आश्रम संध्या सत्संग 05-03-2026 शाम | Surat 1990
TIME STAMP INDEX
0:00 (कथा) भगवान के अनेक प्रकार के अवतार और उनके प्रकट होने का कारण
0:17 (कथा) नित्य, नैमितिक, आवेश, प्रवेश और अर्चना अवतार का परिचय
0:58 (कथा) प्रह्लाद की रक्षा हेतु नरसिंह अवतार और दुष्टों के विनाश का उद्देश्य
1:26 (कथा) संतों के हृदय में प्रकट होने वाले नित्य अवतार – कबीर, नानक, मीरा, ज्ञानेश्वर आदि
2:10 (कथा) साधुओं की रक्षा और दुर्जनों के विनाश के लिए भगवान का अवतरण
2:42 (कथा) श्रीराम मर्यादा अवतार और श्रीकृष्ण आनंद-आल्हाद अवतार का अंतर
2:58 (कथा) श्रीकृष्ण अवतार – आनंद और आल्हाद प्रदान करने वाला अवतार
3:14 (कथा) जन्माष्टमी और राधाष्टमी का संबंध
3:22 (कथा) राधा का कृष्ण से पहले पृथ्वी पर अवतरण
3:41 (कथा) राधा नाम का आध्यात्मिक अर्थ – धारा का उल्टा राधा
3:48 (कथा) राधा-कृष्ण द्वारा पति-पत्नी जीवन को परम पद की ओर ले जाने का मार्गदर्शन
4:05 (कथा) स्त्री की स्नेह शक्ति और पुरुष की अनुशासन शक्ति का समन्वय
4:40 (कथा) चित्त की धारा और आत्मा का संबंध
4:55 (कथा) संसार में बहती चित्तधारा का जन्म-जन्मांतर तक भटकना
5:10 (कथा) प्रेम का धन में लगना लोभ, परिवार में लगना मोह और भगवान में लगना भक्ति
5:46 (कथा) राधा पहले आने का आध्यात्मिक संकेत – पहले भक्ति फिर भगवान का प्रकट होना
6:42 (कथा) पांच कर्मेंद्रिय, पांच ज्ञानेंद्रिय और मन से भक्ति की साधना
7:28 (कथा) बुद्धि का भगवान में स्थिर होना और ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति
8:07 (कथा) देश, जाति या कुल का बड़प्पन धन-संपत्ति से नहीं बल्कि श्रेष्ठ मनुष्य से होता है
8:40 (कथा) श्रीकृष्ण के जीवन से विघ्न-बाधाओं को जीतकर जीवन जीने की शिक्षा
9:32 (कथा) राधा-कृष्ण प्रेम का आदर्श और स्वार्थरहित दांपत्य प्रेम का महत्व
10:41 (कथा) समाज में स्वार्थ बढ़ने पर भगवान के अवतरण का कारण
10:59 (कथा) अर्चना अवतार – भगवान की मूर्ति पूजा और भक्त की भावना
11:31 (कथा) धनन्ना जाट और भगवान की श्रद्धा की कथा
13:36 (कथा) श्रद्धा की शक्ति और उसके जीवन में महत्व
14:50 (कथा) संसार में हर कार्य में श्रद्धा की आवश्यकता
15:06 (कथा) भगवान और सत्संग में श्रद्धा से जीवात्मा का परमात्मा में उत्थान
15:31 (कथा) श्रद्धा से आत्मज्ञान की प्राप्ति का सिद्धांत
16:04 (कथा) केवल श्रद्धा पर्याप्त नहीं – सही श्रद्धा का महत्व
16:21 (कथा) श्रद्धा, तत्परता और इंद्रिय संयम से जीवनदाता का साक्षात्कार
16:58 (कथा) कम समय में भी परम पद की प्राप्ति के उदाहरण
17:15 (कथा) राजा परीक्षित की सात दिन में परमात्मा प्राप्ति की कथा
17:48 (कथा) श्रद्धा, तत्परता और संयम के साथ कथा श्रवण का महत्व
18:05 (कथा) धनन्ना जाट की श्रद्धा, तत्परता और इंद्रिय संयम का उदाहरण
18:36 (कथा) ठाकुर जी को रोटी खिलाने की धनन्ना जाट की सरल भक्ति
19:31 (कथा) कई दिनों तक भगवान के न आने पर भी अटूट श्रद्धा
20:04 (कथा) प्रेम बढ़ने पर भक्ति में बालसुलभ शरारत का भाव
20:45 (कथा) सातवें दिन धनन्ना जाट की तीव्र पुकार
21:31 (कथा) भगवान का पत्थर से प्रकट होकर रोटी स्वीकार करना
21:48 (कथा) सच्चे प्रेम में नियम से अधिक प्रेम का महत्व
22:04 (कथा) अर्चना अवतार का अर्थ और उदाहरण
22:18 (कथा) नित्य, नैमितिक, आवेश और प्रवेश अवतार का पुनः उल्लेख
22:34 (कथा) भक्तों की रक्षा में भगवान की कृपा – प्रह्लाद और मीरा के उदाहरण
