गुरुवार, 15 जनवरी 2026

नींद बनेगी भक्ति - सोने से पहले की दिव्य साधना

 नींद बनेगी भक्ति - सोने से पहले की दिव्य साधना

वीडियो इंडेक्स  

0:02 — दिन में किया गया अच्छा कर्म ईश्वर को अर्पण

0:06 — गलती होने पर प्रभु से क्षमा याचना

0:08 — सोते समय कमरे को भक्ति-भाव से भरना

0:12 — हरि ओम – ओम – प्रभु नाम का स्मरण

0:19 — ओम प्यारे जी, निरंतर नाम-जप

0:24 — ओमकार का गुंजन

0:34 — ओम

0:36 — ओम हम

0:38 — संगीत

0:49 — ओम ओम ओम

0:54 — ओम साधना से पंचकोश व सप्तचक्र शुद्धि

1:11 — ओमकार मंत्र पर वैज्ञानिक शोध

1:34 — दीक्षा से मंत्र की शक्ति

1:59 — श्वास-प्रश्वास के साथ ओम स्मरण

2:29 — भगवान से आत्मीय संबंध का भाव

2:56 — बुद्धि में भगवत कृपा का प्रभाव

3:18 — जागरण के समय ओम शांति

3:40 — प्रभु से संवाद का आनंद

4:06 — ईश्वर से संपर्क का महत्व

4:34 — रात्रि साधना से नींद भी भक्ति

4:50 — इंद्रियों का प्रभु में विश्राम

5:22 — गुरु-प्रभु संपर्क से स्वास्थ्य लाभ

6:21 — ईश्वर की शरण का दृष्टांत

6:38 — “मैं भगवान का हूँ” भाव

7:31 — कंठ केंद्र जागरण साधना

8:36 — स्मृति केंद्र विकास

9:26 — ध्यान व भजन में ओम प्रयोग

10:56 — टंक विद्या – कानों में उंगली डालकर ओम-हम

13:39 — शांडिली (शांली) की कथा प्रारंभ

23:39 — कथा उपसंहार और गलता तीर्थ


0:02–0:06 दिन भर में जो भी अच्छा कर्म, सेवा, सद्भाव आपने किया है, उसे सोने से पहले ईश्वर को अर्पित कर दें। यदि दिन में कोई गलती, भूल, या अविवेक हो गया हो, तो मन से प्रभु से क्षमा मांग लें। यह भाव जीवन को हल्का करता है और अंतरात्मा को शांति देता है।

0:08–0:24 रात को सोते समय अपने कमरे को भक्ति-भाव, स्मरण, और नाम-जप से भर दें। धीरे-धीरे हरि ओम, ओम, प्रभु जी, प्यारे जी जैसे नामों का उच्चारण करें। यह वातावरण को सात्त्विक बनाता है और मन को सहज रूप से अंतर्मुखी करता है।

0:34–0:49 ओम और ओम हम का गुंजन करते हुए संगीत के साथ मन को स्थिर होने दें। यह जप मन, प्राण और चेतना को एक लय में लाता है और नींद को साधना में बदल देता है।

0:54–1:08 इस अभ्यास से पंचकोश, सप्तचक्र, नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं। बताया गया है कि 72 करोड़ 72 लाख सूक्ष्म-स्थूल नाड़ियाँ ओमकार से शुद्ध होती हैं, जिसका दावा कोई औषधि नहीं कर सकती।

1:11–1:30 आधुनिक वैज्ञानिक भी स्वीकार करते हैं कि ओमकार मंत्र से पेट, मस्तिष्क और यकृत की तकलीफों में लाभ होता है। किंतु हमारे ऋषि-मुनियों ने यह सत्य हजारों वर्ष पहले बोधायन संहिता में प्रकट कर दिया था।

1:34–1:56 ओमकार की स्मृति, दीक्षा, और नियमित जप से इसका प्रभाव और गहरा हो जाता है। दीक्षा द्वारा मिला मंत्र अधिक शक्तिशाली होता है और साधक को स्थिर लाभ देता है।

