आश्रम संध्या सत्संग 24-02-2026 शाम | Surat Holi 2008
TIME STAMP INDEX
00:05 भगवान ने कहा तपस्वी से योगी अधिक है (उपदेश)
00:13 तपस्वी तप करके मनचाही वस्तु भोगता है फिर गिर जाता है (उपदेश)
00:20 ज्ञानी को चार वेदों और अतल वितल तलातल रसातल पाताल का ज्ञान है पर आत्मज्ञान नहीं (उपदेश)
00:27 आत्मज्ञान बिना ज्ञानी भी थक जाता है (उपदेश)
00:34 तपस्वी से योगी अधिक है ज्ञानी से भी योगी अधिक (उपदेश)
00:40 कर्मी कर्म करने में कुशल है पर योगी उससे भी श्रेष्ठ (उपदेश)
00:48 बड़े कर्मकर्ता और उद्योगपति सारी धरती का राजा हो जाए तो भी अमर नहीं होता (उपदेश)
00:56 धनवान संभाल संभाल कर जीता है पर मर जाता है (उपदेश)
01:03 उसे अमरता का अनुभव नहीं होता (उपदेश)
01:09 तपस्वी ज्ञानी और कर्मी से योगी श्रेष्ठ है (उपदेश)
01:14 योगी कर्मी तपस्वी और विद्वान से अधिक है (उपदेश)
01:23 इसलिए अर्जुन तू योगी हो जा (संवाद)
01:30 युद्ध के मैदान में हाथी घोड़े और शत्रु सेना के बीच उपदेश (प्रसंग)
01:38 श्री कृष्ण कहते तस्मात योगी बाबा अर्जुन (संवाद)
01:47 आत्मा से शाश्वत से एकाकार होकर युद्ध कर (उपदेश)
01:53 तब पाप नहीं लगेगा विफलता नहीं आएगी (उपदेश)
02:00 सच्चा योगी वह जो अंतरात्मा रूप में मुझसे मिले (उपदेश)
02:07 बाहर मंदिर में नहीं अंतरात्मा में मिलना है (उपदेश)
02:15 योगी नाम सर्वेश मदगतेन अंतरात्मा (श्लोक)
02:22 श्रद्धावान भजते यो माम समयुक्तात्मा (श्लोक)
02:27 अंतरात्म भाव से भजने वाला उत्तम योगी (उपदेश)
02:32 भगवान के मत में वही श्रेष्ठ योगी (उपदेश)
02:38 तपस्वी विद्वान कर्मी से योगी श्रेष्ठ (उपदेश)
02:44 पर सब योगियों में अंतरात्म भाव से भजने वाला उत्तम (उपदेश)
03:00 श्रद्धा से परमेश्वर में शांति पाने वाला श्रेष्ठ (उपदेश)
03:12 भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा शिवजी ने पार्वती से कहा (प्रसंग)
03:28 नास्ति ध्यानम समं तीर्थम नास्ति ध्यानम समं यज्ञम (श्लोक)
03:41 ध्यान के समान कोई तीर्थ यज्ञ दान नहीं (उपदेश)
03:48 हे पार्वती इसलिए ध्यान करना चाहिए (संवाद)
04:03 निष्काम सेवा बिना ध्यान संभव नहीं (उपदेश)
04:11 भगवान का महत्व बिना धर्म का आदर नहीं (उपदेश)
04:18 जीवन की कदर बिना शास्त्र गुरु भगवान की कदर नहीं (उपदेश)
04:25 मनुष्य जीवन बहुत कीमती है (उपदेश)
04:32 अनेक योनियों के बाद मनुष्य जन्म मिला (उपदेश)
04:38 अन्य योनियों में दुख ही दुख (उपदेश)
04:45 मनुष्य शरीर दुर्लभ है (उपदेश)
04:50 दुर्लभो मनुष्य देह क्षणभंगुर है (श्लोक)
04:59 मृत्यु कब हो जाए पता नहीं (उपदेश)
05:12 दुर्लभ और क्षणभंगुर जीवन में शाश्वत कार्य कर लो (उपदेश)
05:22 बाकी सब वस्तुएं यहीं रह जाएंगी (उपदेश)
05:33 चाहे कुछ भी मिला सब यहीं रह जाएगा (उपदेश)
05:40 अपने आत्मदेव को अभी मिलो (उपदेश)
05:48 मरने के बाद भी जो रहता है उसे अभी पहचानो (उपदेश)
05:55 विवेक विकसित करो ताकि योनि भटकाव न हो (उपदेश)
06:02 स्वतंत्र हो जाओ गर्भ में न आना पड़े (उपदेश)
06:09 परमात्मा को दूर दुर्लभ या पराया मत मानो (उपदेश)
06:26 भविष्य में मिलेगा ऐसा मत सोचो (उपदेश)
06:32 अपने को अयोग्य मत मानो (उपदेश)
06:37 मनुष्य जन्म श्रद्धा और सत्संग योग्यता का प्रमाण (उपदेश)
06:50 ब्रह्मज्ञानी गुरु का सत्संग मिलना कृपा है (प्रसंग)
07:02 गुरु में श्रद्धा है तो अयोग्यता मानना भूल (उपदेश)
07:14 अपने को दुखी अयोग्य धनवान दरिद्र पापी स्त्री पुरुष मानना मान्यता है (उपदेश)
07:35 जैसे मकड़ी जाले में फंसती वैसे हम मान्यताओं में (दृष्टांत)
07:43 ज्ञान की कैंची से जाला काटो मैं भगवान का हूं भगवान मेरे हैं (उपदेश)
07:57 भगवान सच्चिदानंद और सबके अंतरात्मा हैं (उपदेश)
08:08 वे पहले थे अब हैं बाद में रहेंगे (उपदेश)
08:15 दुख और सुख से पहले बाद में भी आत्मा रहती है (उपदेश)
08:27 अंतःकरण में आत्मा व्याप्त हो तो परमात्मा (उपदेश)
08:34 परमात्मा अत्यंत निकट है (उपदेश)
08:41 उसमें प्रीति और शांति का अभ्यास करो (उपदेश)
08:47 काम और वाणी से थकान पर विश्रांति सच्चिदानंद से (उपदेश)
09:01 नींद में शरीर को विश्रांति मिलती है (उपदेश)
09:14 ध्यान में संकल्प रहित अवस्था उच्च विश्रांति (उपदेश)
09:29 कुछ दिखे न दिखे आग्रह मत रखो (उपदेश)
09:42 अवस्था की इच्छा मत रखो (उपदेश)
09:57 अवस्थाएं आती जाती हैं जो शेष है उसमें टिक जाओ (उपदेश)
10:12 उसकी स्मृति उच्च और सहज साधन (उपदेश)
10:21 स्वासों की गिनती विश्रांति योग (उपदेश)
10:38 शांत होकर सोओ तो योगनिद्रा की गति (उपदेश)
10:45 योगनिद्रा रचनात्मक शक्ति देती है (उपदेश)
11:00 संसार में सफलता पाकर लोग खुश हो जाते (प्रसंग)
11:14 हम तुम्हें और आगे ले जाना चाहते (संवाद)
11:24 वीजा मिल गई तो क्या हुआ आगे बढ़ो (संवाद)
11:30 ईश्वर बिना सब खिलौने हैं (उपदेश)
11:35 लोग सेवा करते मानते बापू ऊंचे हैं (प्रसंग)
11:54 बापू जैसे ऊंचे उसमें तुम प्रवेश करो (उपदेश)
12:00 पारस लोहे को सोना करे संत करे आप समान (दृष्टांत)
12:15 जो मिला है उससे आगे बढ़ो (उपदेश)
12:23 समाज से दो व्यक्ति दो जिन्हें बापू बना लूं (संवाद)
