परमात्म तत्व का गूढ़ ज्ञान सरल से सरल शब्दों में
0:03 (उपदेश) चार वेद और चार उपवेद — असली स्वरूप के ज्ञान और अनुभव का उद्देश्य
0:09 (उपदेश) असली स्वरूप का व्यवहारिक आनंद
0:15 (उपदेश) ज्ञान, कर्म, भक्ति, दान, पुण्य, सेवा से आत्मज्ञान
0:24 (उपदेश) वेदों के अनुसार चिंतन करने से दुख का अभाव
0:36 (उपदेश) शास्त्रानुसार जीवन से दुख नहीं मिलता
0:43 (उपदेश) असली स्वरूप में दुख का अभाव
0:54 (उपदेश) दुख का मूल कारण — असली स्वरूप की पहचान का अभाव
1:01 (उपदेश) असली स्वरूप में दुख नहीं मिलता
1:11 (उपदेश) असली स्वरूप की पहचान और प्रेम का अभाव
1:16 (उपदेश) नकली स्वरूप को ‘मैं’ मानने की भूल
1:22 (उपदेश) शरीर को ‘मैं’ और वस्तुओं को ‘मेरा’ मानना
1:40 (शास्त्र वचन) श्रीकृष्ण — अज्ञान से ज्ञान ढक जाता है
1:48 (शास्त्र वचन) अज्ञान से मनुष्य मोहित हो जाता है
1:56 (उपदेश) अज्ञान से उल्टा ज्ञान और भटकाव
2:01 (उपदेश) तीर्थों में भटकना — ब्रह्मज्ञान के बिना समाधान नहीं
2:13 (उपदेश) ब्रह्मज्ञान असली वस्तु को प्रकट करता है
2:26 (उपदेश) जगत का ज्ञान नकली वस्तुओं का ज्ञान है
2:31 (उपदेश) ब्रह्मज्ञान की महिमा
2:43 (उपदेश) भगवान के दर्शन से भी दुख नहीं मिटते
2:53 (उपदेश) भगवान के स्वरूप और अपने स्वरूप का ज्ञान — ब्रह्मज्ञान
3:00 (उपदेश) ब्रह्मज्ञान से दुख टिक नहीं सकता
3:07 (उपदेश) संसार का ज्ञान मृत्यु और राग-द्वेष से नहीं बचाता
3:14 (उपदेश) ब्रह्मज्ञान के आगे राग-द्वेष और मृत्यु का प्रभाव नहीं
3:25 (उपदेश) मृत्यु शरीर की होती है
3:34 (उपदेश) सुख-दुख मन में होते हैं
4:02 (उपदेश) सबको जानने वाला आत्मा ज्योति स्वरूप है
4:13 (उपदेश) शरीर, मन और बुद्धि का साक्षी आत्मा
4:22 (उपदेश) श्वास और शरीर के परिवर्तन का साक्षी आत्मा
4:29 (उपदेश) सब बदलता है पर आत्मा अमिट है
4:39 (उपदेश) बचपन की अवस्थाएँ मिट गईं
4:48 (उपदेश) बचपन को जानने वाला आत्मा वही है
4:54 (उपदेश) चैतन्य ‘सोहम’ स्वरूप का बोध
5:01 (उपदेश) दुख-सुख और अवस्थाएँ बदलती हैं
5:08 (उपदेश) जो नहीं बदलता वही असली ‘मैं’ है
5:18 (उपदेश) श्वास में ‘सो-हम’ आत्मचिंतन
5:39 (शास्त्र वचन) गुरु नानक — नाम रस में स्थित रहना
5:47 (उपदेश) आत्मा में स्थित रहने से दुख नहीं दिखता
5:57 (उपदेश) आत्मज्ञान और उसकी स्मृति का महत्व
6:05 (उपदेश) ब्रह्मज्ञान का भाषण करना महापुरुष का लक्षण नहीं
6:15 (उपदेश) विद्वान लोग भाषण कर सकते हैं
6:24 (उपदेश) वेदांत भाषण करने वाले अनेक हैं
6:31 (उपदेश) सच्चे ब्रह्मज्ञानी दुर्लभ होते हैं
6:42 (उपदेश) नानक जैसे ब्रह्मज्ञानी दुर्लभ
6:57 (उपदेश) ब्रह्मज्ञान का भाषण और कथा करना अच्छा है
7:05 (उपदेश) ब्रह्मस्वरूप में तृप्ति प्राप्त करना दुर्लभ
7:11 (शास्त्र वचन) नानक वचन — करोड़ों में कोई एक जानने वाला