22:59 (कथा) अंतर्यामी अवतार और दिव्य प्रेरणा का अनुभव
23:48 (कथा) भगवान के विभिन्न अवतारों का मानव जीवन के लिए कल्याणकारी महत्व
24:04 (कथा) मनुष्य ही भगवान के आनंद स्वरूप को प्रकट कर सकता है
24:19 (कथा) भगवान का स्वरूप – सत, चित और आनंद
24:56 (कथा) हृदय शुद्धि और साधना से आनंद स्वरूप का साक्षात्कार
25:20 (कथा) संसार के संगी साथियों की अस्थिरता – नानक जी का उपदेश
25:56 (कथा) विपत्ति में एकमात्र सहारा भगवान
26:12 (कथा) जीवन की धारा को राधामय बनाने की शिक्षा
26:46 (कथा) कीर्तन को भक्ति का सहायक साधन बताया
27:02 (कथा) गीता और भागवत में कीर्तन और भक्ति का महत्व
27:24 (कथा) प्रेम भक्ति में रोना, हँसना और गद्गद भाव का अनुभव
27:45 (कथा) भीम के हृदय में भगवान के प्रति प्रेम का जागरण
28:10 (कथा) आधी रात को भीम का भजन और माता कुंती का समझाना
28:41 (कथा) एकांत में जाकर भीम का भजन करना
29:17 (कथा) धोबी द्वारा भीम के भजन को गधे की आवाज समझना
30:12 (कथा) भीम की ग्लानि और भगवान के प्रति सच्चा भाव
30:37 (कथा) भगवान श्रीकृष्ण का प्रकाश पुंज के रूप में प्रकट होना
31:09 (कथा) श्रीकृष्ण और भीम का संवाद प्रारंभ
31:16 (कथा) भीम के भजन को सुनकर भगवान श्रीकृष्ण का द्वारका से आना
31:33 (कथा) भगवान को बाहरी विधि से अधिक भक्त के भाव का ज्ञान
31:49 (कथा) लोक प्रशंसा या निंदा से अधिक अंतर्यामी की प्रसन्नता का महत्व
32:14 (कथा) सच्चे भाव से की गई पूजा और सेवा की स्वीकृति
32:32 (उपदेश) संसार के संगी साथियों की अस्थिरता
32:49 (उपदेश) जीवन की धारा को राधामय बनाने की प्रेरणा
33:07 (उपदेश) धन, मकान और वस्तुओं में अत्यधिक उलझाव की चेतावनी
33:26 (साधना) मंदिर में बैठकर भगवान के दर्शन और ध्यान का महत्व
33:45 (साधना) जीवन की शाम से पहले चित्त शक्ति जागृत करने की प्रेरणा
33:55 (तत्वज्ञान) भगवान दूर नहीं – अविद्या की परत हटने पर अनुभव
34:12 (तत्वज्ञान) प्रेम से वासनाओं का क्षय और आनंद स्वरूप का प्रकट होना
34:26 (कथा) चैतन्य महाप्रभु के कीर्तन और तन्मयता का उदाहरण
34:42 (कथा) कीर्तन के प्रभाव से पशुओं तक में आनंद का संचार
35:05 (उपदेश) नामस्मरण और कीर्तन से चित्त की शुद्धि
35:28 (उपदेश) भक्ति में निरंतरता और साधना का महत्व
36:02 (साधना) नामजप और ध्यान से मन को स्थिर करने की विधि
36:40 (साधना) प्रेमपूर्वक भक्ति करने से भगवान की अनुभूति
37:15 (तत्वज्ञान) आत्मा का स्वभाव आनंदमय होना
37:48 (तत्वज्ञान) माया के कारण आत्मस्वरूप का विस्मरण
38:20 (उपदेश) समय का सदुपयोग और आध्यात्मिक जीवन का महत्व
39:05 (उपदेश) सत्संग और संतों की वाणी का प्रभाव
40:12 (कथा) भक्तों के जीवन में भगवान की कृपा के उदाहरण
41:08 (साधना) भक्ति मार्ग में धैर्य और विश्वास की आवश्यकता
42:10 (तत्वज्ञान) परमात्मा और जीव का संबंध
43:22 (उपदेश) जीवन को भगवान के चरणों में समर्पित करने की प्रेरणा
44:15 (साधना) निरंतर स्मरण और प्रेम भक्ति का अभ्यास
45:00 (उपदेश) भगवान के नाम और भक्ति में जीवन की पूर्णता
45:00 (उपदेश) कीर्तन करते समय लोक-लाज और लोगों की चिंता छोड़ने की आवश्यकता
45:43 (उपदेश) कीर्तन में “मैं भगवान का हूँ और भगवान मेरे हैं” – यह भाव रखना
45:50 (उपदेश) प्रेम और भाव से कीर्तन करने की प्रेरणा
45:58 (तत्वज्ञान) डिस्को नृत्य से जीवन शक्ति का ह्रास और कीर्तन से उर्ध्वगमन
46:06 (तत्वज्ञान) भारतीय कीर्तन पद्धति से प्राण शक्ति का हृदय केंद्र में जागरण
46:15 (शास्त्र) नारद भक्ति सूत्र और शास्त्रों में कीर्तन का महत्व
46:21 (शास्त्र) कलियुग में नाम जप और कीर्तन से मुक्ति का मार्ग
46:31 (कथा) चैतन्य महाप्रभु, मीरा जैसे संतों की संप्रेक्षण शक्ति का प्रभाव
46:47 (तत्वज्ञान) संतों की कृपा से सुशुप्त जीवन शक्ति और कुंडलिनी जागरण
46:56 (उपदेश) संत कृपा से साधन-भजन का सहज होने लगना
47:13 (साधना) संतों के चरणों में बैठकर कीर्तन और ध्यान से चित्त का शुद्ध व रिचार्ज होना
47:30 (साधना) साधना में अष्ट सात्विक भावों का प्रकट होना
47:39 (अनुभूति) आँसू, रोमांच, कंपन आदि आध्यात्मिक भावों का अनुभव
47:56 (अनुभूति) ध्यान में प्रकाश दर्शन और इष्टदेव के दर्शन की अनुभूति
48:13 (अनुभूति) ध्यान में उड़ने या गहराई में जाने जैसे अनुभव
48:29 (तत्वज्ञान) पूर्व संस्कारों के कारण साधना में विविध अनुभव होना
48:37 (उपदेश) सत्संग से संप्रेक्षण शक्ति, ज्ञान और पुण्य की प्राप्ति
48:53 (उपदेश) सत्संग की महिमा – संसार में अतुलनीय
49:03 (शास्त्र) तुलसीदास जी द्वारा सत्संग की महिमा
49:18 (तत्वज्ञान) स्वर्ग सुख से पुण्य क्षीण और सत्संग से पाप क्षीण
49:34 (तत्वज्ञान) सत्संग से आत्मा का अमृत और परमात्मा की प्राप्ति
49:51 (कथा) राजा परीक्षित और शुकदेव जी का प्रसंग
50:07 (कथा) सात दिन में मुक्ति का उपाय – शुकदेव जी का उपदेश
50:32 (कथा) देवताओं द्वारा स्वर्ग अमृत और ब्रह्मज्ञान के अदला-बदली का प्रस्ताव
50:50 (कथा) शुकदेव जी द्वारा सत्संग अमृत की श्रेष्ठता बताकर इंकार
51:04 (तत्वज्ञान) सत्संग अमृत से पाप नाश और परमात्मा की प्राप्ति
51:28 (उपदेश) सत्संग अमृत स्वर्ग अमृत से भी श्रेष्ठ
51:36 (तत्वज्ञान) समुद्र मंथन का अमृत और सत्संग अमृत का अंतर
51:50 (तत्वज्ञान) संतों की भगवत भाव से निकली वाणी ही सत्संग
51:59 (उपदेश) सत्संग और हरि कीर्तन कराने वाली संस्था के लिए प्रार्थना
52:14 (उपदेश) हरिनाम कीर्तन के लाभ
52:24 (तत्वज्ञान) हरि नाम उच्चारण से मूलाधार और स्वाधिष्ठान केंद्र में कंपन
52:39 (तत्वज्ञान) कीर्तन से भाव शरीर का विकास
52:46 (तत्वज्ञान) हरि नाम से ऐहिक और आध्यात्मिक जीवन की शुद्धि
53:01 (शास्त्र) हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र का महत्व
53:17 (तत्वज्ञान) हरि नाम से पाप नाश, रक्त शुद्धि और नाड़ियों की शुद्धि
53:26 (उपदेश) प्रेम और श्रद्धा से हरि नाम कीर्तन करने की प्रेरणा
53:36 (प्रार्थना) भगवान से प्रेम और राधामय जीवन की प्रार्थना
54:02 (प्रार्थना) कीर्तन करते-करते देहभाव और अहंकार भूलने की कामना
54:18 (प्रार्थना) हृदय में भक्ति का दान माँगना
54:35 (तत्वज्ञान) चित्तधारा को प्रेममय बनाकर राधा स्वरूप बनाना
54:50 (तत्वज्ञान) राधामय धारा से आत्मदेव कृष्ण का प्रकट होना
55:08 (उपदेश) इष्टदेव और गुरु से सच्चे हृदय से प्रेम करने की प्रेरणा
55:22 (कीर्तन) राधे-श्याम मिलन की प्रार्थना का कीर्तन
55:42 (प्रार्थना) शरीर नश्वर है – पाप मिटें और हृदय परमात्मा में मिले
56:19 (कीर्तन) हरि ओम नाम का कीर्तन प्रारंभ
56:57 (कीर्तन) पावन हरि नाम का संकीर्तन
57:28 (कीर्तन) हरि नाम की महिमा का गान
58:05 (कीर्तन) मधुर हरि नाम का संकीर्तन
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