बुधवार, 18 मार्च 2026

ब्रह्मज्ञान - आश्रम संध्या सत्संग - 13-03-2026 सुबह

 ब्रह्मज्ञान - आश्रम संध्या सत्संग - 13-03-2026 सुबह


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0:00 (सम्वाद) मित्र को शत्रु भाव से देखने पर दुख, जगत भावना मात्र है
0:10 (सम्वाद) जैसी भावना वैसा जगत अनुभव होता है
0:16 (सम्वाद) परमात्मा का भाव करने से जगत की सत्यता मिटती है
0:25 (सम्वाद) दृष्टि और विचार के अनुसार जगत दिखाई देता है

0:32 (दृष्टांत) जगत का अंत जानना असंभव, वैज्ञानिक भी असफल
0:39 (दृष्टांत) प्रकृति अनंत का अंश है, उसका अंत नहीं
0:46 (दृष्टांत) अनंत को जानो तो प्रकृति तुच्छ लगती है
1:01 (कथा) विपश्चित राजा ने जगत का अंत जानने का प्रयास किया
1:17 (कथा) चार शरीर बनाकर चारों दिशाओं में खोज की
1:33 (कथा) स्थूल और सूक्ष्म शरीर से भी अंत नहीं मिला
1:42 (कथा) अंततः थककर निष्कर्ष — माया का अंत नहीं

2:06 (दृष्टांत) अनेक ग्रह और अनेक ब्रह्मांड हैं
2:12 (दृष्टांत) सृष्टि अनंत है, कोई सीमा नहीं

2:20 (कथा) विपश्चित राजा का हिरण रूप में जन्म
2:35 (कथा) वशिष्ठ जी द्वारा पुनः राजा रूप में प्रकट
3:06 (कथा) पूर्व संस्कार से अग्नि में कूदना और रूप परिवर्तन
3:29 (कथा) राजा विपश्चित ने अपने अनुभव बताए

3:53 (कथा) लीलावती और राजा पदम का प्रसंग
4:08 (कथा) अमरता हेतु सरस्वती उपासना
4:36 (कथा) वरदान — मृत्यु के बाद भी उसी मंडल में रहना
5:00 (कथा) राजा पदम युद्ध में मृत्यु
5:22 (कथा) सरस्वती द्वारा सूक्ष्म यात्रा
5:48 (कथा) पति को दूसरे लोक में राजा रूप में देखना
6:06 (दृष्टांत) वासना अनुसार मृत्यु के बाद अनुभव
6:31 (दृष्टांत) जैसे स्वप्न में वासना अनुसार दृश्य

6:48 (कथा) अन्य सृष्टियों में प्रवेश
7:03 (कथा) पूर्व जन्म का घर और पुत्र देखना
7:19 (कथा) पूर्व जन्म — अरुंधति और वशिष्ठ ब्राह्मण
7:43 (कथा) वासना से जन्म परिवर्तन और भोग

8:07 (दृष्टांत) अलग-अलग सृष्टियों में समय का भेद
8:31 (दृष्टांत) कहीं आयु बहुत छोटी, कहीं बहुत बड़ी
8:54 (दृष्टांत) मनुष्य आयु ब्रह्मा के सामने क्षण समान

9:03 (सम्वाद) कल्पनाओं में मनुष्य दुखी होता है
9:17 (सम्वाद) आत्मा को जानने से दुख का अंत
9:24 (सम्वाद) आत्मज्ञान ही सार है
9:38 (दृष्टांत) चैतन्य को जानने से ब्रह्मांड का ज्ञान
9:55 (दृष्टांत) मिट्टी और सोना उदाहरण — मूल जानो

10:10 (सम्वाद) देवताओं की भावना से आगे ब्रह्म को जानो
10:34 (सम्वाद) “मैं” का स्रोत जानना आवश्यक
10:49 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी करता हुआ भी अकर्ता

11:13 (दृष्टांत) पिता का बालक के साथ व्यवहार
11:26 (दृष्टांत) ज्ञानी संसार में रहते हुए भी अलग
11:58 (दृष्टांत) श्रीकृष्ण आदि का व्यवहार और अकर्ता भाव

12:21 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी को समझना कठिन
12:36 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी की स्थिति वही जानता है
12:55 (सम्वाद) ज्ञान प्राप्ति के बाद व्यक्ति छुपा रहता है

14:01 (सम्वाद) भगवान भी अपने को साधारण बताते हैं
14:33 (सम्वाद) ज्ञानी विभिन्न भूमिकाएँ निभाता है
15:04 (दृष्टांत) ज्ञानी में संपूर्ण ब्रह्मांड समाहित

15:44 (सम्वाद) एक बार ब्रह्म अनुभव से सब रहस्य स्पष्ट
16:00 (सम्वाद) भावना अनुसार सुख-दुख अनुभव
16:27 (सम्वाद) धर्म — आत्मा की ओर ले जाए
16:43 (सम्वाद) अधर्म — आसक्ति और दुख बढ़ाए

17:09 (सम्वाद) इंद्रिय नियंत्रण ही धर्म मार्ग
17:24 (दृष्टांत) सृष्टि का आधार क्रम — पृथ्वी से परमात्मा
17:54 (दृष्टांत) जैसे जल में लील, वैसे ब्रह्म में सृष्टि

18:18 (दृष्टांत) ब्रह्म से जीव उत्पन्न, सबमें वही ब्रह्म
18:45 (सम्वाद) आत्मज्ञान से जगत ब्रह्म रूप दिखता है

18:53 (दृष्टांत) शक्कर के खिलौनों का उदाहरण
19:33 (सम्वाद) ब्रह्म दृष्टि से सब ब्रह्म ही है

19:57 (सम्वाद) आत्मज्ञान दुर्लभ है, साधना चाहिए
20:12 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञान सर्वोच्च पद

20:30 (सम्वाद) ज्ञानी प्रवृत्ति में भी निवृत्ति देखता है
20:54 (सम्वाद) कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म

21:19 (सम्वाद) ब्रह्म सुख और ज्ञान आवश्यक
21:37 (सम्वाद) गुरु कृपा से ही रुचि होती है

21:52 (सम्वाद) मनन और ध्यान से ज्ञान स्थिर
22:09 (सम्वाद) एकांत और साधना आवश्यक
22:31 (सम्वाद) ज्ञान के लिए संयम और तत्परता

22:47 (सम्वाद) मनुष्य जन्म का उद्देश्य आत्मज्ञान
23:04 (सम्वाद) भौतिक वस्तुएं अंत में व्यर्थ

23:23 (कथा) नचिकेता और यमराज संवाद
23:45 (कथा) नचिकेता ने भोग अस्वीकार किए
24:23 (कथा) ब्रह्मज्ञान ही सर्वोत्तम वरदान

25:03 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञान से स्थायी सुख
25:44 (सम्वाद) दृढ़ संकल्प से ही प्राप्ति

26:06 (सम्वाद) ब्रह्मज्ञानी न पाप से गिरता न पुण्य से उठता
26:30 (सम्वाद) मृत्यु में भी ज्ञानी शांत रहता

26:50 (सम्वाद) संसार की वस्तुएं नश्वर
27:12 (दृष्टांत) बच्चा चॉकलेट को ही मूल्यवान समझता

27:34 (सम्वाद) जीवन व्यर्थ न गँवाओ
28:05 (सम्वाद) नाम और शरीर दोनों मिथ्या

28:30 (सम्वाद) असली “मैं” को जानना आवश्यक
28:46 (सम्वाद) तीन मिनट का आत्मज्ञान भी मुक्ति दे सकता

29:13 (सम्वाद) परमात्मा को जानने से द्वैत समाप्त
29:31 (दृष्टांत) गुलाब के ज्ञान का उदाहरण

29:49 (सम्वाद) परमात्मा का ज्ञान स्थायी होता है

30:06 (सम्वाद) स्मृति होने पर दुख मिट जाता है 



 


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