सुबह मंगल आरती, 0:04 फिर बाल भोग, 0:08 फिर ठाकुर जी का विश्राम, 0:11 दोपहर को भोजन आरती पूजा, 0:15 इसे पांच टाइम 0:18 सात टाइम तीन टाइम बना लेते हैं, 0:22 भगवान की आरती भी चरणों से लेकर, फिर 0:26 घुटनों से, भगवान के वक्षस्थल 0:30 आदि करते-करते मुख मंडल के तरफ घुमाते 0:34 विधिवत आरती होती है, भगवान को रात्रि को भोजन आरती फिर दूध 0:46 थोड़ी देर के बाद फिर शयन आदि, 0:50 तो भक्ति मार्ग में दिनभर भगवत आकार 0:54 वृद्धि बने इसलिए भिन्न-भिन्न ढंग की पूजा 0:57 ओं का 0:58 विधान कर दिया गया, 1:03 ताकि भक्त की भगवत आकार भावना बन 1:06 जाए,
योग मार्ग में 1:14 आसन आदि करके रजोगुण को हटाया जाए, नहीं तो 1:19 क्या है कि बैठेंगे योग करेगा तो झोका आएगा, तो आसन प्राणायाम, आसन से स्थूल निद्रा का त्याग और प्राणायाम से सूक्ष्म निद्रा पर विजय, इसलिए योग मार्ग वालों को आसन प्राणायाम पर 1:36 ध्यान देना पड़ता है, 1:39 नहीं तो ऐसे ध्यान करें करेंगे तो बस 1:41 थोड़ी देर हुआ न हुआ मनोराज में चलजाएगा मन या तो झोके में चला जायेगा , इस लिए योग मार्ग वालो को यम, नियम, 1:52 आसन, प्राणायाम, 1:54 प्रत्याहार, 1:56 धारणा, ध्यान और समाधि ये आठ नियम होते हैं , यम में अहिंसा अस्तेय ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह ये गुण समाए हुए हैं , यम कह दिया 2:14 तो मन को रोकना, 2:15 हिंसा न करना, हिंसाभी तीन प्रकार की, 2:20 शरीर से मन से और वाणी से, शरीर से हिंसा न हो 2:26 जीव-जंतु ना मरे, 2:28 किसी के हिंसा न हो शरीर से, 2:32 मन से किसी का बुरा न सोचें, अगर 2:35 बुरा सोचेंगे तो ध्यान भजन क्या होगा? 2:38 मन विक्षिप्त रहेगा, 2:42 और वाणी से किसी को ऐसा शब्द न बोलें, 2:45 वाणी से बोलने के पहले तो मन अपना बिगड़ेगा, 2:48 और हम बोलेंगे तो वो भी बोलेगा, तो उसके 2:52 एक दूसरे के अपशब्द और एक दूसरे की निंदा 2:55 क्रिटिसाइज़ ये रहेगी, तो योग सिद्धि कैसे आएगी 3:01
तो यम नियम 3:05 ठीक ढंग से टाइम से उठे 3:08 ऐसा नहीं रात को देर तक जागता रहे एक बजे दो बजे सोवे 3:13 फिर सुबह चार बजे उठे तो झोखा खाएगा 3:18 रात्रि को दस बजे सो जाए सुबह चार बजे उठे 3:23 नरसी मेहता ने कहा है की सड़ घड़ी-घड़ी हो 3:26 छे घड़ियां हो सूरज उगने में उस समय साधक को उठ जाना चाहिए, 3:37 छे घडी माना सवा दो घंटा पहले सूर्योदय से उठ जाना 3:39 चाहिए साधक को, 3:42 और श्रीहरि के भक्ति में ध्यान में बैठना चाहिए, 3:47 तो सुबह वैसे 3:50 रात को 10:00 सोएगा तभी सुबह 4 बजे 3:53 पौने चार उठेगा, 3:57 और जो चार- साढ़े चार के बाद भी सोते 4:00 रहते तो उनको फिर 4:03 शरीर का जो सत्व है सार है ब्रह्मचर्य 4:06 की शक्ति 4:07 उसमें प्रॉब्लम होता है, 4:11बीर्य पात होने लगेगा स्वप्न दोष होने 4:14 लगेगा, में सु करूँ **** 4:18 वो पलायनवादी बन जाएगा 4:22 निस्तेज हो जाएगा 4:25