12:37 ऊंचाई थोड़ी मिलते ही लोग रुक जाते (उपदेश)
12:50 विद्यार्थी कच्चा प्रिंसिपल बने तो हानि (दृष्टांत)
13:04 कंपाउंडर एमडी बने तो रोगी का नुकसान (दृष्टांत)
13:14 सच्चे सतगुरु दुर्लभ हैं (उपदेश)
13:28 जब सतगुरु मिले तो देर नहीं लगी (प्रसंग)
13:37 साधन भजन में टिके रहकर लोगों तक पहुंचाया (प्रसंग)
13:53 ईश्वर की शांति से बढ़कर जगत में कुछ नहीं (उपदेश)
14:01 जितना प्रेम संसार में उतना हरि में हो तो साक्षात्कार (उपदेश)
14:17 ईश्वर प्राप्ति की भूख लगाओ (उपदेश)
14:23 जो मिला वह छूटेगा (उपदेश)
14:47 जो जन्मा है मरेगा जो आया है जाएगा (उपदेश)
15:00 रूप अवस्था सब बदलेंगे शाश्वत आत्मा ही सत्य (उपदेश)
15:00 ऐसा कर लूं ऐसा करूं फिर बूढ़े होकर मरोगे कि नहीं मरोगे (उपदेश)
15:06 मरकर फिर जन्म और दुख इसलिए पहले आत्मा और ईश्वर को जान लो (उपदेश)
15:12 एक साधे सब साधे यह बात बार बार कही (उपदेश)
15:19 एक भक्त ने शादी के लिए गुरु से प्रार्थना की (प्रसंग)
15:25 गुरु ने कहा केवल शादी मत मांगना (संवाद)
15:32 शादी मांगोगे तो आगे और समस्याएं खड़ी होंगी (उपदेश)
15:39 बेटा नहीं होगा तो चिंता फिर उसकी शादी फिर चिंता (दृष्टांत)
15:45 गरीबी या वंश की चिंता अंतहीन (दृष्टांत)
15:59 इसलिए ऐसा वर मांगो कि सब एक साथ सिद्ध हो (उपदेश)
16:07 पुत्रवधू सोने के कलश में छाछ बिलोए ऐसा वर मांग (दृष्टांत)
16:14 इससे शादी पुत्र और संपत्ति सब मिल जाएगा (दृष्टांत)
16:26 पर ऐसा गुरु होना भी अंतिम समाधान नहीं (उपदेश)
16:34 क्योंकि अंत में सब नश्वर है बहू कलश पोते सब छूटेंगे (उपदेश)
17:03 इसलिए ईश्वर प्राप्ति का संकल्प लो (उपदेश)
17:09 ईश्वर मिल जाए तो अन्य सब आशीर्वाद दे सकोगे (उपदेश)
17:24 छोटा पद मत मांगो सर्वोच्च बनो (उपदेश)
17:35 पटवारी नहीं प्राइम मिनिस्टर बनो सब अधीन हो जाएगा (दृष्टांत)
17:51 परमात्मा का खजाना खुला है (उपदेश)
17:58 राजा राजी हो तो छोटी वस्तु मत मांगो (दृष्टांत)
18:11 राजा से राजा जैसा बनना मांगो (दृष्टांत)
18:28 परमात्मा में टिक जाओ सब उपलब्ध (उपदेश)
18:40 नानक कहे सतगुरु हंसते खेलते ज्ञान देता (उद्धरण)
19:00 गीता का ज्ञान साक्षात्कारी महापुरुष देता (उपदेश)
19:09 यह मार्ग संकीर्ण नहीं सीधी उड़ान है (उपदेश)
19:22 जैसे विमान से सीधा आगमन (दृष्टांत)
20:09 परमात्मा प्राप्ति शॉर्ट रास्ता है (उपदेश)
20:16 दुखी सुखी न हो सावधान रहो (उपदेश)
20:29 हर्ष शोक से परे मध्य में टिक जाओ (उपदेश)
20:36 शाश्वत ब्रह्म में मिलना लक्ष्य (उपदेश)
