लगाओ दम मिटे गम - संध्या सत्संग - 02-03-2026 सुबह
TIME STAMP INDEX
00:00 जन्मदिन मनाने की भ्रांति आयु बढ़ना नहीं मृत्यु की ओर बढ़ना (प्रसंग)
00:19 सफेद बाल उम्र का नहीं मृत्यु की निकटता का संकेत संसार जलती आग है
00:34 नश्वर शरीर और नश्वर संसार में आसक्ति से अशांति राग द्वेष ईर्ष्या
00:47 अशांति में शांत विचार राग में वैराग्य इंद्रिय लोलुपता में शम दम का अभ्यास
00:59 शम मन को रोकना दम इंद्रियों को रोकना आत्मा में स्थापना
01:12 इंद्रियों को विवेक से लौटा कर आत्मा में स्थित होना जन्म मरण का गम मिटाना
01:26 लगाओ दम मिटे गम का वास्तविक अर्थ इंद्रिय निग्रह से जन्म मृत्यु चक्र का अंत
01:44 सीधी बात को टेढ़ा अर्थ लेकर नशा आदि में लगाना गलत समझ (प्रसंग)
02:07 मन रूपी घोड़े को एकदम न रोकना न एकदम छोड़ना लगाम की युक्ति (दृष्टांत)
02:33 स्टीयरिंग घुमाकर वहीं लाना आरटीओ की आठ और शून्य की युक्ति से मन नियंत्रण (दृष्टांत)
03:55 युक्ति से मुक्ति होती है परिश्रम और बाह्य त्याग से नहीं
04:07 पत्नी घर धन त्यागने पर भी चिंतन न छूटे तो वास्तविक त्याग नहीं
04:29 विषयों को विष समान छोड़ने का सही अर्थ बाह्य नहीं आंतरिक त्याग
04:46 ज्ञानी का व्यवहार सामान्य पर आसक्ति रहित
05:07 दृश्य अनित्य है आंखें वृत्ति बदलती है पर सच्चिदानंद आत्मा न बदलती (दृष्टांत)
05:48 श्रवण का आनंद भी चैतन्य के कारण गीत का साक्षी भाव (दृष्टांत)
06:25 भोजन स्वाद का अनुभव चैतन्य के कारण शिवोहम भाव
06:52 हरिद्वार बाह्य और अंतर हरिद्वार हृदय में ईश्वर मिलन (दृष्टांत)
07:26 प्रिय वस्तु त्याग का तीर्थ फल लड्डू त्याग कथा (कथा)
07:56 बाह्य त्याग पर आंतरिक चिंतन न छूटना ब्राह्मण की परीक्षा (कथा)
09:12 बाधा का दिखावा पर लड्डू चिंतन जारी आंतरिक आसक्ति (कथा)
10:12 विषय को विष समान पूर्णतया भूलना जैसे विष का चिंतन नहीं करते
10:44 क्षमा संतोष शम दम को जीवन में उतारना
11:01 क्षमा बड़न को होत है भृगु द्वारा विष्णु को लात उदाहरण (प्रसंग)
11:38 व्यवहार में सजगता और आंतरिक क्षमा का संतुलन
11:59 नारद और सर्प की कथा क्षमा और संयम का उपदेश (कथा)
12:49 सर्प का अत्यधिक विनम्र होकर कष्ट पाना (कथा)
13:27 नारद का उपदेश डंक मत मार पर फुफकार तो रख रक्षा हेतु (संवाद)
14:03 भक्ति ज्ञान तंदुरुस्ती और संसार सागर से पार हेतु युक्ति आवश्यक
14:18 चित्र और सिनेमा को असत्य जानकर साक्षी भाव रखना (दृष्टांत)
14:35 हरि ओम तत्सत सब रण छोड़ो राय की मनवश करने की कीमिया (प्रसंग)
14:43 घोड़े की लगाम जरा टेढ़ी रखने की युक्ति भोजन में पंचप्राण को आहुति (दृष्टांत)
14:50 प्राणाय स्वाहा अपानाय स्वाहा व्यानाय स्वाहा उदानाय स्वाहा समानाय स्वाहा (मंत्र)
14:57 मैं अन्न नहीं खाता प्राणों को आहुति देता हूं ऐसा भाव (उपदेश)
15:03 कढ़ी खिचड़ी में स्वाद की चाह और हरी मिर्च का आग्रह मन की वृत्ति (दृष्टांत)
15:16 रोटी फंसना और देखने वाला शाश्वत राम नश्वर देह से भिन्न (दृष्टांत)