1:59–2:25 पुनः यही स्मरण कराएं कि दिन का सत्कर्म प्रभु को अर्पित हो और दोषों के लिए क्षमा याचना हो। लेटते समय श्वास को न रोकें, न खींचें। श्वास भीतर आए तो ओम, बाहर जाए तो ओम—बस इतना सहज भाव रखें।

2:29–2:53 यह भावना रखें कि अंतरात्मा प्रभु, मेरे हैं, जैसे बच्चा माता-पिता से अपनापन जताता है। इस प्रकार का आत्मीय संबोधन भगवान को प्रिय है और बुद्धि में कृपा भर देता है।

2:56–3:15 जब बुद्धि के पीछे भगवत सत्ता काम करती है, तब बड़े-बड़े कार्य सहज हो जाते हैं। इसलिए रात को सोते समय श्वास के साथ ओम गिनना और प्रिय नाम का स्मरण करना बताया गया है।

3:18–3:36 सुबह उठते समय ओम शांति, हरि ओम कहकर शांत आत्मा से दिन की शुरुआत करें। मन दौड़ेगा, थकेगा, और अंततः उसी प्रभु-स्मरण में लौट आएगा।

3:40–4:03 प्रभु से यह पूछना कि “आप मेरे हैं ना”—चाहे उत्तर भीतर से आए या न आए—फिर भी लाभ होता है, क्योंकि ईश्वर से संपर्क तो बन ही गया।

4:06–4:31 जैसे प्रधानमंत्री से बात करने में भी आनंद आता है, वैसे ही परमात्मा से संवाद करने में आनंद और आशीर्वाद दोनों मिलते हैं। इसमें हमारा कुछ भी नहीं जाता।

4:34–4:44 यदि यह अभ्यास रात को किया जाए, तो नींद के घंटे भी भक्ति में परिवर्तित हो जाते हैं। आयु भी बढ़ती है और साधना भी होती है।

4:50–5:20 सुबह पुनः यही भाव रखें कि इंद्रियां, मन, प्रभु में विश्राम पाएं। बच्चे की तरह भगवान से अपनापन जताएं।

5:22–6:08 गुरु और प्रभु से संपर्क हो जाए तो बाहरी मनोरंजन, दवाइयों और साधनों की आवश्यकता कम हो जाती है। स्वास्थ्य, प्रसन्नता और ज्ञान—तीनों का रस मिलने लगता है।

6:21–6:35 जैसे कंगाल व्यक्ति करोड़पति का बेटा बन जाए तो तुरंत धनी हो जाता है, वैसे ही जीव जब ईश्वर की शरण जाता है तो उसी क्षण ईश्वरीय आनंद का अधिकारी बन जाता है।

6:38–7:22 “मैं दुखी हूँ, मैं परेशान हूँ” ऐसा कहने से दुख गहराता है। इसके स्थान पर “मैं भगवान का हूँ” यह स्मरण आनंद देता है।

7:31–8:36 कंठ केंद्र को जागृत करने हेतु गुंजन, लंबा श्वास, और ओम-हरि ओम का सामूहिक उच्चारण कराया गया है।

8:36–9:21 यह साधना स्मृति केंद्र को विकसित करती है। बच्चे और बड़े—दोनों यदि दिन में 2–3 बार करें तो यादशक्ति बनी रहती है।

9:26–10:12 ध्यान और भजन के बीच ओम करने से साधना और स्वास्थ्य—दोनों में बरकत आती है।

10:56–12:48 कानों में उंगली डालकर ओम-हम का जप टंक विद्या का प्रयोग है, जिससे रक्त शुद्ध होता है और स्मृति केंद्र जागृत होता है।

13:39–23:39 इसके बाद शांडिली (शांली) की कथा आती है, जिसमें ओमकार साधना, गुरु-आज्ञा और आत्मशक्ति के बल पर एक कन्या वायु देवता तक को शांत कर देती है। इसी तपस्या की स्मृति में गलता तीर्थ प्रसिद्ध हुआ, जो आज भी कन्याओं, स्त्रियों और बच्चों में निहित परमात्मा की शक्ति का साक्ष्य देता है।


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