7:17 (उपदेश) ब्रह्मज्ञान अत्यंत ऊँची वस्तु
7:24 (उपदेश) कठिन नहीं, उसकी भूख लगना कठिन
7:31 (उपदेश) विवेक से आत्मज्ञान की भूख जागती है
7:39 (उपदेश) जो पाया है वह छूट जाएगा
7:48 (उपदेश) मृत्यु सबको छीन लेती है
7:55 (शास्त्र वचन) “आद सत, जुगाद सत…” परमात्मा की नित्य सत्ता
8:04 (उपदेश) परमात्मा सदा सत्य है
8:11 (उपदेश) शरीर मरने के बाद भी परमात्मा सत्य
8:20 (उपदेश) संसार परिवर्तनशील है
8:30 (उपदेश) प्राण और शरीर छूट जाएंगे
8:39 (उपदेश) आत्मा और परमात्मा का संबंध नहीं टूटता
8:48 (उपदेश) परमात्मा में शांति पाना
8:56 (उपदेश) इस चिंतन का अभ्यास करने का लाभ
9:05 (उपदेश) ब्रह्मज्ञान का चिंतन कठिन नहीं
9:13 (उपदेश) संसार स्वप्न समान है
9:22 (उपदेश) जो हो चुका, जो हो रहा और जो होगा — सब स्वप्न
9:30 (उपदेश) चेतन आत्मा साक्षी है
9:39 (उपदेश) संसार मिथ्या है
9:48 (उपदेश) परमात्मा ही सत्य है
9:57 (उपदेश) आत्मा-परमात्मा का संबंध पक्का करना
10:05 (उपदेश) दृढ़ निश्चय — मैं शरीर नहीं हूँ
10:13 (उपदेश) शरीर के बाद भी आत्मा का अस्तित्व
10:21 (उपदेश) चेतन आत्मा परमात्मा का अंश
10:32 (उपदेश) चेतन आत्मा सबको जानने वाली है
10:39 (उपदेश) अंग स्वयं को नहीं जानते
10:47 (उपदेश) चेतन आत्मा सबको जानती है
10:55 (उपदेश) आत्मा सत और चेतन है
11:05 (उपदेश) परमात्मा सत-चित-ज्ञान स्वरूप
11:14 (भजन) ओम, हरि ओम, आनंद ओम जप
11:28 (उपदेश) संसार और शरीर स्वप्न समान
11:33 (उपदेश) सत्य स्वरूप आत्मा अचल है
11:40 (उपदेश) संसार की वस्तुएँ जड़ हैं
11:48 (उपदेश) गलत मान्यताओं से दुख
12:00 (उपदेश) “मैं दुखी, मैं सुखी” — शरीर की पहचान
12:09 (उपदेश) जाति और पहचान शरीर की है
12:16 (उपदेश) शरीर को ‘मैं’ मानने की भूल
12:22 (उपदेश) आत्मा अमृत पुत्र है
12:29 (उपदेश) परमात्मा का अमृत पुत्र
12:36 (उपदेश) आत्मा ज्योति स्वरूप
12:43 (उपदेश) संसार में रहकर आत्मस्वरूप भूलना
12:50 (उपदेश) उम्र की पहचान भी काल्पनिक
12:59 (उपदेश) संसार नाटक समान
13:07 (उपदेश) संसार और शरीर मिथ्या
13:14 (उपदेश) परिवर्तनशील जगत का साक्षी आत्मा
13:20 (उपदेश) बचपन, जवानी, दुख-सुख बदलते हैं
13:30 (उपदेश) जानने वाला आत्मा स्थिर
13:45 (उपदेश) आत्मा ज्ञान स्वरूप
13:51 (उपदेश) आत्मा आनंद स्वरूप
14:03 (भजन) नारायण हरि परमात्मा स्मरण
14:13 (उपदेश) स्थान और प्रदेश की पहचान शरीर की
14:21 (उपदेश) असली पहचान आत्मा की
14:28 (उपदेश) शरीर संबंध अस्थायी
14:32 (उपदेश) आत्मा परम सत्य की संतान
14:42 (उपदेश) आत्मा अमर स्वरूप
14:48 (उपदेश) इस चिंतन से दुख मिटता है
15:01 (उपदेश) एकांत साधना का महत्व
15:12 (प्रसंग) नानक जी का 60 वर्ष में निवृत्ति उदाहरण
15:20 (प्रसंग) मिलना-जुलना कम करने की घोषणा
15:29 (उपदेश) अंतिम उपदेश — भीतर डूबने की प्रेरणा
15:39 (उपदेश) बाहरी व्यवहार कम करना
15:48 (उपदेश) सत्संग का उद्देश्य आत्मानुभव
16:04 (प्रसंग) बाहरी मिलन से अधिक भीतर मिलन
16:13 (उपदेश) सतस्वरूप में मिलन का संदेश
16:20 (उपदेश) भीतर के परमात्मा से मिलना
16:29 (उपदेश) बाहरी मुलाकात का आग्रह छोड़ना
16:36 (उपदेश) भीतर से मिलने की प्रेरणा
16:44 (उपदेश) भीतर का मिलन कभी नहीं टूटता
17:05 (उपदेश) शरीर बदलने वाला है
17:14 (उपदेश) आत्मा साक्षी स्वरूप
17:21 (उपदेश) मान्यताओं का बोझ छोड़ना
17:31 (उपदेश) जाति और अहंकार का त्याग
17:37 (उपदेश) संसार स्वप्न समान
17:45 (शास्त्र वचन) “राम गयो रावण गयो…” संसार की नश्वरता
17:57 (उपदेश) संसार अस्थायी स्वप्न है
18:07 (उपदेश) संसार को दिल में मत बसाओ
18:20 (उपदेश) परमात्मा में विश्राम
18:28 (उपदेश) आत्मविश्राम से शक्ति का संचय
18:37 (उपदेश) कल्पना और आलस्य से अलग चिंतन
18:47 (उपदेश) शांत होकर आत्मचिंतन
18:54 (उपदेश) अहंकार का त्याग
19:04 (उपदेश) समय बहुत कम है
19:12 (उपदेश) शरीर का भरोसा नहीं
19:21 (उपदेश) आत्मा अमर है
19:29 (उपदेश) जो मरेगा वह शरीर है
19:38 (उपदेश) दुख शरीर और मन में होता है
19:46 (उपदेश) आत्मा साक्षी है
19:53 (उपदेश) आत्मा दुख से अछूती है
20:00 (उपदेश) दुख को महत्व देने से वह बढ़ता है
20:08 (उपदेश) सत्य की शक्ति से दुख हटता है
20:17 (उपदेश) विकारों को महत्व देने से वे हावी होते हैं
20:27 (दृष्टांत) कुत्ते का उदाहरण — महत्व देने से पीछा करता है
20:34 (दृष्टांत) फिल्म का उदाहरण — महत्व देने से प्रभाव
20:42 (उपदेश) महत्व परमात्मा को देना
20:48 (उपदेश) संसार को अधिक महत्व देने से दुख
20:56 (उपदेश) सतस्वरूप परमात्मा को महत्व देना
21:03 (उपदेश) अकाल पुरुष को महत्व देना
21:11 (उपदेश) जो कभी साथ नहीं छोड़ता वही परमात्मा
21:18 (उपदेश) जो छूट जाएगा उसे सिर पर मत बैठाओ
21:28 (उपदेश) संसार का केवल उपयोग करो
21:36 (उपदेश) संसार क्षणिक है
22:01 (उपदेश) परमात्मा में डूबने से दूसरों का भी मंगल
22:10 (उपदेश) दर्शन से भी दूसरों का भला
22:19 (उपदेश) परमात्मा मंगलों का मंगल है
22:29 (उपदेश) परमात्मा ज्ञान तीर्थों को भी तीर्थ बनाता है
23:00 (उपदेश) परमात्मा महापुरुषों को महापुरुष बनाता है
23:09 (उपदेश) परमात्मा में प्रेम बढ़ाओ
23:18 (उपदेश) छल-कपट छोड़ो
23:30 (उपदेश) स्वयं सुखी रहो और दूसरों को सुख दो
23:39 (उपदेश) प्रेम और सूझबूझ से जीवन
23:47 (उपदेश) झगड़े छोड़कर आत्मा में स्थित होना
23:59 (भजन) ओम हरि हरि सच्चे साईं
24:55 (संवाद) “भगवान में मन नहीं लगता” प्रश्न
25:03 (उपदेश) पाँच मिनट भगवान के लिए बैठने का अभ्यास
25:12 (उपदेश) अकेले बैठकर रोना, हँसना या प्रार्थना