15:30 शरीर अनेक बार बदला पर मैं अज अविनाशी शांत निर्लेप शुद्ध बुद्ध शिवोहम (उपदेश)
15:50 सच्चिदानंदोहम आत्मा शांत रूपोहम चिंतन से मति अनुसार गति (सूक्ति)
16:04 सिंधी गुजराती पंजाबी आदि पहचान सुन-सुनकर पक्की होना असली स्वरूप चैतन्य (प्रसंग)
16:25 वेद का उपदेश सत्य स्वरूप को सुनकर स्मरण करो तो बेड़ा पार (संदर्भ)
16:38 अष्टावक्र गीता के विचार से जीवन में उत्साह आनंद प्रेम की क्रांति (ग्रंथ संदर्भ)
16:55 अष्टावक्र और जनक का उच्च संवाद छोटी बातों से परे (संवाद)
17:08 अष्टावक्र गीता समझने से प्राण मन चाह में नई रोशनी (ग्रंथ महिमा)
17:22 ब्रह्म रामायण रूप में छंदों में प्रस्तुति समिति द्वारा प्रकाशन (प्रसंग)
17:35 जो मोक्ष है तू चाहता विषम विषय तज तात पहला उपदेश (श्लोक)
17:48 क्षमा संतोष शम दम पी सुधा दिन रात (श्लोक)
18:05 संसार जलती आग है इससे भागकर शांत शीतल देश में हो जा अजर अमर (भजन)
18:47 शीतल शांत देश बाह्य स्थान नहीं चित्त की गहराई आत्मा है (उपदेश)
19:00 अष्टावक्र आठ महीने में ज्ञानप्राप्ति कथा (प्रसंग)
19:05 गौतम बुद्ध जन्म के साथ सात कदम चल प्रकाश वचन (प्रसंग)
19:29 दुख और दुखमुक्ति की खोज संभव है बुद्ध का संदेश (उपदेश)
19:38 लाओत्से अस्सी वर्ष गर्भ में रहे कथा प्रतीक विषयविचार रहित जीवन (प्रसंग)
20:16 ईसा मसीह विषय चिंतन छोड़ ईश्वर चिंतन से योगशक्ति प्राप्ति (प्रसंग)
20:49 क्रॉस पर भी ईश्वर इच्छा में संतोष से शीतलता (प्रसंग)
21:16 जिसका चिंतन वहां स्थिति आत्मा चिंतन से शीतलता (उपदेश)
21:45 निर्मल स्वामी का वचन ब्रह्मज्ञानी के द्वार का कुत्ता होना भी भला (प्रसंग)
22:05 गुरु द्वारा चोट देह अभिमान पर होती आत्मा अछूती (उपदेश)
22:28 जापान के वृक्ष गुरु की कथा खतरे में स्वतः सजगता (कथा)
23:07 नीचे उतरते समय सावधान रहने का उपदेश ढील में दुर्घटना (कथा)
24:08 जहां खतरा कम लगे वहीं असावधानी से पतन (कथा)
24:40 सद्गुरु द्वार का खतरा संभालने हेतु शत्रु नहीं हितकारी (उपदेश)
25:01 कथम ज्ञानं मुक्ति वैराग्य कैसे प्रश्न जनक का (संवाद)
25:17 अष्टावक्र का विचार प्रश्नकर्ता लंपट या मूढ़ नहीं (संवाद)
25:47 ज्ञानी को संदेह नहीं भक्त को क्रोध नहीं उदाहरण (उपदेश)
25:54 संत तुकाराम की कीर्तन कथा क्षमा का आदर्श (कथा)
26:38 अपमान के बाद भी क्षमा और कीर्तन हेतु आमंत्रण (कथा)
27:04 संकल्प लेकर ध्यान में समय पूरा बैठने का आग्रह (उपदेश)
27:30 संकल्प न तोड़ने से मन वश में आता (उपदेश)
28:04 अष्टावक्र का उत्तर विषयों को विष समान छोड़ो (श्लोक)
28:21 क्षमा दया संतोष पीयूष का पान करो (श्लोक)
28:35 जो मोक्ष है तू चाहता विषम विषय तज तात (भजन)
29:06 संसार जलती आग है शांत शीतल देश में हो जा अजर अमर (भजन)
29:42 शत्रु मित्र धन की तड़प में चित्त को शीतल देश में लाओ (उपदेश)
30:25 लाओत्से का वचन यश धन जीवन की चाह न होने से निर्भयता (प्रसंग)
30:56 अशांति खिन्नता संकेत है कि अशांत देश में चले गए हो (उपदेश)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें