मंगलवार, 12 अगस्त 2025

जप करते हैं पर फल क्यों नहीं मिलता ? मंत्र का क्लिक खुलने की चाबी |

 



जप करते हैं पर फल क्यों नहीं मिलता ? मंत्र का क्लिक खुलने की चाबी |


0:02 कई चिट्ठियां आती मेरे को पत्र विभाग वाले 0:04 ने पूछे कई सवाल ऐसी ऐसी चिट्ठियां आती है 0:08 कि उनका उत्तर क्या दूं 


कि भाई जप में 0:11 बापू बोलते हैं कि मंत्र का देवता होता है 0:15 मंत्र का ऋषि होता है , मंत्र का क्लिक होता 0:19 है।  करन्यास होता है अंगन्यास होता है ये 0:22 तो मंत्र दीक्षा के समय सब नहीं बताया 0:25 जाता है।   0:27 देखो मंत्र का देव जैसे 0:29 ओम नमः शिवाय मंत्र तो उसका देव तो स्पष्ट 0:32 है। सूर्य है, शिवजी है। हरी है तो भगवान 0:36 नारायण है। और ओमकार मंत्र का तो ये सबको 0:40 बताया हुआ है। और क्लिक क्या होता है? कि 0:43 क्लिक होता है कि मंत्र सील बैक। अमुक 0:48 जितने अक्षर हैं 0:51 उतने लाख उतने हजार उतने 100 जप हो जाए तो 0:55 उसका उसी खुल जाता है। मंत्र का प्रभाव 0:58 खुल जाता है। 1:00 मंत्र का देवता मंत्र का ऋषि लेकिन जो 1:04 भगवत प्रीति के लिए जपते हैं वे रोज रोज 1:07 ये मंत्र का देवता मंत्र का ऋषि मंत्र का 1:10 क्लिक उच्चारण करें ना करें तो चल जाएगा। 1:15 एक बार दो बार पांच बार कर दिया और भगवत 1:17 प्रीति अर्थे,  

उल्टा नाम जपत जग जाना, 

वाल्मीकि भए ब्रह्म समाना"


1:26 और भगवन नाम मंत्र ये कोई 1:30 साधना नहीं है। ये तो भगवन नाम मंत्र का 1:34 जप ये भगवान को पुकार है। अब पुकार की 1:38 विधि बच्चा जाने चाहे ना जाने मां समझ 1:41 जाती कि मेरे को पुकारता है। 1:48  ये। … में…. कुछ भी करें समझ रही है कि मेरा 1:53 तिकड़म  मुझे बुला रहा  है 1:56 


बाहर से तू कुछ भी बोले भीतर, तेरा रहस्य न जाने कोई   


तो भाई 2:11 इस प्रकार का वहां जान जाती है।   ऐसी मांओं की 2:14 मां जो बापों का बाप है वो जान जाते कि आप 2:18 माला लेकर क्यों बैठे हैं। 2:23 

नाम जपत मंगल दिशा दशा दसों 

दस दिशा में मंगल 2:27 होता है। कभी-कभी जहां रहते हैं वहां गूगल 2:31 का धूप हो जाए तो अच्छा है। गाय के गोबर 2:35 के कंडे का धूप हो जाए। ऊपर थोड़ा घी का 2:38 चटक लग जाए तो अच्छा है। वातावरण में ताजे 2:41 कहीं फूल हो तो अच्छा है। नाचे कूदे 2:44 कीर्तन किया ध्यान किया। फिर जप करते करते 2:47 कोई इधर-उधर हुआ तो जीवन रसायन पढ़ा अथवा 2:50 तो 2:52 जप बढ़ाना है तो नारायण स्तुति पुस्तक 2:54 पढ़ो। महिमा है। नहीं यह 3:00 भगवन नाम महिमा 3:02 जब जब बढ़ाना है तो भगवत नाम महिमा पढ़ो। 3:06 जो अनुष्ठान करने आते हैं उनको भगवत नाम 3:09 महिमा पुस्तक पढ़ना चाहिए। और जो अनुष्ठान 3:12 कर रहे हैं और बाद में भगवत प्राप्ति करना 3:16 चाहते हैं तो नारायण स्तुति पढ़ो। भगवन 3:19 नाम जप के बाद भगवान की स्तुति। 