25:19 (उपदेश) परमात्मा से सच्चे मन की पुकार
25:28 (उपदेश) पाँच मिनट की सच्ची साधना से परिवर्तन
25:35 (उपदेश) घर में एक कमरा साधना के लिए
25:42 (उपदेश) अकेले होकर परमात्मा से मिलना
25:51 (उपदेश) सच्चे दिल की पुकार से कृपा
26:06 (उपदेश) संसार का बोझ मत उठाओ
26:15 (उपदेश) भगवान का रस पीने के लिए मानव जन्म
26:22 (उपदेश) भगवान का ज्ञान और आनंद पाना
26:31 (उपदेश) संसार में डूबना व्यर्थ
26:53 (संवाद) बाबा का संबोधन — बेटियों और बेटों को उपदेश
26:59 (उपदेश) संसार को स्वप्न मानो
27:11 (उपदेश) आत्मा को याद करो
27:21 (उपदेश) सच्चिदानंद को भूलना ही पतन
27:28 (उपदेश) सत्य को छोड़कर असत्य को ‘मैं’ मानना
27:40 (उपदेश) संसार मोह का प्रभाव
27:48 (उपदेश) गुरु के ज्ञान से कल्याण
28:03 (उपदेश) ब्रह्मज्ञानी गुरु की बात पकड़ना
28:13 (उपदेश) दृढ़ संकल्प करना
28:23 (उपदेश) उसी को पाना जो कभी न छूटे
28:29 (उपदेश) परम साथी परमात्मा को पाना
28:37 (उपदेश) दृढ़ इरादा करने से मार्ग मिलता है
28:56 (उपदेश) विचार के बाद मौन होना
29:16 (उपदेश) परमात्मा में डूबने की प्रार्थना
29:53 (प्रार्थना) चेतन देव और आत्म देव को संबोधन
30:02 (प्रार्थना) ज्ञान स्वरूप परमात्मा से शांति प्रार्थना
30:10 (उपदेश) ऐसा सुमिरन करना कठिन नहीं
30:19 (उपदेश) सात्त्विक आहार से शरीर स्वस्थ
30:28 (उपदेश) भारी और बासी भोजन से बचना
30:38 (उपदेश) वृद्धावस्था में आहार का प्रभाव
30:48 (उपदेश) फल और प्राकृतिक आहार हितकारी
30:57 (उपदेश) स्वास्थ्य और शांति
31:05 (उपदेश) बीमारी आए तो साक्षीभाव रखना
31:19 (शास्त्र वचन) “राम गयो रावण गयो…” संसार की नश्वरता
31:25 (उपदेश) सब नश्वर है — परमात्मा को स्मरण
31:33 (भजन) शांति स्मरण
31:39 (उपदेश) कलियुग के दोष दूर करने वाला मंत्र
31:48 (शास्त्र प्रसंग) शास्त्रों में युगानुसार मंत्र
31:55 (उपदेश) कलियुग का सरल मंत्र
32:05 (उपदेश) नारद जी का प्रश्न
32:13 (शास्त्र प्रसंग) हरे राम हरे कृष्ण मंत्र का उपदेश
32:24 (कीर्तन) हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
32:31 (कीर्तन) हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
32:38 (कीर्तन) शांत मन से नामस्मरण
32:43 (कीर्तन) हरे राम हरे राम जप
32:49 (कीर्तन) हरे कृष्ण हरे कृष्ण जप
33:00 (उपदेश) कलियुग के दोषों को हरने वाला नाम
33:09 (उपदेश) राम, गोविंद, माधव — सब परमात्मा के नाम
33:20 (भजन) हरि नारायण ओम जप
33:28 (कीर्तन) राम नाम जप
33:57 (कीर्तन) प्रेम से नाम जप
34:06 (कीर्तन) हरे राम राम राम हरे
34:16 (उपदेश) मशीन मत बनो — भक्त बनो
34:26 (उपदेश) कंप्यूटर या टेप रिकॉर्डर नहीं, प्रेमी भक्त बनो
34:34 (उपदेश) भीतर प्रेम से डूबना
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