TIME STAMP INDEX
0:02 हरि ओम नाम का प्रारंभिक कीर्तन (कीर्तन)
0:25 जय सियाराम नाम जप (कीर्तन)
0:42 प्रभु ओम, राम, श्याम, शिव नाम स्मरण (कीर्तन)
1:31 हरि नाम का निरंतर जप (कीर्तन)
2:02 हरि ओम मंत्र की महिमा और अर्थ
2:31 पाप, कलियुग और हरि नाम की शक्ति
3:22 चैतन्य महाप्रभु और जगन्नाथ पुरी (कथा)
4:00 राजा रुद्र प्रताप और संत से मिलने की इच्छा (कथा)
5:40 श्रीमद्भागवत श्लोक का उपदेश (कथा)
7:21 कथा कीर्तन की महिमा, कबीर वाणी
8:49 तुलसीदास जी के वचन और वैकुंठ समान घर
9:33 शरीर और आत्मा का विवेक ज्ञान
11:16 राजा का श्लोक पाठ और संत का आलिंगन (कथा)
12:03 धोबी पर कृपा और कीर्तन का प्रभाव (कथा)
18:34 पूरे गांव का परिवर्तन हरि नाम से (कथा)
22:07 पुनः नाम कीर्तन की लहर (कीर्तन)
26:10 ओमकार मंत्र की वैज्ञानिक और शास्त्रीय महिमा
28:22 ओमकार पर ग्रंथ और ऋषियों का वर्णन
30:20 तुलसी, गुरु और आरोग्य उपदेश
31:06 माता की बीमारी और मंत्र प्रयोग (कथा)
33:00 मंत्र से चमत्कारी आरोग्य अनुभव
35:02 आरोग्य मंत्र का उपसंहार
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CONTENT INDEX ANUSAAR PARAGRAPH
0:02 (कीर्तन)
हरि ओम हरि ओम का निरंतर उच्चारण वातावरण को पवित्र करता है। हरि नाम से मन एकाग्र होता है और चित्त में शांति उतरने लगती है। नाम जप से भीतर का शोर शांत होने लगता है।
0:25 (कीर्तन)
जय सियाराम का उद्घोष भक्त के हृदय में राम तत्व को जाग्रत करता है। यह नाम भक्ति, मर्यादा और प्रेम का स्मरण कराता है।
0:42 (कीर्तन)
प्रभु ओम, राम, श्याम और शिव नाम का स्मरण यह दर्शाता है कि सभी नाम एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं।
1:31 (कीर्तन)
लगातार हरि नाम जप करने से मन की चंचलता समाप्त होती है और साधक सहज आनंद की अवस्था में प्रवेश करता है।
2:02
हरि ओम दो अक्षर हैं परंतु इनकी शक्ति अपार है। ये समस्त पापों को नष्ट करने में सक्षम हैं और आत्मा को शांति तथा आनंद का अनुभव कराते हैं।
2:31
कलियुग में पाप और दोष अधिक हैं, पर हरि नाम इन सबका नाश कर देता है। केवल हरि गुण गान से ही जीवन का सार प्राप्त हो जाता है।
3:22 (कथा)
चैतन्य महाप्रभु हरि नाम कीर्तन में लीन रहते थे। जगन्नाथ पुरी में उनका कीर्तन भक्तों के जीवन को बदल देता था।
4:00 (कथा)
उड़ीसा के राजा रुद्र प्रताप संत से मिलने की इच्छा रखते थे, पर संत राजाओं से नहीं मिलते थे क्योंकि वे मान और अहंकार बढ़ाने आते हैं।
5:40 (कथा)
मंत्रियों ने राजा को श्रीमद्भागवत का श्लोक कंठस्थ करने को कहा ताकि सच्ची भक्ति प्रकट हो सके।
7:21
कथा और कीर्तन सबसे बड़ा दान है। धन, वस्त्र या सोना देने से जो शांति नहीं मिलती, वह भगवान की कथा सुनाने से मिलती है।
8:49
जिस घर में कथा और कीर्तन होता है वह वैकुंठ के समान हो जाता है। वहाँ प्रभु का वास होता है और बुद्धि अकुंठित हो जाती है।
9:33
शरीर को मैं मानना अज्ञान है। शरीर बदलता रहता है, पर आत्मा शाश्वत है। आत्मा को मैं मानना ही सच्चा ज्ञान है।
11:16 (कथा)
राजा ने श्लोक का पाठ किया तो चैतन्य महाप्रभु ने उन्हें गले लगा लिया। सच्ची भक्ति ने दूरी मिटा दी।
12:03 (कथा)
एक धोबी हरि नाम से प्रभावित हुआ। पहले अनिच्छा थी, फिर कीर्तन का रंग चढ़ गया और उसकी चेतना जाग उठी।
18:34 (कथा)
हरि नाम से पूरा गांव बदल गया। झगड़े समाप्त हो गए, वर्षा ठीक होने लगी और गांव स्वर्ग समान बन गया।
22:07 (कीर्तन)
हरि ओम, हरि बोल का सामूहिक कीर्तन वातावरण को सात्विक और पवित्र बनाता है।
26:10
ओमकार मंत्र शरीर और मन पर प्रभाव डालता है। शास्त्रों में इसकी महिमा हजारों वर्षों से वर्णित है।
28:22
ऋषियों ने ओमकार पर हजारों श्लोक रचे हैं। यह मंत्र सामान्य नहीं बल्कि दिव्य चेतना का स्रोत है।
30:20
तुलसी, गुरु और मंत्र जीवन को आरोग्य और शक्ति देते हैं। गुरु की महिमा भगवान से भी ऊँची बताई गई है।
31:06 (कथा)
माता की गंभीर बीमारी में मंत्र और तुलसी रस का प्रयोग किया गया। भक्ति के साथ आरोग्य भी प्राप्त हुआ।
33:00
जिसे 24 घंटे का जीवन बताया गया, वह वर्षों जीवित रही। यह मंत्र की शक्ति और भगवान की कृपा का प्रमाण है।
35:02
हर व्यक्ति के जीवन में एक आरोग्य मंत्र होना चाहिए। हरि नाम, ओमकार और गुरु कृपा से जीवन दिव्य बनता है।
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