20:43 अच्छे कर्म करो निंदकों का संग त्यागो (उपदेश)
21:01 सूरदास प्रीतम दास को गुरु से मंत्र मिला (प्रसंग)
21:08 उन्होंने गुरु महिमा लिखी (प्रसंग)
21:17 गुरु को देहधारी मानना संशय नरक का कारण (उपदेश)
21:25 मूर्ति को पत्थर मानना भक्त का पतन (उपदेश)
21:36 मंत्र को अक्षर मानना जापक का नाश (उपदेश)
21:42 मंत्र मूर्ति गुरु तीनों परमात्मा की अभिव्यक्ति (उपदेश)
22:08 करना करना छोड़ परमात्मा में टिक (उपदेश)
22:22 आत्मा में शांत टिकना साधन (उपदेश)
22:32 एक बार टिक जाओ फिर मार्ग स्वतः खुलेगा (उपदेश)
22:40 नारायण नारायण का स्मरण (भजन)
22:48 सभा की शांति पर प्रसन्नता (प्रसंग)
23:05 बच्चों से बुजुर्ग तक शांत बैठना आत्मदेव की महिमा (प्रसंग)
23:18 यह उच्च साधना और संयम (उपदेश)
23:32 सेवा का महत्व झाड़ू लगाने वाला भी धन्य (उपदेश)
23:51 यहां सेवा भगवान की सेवा है (उपदेश)
24:08 भगवान के तीन स्वरूप आधिभौतिक आधिदैविक आध्यात्मिक (उपदेश)
24:23 परिवर्तन के पार जो रहे वही अध्यात्म (उपदेश)
24:37 भगवान को सीमित मत मानो वह सर्वव्यापक (उपदेश)
24:49 वह कर्मफलदाता नियामक हितैषी (उपदेश)
25:08 उनसे प्रीति हो तो द्वेष ठगी छूटे (उपदेश)
25:22 आलसी को पहले कर्म में लगाओ (उपदेश)
25:40 फिर अधर्म छोड़ धर्म कर्म करो (उपदेश)
25:57 विहित कर्म फल की इच्छा से न करो (उपदेश)
26:12 ईश्वर अर्पण बुद्धि से निष्काम करो (उपदेश)
26:24 फिर कर्तापन भी छोड़ो (उपदेश)
26:36 बल्ब मुख्यधारा से जुड़कर ही प्रकाश देता (दृष्टांत)
27:02 परमात्मा बिना मैं कुछ नहीं (उपदेश)
27:21 मैं धर्मात्मा हूं यह अहं अड़चन (उपदेश)
27:35 हर क्षण परमात्मा से जुड़कर ही कार्य (उपदेश)
27:42 चेतना से इंद्रियां कार्य करती हैं (उपदेश)
27:55 जो न बदले वही सत्य (उपदेश)
28:10 आवश्यकता और इच्छा में भेद (उपदेश)
28:22 इच्छा अनंत और दुःखकारक (उपदेश)
28:27 आवश्यकता सहज पूर्ण (उपदेश)
29:01 शरीर की आवश्यकता रोटी पानी कपड़ा आवास (उपदेश)
29:20 जीवात्मा की असली आवश्यकता परमात्मा प्राप्ति (उपदेश)
29:33 धन वैभव से भी असंतोष (उपदेश)
29:48 असली आवश्यकता आत्मा परमात्मा मिलन (उपदेश)
30:11 नकली इच्छाओं में फंसकर असली भूलना मूर्खता (उपदेश)
30:29 सत्संग से विवेक और बुद्धि पुष्ट होती है (उपदेश)
30:37 बुद्धि से विवेक नहीं बनता विवेक से बुद्धि बनती है (उपदेश)
30:42 बिनु सत्संग विवेक न होई राम कृपा बिनु सुलभ नई (उद्धरण)
30:48 विवेक दो प्रकार का सामान्य और मुख्य (उपदेश)
30:55 क्या खाना क्या नहीं यह सामान्य विवेक (उपदेश)