 जिनको 3:22 भगवान मिले और उन्होंने उनकी कैसी स्तुति 3:25 गाई तो स्तुति गाते चिंतन करते पढ़ते 3:28 तुम्हें आनंद आने लगेगा।  और भगवान कैसे 3:31 विभू है कैसे व्यापक है कैसे 3:35 करता भोगता है और 3:38 दिखते नहीं फिर भी 3:41 वही है 3:44 और सब कुछ उनसे दिखता है।   3:48 ऐसी कोई पल नहीं जिस पल में जिस क्षण के 3:53 100 में हिस्से में भी भगवान से हमारा 3:55 वियोग हुआ।   ऐसे भगवान हाजरा है उनकी याद 4:00 करनी पड़ती है महाराज हद हो गई।  तो महाराज 4:03 को कहो कि हम ऐसे हैं महाराज 4:06 तुम्हारी याद हमको करनी पड़ती है।  बोलो 4:11  और जो मर गए उनकी याद आती है।  जाके भगवान 4:14 का पल्ला पकड़ो 4:17 समझ गए कि महाराज आपकी याद करनी पड़ती 4:22 


हम तो 18 17 18 साल के थे और कभी विघ्न 4:26 बाधा कष्टों से जूझना तो,  हम बोलते थे तेरे 4:30 को जितने कष्ट देने है ना अभी दे दे बड़ी 4:34 उत्तरा में बड़ी उम्र में ये सब नहीं देना 4:41 ऐसी बातें करते,  ऐसे नहीं आकाश पाताल में 4:44 मानते हृदय में बातें करते थे। 4:49 कैसा भी कोई विघ्न वाधा  तो होते हैं  संसार में।   एक 4:53 पाठशाला है सबके लिए। 4:56 ऐसी ऐसी आपदाएं आती तो फिर बोलते थे। 5:00 जितना भी देना हो  अभी देते। 5:03 डरते नहीं थे। घबराते नहीं थे। और दुखी भी 5:08 नहीं होते थे। फिर भी दुख होता था। तभी तो 5:12 बोलते थे। 5:14 दुख होता था तभी बोलते थे। दुखी नहीं होते 5:17 थे फिर भी दुख होता था। 5:22 लेकिन घुटने नहीं टिकते थे। क्योंकि 5:25 सुमिरन करते थे ना जब ध्यान करते थे। नियम 5:28 करते थे। गीता बीता पढ़ते थे। तो दुख के 5:31 आगे घुटने नहीं टेकते थे। मैं दुखी हूं। 5:34 ऐसा नहीं सोचते थे। दुख तो होता था। लेकिन 5:37 मैं दुखी हूं नहीं। बोलते थे जितना दुख 5:39 देना है अभी और दे दे। 5:42 लेकिन बड़ी उम्र में नहीं देना। 5:46 ऐसा बोलते थे। 5:49 तो कैसे भी भगवत स्मरण हो नारायण नारायण 5:54 नारायण और 


भगवान के स्वरूप के विषय का 5:56 ज्ञान हो। 5:59 भगवान के स्वरूप का विषय का ज्ञान अपने 6:02 तरफ से नहीं होगा। जिनको हुआ है वर्णन 6:05 क्या है? चिंतन करते-करते चुप हो जाओगे। 6:08 आप अपनी बुद्धि से भगवान को नहीं पार पा 6:11 सकते। 6:13 मति ना लखे जो मती लखे जो मति जिसको नहीं 6:16 देख सकती मति को जो देखता है वो परमेश्वर 6:21 है।  6:24 बड़े-बड़े धर्माचार्य बड़े-बड़े न्याय 6:27 वेदांत आचार्य अच्छे-अच्छे बड़े-बड़े 6:29 आचार्य दर्शनाचार्य जिनके दर्शन और 6:32 सिद्धांत पढ़कर संप्रदाय चलते हैं। वे 6:35 दर्शनाचार्य परस्पर उनके सिद्धांत भिन्न 6:38 होते हैं। लेकिन जो भगवत शरण हो जाता है 6:41 वह वासुदेव सर्वमिति। 


  6:45 तो एक बड़ा आया विद्वान महाराज ध्यान से 6:49 सुनना।  6:51  किसके पास कि जो बचपन से ही सूरदास है 6:55 वैसे शरणानंद महाराज 6:58 बोले महाराज आप क्या जानते हैं इस सृष्टि 7:01 के विषय में आप क्या मानते हैं? बोले भाई 7:04 मैं तो पढ़ा लिखा नहीं हूं। 7:09 और आप मैं 20 साल पढ़ूं तभी भी आपके जितना 7:12 नहीं पढ़ सकता। आप तो बहुत विद्वान है। 7:16 फलाने फलाने विषयों पर तो आपको 7:21 यूनिवर्सिटी में भाषण देते, लेक्चर देते 7:23 आप क्या-क्या बड़े विद्वान जाने माने काशी 7:26 के हैं। 7:28 बोले महाराज मैं भाषण तो दे देता हूं 7:31 सृष्टि के विषय में। लेकिन मेरे को अपना 7:35 अभी समाधान नहीं है। आत्मसंतोष नहीं 7:40 तो बोले भैया ये आत्मसंतोष नहीं है क्यों 7:44 कि तुम पढ़ लिखकर बुद्धि को पहनी तो बना 7:47 ली है।  सूक्ष्म तर्क वितर्क का धन तो तुमने 7:51 कमा लिया लेकिन बुद्धि में ही रुके हो ना 7:54 आप जब बुद्धि के पार जाओगे भगवान में समता 7:58 आएगी तब रहस्य खुलेगा लाला तभी समाधान 8:02 मिलेगा


 बिनु रघुवीर पद जे की जर ना जाए


चाहे बाल की खाल उतार दो दिन को रात साबित 8:11 कर दो, तर्क से।  रात को दिन साबित कर दो।  8:14 मैंने पहले बताई हुई कैसेटों में है।  अभी 8:16 25 साल पहले की घटना है।  8:20 मैं एक बड़े अच्छे संत से मिलने गया था 8:22 मेरे गुरुदेव के परिचित संत थे स्वामी 8:25 गंगागिरी जी उत्तरकाशी में रहते थे 90 से 8:29 भी ज्यादा उम्र के थे, तो गुरु जी का उनका 8:33 संबंध था तो मैं उनसे मिलने गया था।    8:36 तो उन्होंने मेरे को बताया कि फलाने 8:38 मंडलेश्वर 8:40 फूट-फूट कर रोए आकर तो भाई क्या बात है 8:44 आपको कोई कहीं कमी है क्या? बोले महाराज 8:47 आश्रम तो मेरे बहुत है तो क्या पैसे की 8:50 कमी हुई क्या महाराज पैसे इतने हैं, कि 8:54 ऋषिकेश के आश्रम से लेकर उत्तरकाशी तक 8:57 रुपए बिछा दे 9:00 तो भी मिल जाए। इतने पैसे देने वाले हैं 9:03 पैसे।  तो क्या चेलों की कमी है? भाई चेले 9:06 इतने श्रद्धालु हैं कि वो अपने बाल बिछा 9:10 दे और उनके पैरों, उनके बालों पर मैं पैर 9:13 रखकर यहां तक आ सकूं। इतने तो बोले फिर 9:16 क्या है? बोले महाराज जो वेदांत में कहा 9:20 है, शास्त्रों में कहा है, 9:25 भगवत तृप्ति 9:29 समाधान 9:31 सच्चिदानंद स्वरूप में विश्रांति  महाराज 9:35 वो  नहीं, तो उनको बताया गया कि अब तुम अपने 9:38 आश्रमों में मत जाओ 9:41 कहीं अनजानी जगह पर झोपड़ा बांध कर रहो एक 9:44 एक टाइम भिक्षा ले आओ खाओ, और ये जो पढ़ा  है, 9:48 थोड़े अंतर्मुख हो। 