इसलिए उसके जीवन में 4:27चाहे भक्त हो चाहे योगी हो चाहे ज्ञानी हो 4:33 आरंभ में ज्ञान मार्ग में जाने वाले साधक 4:36 को भी बड़ा नियम रखना पड़ता है 4:41 एकांतवास आदि आदि ये वो, 4:44 तो यम नियम 4:48 भक्तिमार्ग वाले को भी ध्यान तो करना ही 4:52 पड़ता है, 4:54 भक्ति करते-करते भगवान के श्री विग्रह 4:57 को देखते-देखते ध्यानस्थ होना है, 4:59 योग वाले तो ध्यान करना ही करना है, मुख्य 5:02 उसका ध्यान है, 5:06 वेदांत वाले का मुख्य वेदांत है लेकिन 5:09 ध्यान तो उसको भी, भक्ति वाले को मुख्य 5:12 भक्ति है तो उसको भी 5:15 ध्यान के बिना चित्त एकाग्र नहीं होता 5:20 एकाग्रचित में योग्यता आएगी निर्मलता आएगी, 5:28 सामर्थ्य आएगा, तो योग मार्ग में भी जाने वाले को भी 5:39 ध्यान की जरूरत और ध्यान में आने वाले 5:42 विघ्न हटाने के लिए यम नियम 5:46 आदि हैं, 5:48 तो अहिंसा अस्तेय, अस्तेय माना चोरी नहीं 5:52 करना, किसी की कोई वस्तु कितनी भी कीमती हो छोटी हो बड़ी हो 5:57 चुरा कर खाना चुरा कर लेना 6:00 चुराने की मुराद रखना 6:02 वह साधना में बड़ा भारी विघ्न है 6:07 अहिंसा अस्तेय 6:11 शरीर से हिंसा न हो वाणी से 6:15 हिंसा न हो चोरी न हो और 6:18 ब्रह्मचर्य का पालन हो आदि, 6:22 तो उसका योग 6 महीने में ही सिद्ध हो जाता है, 6:26 16 छे महीने में बहुत सारी ऊंचाई आती हैं, 6:29 लेकिन यह नियम नहीं पालते तो छे साल भी कम है 6:32 और छे सो साल भी कम है, 6:37 ब्रह्मचर्य पालें अहिंसा अस्तेय 6:40 ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह 6:46 खैर अपरिग्रह तो अपने आश्रम वालों में 6:49 है, विचारों में, सादा सुधा खाना-पीना जो 6:52 थोड़ा बहुत आवश्यक है कपड़ा-लत्ता बाकी 6:56 ज्यादा परिग्रह नहीं, यह तो ठीक है, जो परिग्रह 6:59 रखते तो उसको संभालना भी पड़ता है उसका ध्यान 7:02 होता है चिंतन होता उन वस्तुओं का, 7:05 इसलिए ज्यादा परिग्रह भी ठीक नहीं, 7:09 तो खाली अपरिग्रह तो एक अंग हुआ, 7:17 ब्रह्मचर्य एक अंग है, अहिंसा एक अंग है, 7:21 तो ये सब अंगों को लेकर फिर चुपचाप बैठे 7:24 नहीं, फिर योग करें, 7:27 अभ्यास करें, योग में भी चुपचाप नहीं 7:31 बैठना, सुन नहीं होना है, 7:35 अगर भक्तिमार्ग है तो भगवदाकार वृत्ति 7:39 करें, 7:41 योग मार्ग है तो वृत्ति शांत करें, वृत्ति का पेट खली करें और ज्ञान मार्ग है तो वृत्ति 7:50 ब्रह्माकार करें, और 7:55 भक्ति में बैठ जाएगा सुन मन तो फिर 7:57 झोखा खाएगा, 7:59 योग में बैठ जाएगा सुन मून तो रसास्वाद 8:02 या जो कुछ आ जाएगा, ज्ञान मार्ग वाला 8:06 भी सुन मून बैठ जायेगा तो सुन हो जाएगा, 8:14 8:16 ये सर्वांगी समझ होनी चाहिए तभी पूर्ण 8:19 जीवन की प्राप्ति होती है,