31:02 यह विवेक पशु पक्षी कीट में भी होता है (दृष्टांत)
31:14 शरीर संभालने का विवेक तुच्छ जीवों में भी (उपदेश)
31:26 कीड़ी बच्चों को बचाती यह नश्वर रक्षा का विवेक (दृष्टांत)
31:42 शाश्वत पाने का विवेक सत्संग से जागता (उपदेश)
31:54 सत्संग पाने वाले भाग्यशाली (उपदेश)
32:07 सत्संग से ज्ञान पुण्य विवेक बढ़ता (उपदेश)
32:25 सतगुरु के सत्संग से महान बनना सरल (उपदेश)
32:31 पांच वर्ष के ध्रुव की कथा (कथा)
32:40 ध्रुव को सौतेली मां ने अपमानित किया (कथा)
32:51 मां ने तपस्या और गुरु मंत्र का मार्ग बताया (संवाद)
33:06 ध्रुव वन में गुरु की खोज में निकले (कथा)
33:37 नारद जी मिले और मंत्र दिया ओम नमो भगवते वासुदेवाय (कथा)
33:48 प्राणायाम और एकाग्रता से मनोबल बढ़ा (कथा)
34:02 छह महीने में भगवान प्रकट हुए (कथा)
34:15 बालक ध्रुव को ईश्वर मिले बड़ों को नहीं (उपदेश)
35:08 मन को समझाओ ईश्वर प्राप्ति करो (उपदेश)
35:18 नारद जी की नीति सबको भगवान मार्ग पर लगाना (प्रसंग)
35:46 ईश्वर के लिए रोने की प्रार्थना (उपदेश)
36:22 संत ने कहा भगवान के लिए आंसू बहाओ (प्रसंग)
36:41 झूठमूठ रोना भी अंत में सच्चा बन गया (प्रसंग)
37:16 भगवान के लिए रोने में आनंद (उपदेश)
37:36 गुरु चित्र पर दृष्टि स्थिर रखने की विधि (साधना)
38:00 जीभ मध्य में रख श्वास गिनना तीसरी विधि (साधना)
38:19 तीर्थ जाना पर आत्म तीर्थ भूलना (उपदेश)
38:43 तीर्थ का अर्थ आत्म तीर्थ में प्रवेश (उपदेश)
39:03 शिव जी ने आत्म तीर्थ का महत्व बताया (उद्धरण)
39:50 सुनना जानना मानना अनुभव करना तीर्थत्व पूर्ण (उपदेश)
40:14 सात्विक आहार से सत्व बढ़े ज्ञान जागे (उपदेश)
40:30 प्याज लहसुन रज तम बढ़ाते (उपदेश)
40:39 दूध मूंग अनार अंगूर सात्विक (उपदेश)
40:50 बोलने में संयम आवश्यक (उपदेश)
41:12 मौन से शक्ति संचय और सत्व वृद्धि (उपदेश)
41:26 भोजन में संयम आवश्यकता अनुसार (उपदेश)
41:40 अधिक भोजन से कच्चा रस रोग (उपदेश)
41:59 हरड़ और शहद सेवन की सलाह (उपदेश)
42:32 स्थूल शरीर और सूक्ष्म मन का भेद (उपदेश)
43:04 संकल्प सूक्ष्म होकर भी शक्तिशाली (उपदेश)
43:33 इंद्रियां सूक्ष्म होकर स्थूल नियंत्रित करती (उपदेश)
43:45 पायलट सूक्ष्म होकर जहाज नियंत्रित करता (दृष्टांत)
44:05 ड्राइवर का सूक्ष्म संकल्प रेल चलाता (दृष्टांत)
44:17 सूक्ष्म स्थूल से अधिक व्यापक (उपदेश)
44:42 छोटी आंखें विशाल दृश्य देखती (दृष्टांत)
45:13 पांच ज्ञान इंद्रियां सूक्ष्म (उपदेश)
45:32 मन पांचों इंद्रियों को चलाता (उपदेश)
45:58 मन से भी बुद्धि अधिक सूक्ष्म (उपदेश)
46:03 बुद्धि के थोड़े से हिस्से में मन के फुरने रहते हैं (उपदेश)
46:08 फुरना रहित अवस्था बुद्धि और फुरने वाली अवस्था मन है (उपदेश)
46:14 बुद्धि ने निर्णय किया जाना है तो मन और इंद्रियां कार्य में लग गईं (दृष्टांत)
46:20 गाड़ी पैरों और हाथों के आधीन आई इंद्रियां मन के अधीन (दृष्टांत)
46:28 हाथ पैर इंद्रियों के अधीन इंद्रियां मन के अधीन मन बुद्धि के अधीन (उपदेश)
46:35 बुद्धि ने निर्णय किया हरिद्वार अमेरिका वाशी जाना है (दृष्टांत)
46:44 बुद्धि ने आदेश दिया तो सब अंग सक्रिय हो गए (उपदेश)
46:50 कितने पैर दौड़े कितने हाथ ताली बजाने लगे (दृष्टांत)
46:56 एक बुद्धि के निर्णय से अनेक साधन चल पड़े (दृष्टांत)
47:03 लोकल ट्रेनें कारें जहाज सब बुद्धि निर्णय से चले (दृष्टांत)
47:11 यह केवल एक का नहीं सबका व्यक्तिगत अनुभव (उपदेश)
47:20 जितना सूक्ष्म उतना समर्थ और व्यापक (उपदेश)
47:28 जितना सूक्ष्म उतना परमात्मा के निकट जितना स्थूल उतना दूर (उपदेश)
47:38 दुनिया अहंकारी की बातें नहीं सुनती (उपदेश)
47:49 घमंडी को दुनिया प्रेम नहीं करती (उपदेश)
47:58 घमंड स्थूल वस्तुओं का होता है (उपदेश)
48:03 धन और सत्ता का अहंकार रावण भाव है (दृष्टांत)
48:11 राम सबको प्रिय क्योंकि वे सूक्ष्म चैतन्य में स्थित (दृष्टांत)
48:23 बुद्धि से सूक्ष्म जीव और जीव से सूक्ष्म आत्मा (उपदेश)
48:32 आत्मा सबसे सूक्ष्म और व्यापक (उपदेश)
48:41 जितना आत्मा में शांत उतना श्रेष्ठ (उपदेश)
48:46 आत्मा के आकर्षण से प्रेम उत्पन्न (उपदेश)
48:52 प्रश्न कि बापू इतने प्रिय क्यों लगते (संवाद)
49:01 आज उस प्रश्न का उत्तर मिला (संवाद)
49:15 राम और कृष्ण आत्मा में स्थित इसलिए प्रिय (दृष्टांत)
49:30 आत्मा में रहने से संतोष (उपदेश)
49:39 ओम नारायण नारायण नारायण (भजन)
49:46 गुरु दीक्षा मिल जाए तो इधर उधर न भटकना (उपदेश)
49:53 सुपात्र को दान कुपात्र को नहीं (दृष्टांत)
50:05 सुशिष्य को ज्ञान कुशिष्य को नहीं (दृष्टांत)
50:11 पूर्ण गुरु मिले तो अन्य को नमस्कार आवश्यक नहीं (प्रशंसा)
50:28 केदार काशी मक्का बिना गुरु कृपा व्यर्थ (दृष्टांत)
50:37 ब्रह्मज्ञानी गुरु से दीक्षा मिले तो तीर्थ भटकना नहीं (उपदेश)
50:43 बाहर देवताओं को रिझाने की आवश्यकता नहीं (उपदेश)
50:50 गुरु रिझे तो सब देवता रिझे (उपदेश)
51:02 एक साधे सब साधे (उद्धरण)
51:14 इंद्रियों में जीने वाले अनेक देवताओं को मानते (उपदेश)
51:26 बहुत भगवान मानो पर एकता समझो (उपदेश)
51:54 भगवान की एकता पढ़ो ओम (उपदेश)
52:09 गम गणपतये नमः परमात्मा का नाम बहुशिरा (उद्धरण)
52:17 सब सिर उसी के जो अपना मानता वह भ्रांति में (दृष्टांत)
52:32 चैतन्य बिना सिर टिक नहीं सकता (उपदेश)
52:44 बहुत सिरों और आंखों से देखने वाला वही (उपदेश)
52:59 रावण के दस सिर दस इंद्रियों का अहंकार (दृष्टांत)
53:13 सोने की लंका स्थूल राम चैतन्य में विश्राम (दृष्टांत)
53:25 भगवान बहुशिरा सबमें चेतना वही (उपदेश)
53:32 रखे तो वह काटे तो वह विश्वास रखो (उपदेश)
53:47 मां गुरु मित्र बनकर वही लीला करता (दृष्टांत)
54:04 मित्र गुरु से मिलो सुमिरन उसका रखो (उपदेश)
54:14 सुश्रवा उसका यश पवित्र (उद्धरण)
54:22 भद्रं कर्णेभिः श्रुणुयाम मंगलमय श्रवण (उद्धरण)
54:29 भगवान की कीर्ति से सूक्ष्मता बढ़ती (उपदेश)
54:36 शत्रु का सुनो तो द्वेष मित्र का सुनो तो राग (दृष्टांत)
55:04 भगवान का सुनो तो मन से ब्रह्म में प्रवेश (उपदेश)
55:15 भगवत आनंद उसी की सत्ता से (उपदेश)
55:22 न सुदूरे न दुर्लभ भगवान न दूर न दुर्लभ (उद्धरण)
55:35 शरीर मरे पर भगवान से संबंध न टूटे (उपदेश)
55:53 अहंता ममता जय विजय भाव (उपदेश)
56:01 अहंकार ममता मिटाने भगवान अवतार लेते (उपदेश)
56:14 संतों द्वारा मंत्र रूप नित्य अवतार (उपदेश)
56:34 प्रह्लाद हेतु नैमित्तिक अवतार (दृष्टांत)
56:53 उसका यश हृदय पवित्र करता (उपदेश)
57:06 संसार यश से आसक्ति ईर्ष्या (उपदेश)
57:11 भगवान यश से मन भगवताकार (उपदेश)
57:35 अपयश सुनने से द्वेष उत्पन्न (उपदेश)
57:48 जिसने द्वेष भरा उसने हानि की (उपदेश)
58:05 जिसने भगवत भाव भरा वही सच्चा हितैषी (उपदेश)
58:22 कुत्ते की दोस्ती झंझट चटोरापन घृणा (दृष्टांत)
58:29 सतगुरु भगवान भाव भरते (उपदेश)
58:44 परमात्मा श्रवण से संसार प्रीति घटती (उपदेश)
58:53 अमृतं न विद्यते मृत्युः वह अमर है (उद्धरण)
59:00 शरीर मन बुद्धि नाशवान पर जानने वाला अमर (उपदेश)
59:21 भगवान सरल अपना आत्मस्वरूप (उपदेश)
59:44 नाम स्मरण से मृत्यु से पार (उपदेश)
59:56 उसका नाम अमृत शाश्वत स्थान (उपदेश)
1:00:03 नाम चिंतन से अमृतमय शांति (उपदेश)
1:00:15 शाश्वत स्थिर रहने वाला वही (उपदेश)
1:00:28 आरोह गोद में चढ़ना भगवान की गोद श्रेष्ठ (दृष्टांत)
1:00:50 सटने योग्य केवल भगवान (उपदेश)
1:01:03 गुण लीला चिंतन से उसमें निश्चिंत होना (उपदेश)
1:01:31 तरंग शांत होकर पानी में मिलती (दृष्टांत)
1:01:45 अहंता ममता छोड़ भगवान में विश्रांति (उपदेश)
1:01:50 सैलरी प्रमोशन अंत में धोखा (दृष्टांत)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें