आश्रम संध्या सत्संग 04-03-2026 शाम | Ahmedabad 2008
TIME STAMP INDEX
0:01 ईश्वर के अस्तित्व का प्रश्न (प्रश्न)
0:08 मनुष्य के अस्तित्व को ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण बताना (प्रवचन)
0:16 अपने अस्तित्व पर कभी प्रश्न न होने का उदाहरण (दृष्टांत)
0:24 शरीर के बाद भी आत्मा के अस्तित्व की बात (प्रवचन)
0:33 आत्मा के शाश्वत अस्तित्व का वर्णन (प्रवचन)
0:42 आत्मा और ईश्वर दोनों को चैतन्य और ज्ञान स्वरूप बताना (प्रवचन)
0:51 सत्य की परिभाषा — जो सदा रहे (प्रवचन)
0:59 शरीर मरता है पर अस्तित्व नहीं मिटता (प्रवचन)
1:09 शरीर और तत्वों के अस्तित्व का निरंतर रहना (प्रवचन)
1:16 शरीर का अस्तित्व पूरी तरह नष्ट न होना (प्रवचन)
1:24 बालू के कण के उदाहरण से अस्तित्व का नाश न होना (दृष्टांत)
1:31 मुर्दे के सड़ने और बैक्टीरिया का उदाहरण (दृष्टांत)
1:38 बैक्टीरिया में चेतना और ज्ञान की बात (प्रवचन)
1:47 जीवों में सुख-दुख का अनुभव (प्रवचन)
1:54 मृत्यु के बाद शरीर का पंचतत्व में मिलना (प्रवचन)
2:04 शरीर का जल, अग्नि, वायु, आकाश तत्व में मिलना (प्रवचन)
2:14 पृथ्वी तत्व से खाद, घास और प्राणी बनने का उदाहरण (दृष्टांत)
2:24 माया में परिवर्तन और नाश का सिद्धांत (प्रवचन)
2:31 निर्गुण निराकार ब्रह्म से सगुण साकार का प्रकट होना (प्रवचन)
2:39 सरोवर और बर्फ के टुकड़ों का उदाहरण (दृष्टांत)
2:46 संसार को ब्रह्म की लीला बताना (प्रवचन)
2:55 धर्म बिना आत्मज्ञान जीवन अधूरा होना (प्रवचन)
3:05 भगवान कृष्ण के साथ होने पर भी अर्जुन का दुख न मिटना (कथा)
3:13 विश्वरूप दर्शन के बाद भी अर्जुन का भय न मिटना (कथा)
3:22 सत्संग सुनकर अर्जुन का दुख मिटना (कथा)
3:29 सत्संग की महिमा (प्रवचन)
3:29 शिव जी का अगस्त ऋषि के आश्रम में सत्संग सुनने जाना (कथा)
3:41 राम जी का वशिष्ठ और भारद्वाज आश्रम में सत्संग (कथा)
3:41 कृष्ण और अर्जुन को भी सत्संग प्रिय होना (कथा)
3:52 सजगता से परमात्मा की कृपा और ज्ञान प्राप्त होना (प्रवचन)
4:00 परमात्मा की कृपा से आनंद और ज्ञान मिलना (प्रवचन)
4:09 लापरवाही से पशु समान स्थिति होना (प्रवचन)
4:18 अपने को पापी समझने की भ्रांति (प्रवचन)
4:26 दुराचारी भी ज्ञान से पार हो सकता है (प्रवचन)
4:33 ज्ञान की नाव में बैठने का उपदेश (प्रवचन)
4:44 पुण्य और पाप को मानसिक स्थिति बताना (प्रवचन)
4:52 अहंकार से “मैं पापी” या “मैं पुण्यात्मा” की भावना (प्रवचन)
5:01 आत्मदेव को जानकर पुण्य-पाप से पार होना (प्रवचन)
5:23 तत्वज्ञान कठिन लगे तो राम नाम जप का मार्ग (उपदेश)
5:39 ओम जप (कीर्तन)
5:42 संगीत (कीर्तन)
5:49 हरि ओम जप (कीर्तन)