इसलिए कई 8:31 विचारे मेहनत करते तप करते ध्यान करते भक्ति करते त्याग करते और फिर भी देखते की ठन ठन पाल, 8:33 तो शास्त्र झूठे नहीं है, मार्गदर्शक 8:40 गुरु झूठे नहीं है 8:44 और साधना करने वाला साधक भी झूठा नहीं है 8:47 लेकिन कहीं न कहीं 8:50 नासमझी रह गई, 8:53 में कहीं ना कहीं थोड़ी कमी रह गई,
8:57 विज्ञान की बातें तो बदल जाती है , झूठी हो सकती है कईबार निकलती है 9:00 विज्ञानी 9:04 बोलते हैं जो स्त्री अपना जौवन की रक्षा 9:06 करना चाहती है स्वास्थ्य सुरक्षित रखना चाहती है 9:10 वो अपने बच्चों को अपना दूध न पिलाये 9:13 क्योंकि दूध एक प्रकार की शक्ति ही तो है अपने रक्त में से ही तो बनता है, तो स्त्री का यौवन बालक चूस लेता है इसलिए युवतियां बच्चे को जन्म दे 9:26 एनिमल फूड पे रखें 9:28 ऐसा विज्ञानिओं ने बोला था और 9:31 बाद में बात बोलनी पड़ी 9:36 कि एनिमल फ़ूड जो है पशु की बुद्धि मनुष्य 9:38 की बुद्धि से कम है, तो शुरुआत में बच्चे 9:42 को पशुओं का दूध पिलाएंगे उसकी बुद्धि का 9:44 विकास नहीं होगा, 9:47 और माँ का वात्सल्य नहीं मिलेगा, बिज्ञानिओं ने प्रयोग किये 9:55 और बंदरी के बच्चे को आर्टिफिशल बंदरी के 9:59 10:02 दूध मिलता रहे ऐसी व्यवस्था कर दी 10:04 उस आर्टिफीसियल बंदरी में और वो बन्दरि भी हाथ पेअर भी हिलती रहे 10:11 तो आर्टिफिशल बंदरी का दूध पीकर वह जो 10:14 बंदर है वह चिड़चिड़ी हो गया बच्चा ,10:17 क्योंकि असली मां का वात्सल्य नहीं मिला, 10:20 और असली मां का जिसको वात्सल्य मिला उस 10:26 बंदर में चिड़चिड़ापन नहीं के बराबर रहा, 10:29 और भी कई गुण उसके जो मां के वात्सल्य से 10:34 पनपते हैं 10:36 उस नतीजे तय जिन बच्चों को 10:41 कि वात्सल्यता के साथ मां का दूध नहीं 10:44 मिलता है बच्चे ठीक से उनका दिमाग डेवलप 10:48 नहीं होता, और मां को प्रसूति के बाद 10:51 दूध बनाने की क्षमता दी शरीर में 10:54 तो वो दूध है उसका उपयोग न होने से महिलाओं को 10:59 स्तन का कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है, 11:05 तो बार बार उन्होंने फिर प्रचार किया, झख मार के बोलना पड़ा की माँ जिसको जन्म देती है तो कर्तव्य है की अपना ही दूध पिलायें 11:09 उन्होंने ही कहाथा कि 11:18 एनिमल एनिमल फूड ही उस के लिए 11:23 व्यवस्था करें अपना दूध नहीं पिलायें बिज्ञानिओं ने कहाथा फिर बिज्ञानिओं कहा की अपना ही दूध पिलायें,
क्यों की विज्ञान की खोज मति तक है, और 11:35 मति में 11:38 एक से एक बढ़कर आविष्कार होने की 11:40 संभावना है, 11:41 और एक से एक बढ़कर एक गलती होने की भी 11:44 संभावना है, 11:46 तो मति से मत-मतांतर बनते हैं, 11:50 लेकिन व्यास जी अथवा कृष्ण या राम या जो 11:56 मंत्रद्रष्टा ऋषि है 12:00 वो मति न लखे जो मति लखे , मती तो बदल जाती है, और भिन्न भिन्न व्यक्तियों की मति होती है, 12:09 इसलिए मत-मतांतर 12:13 किसी एक पैगंबर का कुछ मत होगा तो दूसरा पैगम्बर आयेगा तो उसका मतान्तर हो जायेगा, 12:25 किसी एक पंथ या मत या कोई संस्था का जो सिद्धांत है वो 12:30 दूसरा आदमी आएगा तो उस में उस व्यक्ति के 12:33 सिद्धांत के अनुसार दूसरे आजायेगा
