शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

भगवद दर्शन से भी ऊंचा है सत्संग - आश्रम संध्या सत्संग 27-02-2026 सुबह |

 

भगवद दर्शन से भी ऊंचा है सत्संग - आश्रम संध्या सत्संग 27-02-2026 सुबह |

TIME STAMP INDEX   

0:00   आत्म शांति में रुचि रखने वाले पृथ्वी के देव

0:33   कबीर जी का वैकुंठ प्रसंग (प्रसंग)

1:03   सनकादि ऋषि और सत्संग की महिमा

1:14   केवल दर्शन से दोष नहीं मिटते

2:17   अर्जुन को श्रीकृष्ण का उपदेश और मोह नाश

2:54   सतगुरु तत्व बिना साधना अधूरी

3:15   कबीर वचन और भटकता जीव

4:03   भगवद्गीता श्लोक समुद्र दृष्टांत

4:39   तीन अनिवार्य जीवन सत्य

6:16   राम नाम ही सच्चा धन

6:41   यमराज और हाथी की कथा (कथा)

7:59   जीवित मनुष्य की चतुराई (कथा)

10:54   वैकुंठ भरने का रहस्य (कथा)

15:40   मनुष्य जीवन की महान संभावना

16:26   संत संग की आवश्यकता

17:27   तुलसीदास का परिवर्तन (कथा)

19:47   सच्ची प्रार्थना की शक्ति

22:36   संत द्वार का कुत्ता बनने की विनती (प्रसंग)

23:47   सत्संग का आह्वान (भजन)

24:46   कामनाओं का शुद्धिकरण

25:52   गरुड़ मोह और सत्संग से निवृत्ति (कथा)

28:34   सत्संग से अंतर्ज्योति जागरण

29:29   ज्ञानी पुरुषों की विशेषता


इंडेक्स के अनुसार कंटेंट:

0:00 (विवरण) जिनके जीवन में आत्म शांति पाने की रुचि और तत्परता है वे पृथ्वी पर के देव हैं। स्वर्ग के देव पुण्य क्षय करते हैं, जबकि पृथ्वी के देव दान, सेवा, सुमिरन से पाप नष्ट कर हृदय अमृत पीते हैं।

0:33 (प्रसंग) कबीर जी के पास भगवान का परवाना आया, पर वे वैकुंठ नहीं जाना चाहते क्योंकि वहां सत्संग नहीं। “राम परवाना भेजिया…” कहकर वे सत्संग की महिमा बताते हैं।

1:03 (विवरण) सनकादि ऋषि आत्मा-परमात्मा चर्चा में शांति पाते हैं। एक वक्ता, तीन श्रोता बनकर ब्रह्मचर्चा करते हैं और परम विश्रांति पाते हैं।

1:14 (उदाहरण) केवल भगवान का साकार दर्शन हो जाए तो भी काम, क्रोध, कपट रह सकते हैं। मंथरा, कैकयी, शूर्पणखा, शकुनि, दुर्योधन — सभी ने दर्शन किए पर दोष रहे।

2:17 (सिद्धांत) अर्जुन को श्री कृष्ण ने उपदेश देकर कृष्ण तत्व का बोध कराया। तब अर्जुन ने कहा “नष्टो मोह…” — ज्ञान से मोह नष्ट हुआ।

2:54 (सिद्धांत) सतगुरु आत्मा-परमात्मा का साक्षात्कार न कराए तब तक साधना अधूरी रहती है और मन सुख-दुख में डोलता रहता है।

3:15 (उपदेश) कबीर वचन “भटक मुआ भेदु बिना…” जीव की दशा बताते हैं। बिना तत्वज्ञान जीव वासनाओं में भटकता है।

4:03 (श्लोक) भगवद्गीता का “आपूर्यमाणम अचल प्रतिष्ठं…” — जैसे समुद्र नदियों से भरकर भी अचल रहता है, वैसे निर्वासनिक पुरुष शांति पाता है।

4:39 (उपदेश) तीन बातें अनिवार्य हैं — मृत्यु निश्चित है; बीता समय नहीं लौटता; लक्ष्य परमात्मा होना चाहिए। लक्ष्य बिना जीवन भटकन है।

6:16 (दोहा) “कबीरा यह जग निर्धन…” — राम नाम धन बिना कोई धनवान नहीं। बाहरी धन यहीं रह जाएगा, आत्मधन ही साथ जाएगा।

6:41 (कथा) यमराज और हाथी संवाद में हाथी कहता है मनुष्य बड़ा है क्योंकि वह बुद्धि से राज्य करता है। जीवित मनुष्य की शक्ति अद्भुत है।

7:59 (कथा) यमदूत जीवित किसान को उठा लाते हैं। वह चतुराई से यमपुरी का अध्यक्ष बनकर सबको वैकुंठ भेज देता है और भगवान से तर्क करता है।

10:54 (कथा) भगवान आते हैं, संवाद होता है। अंततः उसकी बुद्धि और परोपकार भाव से प्रसन्न होकर उसे और हाथी को वैकुंठ ले जाते हैं।

15:40 (सिद्धांत) मनुष्य भगवान का माता-पिता भी बन सकता है — दशरथ-कौशल्या, वसुदेव-देवकी उदाहरण हैं। पर सतगुरु बिना मनुष्य भटकता है।

16:26 (उपदेश) “संत जना मिल हरि जस गाइए” — संत संग से ही मार्ग मिलता है। गुरु बिना हरि मिलना कठिन है।

17:27 (कथा) तुलसीदास पत्नी आसक्ति से प्रेरित होकर अंधेरी रात में पहुंचे। पत्नी ने शरीर की नश्वरता समझाई — आधी प्रीति राम में होती तो भवभय मिटता।

19:47 (परिवर्तन) तुलसीदास रोकर प्रार्थना करते हैं — संत का शिष्य, द्वार की गाय, घोड़ा, कुत्ता बनने की विनती। सच्ची प्रार्थना से अंतःकरण शुद्ध हुआ।

22:36 (प्रसंग) भगवान ने कुत्ता या घोड़ा नहीं, तुलसी को संत तुलसीदास बना दिया — “तुलसी वन की घास…” कृपा से महिमा मिली।

23:47 (भजन) “कर सत्संग अभी से प्यारे…” — जीवन क्षणभंगुर है, देह जलानी है, अभी से ईश्वर संग करो।

24:46 (सिद्धांत) हल्की वासनाओं को निकालने हेतु अच्छी कामना अपनाओ। कांटे से कांटा निकालो। देवदर्शन, सत्संग से कुसंग मिटता है।

25:52 (कथा) गरुड़ ने राम को नागपाश से छुड़ाया, पर अहंकार से मोह हुआ। शिव ने उन्हें काकभुशुण्डि से सत्संग सुनने भेजा। सत्संग से मोह मिटा।

28:34 (सिद्धांत) दर्शन से मोह रह सकता है, पर सत्संग से मोह दूर होता है। सत्संग अंतर्ज्योति जगाता है — शांति, माधुर्य, ज्ञान लाता है।

29:29 (निष्कर्ष) जिनके हृदय में अचल शांति है वे अज्ञानियों को आत्मज्ञान देते हैं। आप भी सत्संग सहारा लेकर दिल मंदिर में प्रवेश करें और हर परिस्थिति में ज्ञान का सहारा लें।



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