मंगलवार, 3 मार्च 2026

वृत्ति मीमांसा - संध्या सत्संग - 01-03-2026 सुबह |

 वृत्ति मीमांसा - संध्या सत्संग - 01-03-2026 सुबह |

TIME STAMP INDEX 

00:01 संसार में जो भी दुख सुख हैं वे सब वृत्ति का विलास मात्र है इसका अर्थ और वृत्ति की परिभाषा
00:35 संसार का व्यवहार सुख दुख आकर्षण विकर्षण भोग त्याग पंडित साधु मूर्ख सब वृत्ति का विस्तार
00:59 वृत्तियां हृदय से निकलती हैं कल्पना के रूप में दुख में सुख और विष में अमृत का भास
01:25 बादलों में हाथी रथ ठूंठ में चोर साधु सीपी में रूपया रस्सी में सांप (दृष्टांत)
02:07 देह में सुख बुद्धि और परमात्मा में सुख बुद्धि का अंतर तथा परम सुख की उपलब्धि
02:20 फिल्म के पर्दे द्वारा वृत्तियों को नीचे के केंद्रों में ले जाने का प्रभाव
02:59 फिल्मी दृश्य से वासना जागृत होकर जीवन शक्ति का नाश (प्रसंग)
04:22 कल्पना से विनाश और रक्षण दोनों संभव माया का प्रभाव
05:05 साधना जप तप सेवा से वृत्ति की मलिनता घटती है और विवेक बढ़ता है
05:35 पुराने संस्कारों की गहरी लकीर से साधक का बार बार गिरना और संभलना
06:23 विवेक और वासना का संघर्ष तथा हिम्मत का आना जाना
07:34 आत्मवेत्ता महापुरुषों का श्रेष्ठ साधन विषय सुख की क्षणिकता का विश्लेषण
08:23 जुआरी की कहावत हारा आधा मुंह काला जीता पूरा मुंह काला (दृष्टांत)
09:25 संसार में प्राप्त पद कुर्सी से वासना बढ़ने का खतरा
09:33 सुख की इच्छा से बंधी वृत्ति और सुख का न टिकना
10:13 तीन प्रकार की वृत्ति बुद्धू साधक और सिद्ध
10:45 साधक की तत्किम भावना राज्य धन रूप का निष्फल होना
11:39 मूढ़ की परिभाषा संसार को सत्य मानकर नश्वर में सुख खोजने वाला
13:38 श्रीकृष्ण का वचन विमूढ़ा नानुपश्यति ज्ञान चक्षु से तत्व दर्शन (संदर्भ)
14:03 सत्संग से विवेक जागरण विवेक से साधना साधना से उन्नति
14:57 स्वामी विवेकानंद का सावधानी का उपदेश पुराने घाव को न खुजलाने का (प्रसंग)
15:47 एकांत वास मौन लघु भोजन का उपदेश आदि शंकराचार्य द्वारा (संदर्भ)
16:48 साधना से वृत्ति की शुद्धि और मोक्ष की दिशा
17:54 तीव्र प्रारब्ध का उदाहरण पाराशर और मत्स्यगंधा (कथा)
19:38 वेदव्यास जन्म और पतन उत्थान का विवेचन (प्रसंग)
20:52 शरीर रहते इच्छा अनुसार सब न होना अवस्थाओं की अनित्यता
22:09 श्रीकृष्ण और भगवान राम के जीवन में भी बाह्य घटनाओं की अनिवार्यता (प्रसंग)
23:32 कर्ता भाव और दृष्टा भाव का अंतर
23:45 भोगी भक्त योगी और ज्ञानी की वृत्ति का भेद
24:28 ज्ञानी द्वारा वृत्ति का बाध और प्रारब्ध अनुसार व्यवहार
25:49 इच्छा अनुसार सब न होना और इच्छा भी वृत्ति होना
26:54 श्रीकृष्ण की लीला में विस्तार और विनाश पर असंगता (प्रसंग)
27:31 सुख दुख से न बंधने वाला ही मुक्त वास्तविक आत्मा अबंधित
28:10 ईश्वर मार्ग के तीन भेद वह है वह मेरा है मैं वही हूं
29:02 तसैवाहम तवैवाहम सोऽहं  अद्वैत की पराकाष्ठा (सूक्ति)
29:27 विश्वास से आगे अंतःकरण से परे चैतन्य की अनुभूति
29:48 चैतन्य का सूर्य चंद्र सात्विक राजस तामस में प्रकट होना (दृष्टांत)
30:15 चिदानंद रूपम शिवोहम शिवोहम जन्म मरण और भेद से परे आत्मानुभव


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