) प्रेम के लिए कृष्ण का लीला रूप बदलना
16:39 (प्रसंग) भक्तों के लिए सेवक रूप धारण करना
16:45 (श्लोक) तेषाम सततयुक्तानाम भजताम प्रीति पूर्वकम
16:53 (श्लोक) ददामि बुद्धियोगं तम का पुनः स्मरण
17:02 (प्रसंग) बुद्धि सबके पास होना
17:11 (दृष्टांत) मच्छर की बुद्धि का उदाहरण
17:19 (दृष्टांत) मच्छर का सही जगह बैठना
17:27 (दृष्टांत) मच्छर की व्यवहारिक बुद्धि
17:36 (प्रसंग) सामान्य बुद्धि और बुद्धियोग का अंतर
17:45 (प्रसंग) भगवान की कृपा से बुद्धि का प्रकाश
17:53 (प्रसंग) बुद्धि के दुरुपयोग का परिणाम
17:59 (प्रसंग) बुद्धि के सदुपयोग का मार्ग
18:08 (प्रसंग) प्रेम से ज्ञान, क्रिया और नियंत्रण प्राप्त होना
18:17 (प्रसंग) ज्ञान, प्रेम और क्रिया का संतुलन
18:25 (प्रसंग) कर्म करते समय भगवान भाव रखना
18:32 (प्रसंग) पुत्र को कन्हैया मानकर सेवा करना
18:42 (प्रसंग) दान देते समय भगवान भाव रखना
18:48 (प्रसंग) भिखारी के रूप में भगवान का अवसर
18:58 (प्रसंग) देने से अपना कल्याण होना
19:04 (प्रसंग) भगवान सेवा का अवसर देते हैं
19:12 (दृष्टांत) स्वामी अखंडानंद के शिष्य को दान की घटना
19:21 (संवाद) शिष्य का दान अस्वीकार करना
19:29 (संवाद) महिला का भावपूर्ण उत्तर
19:39 (प्रसंग) देने की भावना का महत्व
19:48 (प्रसंग) सेवा से आत्म कल्याण होना
19:57 (प्रसंग) भगवान को प्रेम की आवश्यकता
20:06 (प्रसंग) प्रेम मांगने का उद्देश्य भक्त का कल्याण
20:15 (प्रसंग) प्रेम का सार्वभौमिक महत्व
20:23 (प्रसंग) प्रेम से सभी आकर्षित होना
20:32 (प्रसंग) प्रेम से पशु, मनुष्य और देवता वश होना
20:40 (प्रसंग) प्रेम से परमात्मा भी वश होना
20:48 (प्रसंग) प्रेम के विकृत रूप काम और लोभ
20:56 (प्रसंग) परमात्मा प्रेम से बंदगी होना
21:04 (प्रसंग) प्रेम का सांसारिक वस्तुओं में बिखरना
21:12 (प्रसंग) बाहरी रूपों से प्रेम का उदाहरण
21:21 (प्रसंग) दिल को सजाने का संदेश
21:30 (भजन) मत कर रे गर्व गुमान पद
21:36 (भजन) संसार की नश्वरता का वर्णन
21:42 (भजन) पतंग के रंग का उदाहरण
21:50 (प्रसंग) मकान और धन को अपना कहना
21:56 (प्रसंग) वस्तुएं मालिक को नहीं पहचानती
22:05 (प्रसंग) वस्तुओं को अपना कहने की आदत
22:15 (प्रसंग) जीवन की छोटी वस्तुओं को अपना कहना
22:24 (प्रसंग) भगवान को अपना बनाने का संदेश
22:32 (प्रसंग) भगवान मेरे हैं मैं भगवान का हूं
22:38 (प्रसंग) यज्ञ, दान और पुण्य का महत्व
22:45 (प्रसंग) भगवान से संबंध की भावना
22:54 (प्रसंग) अंतरंग साधना का महत्व
23:03 (प्रसंग) भगवान भाव से दान का फल
23:12 (प्रसंग) अनंत भाव से दान का अनंत फल
23:19 (दृष्टांत) चपरासी को चाय देने का उदाहरण
23:29 (दृष्टांत) कलेक्टर को चाय देने का उदाहरण
23:37 (दृष्टांत) राष्ट्रपति को जल देने का उदाहरण
23:46 (प्रसंग) परमात्मा को प्रेम देने का महत्व
23:53 (प्रसंग) परमात्मा कृपा से कुल का कल्याण
24:02 (श्लोक) भजताम प्रीति पूर्वकम ददामि बुद्धियोगं तम
24:09 (प्रसंग) बुद्धि और बुद्धियोग का अंतर
24:19 (दृष्टांत) आइंस्टीन का उदाहरण
24:27 (संवाद) आइंस्टीन से सफलता का रहस्य पूछना
24:34 (दृष्टांत) ध्यान साधना का रहस्य बताना
24:43 (प्रसंग) ध्यान से बुद्धियोग की प्राप्ति
24:51 (प्रसंग) सात केंद्रों का वर्णन
24:58 (प्रसंग) मूलाधार से अनाहत केंद्र तक का वर्णन
25:09 (प्रसंग) केंद्र के अनुसार विचार बदलना
25:17 (प्रसंग) सज्जन से गलती होने का कारण
25:26 (प्रसंग) दुर्जन से भी अच्छे कर्म होना
25:34 (प्रसंग) नीचे केंद्र में नकारात्मक भाव
25:44 (प्रसंग) ऊपर केंद्र में सद्गुणों का उदय
25:52 (प्रसंग) क्रोध में हाथ नीचे जाना
26:00 (प्रसंग) प्रेम में हाथ ऊपर उठना
26:08 (प्रसंग) भगवान स्मरण में हाथ ऊपर जाना
26:15 (श्लोक) ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशे अर्जुन तिष्ठति
26:23 (प्रसंग) परमात्मा का हृदय में निवास
26:30 (प्रसंग) नश्वर वस्तुओं में उलझना
26:37 (प्रसंग) प्रेम स्वरूप परमात्मा से वंचित होना
26:46 (प्रसंग) सत्संग का स्मरण संदेश
26:52 (प्रसंग) भगवान में प्रेम न लगने की समस्या
27:00 (दृष्टांत) सूखा रोग और मिश्री का उदाहरण
27:08 (दृष्टांत) मिश्री चूसने से रोग मिटना
27:15 (दृष्टांत) भगवान नाम से हृदय का सूखापन मिटना
27:23 (प्रसंग) भगवान नाम से प्रेम जागना
27:34 (प्रसंग) भजन को टालने की प्रवृत्ति
27:44 (दृष्टांत) अंग्रेज तहसीलदार और घोड़े की कथा
27:53 (दृष्टांत) घोड़े का खटखट से डरना
28:02 (दृष्टांत) पानी पिलाने की घटना
28:11 (संवाद) किसान और तहसीलदार का संवाद
28:20 (संवाद) खटखट बंद करने की मांग
28:29 (संवाद) किसान का उत्तर
28:37 (दृष्टांत) खटखट चालू होने पर पानी मिलना
28:44 (प्रसंग) कार्य करते हुए ही साधना करना
28:51 (प्रसंग) जीवन के बीच भजन करने का संदेश
29:00 (प्रसंग) साधकों को नाम स्मरण का संदेश
29:09 (कीर्तन) कृष्ण कन्हैया की जय
29:17 (कीर्तन) कथा में आनंद का वर्णन
29:24 (कीर्तन) हरि हरि बोल का उच्चारण
29:34 (प्रसंग) हरि बोल से चेतना ऊपर उठना
29:41 (प्रसंग) गौरांग महाप्रभु का कीर्तन
29:47 (दृष्टांत) मीरा के कीर्तन में अकबर का जाना
29:58 (प्रसंग) प्रेम की एक बूंद का महत्व
30:07 (प्रसंग) बाहरी सुख से आंतरिक तृप्ति न होना
30:16 (प्रसंग) प्रेम प्रसाद के बिना जीवन में अधूरापन
30:16 (प्रसंग) संसार में घूमने के बाद भी प्रेम की आवश्यकता का वर्णन
30:24 (प्रसंग) विदेशों से घूमकर अंत में साईं प्रेम की प्याली की आवश्यकता
30:31 (प्रसंग) परमात्मा प्रेम की सबको आवश्यकता — धनी, निर्धन, स्त्री, पुरुष
30:39 (दृष्टांत) अमेरिका में लोग बिल्ली-कुत्तों को प्रेम से खिलाते हैं
30:48 (प्रसंग) भारतवासियों का राम-कृष्ण को मक्खन-मिश्री अर्पण करने का सौभाग्य
