गणेश चौथ का चाँद दिख जाये तो कलंक से बचने का सबसे अच्छा और सरल उपाय |
0:05 भादरवा सुद चौथ को हे चंद्रदेव तुमको 0:09 कोई भी देखेगा तो उसको कलंक लगेगा तो उसका 0:12 मैंने तोड़ निकाला है।
शास्त्र में से दो 0:15 प्रकार का तोड़ है 0:20 कार्तिक स्वामी और गणपति दो भाई थे शिव 0:27 पार्वती के बेटे 0:29 कार्तिकेय ने कहा बड़ा भाई हूं मैं बोले 0:32 बड़े भाई तो हूं लेकिन जिसका बड़ा विवेक हो 0:34 वो बड़ा भोले विवेक विवेक क्या तो क्या 0:36 मेरा कम है जरा जैसे भैया भैया में लग 0:39 जाता है तो दोनों भाई आए शिव पार्वती के 0:42 पास के मां बाप आप ही तय करो कि हम दोनों 0:45 में कौन बड़ा। शिव पार्वती ने कहा जो 0:48 पृथ्वी के तीर्थों की यात्रा करके जल्दी 0:51 यहां पहुंचेगा वह बड़ा माना जाएगा। तो 0:53 कार्तिक जी तो निकल पड़े और गणपति जरा 0:58 शांत स्वभाव के धीरा सो गंभीरा और ऐसे 1:02 उनका मॉडल भी ऐसा है कि शांति से ही सब 1:05 काम हो इतना बड़ा पेट और नन्हा सा उनकी 1:09 व्हीकल 1:11 तो तो शांत स्वभाव था उनका 1:14 तो बोले सर्व तीर्थमयी माता 1:18 सर्वदेवमय पिता तो शिव पार्वती की उंगली 1:22 पकड़ के थल्ले पर बिठाया, और गणपति जी उनको 1:26 तिलक करके पूजन करके प्रदक्षिणा करने लगे, 1:29 और प्रणाम किया। पार्वती जी यूं देखती है। 1:33 शिव जी यूं देखते हैं क्या कर रहा है? 1:35 नन्हा मुन्ना और कुछ करें तो जरा आश्चर्य 1:38 भी होता है कि क्या कर रहा है। फिर दूसरा 1:40 चक्कर मारे और प्रणाम करें। तो गुदगुदी 1:44 होने लगी। बेटा क्या है? बोले अभी बताता 1:46 हूं। तीसरा चक्कर, चौथा चक्कर, सात चक्कर 1:51 मार डाले गणपति जी ने। ये क्या कर रहे हो? 1:54 गजानन गणू क्या कर रहे हो? 1:57 बोले बड़े भैया तो 2:00 पृथ्वी के तीर्थों की यात्रा करने गया और 2:03 मैं तो पृथ्वी की सात बार यात्रा पूरी कर 2:07 चुका हूं। सर्व तीर्थमई माता और सर्वदेवमय 2:12 पिता शिव पार्वती ने गले लगाया बेटा उम्र 2:16 में तो वो बड़ा है लेकिन विवेक शक्ति में 2:19 तू बड़ा है। संयम शक्ति में तू बड़ा है। 2:23 शास्त्र ज्ञान में तू बड़ा है। क्या 2:25 करणीय? क्या अकरणीय? बाहर का तीर्थ तो 2:29 तामसी लोग घूमते हैं। सात्विक लोग तो आत्म 2:32 तीर्थ में आते हैं। इसलिए गजानन हमारी 2:35 पूजा के पहले ही तेरी पूजा होगी। लल्ला 2:38 बेटा 2:40
अभी कोई भी काम करो गणा गवाहा निधि गवा 2:45 महेश गं गणपतये नमः 2:50 ऐसे ही ब्राह्मण को बोलना पड़ेगा। चाहे 2:53 वास्तु पूजन हो 2:55 चाहे शिलान्यास हो चाहे राज तिलक करते हो 3:00 मंगवा निधि गंगा 3:03 गणेश्वराय 3:07 लेकिन ये गणपति जी का वचन सिद्धि कैसी है 3:10 रे सेड गोल मटोल जरा लड्डू प्रिय शरीर 3:16 तो चंद्रदेव ने हंसी कर दी कि चंद्र तुझे 3:20 अपनी शोभा पर गर्व है, तू मेरी मस्करी करता 3:24 है जा तुझे जो देखेगा तू मुझे कलंकित करता 3:27 है, तुझे जो देखेगा उस पर कलंक लगेगा। तो 3:30 लोग चंद्र देव पर थू थू करने लगे कि इसको 3:32 देखेंगे कलंक लगेगा, चंद्रदेव घबराए ना 3:36 रगड़ा हाथ जोड़ी की तो गणपति जी ने कहा 3:39 अच्छा तो वर्ष भर तो तुम्हें 364 दिन तो 3:44 माफ कर देता हूं लेकिन आज का दिन तो लोगों 3:47 को पता लगे कि अपना रूप लावणी या गुण 3:50 देखकर अभिमान मान करना और दूसरे में 3:54 दोषारोपण करके उसकी खिल्ली उड़ाना कितना 3:57 खतरनाक होता है। यह लोगों को भी पाठ 4:00 मिलेगा और तुझे भी याद रहेगा बच्चों।
तो 4:03 भादरवा सुद चौथ के दिन तुमने यह 4:05 छेड़खानी की थी। तो भादरवा सुद चौथ को 4:09 हे चंद्रदेव तुमको कोई भी देखेगा तो उसको 4:12 कलंक लगेगा। भगवान कृष्ण ने एक बार देख 4:15 लिया भाद्रवा शूद चौथ का चांद तो उनको 4:18 भी स्यमन्तक मणि चुराने का कलंक लगा तो आप 4:22 भादरवा चौथ का चंद्रमा नहीं देखिएगा। 4:26 लेकिन नहीं देखिएगा तो आज चौथे चंद्रमा ना 4:29 दिखे ना दिखे ना दिखे करके भी कई लोग देख 4:32 लेते हैं। 4:34 आप इधर नहीं देखना 4:36 तो बलात दिख जाता है। आज नहीं देखना है 4:40 नहीं देखना है, अभी दिखता तो नहीं ऐसे ऐसे 4:43 करके भी लोग देख लेते हैं। तो उसका मैंने 4:46 तोड़ निकाला है। शास्त्र में से दो प्रकार 4:48 का तोड़ है। अगर चंद्र दिख जाए तो शास्त्र 4:53 का एक श्लोक है।
सिहः प्रसेनमवधीत सिंहो जाम्बवता हतः ।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ॥
(सुंदर सलोने कुमार! इस मणि के लिए सिंह ने प्रसेन को मारा है और जाम्बवान ने उस सिंह का संहार किया है, अतः तुम रोओ मत ।)
ब्रह्म वैवर्त पुराण में इस मंत्र से पानी 5:13 अभिमंत्रित करके 5:18 पी ले, छिटक दे, तो उसका प्रभाव कुप्रभाव कम 5:22 होता है। उससे भी सरल उपाय और है। आप 5:26 भादरा शुद्ध तीज का चांद देख लो जानबूझ 5:30 के। अगर चौथ का दिख जाए तो पांचम का भी 5:33 देख लो। तो कंटिन्यूटी के प्रभाव में चौथ 5:36 का प्रभाव कम हो जाएगा।
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