लेकिन जो परमात्मा को पाने का जो सिद्धांत है 12:39 वो मति से नहीं बनाया गया, मति से पार 12:44 मंत्रद्रष्टा, ऋषि 12:46 न मंत्र कर्तारः मंत्रदृष्टा, 12:50 ऋषि मंत्र का करता नहीं है, मंत्रदृष्टा का द्रष्टा है , 12:55 वेद किसी पुरुष का नहीं अपौरुषेय है, 12:59 जहाँ पुरुष माने जीव खो गया, 13:03 जैसे बुलबुला खो गया सागर हो गया, ऐसे ही 13:08 जिसकी मति और जिव ब्रह्म में विलय हो गया, उस ब्रह्म में विलीन हो गया, उस ब्रह्म के 13:14 स्फुरने से जो ज्ञान निकला, वेद माने जानकारी, 13:18 वो अपौरुषेय वेद माना जाता है, 13:24 वो पहले भी उतना ही सत्य था, अभी भी उतना ही सत्य है, बाद में भी उतना ही सत्य रहेगा, 13:28 तो ऐसे सत्य स्वरूप परमात्मा में जो एक 13:33 हो गए 13:35 उन महापुरुषों को गुरु कहा जाता है, 13:38
विवेकानंद ने कहा, कि दुनिया के सब मत सब 13:43 मजहब 13:45 सब उपासना पद्धतियाँ 13:47 रसातल में चले जाये, 13:51 फिर भी धर्म फिर से उत्पन्न हो जाएगा 13:54 अगर धरती पर एक भी ब्रह्मवेत्ता है 13:57 एक भी साक्षात्कारी पुरुष है , 14:00 और एक उन का सत्शिष्य है, तो सत्शिष्य का सत आचरण देख कर गुरु उसको सत उपदेश देगा, वो शास्त्र बन जायेगा , सत में टिककर ,
वेद में मंत्र आता है, सर्व तरतु दुर्गाणि, हम सब अपने-अपने दुर्ग से अपने-अपने 14:20 कल्पित दायरों से मान्यताओं से तर जाएँ, 14:25 सर्वे भद्राणि पश्यतु हम सब मंगलमय देखें , 14:30 सर्व सद्बुद्धि माप्नोतु , हम सबको सद्बुद्धि प्राप्त हो, 14:34 बुद्धि तो सब के पास है, मच्छर के पास भी बुद्धि तो है , पेट भरने की बच्चे पैदा करने की प्रॉब्लम आये तो भाग जाने की, सुविधा आये तो वहां सेट होने की, इतनी बुद्धि तो मच्छर में भी है, कुत्ता में , गधा में मनुष्य में है, लेकिन वेद भगवान ने कितनी सुन्दर बात कही, सर्व तरतु दुर्गाणि, 14:57 हम सब अपने-अपने दुर्ग से, अपने अपने दायरे से, अपने 15:01 मान्यताओं से अपने दुर्ग जो रचे हैं,उसे तर जाएँ , अपने अपने खावोचि में पड़े हैं मान्यताओं से उसे हम तर जाएँ, 15:13 सर्वे भद्राणि पश्यतु, हम सब मंगलमय देखे, 15:18 सर्व सद्बुद्धि माप्नोतु , हम सबको सद्बुद्धि प्राप्त हो,15:21 ताकि सत्य में विश्रांति कर सके,सर्व तरतू नन्दतु , हम सब एक दूसरे को 15:33 मदद रूप हों,