5:55 संगीत (कीर्तन)
6:04 भगवान के नाम से पापों का नाश (प्रवचन)
6:11 पाप दोहराने से फिर लौटने की चेतावनी (प्रवचन)
6:20 सत्संग से निष्पाप होने की बात (प्रवचन)
6:27 ब्रह्मज्ञान के लिए स्थायी शुद्धि जरूरी नहीं (प्रवचन)
6:36 स्नान से अस्थायी शुद्धि का उदाहरण (दृष्टांत)
6:42 दिनभर में शुद्ध-अशुद्ध होने का उदाहरण (दृष्टांत)
6:49 भगवत नाम को स्नान के समान बताना (दृष्टांत)
6:57 भगवत नाम से ब्रह्मज्ञान प्राप्ति का उदाहरण (प्रवचन)
7:05 हरे नारायण जप (कीर्तन)
7:16 मन, बुद्धि और शरीर में दोष आने की बात (प्रवचन)
7:20 दोषों को अपने ऊपर न लेने की शिक्षा (प्रवचन)
7:30 स्वयं को परमात्मा में स्थित मानने की शिक्षा (प्रवचन)
7:35 ज्ञान की नाव में बैठने का उपदेश (प्रवचन)
7:41 दोषों को “मुझमें” न मानकर मन-बुद्धि में मानना (प्रवचन)
7:48 परमात्मा में स्थित होकर निर्दोष होने की शिक्षा (प्रवचन)
7:54 दोषों को महत्व न देने से निर्दोषता (प्रवचन)
8:03 दोषों को स्वीकारने से उनका बढ़ना (प्रवचन)
8:11 नारायण में स्थित होने से दोषों का नाश (प्रवचन)
8:24 सत्संग से ज्ञान प्राप्ति की महिमा (प्रवचन)
8:24 गोपेश्वर महादेव तीर्थ का उल्लेख (प्रसंग)
8:32 गोपेश्वर में रहने वाले साधु का वर्णन (कथा)
8:39 साधु का लोगों से दूर एकांत में जाना (कथा)
8:47 नारायण स्वामी / नारायण बापू का उल्लेख (प्रसंग)
8:53 भीड़ से बचकर गिरनार जाने का निर्णय (कथा)
9:02 एकांत साधना का प्रयास (कथा)
9:12 मनमाने एकांत से लाभ न होना (प्रवचन)
9:20 मनमाने साधन से अहंकार बढ़ना (प्रवचन)
9:28 सफलता से घमंड और विफलता से विषाद (प्रवचन)
9:35 महापुरुषों के मार्गदर्शन से साधना की सफलता (प्रवचन)
9:43 गुरु विफलता के कारण और समाधान बताते हैं (प्रवचन)
9:52 पहले ही सावधान करने का लाभ (प्रवचन)
10:06 महापुरुषों के मार्गदर्शन में साधना का श्रेष्ठ फल (प्रवचन)
10:15 मनमाने साधन से ऊँचा परिणाम न मिलना (प्रवचन)
10:22 मन को गुलाम बताने का उदाहरण (दृष्टांत)
10:29 साधन से अधिक मार्गदर्शन का महत्व (प्रवचन)
10:33 गुरु के आदेश से साधना का महत्व (प्रवचन)
10:40 नारायण स्वामी का गिरनार जाना (कथा)
10:48 गुफाओं में साधु साथियों से मिलना (कथा)
10:55 गपशप और संगति से पतन की शुरुआत (कथा)
11:05 सिगरेट और नशे की आदत लगना (कथा)
11:11 तंबाकू और शराब से बुद्धि में तमस आना (प्रवचन)
11:21 ऊर्जा का नीचे के केंद्रों में गिरना (प्रवचन)
11:30 साधना में रुचि समाप्त होना (कथा)
11:38 निराश होकर आत्महत्या करना (कथा)
11:50 मनमाने निर्णय से साधक का पतन (प्रवचन)
12:00 मनमाने निर्णय का दूसरा उदाहरण (कथा)
12:06 अपने निर्णय की जिम्मेदारी का उल्लेख (प्रवचन)