 हम आम आदमी में बोल 9:52 देते भाई पांच मिनट सुबह ध्यान करो, लेकिन 9:55 जो ईश्वर प्राप्ति करना है तो कोई पांच 9:57 मिनट के ध्यान से होती है क्या? वो 10:00 तो ज्यादा समय लगाना चाहिए। आम आदमी के 10:04 लिए बोलते जो कुछ नहीं करते वह 5 मिनट का 10:06 चस्का लगे तो फिर 7 मिनट करेंगे। 10 मिनट, 10:09 फिर तो हरि स्मृति बढ़ती जाएगी। कामकाज 10:12 में भी भगवान रहेंगे। 10:14 तो कभी ऐसा नहीं समझना कि बापू जी ने कहा 10:17 5 सात मिनट और तुम तो आधा घंटा बैठते हो। 10:20 देखो बापू जी की आज्ञा का पालन नहीं करते 10:22 हो। ऐसा अपने घर वालों को कुटुम्बियों को 10:25 रोकना टोकना मत। 10:27 जय राम जी की।  10:29 नारायण नारायण नारायण नारायण 10:35 


तो महाराज उसने 10:39 दूसरा आया बोले शरणानंद महाराज 10:44 के भाई भगवान साकार है कि निराकार है? 10:52 भगवान कैसे हैं? 10:56 तो महाराज महाराज ने कहा कि भगवान साकार 10:58 है कि निराकार है कि कैसे हैं वही 11:01 शास्त्रार्थ करें, जो अनाथ है भगवान के 11:04 बारे में वही सोचे, 11:06 हम तो शरणानंद है हमारा तो नाथ है जैसा भी 11:10 है हमारे स्वीकार है साकार है तो भी वही 11:12 हमारा है निराकार भी हमारा है, 11:17 जो हे ,  हम अनाथ नहीं है हम तो सनाथ है, प्रभु आप 11:22 जैसे हो बस हमारे हो, 11:26 आप दो हाथ वाले हो तो भी हमारे हो। चार 11:28 हाथ वाले हो तो भी हमारे हो। अष्ट 11:32 भुजाधारी माता जी के रूप में तो हमारे हो। 11:34 और गोल मटोल शालिग्राम हो तो भी हमारे हो। 11:39 और महाराज सबसे निर्गुण निराकार और 11:43 अंतर्यामी दिल के झरोखे में झुरमुट झुरमुट 11:47 कर्मों के साक्षी हो तो भी हमारे हो। आप 11:50 जो भी हो हमारे हो हमारा 11:54 हमारे हो महाराज। 11:57 हम तुम्हारे हो चाहे ना हो लेकिन तुम तो 12:00 हमारे हो 12:03 हम तो दुर्भाग्यवश किसी के हो जाते हैं।  जब 12:06 मार खाते तो तेरे शरण आते हैं।  लेकिन तू तो 12:09 हमारा है ऐसा मिलता है 12:13 हम जब बेवकूफी में जाते ना जैसे बच्चा 12:16 बेवकूफी करके अंगारे पकड़ेगा या अपनी मैले 12:19 में खेलेगा या इधर-उधर फिर केँ  केँ  करेगा तो 12:22 मां तो बच्चे की है। बच्चा चाहे मां का हो 12:26 चाहे ना हो लेकिन मां तो बच्चे की है। ऐसे 12:28 ही महाराज आपको 12:33 बाबा हम आपके हैं नहीं है। ये तो हमारे 12:36 लक्षण बता रहे हैं कि हम आपके कितने हैं। 12:39 लेकिन आपके 12:41 कृपा के आगे हमें लगता है कि आप हमारे 12:44 पूरे हो। महाराज हो। मुझे जैसा 12:48 हमारे पूरे हो प्रभु 12:51 ओ हो इसका रस लेके देखो ना भगवान 


