ये गलतियां आपकी उम्र तेज़ी से कम कर रही हैं ! श्वासों की बचत कैसे करें ?
इंडेक्स (विषयवार)
0:04 – (संसार-यथार्थ उपदेश) जीवन की अनिवार्यता और संसार का स्वभाव
0:15 – (समत्व-योग उपदेश) अनुकूल-प्रतिकूल में समभाव की साधना
0:33 – (प्राण-आयु सिद्धांत) क्रिया अनुसार श्वास-व्यय और आयु
0:47 – (आहार-विहार उपदेश) मैथुन, मांसाहार और श्वास-गति
1:00 – (श्वास-गणना सिद्धांत) आयु वर्ष नहीं, श्वासों से निर्धारित
1:40 – (प्राणायाम-लाभ) संध्या व प्राणायाम से आयु-वृद्धि
1:54 – (स्वानुभव/दृष्टांत) रोग से मुक्ति और नया जीवन
2:39 – (योग-कला विनय) सीमित ज्ञान से भी महान लाभ
3:09 – (संयम-असंयम परिणाम) काम, क्रोध, हस्तमैथुन का प्रभाव
4:00 – (योगी-कथा/इतिहास) चांगदेव, च्यवन, वशिष्ठ, दत्तात्रेय
4:26 – (दिव्य-योगी अनुभव) हनुमान जी व दत्तात्रेय का साक्षात-भाव
4:54 – (अदृश्य-योग सिद्धि) पंचतत्त्व विजय और अदृश्यता
5:02 – (स्वानुभूति) अल्प साधना से दिव्य अनुभूति
5:27 – (ब्रह्मज्ञान उपसंहार) योग-सिद्धियाँ भी ब्रह्मज्ञान के आगे तुच्छ
🕉️ अर्थपूर्ण पैराग्राफ (टाइम-स्टैम्प अनुसार)
0:04 – (संसार-यथार्थ उपदेश)
मनुष्य जब संसार में आया है तो उसे जीवन जीना ही पड़ेगा। जैसे मृत्यु निश्चित है वैसे ही जीवन भी अनिवार्य है। संसार स्वभाव से ऐसा है कि यहाँ सब कुछ मन के अनुसार हो, यह संभव नहीं। इसलिए संसार को समझकर चलना ही विवेक है।
0:15 – (समत्व-योग उपदेश)
जहाँ मन की इच्छा पूरी हो, वहाँ भी सम रहना और जहाँ इच्छा पूरी न हो, वहाँ भी सम रहना—यही परमात्मा में टिकने का मार्ग है। सुख-दुःख, अनुकूल-प्रतिकूल दोनों में समभाव ही सच्चा योग है।
0:33 – (प्राण-आयु सिद्धांत)
मनुष्य बैठा रहता है तो 12 श्वास, चलता है तो 18 और सोता है तो 24 श्वास प्रति मिनट खर्च करता है। जो अधिक लेटे रहते हैं, वे अपनी आयु शीघ्र क्षीण करते हैं।
0:47 – (आहार-विहार उपदेश)
मैथुन, भारी आहार और मांस सेवन के समय श्वास की गति 30 प्रति मिनट तक पहुँच जाती है। इससे आयु शीघ्र खर्च होती है। मनुष्य की आयु वर्षों से नहीं, श्वासों से निर्धारित होती है।
1:00 – (श्वास-गणना सिद्धांत)
एक दिन में लगभग 21,600 श्वास हैं। कुल निश्चित श्वासों को कोई 40 वर्ष में खर्च कर देता है, कोई 60 में। पर यदि संध्या, प्राणायाम और संयम हो तो वही श्वास अधिक वर्षों तक चल सकती है।
1:40 – (प्राणायाम-लाभ)
नियमित संध्या और प्राणायाम करने से सामान्य 50 वर्ष की आयु 55–60 तक सहज बढ़ सकती है। मैथुन-संयम और प्राणायाम की विधि जानने से आयु और भी दीर्घ हो जाती है।
1:54 – (स्वानुभव/दृष्टांत)
वक्ता अपने जीवन का उदाहरण देते हैं कि कैसे मृत्यु के समीप पहुँचकर भी योग-बल से नया जीवन प्रारंभ हुआ। ज्योतिषीय रेखाएँ पूरी होने पर भी प्राणायाम से आयु बढ़ी।
2:39 – (योग-कला विनय)
सभी योग-कलाएँ न जानने पर भी केवल एक-दो प्राणायाम का अभ्यास करने से भी अद्भुत लाभ प्राप्त हो जाता है। गुरुजन 64 प्रकार के प्राणायाम जानते हैं।
3:09 – (संयम-असंयम परिणाम)
क्रोध, कपट और काम से श्वास की गति बढ़ती है। हस्तमैथुन से नाड़ियाँ विकृत होती हैं और आयु घटती है। संयम से वही श्वास 70, 80, 90甚至 100 वर्ष तक चल सकती है।
4:00 – (योगी-कथा/इतिहास)
चांगदेव योगी 1400 वर्ष जीवित रहे। च्यवन ऋषि ने च्यवनप्राश द्वारा शरीर नवजीवन दिया। वशिष्ठ महाराज ने डेढ़ लाख वर्ष तक और महर्षि दत्तात्रेय दीर्घकाल तक योगबल से आयु धारण की।
4:26 – (दिव्य-योगी अनुभव)
हनुमान जी और दत्तात्रेय जैसे सिद्ध योगी आज भी साधकों पर कृपा कर प्रकट होते हैं, संवाद करते हैं और फिर अदृश्य हो जाते हैं।
4:54 – (अदृश्य-योग सिद्धि)
पृथ्वी और जल तत्व पर विजय प्राप्त होने पर योगी अदृश्य हो सकता है। यह उच्च योग-साधना का फल है।
5:02 – (स्वानुभूति)
वक्ता बताते हैं कि थोड़ी-सी साधना और त्रिकाल संध्या के अभ्यास से शरीर में उड़ने-सी अनुभूति हुई और अल्प समय में बड़ा लाभ मिला।
5:27 – (ब्रह्मज्ञान उपसंहार)
अंत में कहा गया कि ये सभी योग-सिद्धियाँ भी ब्रह्मज्ञान के आगे स्वप्न समान हैं। वास्तविक लक्ष्य ब्रह्म की अनुभूति है।
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