30:56 (प्रसंग) भगवान को अर्पण किए बिना खाने की प्रवृत्ति पर संकेत
31:04 (प्रसंग) जो भगवान को प्रेम नहीं करते वे संसार में आसक्ति करते हैं
31:12 (प्रसंग) स्वार्थपूर्ण प्रेम और पवित्र प्रेम का अंतर
31:19 (प्रसंग) स्वार्थ के कारण प्रेम का विकृत रूप
31:29 (भजन) नारायण नारायण का उच्चारण
31:35 (प्रसंग) व्यवहार में धैर्य और समझ जोड़ने का उपदेश
31:45 (प्रसंग) संसार की वस्तुओं की क्षणभंगुरता पर चिंतन
31:53 (काव्य) संसार की नश्वरता पर काव्यात्मक पंक्तियाँ
32:00 (काव्य) महलों और वैभव के नष्ट होने का वर्णन
32:08 (काव्य) यश और वैभव के न टिकने का संकेत
32:17 (काव्य) संसार के दृश्य नज़ारों की नश्वरता
32:23 (काव्य) मानव को मिले तन रूपी रत्न का स्मरण
32:31 (प्रसंग) मनुष्य का अहंकार और अपनेपन का भ्रम
32:38 (प्रसंग) घर, मकान, दुकान, धन को अपना मानने की भूल
32:48 (प्रसंग) सब कुछ भगवान का है यह सत्य
32:56 (प्रसंग) यह समझ आने पर प्रेमपूर्ण व्यवहार का आरंभ
33:06 (प्रसंग) “हमारा-हमारा” भाव से आत्मा का नुकसान
33:12 (काव्य) मानव की भूल पर पुनः चेतावनी
33:19 (काव्य) संसार के मोह में उलझने का वर्णन
33:26 (काव्य) अंत में मृत्यु और कफ़न का अनिश्चित होना
33:32 (प्रसंग) मृत्यु की अनिश्चितता का स्मरण
33:40 (प्रसंग) जीवन की यात्रा का अचानक समाप्त होना
33:49 (प्रसंग) ट्रेन और यात्रा के उदाहरण से जीवन की अनिश्चितता
33:58 (प्रसंग) बस और विमान के निश्चित समय का उदाहरण
34:06 (प्रसंग) मनुष्य जीवन के प्रस्थान का अनिश्चित होना
34:16 (प्रसंग) शरीर की यात्रा कब समाप्त हो जाए पता नहीं
34:25 (दृष्टांत) बस से उतरते ही मृत्यु का उदाहरण
34:34 (दृष्टांत) बीमार व्यक्ति के अचानक मृत्यु का उदाहरण
34:43 (दृष्टांत) कथा में मिले व्यक्ति की अचानक मृत्यु
34:49 (प्रसंग) जीवन का अचानक समाप्त होना
34:58 (प्रसंग) मृत्यु की अनिवार्यता
35:06 (प्रसंग) मृत्यु निश्चित है इसलिए प्रेम करना आवश्यक
35:13 (प्रसंग) शरीर के चलने से पहले आत्मिक यात्रा प्रारंभ करने का उपदेश
35:21 (प्रसंग) आत्मा की अचल अवस्था प्राप्त करने का संदेश
35:29 (श्लोक) तेषाम सततयुक्तानाम का उच्चारण
35:45 (श्लोक) भजताम प्रीति पूर्वकम का जप
36:00 (श्लोक) ददामि बुद्धियोगं तम का जप
36:20 (श्लोक) येन मामुपयान्ति ते का जप
36:36 (प्रसंग) मंदिर में जाते समय अहंकार छोड़ने का उपदेश
36:48 (प्रसंग) मंदिर में खाली मन से प्रवेश करने का संदेश
36:58 (प्रसंग) “मैं भगवान का हूँ” ऐसा भाव रखने का निर्देश
37:06 (प्रसंग) मूर्ति दर्शन के तीन स्तरों का वर्णन
37:13 (प्रसंग) भौतिक दृष्टि से मूर्ति पत्थर लगना
37:23 (प्रसंग) दैविक दृष्टि से भगवान का रूप देखना
37:31 (प्रसंग) सनातन धर्म की अद्भुत परंपरा का वर्णन
37:37 (प्रसंग) गणपति या शिव की मूर्ति बनाकर पूजा करने की परंपरा
37:47 (प्रसंग) पूजा के बाद मूर्ति का विसर्जन
37:55 (दृष्टांत) गुड़ के गणपति बनाने वाले भक्त की कथा
38:04 (दृष्टांत) पत्नी के न होने पर ब्राह्मण का उपाय
38:11 (दृष्टांत) गुड़ से भगवान को भोग लगाने का उपाय
38:20 (दृष्टांत) गणपति के पेट से गुड़ निकालकर भोग लगाना
38:27 (मंत्र) पानाय स्वाहा आदि मंत्रोच्चार
38:33 (मंत्र) पूजा मंत्रों का उच्चारण
38:42 (प्रसंग) भगवान को बुलाने-विदा करने की अज्ञानता का स्वीकार
38:51 (प्रसंग) अहंकार मिटाने के लिए मूर्ति पूजा की व्यवस्था
39:00 (प्रसंग) सुपारी या गुड़ के भगवान में भी भगवद्-भाव
39:07 (प्रसंग) पूजा से अहंकार ढीला करना
39:14 (प्रसंग) मूर्ति विसर्जन के बाद भी भगवान का न नाराज़ होना
39:22 (प्रसंग) भगवान और भक्त के बीच प्रेम का महत्व
39:30 (प्रसंग) ईगो हटाने के लिए पूजा की परंपरा
39:39 (प्रसंग) पुजारी और भक्त दोनों का भाव
39:46 (प्रसंग) भगवान का भाव प्रधान होना
39:54 (कथा) युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण की कथा प्रारंभ
40:03 (कथा) युद्ध के बाद युधिष्ठिर का राजगद्दी से विरक्ति
40:10 (कथा) तप करने जाने की इच्छा
40:17 (कथा) श्रीकृष्ण का समझाना
40:25 (कथा) कलियुग आने की चेतावनी
40:32 (कथा) युधिष्ठिर को समझाने का प्रयास
40:39 (कथा) पाँचों पांडवों को वन में अनुभव करने भेजना
40:48 (कथा) पांडवों के अलग-अलग अनुभव
40:55 (दृष्टांत) युधिष्ठिर द्वारा दो सूंड वाला हाथी देखना
41:05 (दृष्टांत) भीम द्वारा गाय का बछड़े को अत्यधिक चाटना
41:14 (दृष्टांत) अर्जुन द्वारा शास्त्र लिखे पंखों वाला पक्षी देखना
41:23 (दृष्टांत) पक्षी का मांस खाना
41:32 (दृष्टांत) चारों ओर कुएँ और बीच का सूखा कुआँ
41:40 (दृष्टांत) पाँचवें भाई द्वारा पहाड़ से लुढ़कती चट्टान
41:48 (दृष्टांत) चट्टान का पेड़ों से टकराना
41:56 (दृष्टांत) चट्टान का दूसरी चट्टानों से टकराना
42:04 (दृष्टांत) चट्टान का छोटे पौधे से रुक जाना
42:13 (प्रसंग) पाँचों पांडवों का कृष्ण के पास लौटना
42:22 (प्रसंग) आश्चर्यों का वर्णन
42:29 (प्रसंग) दो सूंड वाले हाथी का अर्थ — भ्रष्ट शासक
42:37 (प्रसंग) नौकरी और रिश्वत दोनों से कमाई
42:45 (प्रसंग) गाय-बछड़े का अर्थ — अति मोह में फँसा मनुष्य
42:58 (प्रसंग) बच्चों के प्रति अत्यधिक मोह
43:07 (प्रसंग) बच्चों पर निर्भरता का खतरा
43:13 (प्रसंग) परमात्मा पर भरोसा रखने का उपदेश
43:22 (प्रसंग) धन-कमाई पर अधिक भरोसा न रखने का संदेश
43:30 (प्रसंग) शरीर से सेवा और मन से भक्ति का उपदेश
43:40 (प्रसंग) दिखावे में धन खर्च करने की प्रवृत्ति
43:49 (प्रसंग) पड़ोसी की भूख की उपेक्षा
43:58 (प्रसंग) कलियुग के मनुष्य के लक्षण
44:06 (प्रसंग) शास्त्र बोलने वाले लेकिन स्वार्थी लोग
44:15 (प्रसंग) पंडित-मौलवी का स्वार्थी आचरण
44:23 (प्रसंग) विरले संतों का मिलना
44:29 (प्रसंग) कलियुग में धर्म का पतन
44:36 (प्रसंग) चट्टान का अर्थ — मनुष्य का पतन
44:45 (प्रसंग) धन और सत्ता का रोक न पाना
44:53 (प्रसंग) भगवान के नाम का छोटा पौधा ही रोकता है
45:02 (कथा) रावण और कुंभकर्ण संवाद
45:08 (कथा) सीता हरण की चर्चा
45:17 (कथा) राम का रूप धारण करने की सलाह
45:26 (कथा) रावण का राम चिंतन अनुभव
45:36 (कथा) राम का चिंतन करने से दृष्टि बदलना
45:44 (प्रसंग) भगवान के चिंतन से विकार का परिवर्तन
45:51 (प्रसंग) भारत में जन्म का सौभाग्य
46:00 (प्रसंग) सनातन धर्म में जन्म का महत्व
46:08 (प्रसंग) श्रद्धा का दीप जलना
46:16 (प्रसंग) ठाकुर जी के दर्शन का सौभाग्य
46:23 (प्रसंग) सत्संग से अंतःकरण की यात्रा
46:32 (कथा) ब्रह्मज्ञानी संत और रोहित की कथा प्रारंभ
46:41 (कथा) रोहित का पिता के साथ संत के पास जाना
46:50 (कथा) पिता के देहांत के बाद रोहित का न आना
46:58 (प्रसंग) संत का संसार में पड़ने और प्रेम में तरने का अंतर
47:08 (प्रसंग) विवेकपूर्वक संसार में रहने का संदेश
47:16 (प्रसंग) विवाह और धन कमाने की अनुमति
47:24 (प्रसंग) विकारों पर अधिकार रखने का उपदेश
47:32 (प्रसंग) भगवान के प्रेम से बुद्धियोग मिलना
47:39 (दृष्टांत) वल्लभाचार्य और श्रीनाथजी की कथा
47:47 (दृष्टांत) भगवान द्वारा दूध स्वीकार करना
47:56 (दृष्टांत) नरो नाम की लड़की का प्रेम
48:04 (दृष्टांत) भगवान द्वारा उसका दूध स्वीकार करना
48:13 (प्रसंग) प्रेम से पत्थर में भी भगवान प्रकट होना
48:21 (प्रसंग) भगवान को प्रतिमा में देखने का सौभाग्य
48:30 (प्रसंग) सुबह-शाम भगवान से संबंध जोड़ने का उपदेश
48:39 (प्रसंग) रात को भगवान के चरणों में सोने का भाव
48:47 (प्रसंग) वैकुंठ भाव में सोने का संदेश
48:55 (प्रसंग) भगवान को माँ की गोद जैसा मानना
49:04 (प्रसंग) बुद्धियोग प्राप्त होने का संकेत
49:14 (कथा) रोहित की शादी और संत की याद
49:22 (कथा) विवाह के तीन फेरे के बाद रुकना
49:29 (कथा) विवाह स्थगित कर संत के पास जाना
49:35 (कथा) यात्रा में धर्मशाला में रुकना
49:44 (कथा) वासना का प्रलोभन
49:51 (कथा) कमरे के बाहर पहरेदार का दर्शन
50:00 (कथा) बार-बार पहरेदार का दिखना
50:08 (प्रसंग) सूर्य नमस्कार से बुद्धि का विकास
50:17 (कथा) गुरु के पास पहुँचना
50:25 (कथा) गुरु को पूरी घटना बताना
50:35 (कथा) गुरु का रात को पहरेदार बनकर रक्षा करना
50:42 (प्रसंग) संत-प्रेम से रक्षा होना
50:49 (प्रसंग) वस्तुओं से प्रेम करने का निष्फल होना
50:57 (प्रसंग) भगवान और संत से प्रेम का महत्व
51:13 (भजन) अब प्रभु कृपा करो यही भाँति
51:39 (भजन) अब मोहे भाव भरोस हनुमंता
51:54 (भजन) जय सियाराम जय जय सियाराम
52:04 (भजन) एक घड़ी आधी घड़ी
52:13 (भजन) तुलसी संगत साध की
52:31 (भजन) राम परवाना भेजिया
52:49 (भजन) वैकुंठ में साध संगत का महत्व
52:57 (भजन) जय सियाराम जय जय सियाराम
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