पूरा प्रभु आराधिया पूरा जँका नाम 


पूरा उसका नाम 13:03 कोई भगवान का नाम अपूर्ण नहीं है 13:07.  और और मंत्र में जो 13:11 किया जाता है ना तांत्रिक मंत्र, साबरी 13:13 मंत्र, तो उसमें कर्ता के बल बल पर सिद्धि 13:16 होती है।  और भगवान नाम जब करते हैं ना तो 13:20 उसमें कर्ता का बल नहीं होता है। जिसका 13:23 नाम है उसकी बल की विशेषता होती है। 13:25 इसीलिए दीक्षा देने वालों को में मेहनत कम 13:29 पड़े और उसका बल मिल जाए। ऐसी दीक्षा देता 13:32 हूँ । इसीलिए ज्यादा टेंशन करने की जरूरत 13:34 नहीं कि क्या विधि, क्या करना, क्या नहीं 13:37 चिंता नहीं। दीक्षा के बाद तुम्हारे जीवन 13:40 में परिवर्तन हुआ कि नहीं हुआ? 13:42 सत्संग के बाद सत्संग सुनते सुनते दीक्षा 13:45 में आते शिविर ध्यान शिविर भरते भरते तुम 13:48 पहले की अपेक्षा अभी समता में आगे बढ़े कि 13:52 नहीं बढ़े ?13:54 संपत्ति बढ़ गई है कोई कोई ज्यादा 13:56 प्रोग्रेस नहीं है।  प्रमोशन हो गया, ऐसे तो 13:58 कईयों का होता रहता है स्वास्थ्य बढ़िया 14:01 हो गया है तो होता रहता है लेकिन चित्त की 14:03 दशा भी आगे बढ़ेगी 14:06 इसीलिए आप चिंता नहीं करना 14:10 हम भगवान के हैं कि नहीं है लेकिन भगवान 14:13 हमारे हैं। हम गुरु के हैं कि नहीं लेकिन 14:16 गुरु जी तो हमारे हैं। 14:20 मुझ साईं बोला हाजरा हजूर।   मैं तो मेरे 14:25 गुरुदेव से भी वार्तालाप कर लेता हूं भाव 14:27 में। पहले भी करता था। हम गुरु जी के हैं 14:32 कभी हैं कभी नहीं है। लेकिन गुरु जी तो 14:34 हमारे हैं भाई। 14:37 हम तो इधर के उधर के उधर के हो जाते। 14:40 लेकिन वो तो हमारे हैं प्रभु जी गुरु जी 14:42 जो कहो 


ओम नमो 14:49 भगवते 14:51 वासुदेवाय 14:55 ओम 14:56 नमो 14:58 भगवते 15:00 वासुदेवाय 15:04 वासुदेवाय 15:06 वासुदेवाय 15:07 प्रीति देवाय शांति देवाय 15:10 भक्ति देवाय 15:11 भक्ति देवाय 15:13 शांति देवाय 15:15 शांति देवाय 15:16 मम देवाय 15:18 मम देवाय 15:19 माधुर्य देवाय 15:20 माधुर्य देवाय 15:24 हरि ओम ( हास्य प्रयोग ) 


नारायण नारायण नारायण नारायण 16:14 ओम ओम ओम नारायण नारायण नारायण 16:18





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