होली-धूलेंडी - संध्या सत्संग - 03-03-2026 सुबह
TIME STAMP INDEX
00:18 भीतर के रस का आदर बिना बाह्य उपाय निष्फल (उपदेश)
00:39 अपनी शक्ति जीवन समय का आदर ही परम आदर का द्वार (उपदेश)
01:07 ऊर्जा और जीवन के स्वामी न बने तो शैतान स्वामी बन जाएगा (चेतावनी)
01:28 होली पर इच्छाओं वासनाओं अहंकार को धूल में मिलाने का संदेश (उपदेश)
01:41 निर्दोष बालक समान निर्विकार जीवन धुलेटी का पैगाम (प्रसंग)
01:54 ध्यान सत्संग महापुरुष दर्शन से ईश्वरी सामर्थ्य (उपदेश)
02:20 प्राणायाम बहिर कुंभक और भीतरी कुंभक से जीवन शक्ति विकास (उपदेश)
02:52 महापुरुषों का एकांत और अज्ञातवास शक्ति संरक्षण हेतु (प्रसंग)
03:35 दृष्टि की रक्षा से वाणी में सामर्थ्य और प्रभाव (उपदेश)
04:19 जीवन शक्ति का आदर न किया तो शैतान हावी (चेतावनी)
04:55 साधक की होली संयम और समझ की लकड़ी से ज्ञानाग्नि (उपदेश)
05:38 ब्रह्मज्ञान की आग से विकार भस्म कर धुलेटी में शिवोहम भाव (उपदेश)
06:11 जो भीतर मस्त वही जहां जाए आनंद रूप (सूक्ति)
06:44 फकीरी होली का रंग अबाधित कभी न उतरे (दृष्टांत)
07:25 फकीरी होली जहां पाने के बाद खोना न हो (उपदेश)
07:48 होली का मूल अर्थ देह-अभ्यास भूलकर एकता (प्रसंग)
08:31 त्योहारों का दुरुपयोग अहंकार और विकार वृद्धि (चेतावनी)
09:17 ज्ञान की पिचकारी से अहंकार शैतान को भगाना (उपदेश)
10:12 त्यौहार सार्थक जब ईश्वर मार्ग में एक कदम आगे (उपदेश)
10:50 असली पिता सरल प्रेमस्वरूप आनंदमूर्ति (उपदेश)
11:20 रोटी और धागा दृष्टांत देह नश्वर आत्मा शाश्वत (दृष्टांत)
12:00 दृष्टि संयम और ध्यान से जीवन शक्ति संचय (उपदेश)
12:43 ध्यान प्राणायाम व्यायाम से जीवन शक्ति विकास (उपदेश)
13:11 आशा तृष्णा ईर्ष्या दंभ क्रोध अज्ञान न जले तो होली व्यर्थ (कविता)
14:19 मोह ममता पर धूल न डाली तो धुलेटी क्या खेली (कविता)
14:25 वेदांत छंदावली में फकीरी होली का गान (ग्रंथ संदर्भ)
14:46 शत्रु से छाती मिलाकर ईश्वर से मुख मोड़ना व्यर्थ (कविता)
15:21 जो अपना है उसे प्रकट करो जगत से नाता छोड़ो (उपदेश)
15:53 अपने देश अर्थात आत्मदेश की होली भली परदेश अर्थात देह की नहीं (दृष्टांत)
16:12 स्वदेश की होली अर्थात आत्मदेश में स्थित होना (उपदेश)
16:18 स्वस्थ का अर्थ स्व में स्थित होना शरीर या मन की दशा नहीं (उपदेश)
16:36 शरीर तंदुरुस्त पर मन अशांत तो स्वस्थता व्यर्थ (उपदेश)
16:43 तुम स्वस्थ हो जाओ शरीर मन की बीमारी बाधक नहीं (उपदेश)
17:16 फकीरी होली से असली स्वस्थता का बोध (प्रसंग)
17:59 भांग जूता झगड़ा यह होली नहीं (चेतावनी)
18:27 गान नृत्य में अहंकार विसर्जन ही सच्ची होली (उपदेश)
19:15 होली अगर खेलनी हो तो संत समत खेलिए (भजन)
19:52 संत संग में ब्रह्मविद्या की अग्नि से विकार स्वाहा (उपदेश)
20:26 त्यौहार से नैसर्गिक सरल जीवन की झलक (प्रसंग)
21:21 संत का आदर प्रोफेसर से हजार गुना अधिक (उपदेश)
22:46 शेरनी का दूध केवल सुवर्ण पात्र में ठहरे पात्रता आवश्यक (दृष्टांत)
23:18 स्थूल नहीं मानसिक होली मनाने का आग्रह (उपदेश)
23:43 सच ग्रहण झूठ त्याग निर्णयपूर्वक कर्म (उपदेश)
24:03 संसार जलती आग विषय फीके लगें तब होली सफल (भजन)
24:48 शांति और आत्मज्ञान का निशदिन ध्यान होली की सार्थकता (उपदेश)
25:17 सद्गुरु की पिचकारी लगे तब सच्ची होली (भजन)
25:52 सब कच्चे रंग उड़ें एक पक्का आत्मज्ञान रंग रहे (उपदेश)
26:24 योगमार्ग में आकर्षण बाधाएं निष्कामता की परीक्षा (प्रसंग)
27:29 पूर्ण निष्कामी आत्मवेत्ता ईश्वर पाने की भी कामना नहीं (उपदेश)
28:14 आला फकीर का तुर्क दुनिया तुर्क मौला वैराग्य संदेश (प्रसंग)
29:30 दुनिया देवता यहां तक कि ईश्वर आशा भी त्याग अंतिम मिलन (उपदेश)
30:09 देश काल वस्तु से परे अपरिच्छिन्न ही परम ईश्वर (उपदेश)
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