12:14 साधना छोड़कर सांसारिक कार्य करना (कथा)
12:22 जीवन में ग्लानि और पतन (कथा)
12:32 मनमानी से विनाश होने की चेतावनी (प्रवचन)
12:32 गुरु की शरण जाने का उपदेश (प्रवचन)
12:39 श्रोत्रिय और ब्रह्मनिष्ठ गुरु की परिभाषा (प्रवचन)
12:47 ऐसे गुरु से परमात्मा का प्रकाश (प्रवचन)
12:56 परमात्मा इंद्रियों, मन और बुद्धि को प्रकाशित करता है (प्रवचन)
13:06 ध्यान और भजन से मन शांत होना (प्रवचन)
13:13 शांत मन में चिन्मय आनंद प्रकट होना (प्रवचन)
13:20 परमात्मा को सत्य-चित-आनंद बताना (प्रवचन)
13:28 ज्ञान और आनंद स्वरूप का प्रकट होना (प्रवचन)
13:35 सच्चिदानंद आत्मदेव को बुद्धि का आधार बताना (प्रवचन)
13:43 कर्म और फल का नियामक परमात्मा (प्रवचन)
13:52 बड़ौदा सत्संग का प्रसंग (प्रसंग)
14:00 साधु द्वारा वही बात दोहराने का उल्लेख (प्रसंग)
14:08 प्रेरक और जानकार कौन है प्रश्न (प्रश्न)
14:17 जड़ और चेतन का भेद समझाना (प्रवचन)
14:25 परमात्मा को चेतन और सर्वव्यापक बताना (प्रवचन)
14:40 ईश्वर को समझ से परे बताना (प्रवचन)
14:46 परम समझ का अधिष्ठान ईश्वर बताना (प्रवचन)
14:54 ईश्वर बुद्धि से नहीं जाना जा सकता (प्रवचन)
15:04 बुद्धि को जानने वाली सत्ता का प्रश्न (प्रश्न)
15:13 अहंकार, लोभ को जानने वाली सत्ता का प्रश्न (प्रश्न)
15:21 लोभ के सुख का उदाहरण (प्रवचन)
15:29 कामनाओं के सुख का उदाहरण (प्रवचन)
15:37 मोह के सुख का उदाहरण (प्रवचन)
15:44 अहंकार के सुख का उदाहरण (प्रवचन)
15:51 इंद्रिय सुख को भ्रमकारी बताना (प्रवचन)
15:59 सुख के मूल स्रोत का प्रश्न (प्रश्न)
16:07 इंद्रियों से अनुभव होने वाले सुख का उदाहरण (दृष्टांत)
16:16 धन और अहंकार से मिलने वाले सुख का उदाहरण (दृष्टांत)
16:26 धन को सुख का ज्ञान न होना (प्रवचन)
16:35 सुख-दुख को जानने वाली चेतना का वर्णन (प्रवचन)
16:43 सबको सत्ता और चेतना देने वाले ईश्वर का वर्णन (प्रवचन)
16:50 हृदय में परमात्मा होने की धारणा (प्रवचन)
16:58 कटोरी और लड्डू का उदाहरण (दृष्टांत)
17:05 हृदय और भगवान के आकार पर प्रश्न (प्रश्न)
17:12 छोटे भगवान की धारणा पर हास्य उदाहरण (दृष्टांत)
17:19 हृदय में भगवान होने की गलत समझ (प्रवचन)
17:27 भगवान की सर्वव्यापकता का वर्णन (प्रवचन)
17:34 अनुभव करने वाले अंतःकरण का वर्णन (प्रवचन)
17:49 सूर्य और बिलोरी कांच का उदाहरण (दृष्टांत)
17:58 सूर्य के प्रकाश से अग्नि उत्पन्न होने का उदाहरण (दृष्टांत)
18:04 अंतःकरण द्वारा भगवान के अनुभव का उदाहरण (प्रवचन)
18:13 डॉक्टरों को दिखने वाले हृदय और आध्यात्मिक हृदय का भेद (प्रवचन)
18:19 हृदय को आत्मा का निवास स्थान बताना (प्रवचन)
18:36 लालजी महाराज से मुलाकात का प्रसंग (प्रसंग)
18:43 आनंद में साधकों के मार्गदर्शन का अनुरोध (प्रसंग)
18:51 साधकों के घर जाने का प्रसंग (प्रसंग)
19:05 साधकों का स्वागत करना (प्रसंग)
19:13 बिना सूचना साधकों को आने का पता चलना (प्रसंग)
19:19 स्वप्न में महात्मा के दर्शन होना (प्रसंग)
19:27 स्वप्न के आधार पर पहचान होना (प्रसंग)
19:37 लालजी महाराज के निर्देश का उल्लेख (प्रसंग)
19:44 साधकों द्वारा स्वागत और पूजा (प्रसंग)
20:02 ध्यान भजन पर चर्चा का आरंभ (संवाद)
20:13 आनंद नगर की कॉलोनी का उल्लेख (प्रसंग)
20:23 डॉक्टरों की कॉलोनी का वर्णन (प्रसंग)
20:36 डॉक्टर साधकों का परिचय (प्रसंग)
20:46 ध्यान में प्रकाश और कंपन अनुभव का वर्णन (संवाद)
20:54 कुंडलिनी शक्ति जागरण का स्पष्टीकरण (प्रवचन)
21:01 नाड़ी शोधन और ऊर्जा प्रवाह का वर्णन (प्रवचन)
21:09 कुंडलिनी योग की साधना का उल्लेख (प्रवचन)
21:16 शंकाओं का समाधान और श्रद्धा उत्पन्न होना (प्रसंग)
21:24 साधना के अनुभव से मार्गदर्शन देना (प्रसंग)
21:41 डॉक्टरों द्वारा प्रश्न पूछना (संवाद)
21:47 भगवान के हृदय में होने का प्रश्न (प्रश्न)
21:59 डॉक्टरों का आपस में हँसना (प्रसंग)
22:06 भगवान के हृदय में होने की मान्यता पर चर्चा (संवाद)
22:12 भगवान को मानने या न मानने से अस्तित्व न बदलना (प्रवचन)
22:20 सूर्य के उदाहरण से ईश्वर के अस्तित्व का स्पष्टीकरण (दृष्टांत)
22:27 भगवान को प्रमाणपत्र की आवश्यकता न होना (प्रवचन)
22:36 भगवान को अंतरात्मा बताना (प्रवचन)
22:45 डॉक्टरों के हँसने का कारण पूछना (संवाद)
22:57 हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का परिचय (प्रसंग)
23:05 ऑपरेशन में भगवान खोजने का हास्य उदाहरण (दृष्टांत)
23:16 हार्ट ऑपरेशन में भगवान खोजने की बात (दृष्टांत)
23:23 डॉक्टरों की धारणा पर हास्य प्रतिक्रिया (प्रसंग)
23:30 माइक्रोस्कोप से भगवान देखने का तर्क (दृष्टांत)
23:39 तब शास्त्र और साधना की आवश्यकता न रहती (प्रवचन)
23:50 गीता का श्लोक — ईश्वर सर्वभूतों के हृदय में (उद्धरण)
24:07 शारीरिक हृदय और सूक्ष्म हृदय का भेद (प्रवचन)
24:17 सूक्ष्म शरीर अदृश्य होना (प्रवचन)
24:33 अन्नमय और सूक्ष्म शरीर का वर्णन (प्रवचन)
24:43 प्रेत प्रवेश का उदाहरण (दृष्टांत)
24:49 सूक्ष्म शरीर का अदृश्य होना (प्रवचन)
25:08 अच्छे संग और चिंतन का प्रभाव (प्रवचन)
25:15 निरहंकार सेवा का महत्व (प्रवचन)
25:21 राजकुमार के खेल का उदाहरण (दृष्टांत)
25:28 सेवा कार्य को प्रसन्नता का खेल बताना (प्रवचन)
25:38 मजदूरों से प्रश्न का दृष्टांत (दृष्टांत)
25:46 मजदूर का पत्थर कूटने का उत्तर (दृष्टांत)
25:55 मजदूर का रोजी कमाने का उत्तर (दृष्टांत)
26:02 मजदूर का महल बनाने का उत्तर (दृष्टांत)
26:09 मजदूर का मंदिर बनाने का उत्तर (दृष्टांत)
26:16 अलग-अलग दृष्टिकोण का वर्णन (प्रवचन)
26:23 सेवा को मंदिर निर्माण से जोड़ना (प्रवचन)
26:30 ऋषि प्रसाद सेवा को हृदय मंदिर निर्माण बताना (प्रवचन)
26:39 सेवा को मंदिर निर्माण का कार्य बताना (प्रवचन)
26:46 कार्य में भाव और ज्ञान को ऊँचा करने की शिक्षा (प्रवचन)
26:55 आत्मज्ञान को सर्वोच्च ज्ञान बताना (प्रवचन)
27:01 ब्रह्मज्ञानी गुरु की अंतिम चाबी का उदाहरण (दृष्टांत)
27:10 आत्मज्ञान के बिना पद का अस्थिर होना (प्रवचन)
27:18 सेठ या मंत्री पद से गिरने का उदाहरण (दृष्टांत)
27:27 आत्म पद के बिना कोई पद स्थायी नहीं (प्रवचन)
27:35 आत्म पद को शाश्वत बताना (प्रवचन)
27:42 राजाओं द्वारा आत्म पद की खोज का उदाहरण (कथा)
27:51 हनुमान जी की राम में शरणागति (कथा)
27:59 आत्म पद की महानता (प्रवचन)
28:06 आत्मज्ञान के मूल्य को न समझने का उदाहरण (दृष्टांत)
28:14 भूख के उदाहरण से आत्मज्ञान का महत्व (दृष्टांत)
28:21 आत्मज्ञान की भूख न होने की बात (प्रवचन)
28:30 आत्म पद प्राप्ति की अनिवार्यता (प्रवचन)
28:41 कृष्ण के साथ होने पर भी आत्मज्ञान बिना दुख न मिटना (कथा)
28:50 अर्जुन द्वारा आत्मज्ञान श्रवण का उदाहरण (कथा)
28:57 आत्मज्ञान से अर्जुन का दुख मिटना (कथा)
29:06 ब्रह्मज्ञानी गुरु के ज्ञान को अमूल्य बताना (प्रवचन)
29:15 भविष्य में भी गुरु की आवश्यकता बताना (प्रवचन)
29:22 गुरु कृपा, गुरु, ज्ञान और आत्मज्ञान का संबंध (उद्धरण)
29:29 हरि ओम जप (कीर्तन)
29:35 संगीत (कीर्तन)
29:41 राम नाम जप (कीर्तन)
29:48 हरि ओम जप (कीर्तन)
29:58 ओम जप (कीर्तन)
30:08 — (भजन) वे चाहते सब झोली भर ले निज आत्मा का दर्शन कर ले [संगीत]
30:18 — (भजन) 108 जो बात करेंगे उनके सारे काज सेंगे [संगीत]
30:27 — (भजन) गंगा राम शील है दासा होगी पूर्ण [संगीत]
30:34 — (भजन) सभी अभिलाषा — हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम
30:41 — (भजन) हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम
30:47 — (भजन) हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम
30:53 — (भजन) हरि ओम हरि ओम — वर भय दाता सदगुरु [संगीत]
31:02 — (भजन) परम ही भक्त कृपाल गुरुवर [संगीत]
31:14 — (भजन) प्रेम से जो बजे साईं करे निया निश्चल
31:23 — (भजन) प्रेम से जो बजे साईं करे निया [संगीत]
31:32 — (भजन) मन में नाम तेरा रहे मुख पे रहे [संगीत]
31:40 — (भजन) मुख पे रहे सुगीवर हमको [संगीत]
31:49 — (भजन) इतना दीजिए रहे चरण में प्रिय [संगीत]
31:58 — (भजन) हमको इतना दीजिए रहे चरण में प्रिय
32:08 — (भजन) हरि ओम हरि ओम हरि ओम [संगीत]
32:13 — (भजन) हरि ओम हरि ओम हरि ओम
32:19 — (भजन) हरि ओम हरि ओम हरि ओम [संगीत]
32:25 — (दोहा / उपदेश) गुरु बिन ज्ञान ना उपजे
32:32 — (दोहा) गुरु बिन मिटे ना भय
32:35 — (दोहा) गुरु बिन संशय ना मिटे — जय जय जय जय गुरुदेव [संगीत]
32:50 — (दोहा) तीर्थ का है एक फल, संत मिले फल चार
33:01 — (दोहा) सदगुरु मिले आनंद फल — कहत कबीर [संगीत]
33:08 — (प्रसंग आरंभ) इटावा डिस्ट्रिक्ट के डिप्टी कलेक्टर सुप्रू साहब का प्रसंग
33:19 — (कथा) रात्रि का समय — सुप्रू साहब पलंग पर शयन कर रहे थे
33:27 — (संवाद) मनहर नाई को कहा — जरा पैरों की चंपी कर दे
33:35 — (व्याख्या) वृद्धावस्था में पैरों की चंपी से शरीर की वायु शांत होती है
33:42 — (व्याख्या) चंपी से नाड़ियों में वायु प्रसारित होती है और नींद अच्छी आती है
33:51 — (कथा) सुप्रू साहब पैर दबवा रहे थे
34:00 — (उपदेश) खड़े-खड़े पानी पीने से पैरों की पिंडलियों में दर्द होता है
34:08 — (अनुभव) बड़े बुजुर्गों को अक्सर चंपी की आवश्यकता होती है
34:16 — (उदाहरण) नारायण बापू भी चंपी करवाते थे
34:23 — (कथा) सुप्रू साहब रात को चंपी करवाते हुए सोने लगे
34:31 — (संवाद) बोले — पैर दबाते-दबाते कोई कथा भी सुना दे
34:40 — (संवाद) मनहर बोला — आप सो जाएंगे और मैं कथा सुनाऊं, ऐसा कैसे
34:49 — (व्याख्या) सत्संग सुनने वाला चाहे नौकर ही क्यों न हो, दमदार होता है
35:04 — (स्वभाव चर्चा) पित्त प्रकृति वाले लोग कई बार स्पष्ट बोलते हैं
35:11 — (संवाद) मनहर बोला — मैं चंपी करता रहूं और आप सो जाएं, ऐसा नहीं होगा
35:18 — (संवाद) सुप्रू साहब बोले — नहीं, मैं सुनूंगा
35:27 — (कथा आरंभ) मनहर ने एक अजीब कहानी सुनानी शुरू की
35:39 — (कथा) ईरान का सम्राट — विशाल राज्य और ऐश्वर्य
35:48 — (कथा) युवावस्था, वैभव और ऐश की जिंदगी
35:56 — (कथा) दरबार में भाट-चारण यशगान करते थे
36:02 — (वर्णन) चंवर डुलाने वाली सुंदरियां, हीरे-जवाहरात से सजी चूड़ियां
36:11 — (संवाद) सुप्रू साहब बीच-बीच में कहते — मैं सुन रहा हूं
36:24 — (कथा) रेशम की खाट, फूलों की चादर, केवड़े की खुशबू
36:32 — (कथा) चांदनी रात में छत पर विश्राम
36:42 — (वर्णन) भादो और शरद पूर्णिमा की चांदनी रात
37:03 — (व्याख्या) शरद पूर्णिमा की चांदनी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होती है
37:19 — (कथा) राजा-रानी का जीवन ठाट-बाट में बीत रहा था
38:02 — (कथा) एक दिन दासी ने शैया सजाई — फूलों की चादर बिछाई
38:19 — (कथा) थकी हुई दासी ने सोचा — जरा मैं भी लेटकर देखूं
38:28 — (कथा) राजा-रानी अभी भोजन कर रहे थे, बाद में आएंगे
38:44 — (कथा) दासी शैया पर लेट गई
38:56 — (कथा) लेटते ही उसे गहरी नींद आ गई
39:19 — (कथा) गहरी नींद में समय का पता नहीं चलता
39:34 — (कथा) राजा-रानी लौटे और दासी को अपनी शैया पर सोते देखा
39:42 — (कथा) दासी खर्राटे ले रही थी
39:51 — (उपदेश) राज्य, धन, जवानी और गुरु का अभाव — अहंकार पैदा करते हैं
40:16 — (उदाहरण) रावण, सीज़र, हिटलर, औरंगजेब — अहंकार के उदाहरण
40:31 — (उपदेश) शरीर की उत्पत्ति साधारण है फिर भी मनुष्य अहंकार करता है
40:49 — (दोहा) धन जोबन का करे गुमान — सो मूर्ख अंध अज्ञान
41:06 — (कथा) राजा ने रानी से कहा — यह तेरी अपराधी है
41:15 — (आदेश) इसे 100 हंटर मारो
41:24 — (कथा) रानी ने हंटर चलाया — दासी की नींद खुली
41:31 — (कथा) दासी रोने लगी
41:39 — (कथा) कुछ वार के बाद रानी ने धीरे मारना शुरू किया
41:48 — (कथा) रोती-चीखती दासी अचानक हंसने लगी
42:13 — (कथा) दासी की हंसी से पूरा माहौल बदल गया
42:30 — (कथा) राजा ने आश्चर्य से पूछा — क्यों हंस रही है
42:46 — (संवाद) राजा ने पुकारा — ऐ जुबेदा, तू रोते-रोते हंस क्यों पड़ी
43:17 — (संवाद) राजा-रानी दोनों कारण पूछने लगे
43:25 — (संवाद) दासी बोली — जहांपनाह, गुस्ताखी माफ हो
43:36 — (संवाद) मनहर नाई ने सुप्रू साहब से कहा — आप सो गए क्या
43:44 — (संवाद) सुप्रू बोले — नहीं, मैं सुन रहा हूं
44:14 — (व्याख्या) मनहर नाई सत्संग और ओंकार जप से बुद्धिमान बन गया था
44:30 — (व्याख्या) भगवान का नाम मनुष्य को बुद्धिमान और लोकहितकारी बनाता है
45:08 — (कथा) मनहर नाई सुप्रू साहब को कथा सुनाते-सुनाते प्रश्न पूछ रहा है
45:24 — (संकेत) दासी अब एक गहरी मार्मिक बात कहने वाली है
45:50 — (कथा) दासी बोली — जहांपनाह गुस्ताखी माफ हो, मुझे हंसी इसलिए आई
45:58 — (कथा) मैं थोड़ी देर सोई इसलिए मुझे 100 बैत की सजा मिल रही है
46:04 — (कथा) एक घड़ी सोने का इतना दंड मिल रहा है
46:13 — (उपदेश) जो रोज घंटों सोते हैं और दूसरों को दंड देते हैं वे अपने भविष्य के दंड का विचार नहीं करते
46:22 — (दृष्टांत) कौन जाने अगला जन्म भैंसा, गाय या घोड़ा बनना पड़े
46:30 — (उपदेश) दूसरों को सजा देने वाला अपनी सजा का विचार नहीं करता
46:40 — (उपदेश) मनुष्य जवानी, सत्ता और धन में सब भूल जाता है
46:50 — (उपदेश) मृत्यु निकट आ रही है, आयुष्य समाप्त हो रहा है — यह समझ नहीं पाता
46:58 — (उपदेश) आत्मा-परमात्मा या अल्लाह को नहीं पहचानता
47:09 — (संवाद) सुप्रू साहब बोले — नहीं नहीं, मैं सुन रहा हूँ
47:16 — (संवाद) बोले — कथा बहुत अच्छी है, आगे सुनाओ
47:24 — (संवाद) बोले — फिर क्या हुआ?