15:39 तो उत्तम साधक को उचित है कि अपने से 15:44 जो छोटा साधक है उसको आध्यात्मिक रास्ते 15:47 मदद करें, छोटे साधक का कर्तव्य के उत्तम साधक का सहयोग करें 15:58 तो वो सहयोग क्या करेगा? ध्यान में छोटा 16:03 है, वो सहयोग क्या करेगा ? 16:06 जैसे गुरु, गुरु ज्ञान ध्यान में आगे 16:09 हैं, शिष्य छोटा साधक है,वो तो गुरु की 16:13 सेवा कर लेता है, गुरु के कपड़े धो देता है, 16:16 गुरु के आश्रम में शबरी बुहारी कर देती है, 16:20 तो उतना ओ मतंग ऋषि का जो काम है बट 16:23 जाता है, तो अध्यात्मिकता का प्रसाद ज्यादा 16:25 बांटते, तो पुण्यका भागी बनते, 16:30 तो भगवान ब्रह्मा जी कहते हैं कि जो योगी 16:33 हैं उनके निकट रहना भी बड़ा पुण्यदाई होता है, 16:38 उनका दर्शन भी पुण्यदाई होता है, उनके निकट 16:41 निवास मिल जाए उनके इलाके में रेंज में तो भी 16:46 बड़ा पुण्य , 16:50 एक तो वह ध्यान भजन की पवित्र जगह 16:54 के निकट रहना, दूसरा तो उसी जगह में रहना, 16:58 अभी ये देड़ सो दो सो साधक हो जो तुमलोग यहां , आपने अपने घर में होते 17:05 तो अपने आस पास की टीवी रेडियो तें तें में में चे चे में ही समय जाता,17:12 कितने भी आंख मूंद कर हरी ओम करते 17:15 तो ऐसी शांति ऐसीभक्ति 17:18 सुबह सुबह ऐसा सत्संग दर्शन संभव ही नहीं, तो पवित्र जगह पर रहते हैं तो स्वाभाविक ही 17:24 उन्नति होती है,
17:27 डॉक्टर बनना है तो डाक्टरों का सान्निध्य 17:29 लेना पड़ता है, वकील बनना है तो सनत के 17:32 लिए वकीलों का सनत आदि प्रैक्टिस करना पड़ता है,ऐसे ब्रह्म बनना है, ऐसे योगी बनना है, भक्त बनना है, तो ब्रह्मवेत्ता, योगी और भक्तों की माहौल में ही रहना पड़ता है, 17:48 अकेले जाकर कोई बोले *****gj ठीक है अकेला जाकर साधना करेगा लेकिन 17:57 अकेले में जप तप उपवास तो कर सकता है, 18:02 लेकिन दोष अकेले में बैठकर नहीं निकाल सकता, ब्रह्माकार वृत्ति अकेले में बैठ कर नहीं 18:13 ला सकता, तपस्वी हो सकता है, जपि, तपी, योगी बन सकता है, 18:18 लेकिन ब्रह्म परमात्मा का साक्षात्कार करना और चित्त का दोष निकलना है तो उसमें साथ बल चाहिए, जैसे अकेले कोई बच्चा निकल जाए जंगल में और पढ़ पढ़ के कितना विद्वान होगा ? उसके लिए कठिन है, स्कूल कॉलेज के माहौल में रहता है तो उसके लिए विद्वान होना आसान है, ऐसे ही सदगुरु के आश्रम अथवा सदगुरु के माहौल में जो रहके साधन भजन करता है उसके लिए तो आसान हो जाता है, तो संग का भी बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है,
18:44 मिनिस्टर आए हैं आठ दिन रहेंगे , घर में तो आसान हो जाता है 19:01 आश्रम में रहेंगे तो झाड़ू भी लगाना पड़ता है, 19:04 मिनिस्टर है तो क्या है, गुरुकुल में रहना हो तो सब सादा शुदा जीवन होता है, 19:13 फिर भी रह रहे है 19:15 तो लाभ होता तभी रहते हैं, वकील भी हैं, मिनिस्टर भी हैं, 19:22 खैर इनके के तो मिनिस्टर पोस्ट हमारी 19:25 मिनिस्टर ******
19:28 एक छत्र राज है और भगवान रामचंद्र गुरुकुल में जाके रहे, 19:33 श्रीकृष्ण जा के रहे शबरी भीलन,19:38 दूसरी ओर शबरी हो गई, शबरी गुरुकुल में रही तो कितनी ऊंची आ गई, कितनी तेज हो गई, आध्यात्मिक रस्ते में कितनी महान बन गई, दूसरी कोई घर में रहके भक्ति किया और महान बन गई संभव नहीं है, हां संभव है, सती अनुसूया महान थी परिवार में रही थी, परिवार में नहीं थी ऋषि आश्रम में थी, पति ऋषि थे, और स्वयं भी ऋषि पत्नी थी , घर नहीं था उन का, उनका उनका आश्रम था 20:13 अरुंधति महान बन गई पति के साथ रह कर तो 20:16 उसका पति ब्रम्हज्ञानी था, 20:19 और अरुंधति भी कम नहीं थी संयम में नियम में 20:23 भगवान के साधना में पार्वती जी के 20:27 साथ सत्संग करने की क्षमता थी अरुंधति में, 20:30 और शिवजी के साथ सत्संग करने की क्षमता थी 20:34 वशिष्ठ जी में, तभी वो महान बने, कोई समता 20:38 लाने के लिए भी उन्होंने ने भजन तप किया था, हिमालय में रहे थे वशिष्ठ जी और अरुंधति योग वशिष्ठ में आता है 20:51 कि कोई बाजार में या सोसाइटी में रहे होते 20:54 तो इतनी योग्यता नहीं विकसित होती, 20:56 अरुंधति की, अनुसया की, गार्गी की, मदालसा की ,
तो 21:05 दस चीजों से विकास होता है 21:07 आध्यात्मिक, एक तो 21:13 आप कैसी जगह पर रहते हैं? उससे भी आपकी 21:16 साधना 21:17 बढ़ती है और नष्ट होती हैं 21:21 ऐसे फालतू जगह पर रहते तो धीरे-धीरे 21:23 साधना नष्ट होती है और अच्छी जगह पर रहते 21:27 तो धीरे-धीरे साधना का रंग लगता है, तो स्थान 21:31 दूसरा साहित्य कैसा पढ़ते हैं? 21:36 इधर-उधर का कचरा पढ़ते हैं कि विवेक वैराग्य जगाने वाला साहित्य पढ़ते हैं , पुस्तक कौन सा पढ़ते हैं, जप कौन सा करते हैं ? भोजन कैसा करते हैं , दृश्य कैसा देखते हैं, विकार पैदा हो ऐसा देखते हैं बार बार, की निर्विकार नारायण की याद आए ऐसा देखते हैं , 21:39 खुराक कैसा खाते हैं ? 22:05 कि संग कैसे लोगों का है, इस प्रकार दस 22:08 चीजों का मन पर बड़ा ***भारी असर पड़ता है, इसलिए उनका बड़ा ध्यान रखना चाहिए,
जबतक ईश्वर साक्षात्कार नहीं हुआ तब तक संग दोष का प्रभाव पड़ता है 22:27 हे राम जी साधु भी अगर 22:31 22:32 बारातों में जाएं शादी में शादियों में 22:34 जाए तो साधु असाधु हो जाएगा, और असाधु भी 22:39 श्मशान यात्रा में जाए तो उसको वैराग्य आएगा, साधु बनने की रस्ते चलेगा, 22:41 अगर मूढ़ों का भोगियों का संग साधु संग 22:50 करें तो साधु 22:54 असाधू हो जायेगा और असाधु अगर 22:57 सत्पुरुषों का संग करे तो वो भी साधु होने लगेंगे 23:00 आप लोग जो इतने साधु बैठे हैं तो क्या ऐसे ही साधु हुए, 23:03 साधु संग किया तब साधु हुए, 23:09 साधुओं का दर्शन, साधु वचन, साधू का 23:12 संग करने से आई साधु ताई तुम्हारे में, 23:19 कुछ थोड़े बहुत आई, बाप दादा की परंपरा से आई ऐसा तो लगता नहीं , घर