47:31 — (कथा) ऐशो-आराम में जीने वाला सम्राट उस शैया पर नहीं सोया
47:40 — (दृष्टांत) जैसे भगवान राम ने राजपाट छोड़ दिया
47:49 — (कथा) सम्राट मध्यरात्रि में राज्य-लक्ष्मी छोड़कर निकल पड़ा
47:55 — (कथा) फकीरों को खोजते-खोजते सत्संग की खोज में चला गया
48:05 — (कथा) सत्य स्वरूप अल्लाह की खोज में निकल गया
48:14 — (उपदेश) कथा को लोग केवल मनोरंजन समझ लेते हैं
48:20 — (उपदेश) जीवन सुधारने वाली कथा भी मूर्खों के लिए मनोरंजन बन जाती है
48:28 — (उपदेश) सम्राट ने तो सब छोड़ दिया — मनुष्य अपने जीवन में क्या करता है
48:34 — (उपदेश) सोने की खाट, रेशम की नवार, फूलों की चादर का वैभव भी छोड़ना पड़ता है
48:41 — (उपदेश) आयुष्य कब समाप्त हो जाए पता नहीं चलता
49:10 — (कथा) सुप्रू साहब को कथा से गहरी प्रेरणा मिली
49:20 — (कथा) प्रमाद की नींद त्यागने का निर्णय लिया
49:32 — (कथा) पलंग छोड़कर कंबल धरती पर बिछाया
49:40 — (कथा) बैठकर भगवान का सुमिरन करने लगे
50:03 — (कथा) सुबह सुप्रू साहब ने कलेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया
50:11 — (संवाद) अंग्रेज कलेक्टर ने कहा — अभी जवान हो, रिटायर मत लो
50:19 — (संवाद) बच्चों का भविष्य सोचो
50:27 — (संवाद) सुप्रू बोले — नौकरी गुलामी है, मैं नहीं करूंगा
50:36 — (कथा) सुप्रू साहब नौकरी छोड़कर साधु बन गए
50:45 — (कथा) यमुना किनारे जाकर रहने लगे
50:53 — (कथा) भिक्षा लेकर भोजन करते और जप करते
51:00 — (कथा) यमुना और आकाश को देखते हुए साधना करते
51:08 — (कथा) हाथ में डंडा लेकर मन को समझाते
51:17 — (कथा) सुप्रू साहब का नाम पड़ा — खटखटा बाबा
51:26 — (साधना) 12 वर्ष तक निरंतर सुमिरन किया
51:32 — (साधना) पहले जोर से जप → फिर स्वास में → फिर मन में → फिर हृदय में
51:42 — (फल) आत्मानुभव और ब्रह्मी स्थिति प्राप्त हुई
51:48 — (भजन) गुरु कृपा से मोह समाप्त
51:55 — (भजन) इच्छा और लोभ समाप्त
52:07 — (भजन) पूर्ण गुरु कृपा मिली — पूर्ण गुरु का ज्ञान
52:17 — (भजन) मन से आशा समाप्त
52:27 — (भजन) खटखटा बाबा का गुणगान
52:36 — (भजन) हरि ओम हरि ओम हरि ओम
52:43 — (भजन) हरि ओम हरि ओम
52:52 — (भजन) हरि ओम हरि ओम
52:59 — (भजन) गुरु ने दिशा दिखाई
53:06 — (भजन) गुरुवर ने मार्ग दिखाया
53:13 — (भजन) फकीर की मौज — झोपड़ी ही महल
53:23 — (भजन) फकीर की मौज — झोपड़ा ही फूल
53:30 — (भजन) ज्ञान लेकर नर्मदा किनारे पहुँचे
53:43 — (भजन) घोर जंगल में साधना
53:52 — (भजन) पत्थर पर बैठकर ध्यान
54:00 — (भजन) निरंजन का ध्यान
54:04 — (भजन) रात बीती — प्रभात हुआ
54:12 — (भजन) सूर्य उदय हुआ
54:19 — (भजन) पक्षियों की आवाज से ध्यान टूटा
54:27 — (भजन) संतों के पास लोग आने लगे
54:35 — (विचार) संत ने सोचा — मैं कहीं नहीं जाऊंगा
54:40 — (विचार) यहीं बैठकर रहूंगा
54:50 — (विचार) जिसे जरूरत होगी वह स्वयं आएगा
55:05 — (कथा) दो किसान भोजन लेकर आए
55:13 — (संवाद) बोले — महाराज, आज हमारा भाग्य है
55:18 — (संवाद) कृपया भोजन स्वीकार करें
55:26 — (संवाद) संत बोले — पहले अपने परिवार को खिलाओ
55:36 — (भजन) हरि ओम हरि ओम
55:43 — (भजन) हरि ओम हरि ओम
55:55 — (भजन) शक्ति ओम — भक्ति हरि ओम — मुक्ति हरि ओम
56:04 — (भजन) प्रभु जी हरि ओम
56:11 — (भजन) हरि ओम मेरे हरि ओम
56:41 — (उपदेश) सोने की खाट, रेशम की नवार, फूलों की शैया छोड़कर ईश्वर की ओर जाना
56:51 — (उपदेश) मरते समय दुनिया छोड़ना मजबूरी है
57:00 — (उपदेश) लेकिन भगवान के लिए त्याग करना शहनशाही है
57:08 — (उपदेश) दुनिया की वस्तुओं को छोड़कर भगवान की ओर जाना सच्ची महानता है
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