में बैठके आई ऐसा तो लगता नहीं, 23:20 और घर मैं बैठकर आई तो भी भी किसी ने किसी 23:30 संत महापुरुष के संपर्क का संस्कार है, 23:33 घर में बैठकर करते तो भी वह मंत्र दीक्षा 23:37 और पुस्तक और उनका दिया हुआ नियम की ही कृपा 23:40 है, तो सत्पुरुषों का तो समाज पर बड़ा 23:45 उपकार हैं, वे लोग सचमुच नादान है जो संतो 23:49 से समाज को विमुख करने के लिए, अगर सच्चे 23:54 संतों से समाज विमुख हो गया तो समाज को शांति 23:58 कहां से मिलेगी, सदाचार कहां से मिलेगा? भाईचारा कहां से मिलेगा, 24:04 अगर समाज में भाईचारा लाना है तो संतों 24:06 का ही तो प्रभाव प्रसाद की जरूरत है, 24:11 परस्पर देव भव मानव मन नहीं तो फिर शांति और 24:14 बम तो बढ़ ही रहे हैं, 24:19 वे लोग बहुत बड़ा काम करते हैं जो संत 24:22 और समाज के बीच में सेतु बनने की कोशिश 24:24 करते हैं, 24:26 बहुत उत्तम काम कर रहे हैं, देश के लिए, विश्व 24:29 के लिए, मानव जाति के लिए, और वे लोग बड़ा खतरा 24:32 पैदा कर रहे हैं जो संतो और समाज के बीच 24:36 में अश्रद्धा की खाई खोद रहे हैं ,
बोले 24:43 आज कल संत ऐसे हैं वैसे आदि तो, आज 24:46 कल भगत भी ऐसे है वैसे हैं, 24:51 ये ऐसा हो गया वह ऐसा हो गया, ऐसा हो गया 24:54 फलाना ऐसा है, फलाना ऐसा है, ढींगना ऐसा है, 24:59 तो दूसरे के ऊपर दोष मढ़ना या दोषी 25:02 साबित करना तो आसान है, लेकिन उसके गुण 25:04 चुन कर अपने जीवन को उन्नत करना यह 25:07 बुद्धिमान है, 25:12 आजकल ना साधु आवाज ज्यादा, आजकल साधु 25:17 ऐसे, तो सब साधु ऐसे हैं क्या ? अच्छा कोई साधु उन्नीस बीस हो गया उसकी कोई गलती हो गई किसी भी कारण छोटी मोटी, तो तो बाकि के उसके सद्गुण तो देख ,
जैसे कार में जाते-जाते, बस में 25:33 जाते-जाते किसी बस ड्राइवर आज कल के बस 25:36 ड्राइवर ऐसे हैं एक्सीडेंट कर देते हैं, तो 25:39 क्या बस दूसरी बसों में नहीं बैठते हैं? 25:41 हवाई जहाज के पायलटों से एक्सीडेंट हो 25:44 जाता है, 25:45 विमान फ्लाइट क्रैश हो जाते हैं, 25:48 समुद्र मे सीधे डूब जाते हैं, धड़क धूम होके, 25:53 लाशें भी नहीं मिलती, ऐसे खतरनाक एक्सीडेंट होते, फिर 25:57 भी दूसरे लोग जहाज में तो बैठते हैं,
26:00 ऐसे कभी-कभार कुछ हो गया, 26:04 दूसरे लोगों को तो आध्यात्मिक रस्ते जाने देना चाहिए, 26:12 चलना चाहिए , ***** 26:15 अश्रद्धा की नजर से देखते रहेंगे तो श्रद्धा बनेगा ही 26:18 नहीं संतों में, श्रद्धा बनेगा नहीं तो 26:20 फायदा भी नहीं होगा, 26:26 श्रद्धा तो अंधी ही होती है, 26:30 देखकर मानेगा क्या? बिना देखे मानने 26:34 का नाम तो श्रद्धा है, 26:37 अरे अपने बाप के ऊपर भी श्रद्धा करना 26:40 पड़ता है, तू बड़ा साहब हो गया अपने को 26:42 चतुर समझता है बुद्धू, अपने बाप पर भी श्रद्धा किया, 26:45 तेरे बाप को तूने देखा 26:47 क्या? 26:48 मां ने कह दिया यह तेरा पापा है डैडी डैडी डैडी करते पक्का करलिया ये तेरा डैडी है, 26:53 तूने देखाथा क्या ये तेरा बाप है, हजम पे श्रद्धा करनी पड़ती है, 27:02 इंजेक्शन पर श्रद्धा करनी पड़ती है कि 27:04 इंजेक्शन 27:05 अच्छा होगा, हमारे को फायदा करेगा तभी पैसे देके भुकुआते हो, 27:10 ऑपरेशन करता डॉक्टर पर भी व 27:16 श्रद्धा करनी पड़ती है, बस में भी ड्राइवर पर भी श्रद्धा रखनी पड़ती है, की ये बदरीनाथ पहुचाये गा , बदरीनाथ जाते जाते कहीं और भी बस पूरी हो जाती है, 27:48 फिर भी श्रद्धा कर दूसरे लोग बैठते हैं, 27:51 जहाज में भी जाते जाते कहीं पहुँच जाते हैं एक्सपायर होजाते मर जाते एक्सीडेंट में फिर भी दूसरे लोग जहाज की पायलट पर श्रद्धा करते हैं, मशीन पर भी श्रद्धा करनी पड़ती है , पायलट भी मशीन पर श्रद्धा करता है उड़ेगी आकाश में और हमारे कंट्रोल में रहेगी, लेंडिंग में मदत सिस्टम क्या पता फिर मशीन फिर बंद हो जाये तो? 27:53 ऐसा हो जाए तो, तो कोई जहाज 27:59 उड़ नहीं सकता, 28:02 लोहे के पंखों पर भी श्रद्धा करनी 28:05 पड़ती है, 28:07 हवाई जहाज के पुर्जो पर भी पायलट को 28:10 श्रद्धा रखनी पड़ती है, और लोगों को भी पायलट पर 28:13श्रद्धा रखनी पड़ती है, तभी यहाँ से उठ कर लंदन, लंदन से उठकर नैरोबी , नैरोबी से उठकर अमेरिका, जहाँ भी जाता है
, 28:18 दोष दर्शन से तो भाई चाँद में, श्रीराम में भी दोष दिखेंगे, श्री कृष्ण में भी दोष दिखेंगे, 28:27 तुम्हारे बाप में भी दिखेंगे, और तुम अपने को निर्दोष मानते हो, 28:35 अगर दोष देखना है तो अपना दोष देखो , तुम्हारे में कितने छुपे दोष है, 28:39 सजा करने तो अपने को 28:42 करो पहले, 28:45 अपने दोष आदमी जितना जानता है उसके कुटुम्बी 28:48 भी नहीं जानते हैं, कुटुम्बी जितना अपनी व्यक्तिगत दोष जानता पड़ोसी उतना नहीं जानता, 28:54 और पड़ोसी जितना जानता दूसरे लोग उतना नहीं जानेंगे दोष किसीका दीखता हो तो अपना दोष पहले निकालो 29:02 गांधी जी के नाइ आप पूजे जाओगे, 29:0 6ऐसे तो गांधीजी के लिए कलम उठाने वालोने लिखा 29:10 फिर क्या हुआ? 29:11बुद्ध, महावीर, कवीर, नानक, मीरा रोहिदास न जाने कितनो ने जो भी धरती पे महापुरुष हुए, 29:17 योग वशिष्ठ में आता है , हे राम जी मैं बाजार 29:22 से गुजरता हूँ , बाजार में 29:26 लोग मेरे लिए क्या क्या बकते हैं सब मुझे पता है, राम-राज्य दशरथ नंदन जिसके चरण धो चरण राज चरणामृत लेते सीता सहित, ऐसे रामजी के लिए बकने वाले तो बकते हैं , तो तुम्हारे 29:32 हमारे लिए यहाँ कोई कुछ बोल दिया तो उस के लिए सुकड़ने की कोई 29:36 जरूरत 29:40 नहीं है, तू अपने सच्चाई से ईश्वर के भक्ति कर प्रचार प्रसार कर के आगे बढ़ता जा 29:44
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें